Prekha Paryakashayanam
प्रेख पर्यकशयनम्
प्रेंख पर्यंकशयनम् | चिरविरहताप हरमति रुचिर मीक्षणं प्रकट प्रेमायानम् || प्रेंख. || तनुतर द्रिज पंक्तिमति ललितानि हसिता...
Raag
Read 64 Pushtimargiya kirtans in Ramakali · रामकली with original Braj Bhasha text and English meanings.
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प्रेख पर्यकशयनम्
प्रेंख पर्यंकशयनम् | चिरविरहताप हरमति रुचिर मीक्षणं प्रकट प्रेमायानम् || प्रेंख. || तनुतर द्रिज पंक्तिमति ललितानि हसिता...
झूलो पालनें बलि जाऊं
झूलो पालनें बलि जाऊं । स्याम सुंदर कमल लोचन निरखि अति सचुपाऊं ॥१॥ अति उदार विलोकि आनन पावत नहीं अघाऊं चुटकी दै दै नचाऊं...
श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत
श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत श्रीनवनीत प्रिये पलना । गावत गुण गोविंदके चहुँ दिस जुरि सगरी व्रजकी ललना ॥१॥ व्रज रानी लड़ावत...
गोकुलचंद पालनें झुलत
गोकुलचंद पालनें झुलत । हौलें हौलें ब्रजरानी झुलावति किलकि किलकि देख मन फूलत ॥१॥ कीरतिलली बुलाई हरखसों लालन ढिंग पौढ़ाई...
चक्षुश्रवा प्रियकौ पलना
चक्षुश्रवा प्रियकौं पलना ललना तिहि माँझ झुलावत हैं । युवती मुख पंकज बंक चितै मिलिकैं क्षितिकौ सुत गावत हैं ॥१॥ ब्रजराज...
अपने लालके गुन गाऊँगी
अपने लालके गुन गाऊँगी । सुंदर रतन जटित पलनामें छगनमगनको झुलाऊँगी ॥१॥ लाल कुलहि पीत झगुली तन नाक नथुली पहराऊँगी । कंठ हस...
अपने लालके गुन गाऊँ
अपने लालके गुन गाऊँ । तुम झूलौ हौं हरखि झुलाऊँ प्रेम कलोलन जाऊँ ॥१॥ नखशिख लौं सिंगार बनाऊँ भाल डिठौना लाऊँ ॥ कुलह सुरंग...
करवट लई प्रथम नंदनंदन
करवट लई प्रथम नंदनंदन । ताकों महरि महोत्सव मानत भवन लिपायौ चंदन ॥१॥ बोलीं सकल घोषकी नारी तिनकौ कियौ बंदन । मंगल गीत गवा...
जहाँ गगन गति गर्ग
जहाँ गगन गति गर्ग कह्यो । यह बालिक अवतार पुरुष है कृष्ण नाम आनंद लह्यो ॥१॥ द्रोण धरा वसु परम तपोधन पुत्र नाम निरभय करी...
नंदगृह आयौ गर्ग
नंदगृह आयौ गर्ग विधि जानी । रामकृष्णके नाम करन हित यदुकुल के सनमानी ॥१॥ गजमोतिनके चौक पुराये नामकरन बिधि ठानी । मंगल गी...
देत गज बाजि
देत गज बाजि व्रजराज बिराजत गोपनके सिरताज । देश देशते खट दरसन आवत मन इच्छित फल पावत कीरति अपरंपार पहुँचे चढ़ि दान जहाज ॥...
सुनौ हो जसोदा
सुनौ हो जसोदा आज कहूँ ते गोकुल में एक पंडित आयौ। अपने सुतकौ हाथ दिखावौ सो वह कहै जो विधि निरमायौ ॥१॥ तुरत ही जन पठयौ दे...
अब डरकौनको रे
अब डरकौनको रे भैया । गर्ग बचन गोकुलमें पैठे हमारे मीत कन्हैया ॥१॥ कहत ग्वाल जसुमतिके आगें है त्रिभुवन कौ रैया । तोर्यो...
मोहन तें माटी
मोहन तें माटी क्यों खाई । ठाड़े ग्वाल कहत सब बालिक जे तेरे समुदाई ॥१॥ मुकरि गये मैं सुनी न देखी झूठेंई आनि बनाई । दै प्...
उगलौ प्यारे बाल
उगलौ प्यारे बाल गोपाल माँटी । बार बार अनरुचि उपजावत जसुमति हाथ लिये साँटी ॥१॥ महतारीकौ कह्यो न मानत कपट चतुरई ठाटी। बदन...
देखौ गोपालजूकी लीला
देखौ गोपालजूकी लीला ठाटी । सूर ब्रह्मादिक अचरज ह्वे हे जसुमति हाथ लिये रजु साँटी ॥१॥ ये सब ग्वाल प्रगट कहत हैं श्याम मन...
तें माटी क्यों
तें माटी क्यों खाई मेरे मोहन । ठाड़े कहत गोप बालिक सब जैहें तेरे गोहन ॥१॥ मुकरि गये मैं कछु न देखी झूठेंई आनि लगाई । दै...
यशोमति मन अभिलाष
यशोमति मन अभिलाष करै । कब मेरौ मोहन घटुरुवन रैंगै कब द्वैक पग धरनी धरै ॥१॥ कब दतियाँ द्वै दूधकी देखों कब तोतरे मुख बचन...
रानी तेरे लालसों
रानी तेरे लालसों कहा कहों । जे जे कर्म नैनभरि देखति हों अचंभे रहों ॥१॥ तोर्यौ शकट पूतना मारी तृणावर्त बध कीनौ । सात दिव...
