एरी सखी संभरवारे Eri Sakhi Sambharvare
MEANING
एरी सखी संभरवारे दामोदरदास तुलसा आये प्रेमसों रंग रस छाय रह्यो। एरी सखी रघुनाथदास सुहावने आये जु लाये निज वधु रंग रस छाय रह्यो ॥१॥O sakhi, Damodardas Sambharvare and Tulasa came; with love, the joy of rasa spread everywhere. O sakhi, the graceful Raghunathdas came, bringing his own wife; the joy of rasa spread everywhere. ॥१॥एरी सखी राम गदाधरदास वेणी माधवदास सोहावनो रंग रस छाय रह्यो । एरी सखी हरिवंश पाठक आये अम्मा क्षत्राणि मन भावने रंग रस छाय रह्यो ॥२॥O sakhi, Ram, Gadadhardas, Veni, and the graceful Madhavdas came; the joy of rasa spread everywhere. O sakhi, Harivansh Pathak came, and Amma Kshatrani, dear to the heart; the joy of rasa spread everywhere. ॥२॥एरी सखी गोविन्द भला मनमाने गजन धावनसों बखाने रंग रस छाय रह्यो । एरी सखी ब्रह्मचारी नारायणदास देवा कपूर मनमाने रंग रस छाय रह्यो ॥३॥O sakhi, Govind Bhala, dear to the heart, and Gajan Dhavan, who is praised, came; the joy of rasa spread everywhere. O sakhi, Brahmachari Narayandas and Deva Kapoor, dear to the heart, came; the joy of rasa spread everywhere. ॥३॥एरी सखी महावनसों क्षत्राणि जीया दिनकर के मनमानी रंग रस छाय रह्यो । प्रभुदास मुकुंद सुखदानी प्रभु भाट जस कहत बखानी रंग रस छाय रह्यो ॥४॥O sakhi, Kshatrani Jiya from Mahavan, dear to Dinakar, came; the joy of rasa spread everywhere. Prabhudas, Mukund Sukhdani, and Prabhu Bhat came, singing and proclaiming the glory; the joy of rasa spread everywhere. ॥४॥
ORIGINAL
एरी सखी संभरवारे दामोदरदास तुलसा आये प्रेमसों रंग रस छाय रह्यो। एरी सखी रघुनाथदास सुहावने आये जु लाये निज वधु रंग रस छाय रह्यो ॥१॥ एरी सखी राम गदाधरदास वेणी माधवदास सोहावनो रंग रस छाय रह्यो । एरी सखी हरिवंश पाठक आये अम्मा क्षत्राणि मन भावने रंग रस छाय रह्यो ॥२॥ एरी सखी गोविन्द भला मनमाने गजन धावनसों बखाने रंग रस छाय रह्यो । एरी सखी ब्रह्मचारी नारायणदास देवा कपूर मनमाने रंग रस छाय रह्यो ॥३॥ एरी सखी महावनसों क्षत्राणि जीया दिनकर के मनमानी रंग रस छाय रह्यो । प्रभुदास मुकुंद सुखदानी प्रभु भाट जस कहत बखानी रंग रस छाय रह्यो ॥४॥