जहाँ गगन गति गर्ग Jahan Gagan Gati Garg
MEANING
जहाँ गगन गति गर्ग कह्यो ।यह बालिक अवतार पुरुष है कृष्ण नाम आनंद लह्यो ॥१॥There Garg spoke of the movements of the heavens: “This child is the embodied Purush; by the name Krishna, joy has been received” ॥१॥द्रोण धरा वसु परम तपोधन पुत्र नाम निरभय करी ।ते तुम नंद यशोदा दोउ वर माँग्यो सुत देहु हरी ॥२॥Drona and Dhara, the Vasus, great treasures of austerity, asked for the boon without fear: “O Hari, give us a son.” Those two are you, Nanda and Yashoda ॥२॥कहै नंदराय सबनके आगें सकल मनोरथ पूरन करे ।परमानंददासकौ ठाकुर गोकुल की आपदा हरे ॥३॥Nandaraya says before everyone, “He fulfills all desires.” The Thakur of Paramananddas removes the distress of Gokul ॥३॥
ORIGINAL
जहाँ गगन गति गर्ग कह्यो । यह बालिक अवतार पुरुष है कृष्ण नाम आनंद लह्यो ॥१॥ द्रोण धरा वसु परम तपोधन पुत्र नाम निरभय करी । ते तुम नंद यशोदा दोउ वर माँग्यो सुत देहु हरी ॥२॥ कहै नंदराय सबनके आगें सकल मनोरथ पूरन करे । परमानंददासकौ ठाकुर गोकुल की आपदा हरे ॥३॥