तिहारी ढाढी श्रीलछमनराज Tihari Dhadhi Shrilachhmanraj
MEANING
तिहारी ढाढी श्रीलछमनराज। तिहारे पूत भये पुरुषोत्तम सुफल भये मेरे काज ॥१॥O Shri Lachhmanraj, I am your bard. Purushottam has been born as your son, and all my purposes have been fulfilled. ॥१॥तिहारे पितर भये जे पहेले महापुरुष अवतार। तिलंग तिलक द्विज जग्यनारायन किने जग्य अपार ॥२॥Among your forefathers, the first was the great Purush, Jagyanarayan—the foremost Brahmin of Tailang—who performed countless yajnas. ॥२॥ताके पूत भये गंगाधर कीने बहुत सोमयाग । तिनके गनपति सोमजग्य करि वे हैं बड़े सोहाग ॥३॥His son was Gangadhar, who performed many Soma-yajnas. His son Ganapati also performed Soma-yajnas and was greatly blessed. ॥३॥ताके श्रीवल्लभ अग्निहोत्री तव पितु अति कृपाल । तिहारे पूत आचारज वल्लभ वदन अनल बीजपाल ॥४॥His son was Shri Vallabh Agnihotri, your greatly gracious father. Your son is Acharya Vallabh, in whose mouth dwells the seed of fire. ॥४॥दैवी जीव उद्धारन कारन मायावाद निवार । श्री भागवत स्वरूप बताये सेवा पुष्टि प्रकार ॥५॥For the upliftment of divine souls, He refuted Mayavada. He revealed the true form of Shri Bhagavat and the path of seva and Pushti. ॥५॥इनके पूत होयके दोऊ श्रीहलधर गोपकुमार । गोपीनाथ विठ्ठल पुरुषोत्तम तिहि गोकुल उजियार ॥६॥His two sons were like Shri Haladhar and the cowherd prince: Gopinath and Vitthal, who illumined Gokul. ॥६॥श्री विठ्ठल को सात होई सुत ते सब आप समान । सुतके सुत नाती पाँति सब दीपत दीप प्रमान ॥७॥Shri Vitthal had seven sons, all like Himself. Their sons, grandsons, and descendants all shine like radiant lamps. ॥७॥नरनारी जे सरन आये हैं ते सब किये सनाथ । नाम सुनाये भक्ति देके पकरे दृढ करि हाथ ॥८॥All the men and women who came into His refuge were given a protector. He gave them the Name and bhakti, and firmly took them by the hand. ॥८॥तव सुतके गुन रूप बखाने तोहु न आवे पार । गोकुलपति मुख्य व्है वहनि वपु आकृति सीतल सार ॥९॥Even if I describe the virtues and form of your son, I cannot reach their limit. As the foremost Lord of Gokul, His form and appearance are the very essence of soothing grace. ॥९॥हौं ढाढी तिहारे घरको तव सुत कीरत करों गान । पर्यों रहूँ हरिवदन विलोकुं मागूं न भिच्छा आन ॥१०॥I am the bard of your household, and I sing the glory of your son. May I remain here, beholding Harivadan; I ask for no other alms. ॥१०॥तुम हो परम उदार दानेश्वर हौं मांगु सो दीजो । ढाढिन मेरी इनकी चेरी मोहे चेरो करि लीजो ॥११॥You are supremely generous, the lord of giving; please grant what I ask. Accept us as His das. ॥११॥निसदिन भक्ति करों तव सुतकी इतनी पूजहु आस । जनम जनम नित लीला निरखूं बलि-बलि वल्लभदास ॥१२॥May I worship your son with bhakti day and night—please fulfill this one hope of mine: birth after birth, may I ever behold His lila. Again and again, Vallabhdas offers himself. ॥१२॥
ORIGINAL
तिहारी ढाढी श्रीलछमनराज। तिहारे पूत भये पुरुषोत्तम सुफल भये मेरे काज ॥१॥ तिहारे पितर भये जे पहेले महापुरुष अवतार। तिलंग तिलक द्विज जग्यनारायन किने जग्य अपार ॥२॥ ताके पूत भये गंगाधर कीने बहुत सोमयाग । तिनके गनपति सोमजग्य करि वे हैं बड़े सोहाग ॥३॥ ताके श्रीवल्लभ अग्निहोत्री तव पितु अति कृपाल । तिहारे पूत आचारज वल्लभ वदन अनल बीजपाल ॥४॥ दैवी जीव उद्धारन कारन मायावाद निवार । श्री भागवत स्वरूप बताये सेवा पुष्टि प्रकार ॥५॥ इनके पूत होयके दोऊ श्रीहलधर गोपकुमार । गोपीनाथ विठ्ठल पुरुषोत्तम तिहि गोकुल उजियार ॥६॥ श्री विठ्ठल को सात होई सुत ते सब आप समान । सुतके सुत नाती पाँति सब दीपत दीप प्रमान ॥७॥ नरनारी जे सरन आये हैं ते सब किये सनाथ । नाम सुनाये भक्ति देके पकरे दृढ करि हाथ ॥८॥ तव सुतके गुन रूप बखाने तोहु न आवे पार । गोकुलपति मुख्य व्है वहनि वपु आकृति सीतल सार ॥९॥ हौं ढाढी तिहारे घरको तव सुत कीरत करों गान । पर्यों रहूँ हरिवदन विलोकुं मागूं न भिच्छा आन ॥१०॥ तुम हो परम उदार दानेश्वर हौं मांगु सो दीजो । ढाढिन मेरी इनकी चेरी मोहे चेरो करि लीजो ॥११॥ निसदिन भक्ति करों तव सुतकी इतनी पूजहु आस । जनम जनम नित लीला निरखूं बलि-बलि वल्लभदास ॥१२॥