Pushti Kirtan

Raag

Devagandhar · देवगंधार

Read 58 Pushtimargiya kirtans in Devagandhar · देवगंधार with original Braj Bhasha text and English meanings.

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Shriviththalnathke Bajat Badhai

श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई

श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई ॥ अश्विन वदी तेरसकों प्रकटे श्रीबालकृष्ण सुखदाई ॥१॥ वीर्यरूप महा कीयो पराक्रम नेंन कमल दलएन ॥...

Shrivittalnathken Aaj Anand

श्रीविट्ठलनाथकें आज आनंद

श्रीविट्ठलनाथकें आज आनंद ॥ पंचम पुत्र भये श्रीरघुपति पूरण परमानंद ॥१॥ मोतिन चोक पुराये घरघर छिरकत अत्तर सुगंध ॥ बंदनबार...

Aaj Jagatipar Jayjaykar

आज जगतीपर जयजयकार

आज जगतीपर जयजयकार ॥ प्रकटभये श्रीवल्लभ पुरुषोत्तम वदन अग्निअवतार ॥१॥ धन्यदिन माधव मास एकादशी कृष्णपक्ष रविवार ॥ श्रीमुख...

Aaj Jagatipar Jayjaykar

आज जगतीपर जयजयकार

आज जगतीपर जयजयकार ॥ अधम उद्धारन करुणा सागर प्रकटे अग्नि अवतार ॥१॥ गृहगृहतें सुंदरि सब आईं मोतिन भरभर थार ॥ निरख कमलमुख...

Bhutal Maha Mahotsav

भूतल महा महोत्सव

भूतल महा महोत्सव आज ॥ श्री लक्ष्मणगृह प्रकट भयेहें श्रीवल्लभ महाराज ॥१॥ आज्ञादई दयाकर श्रीहरि पुष्टि प्रकटवे काज ॥ कलिम...

Bhagyan Vallabh Janma

भाग्यन वल्लभ जन्म

भाग्यन वल्लभ जन्म भयो शुभ वैशाख कृष्णएकादशी पूरण विधु उदयो ॥१॥ संतन मन मायामत्तको अति गहवर तिमिर गयो ॥ रसस्वरूप व्रजभूप...

Bhagyan Vallabh Bhutal

भाग्यन वल्लभ भूतल

भाग्यन वल्लभ भूतल आये ॥ कर करुणा लक्ष्मणगृह कलिमें व्रजपति प्रकट कराये ॥१॥ चिंता तजो भजो इनके पद महा पदारथ पाये ॥ दास ज...

Karmodakmakhanmishrile

करमोदकमाखनमिश्रीले

करमोदकमाखनमिश्रीले कुवरकेसंग डोलत नंदरानी ॥ मिसकर पकर न्हवायोचाहतबोलत मधुरी बानी ॥१॥ कनकपथ आंगनमें राख्यो सीतउष्णधर्यो...

Pratasmenuth Yashomatijanani

प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी

प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी गिरीधरसुत को उबटन्हवावे ॥ करतशुंगार वसन भूषणले फूलन रुचिरुचिपागबनावे ॥१॥ छूटेबंदबागो अति सोहत वि...

Kaha Ochhihavaijaihaijat

कहा ओछीहवैजैहैजात

कहा ओछीह्वैजैहैजात ॥ सुनयशुमति तुमबडरन आगेंजोछिन एक बितात ॥१॥ अतिनीको सतभावभलाई जो यातनतेकीजे ॥ मायबापको नामलिवावत लोकम...

Yashumati Jabahi Kaho

यशुमति जबही कहो

यशुमति जबही कह्यो न्हवावनरोय गयेहरि लोटतरी ॥ तेलउबटनोंले आगेंधर लालहीचोटीपोततरी ॥१॥ मैंबलजाऊ इनमोहनकी कितरोवत बिन काजे...

Manjankarat Gopalchaukipar

मंजनकरत गोपालचौकीपर

मंजनकरत गोपालचौकीपर ॥ अतिसुगंधफुलेलउबटनो विविधभांत कीसोंझराखीधर ॥१॥ प्रथमन्हवाय फिरकेसरचर्चत शोभित अंगअंग सुंदरवर ॥ व्र...

Karatshringar Maiyamanbhavat

करतशृंगार मैयामनभावत

करतशृंगार मैयामनभावत ॥ सीतलजल उष्ण करराख्यो लेलालन को बैठ न्हवावत ॥१॥ अंगअंगोछ चौकीबैठारत प्रथमहीले तनिया पहरावत ॥ देखो...