बलिबलि चरित्र गोकुल
बलिबलि चरित्र गोकुल राय । दावानल को पान कीयौ पीबत दूध सिराय ॥१॥ पूतना के प्रान शोषे रहै उर लपटाय । कहत जननी दूध डारत खी...
रुन झुन बजत
रुन झुन बजत पग पेंजनी । हरि के तन जगमगत बिच बिच जटित कोटि कमनी ॥१॥ उठत तान तरंग बिच बिच जमी राग रगनी। धरत पग डगमगत आँगन...
हों वारी तेरे
हों वारी तेरे मुख पर । मेरी दृष्टि जिन लागों माई मसि बिंदु को देहुँ भ्रूपर ॥१॥ सर्वसु मैं पहलें ही दीनौ दतियाँ नान्हीं...
गोषी नाचति गोद
गोपी नाचति गोद लै गोविंद । देखि देखि जसुमति सुख पावत प्रफुलित मुखअरविंद ॥१॥ श्याम गात सरोज आनन शोभित दधि के बिंद । कुटि...
सिखवत चलन यशोदा
सिखवत चलन यशोदा मैया । अरबराय कर पान गहावत डगमगात धरनी परें पैया ॥१॥ कबहुँक बलिकूँ टेरि बुलावत यह आँगन खेलौ दोऊ भैया ।...
हरि अपने आगे
हरि अपने आगे कछु गावत । तनक तनक चरनसों नाचत मनही मनही रिझावति ॥१॥ बांह उठाय काजरी धौरी गैअनि टेर बुलावत । कबहुँक बाबा न...
खेलत श्याम ग्वालन
खेलत श्याम ग्वालन संग ॥ सुबल हलधर अरु श्रीदामा करत नाना रंग ॥१॥ हाथ तारी देत भाजत सबैं करि करि होड़ ॥ बरजें हलधर श्याम...
देखौ माई या
देखौ माई या बालक की बात । बन उपवन सरिता सब मोहे देखत साँवल गात ॥१॥ मारग चलत अनीत करत हरि हटके माखन खात ॥ पीतांबर वह सिर...
लाड़िली सुरँग पालने
लाड़िली सुरँग पालने झूले । कीरति बैठि झुलावति हरखत अति आनँद मन फूले ॥१॥ सुरँग खिलौना भाँति भाँतिके प्रमुदित गोद खिलावै...
नंदरायको ढाढ़ी आयो
नंदरायको ढाढ़ी आयौ । भानुराय घर सुता जनम सुनि कुँवरिको मंगल गायो ॥१॥ महाराज वृषभानु जानि यों बड़घरनी बहुविधि पहरायौ । ह...
मुरली हमसों बैर
मुरली हमसों बैर दृढ़ायौ ॥ चली निपट इतराय नेंकही हरि अधरन परसायौ ॥१॥ फूली फिरत श्याम कर बैठी योंही गर्व बढ़ायौ ॥ ज्यों न...
लालतुम आछे लेहुखिलोना
लालतुम आछे लेहुखिलोना ॥ यह मिस ठानि न्हवावन बेठी रोवो जिनमेरे छोना ॥१॥ अंगफुलेल उबटनो चुपर्यो तिलक दियो अक्षतधरि भाल ॥...
श्रीवल्लभ सुरंग पालने
श्रीवल्लभ सुरंग पालने झूले ॥ झोटा देत रुक्मिनी करगही निरखि नेन मन फूले ॥१॥ कबहुंक चुटकी देत मगन मन ले बलाय समतूले ॥ भक्...
श्रीरुक्मिनी पालने झुलावे
श्रीरुक्मिनी पालने झुलावे ॥ बार बार वल्लभ वल्लभ गुन अपने सुतके गावे ॥१॥ चुंबति मुख आनंद आनन पर ले बलाय उर लावे ॥ वृन्दा...
रुक्मिनि चलन शीखावत
रुक्मिनि चलन शीखावत पायन। सुतकी गहे अंगुलियाँ डोलत शोभा कोटिक भायन ॥१॥ मणिमय जडित घूंघरू बांधे नाचत अपने पायन। वृन्दावन...
बाल विनोद करत
बाल विनोद करत वल्लभ वर हरखत सबको मन माई। रुक्मिनी गोदतें उतारी घुंटुरवन जब चलत छबी बरनी न जाई ॥१॥ कीलक कीलकके आवत धावत...
ठुमकी ठुमकी चरन
ठुमकी ठुमकी चरन धरतरी मन हरत श्रीवल्लभलाल। रुनुझुनु रुनुझुनु पग नूपुर बाजे तब चाय चाय चलत चंचल चाल ॥१॥ बोलत कछु अलबलाय...
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसाई
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसांई निजकुलहीमें फेर ।। दे चर्चित तांबूल पौत्रकों निकट आपने टेर ।।१।। सो प्रभु कल्याणराय घर निज...
आवत ललन पिया
आवत ललन पिया रस भीने ॥ शिथिल अंग डगमगात चरणगति मोतिनहार उरचीने ॥१॥ पारिजात मंदारमाल लपटात मधुप मधुपीने ॥ गोविंदप्रभु पि...
आवत कुंजनतें पोंहोपीरी
आवत कुंजनतें पोंहोपीरी ॥ पिय अलसात जूंभात रसभरे ललन खवावत बीरी ॥१॥ सुरत शिथिल अंगअंग शिथिल अति भुजभर स्यामा रसकी रसीली...
मेरे रामलला को
मेरे रामलला को सोहिलो सुन नाचो सुर नर नारीहो ॥ उमग उमग आनंदमें डोलें तन मन धन सब वारीहो ॥१॥ गृहगृहतें सब सजि चले अपनें...