Chahuyug Ved Vachan
चहूंयुग वेद वचन
चहूंयुग वेद वचन प्रति पार्यो ॥ धर्म ग्लानि भई जबहि जब तब तब तुम वपु धार्यो ॥१॥ सत्ययुग श्वेत बाराह रूप धर हिरण्याक्ष उर...
Raag
Read 58 Pushtimargiya kirtans in Devagandhar · देवगंधार with original Braj Bhasha text and English meanings.
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चहूंयुग वेद वचन
चहूंयुग वेद वचन प्रति पार्यो ॥ धर्म ग्लानि भई जबहि जब तब तब तुम वपु धार्यो ॥१॥ सत्ययुग श्वेत बाराह रूप धर हिरण्याक्ष उर...
अबके द्विज वर
अबके द्विज वर व्हे सुख दिनों ॥ तबकें नंद यशोदा नंदन व्हे हरि आनंद कीनों ॥१॥ तब कीनो गोपाल रूप अब वेद स्मृति दृढचीनों छी...
श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई
श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई ॥ अश्विन वदी तेरसकों प्रकटे श्रीबालकृष्ण सुखदाई ॥१॥ वीर्यरूप महा कीयो पराक्रम नेंन कमल दलएन ॥...
भयो श्रीविठ्ठलके मन
भयो श्रीविठ्ठलके मन मोद ॥ परम पुन्य फल श्रीगोकुलेश सुत धाय लिये जब गोद ॥१॥ बारबार बिधु बदन विलोकत फुले अंग न मात ॥ बाल...
यह सुख कयों
यह सुख कयों हु कहत न आवे ॥ सुखनिधि रससों न्हात रसही रस भाग्य रास जो न्हावे ॥१॥ निज जन निरखि निरखि सुख पावत वल्लभरस बरसा...
श्रीविट्ठलनाथकें आज आनंद
श्रीविट्ठलनाथकें आज आनंद ॥ पंचम पुत्र भये श्रीरघुपति पूरण परमानंद ॥१॥ मोतिन चोक पुराये घरघर छिरकत अत्तर सुगंध ॥ बंदनबार...
आज जगतीपर जयजयकार
आज जगतीपर जयजयकार ॥ प्रकटभये श्रीवल्लभ पुरुषोत्तम वदन अग्निअवतार ॥१॥ धन्यदिन माधव मास एकादशी कृष्णपक्ष रविवार ॥ श्रीमुख...
आज जगतीपर जयजयकार
आज जगतीपर जयजयकार ॥ अधम उद्धारन करुणा सागर प्रकटे अग्नि अवतार ॥१॥ गृहगृहतें सुंदरि सब आईं मोतिन भरभर थार ॥ निरख कमलमुख...
भूतल महा महोत्सव
भूतल महा महोत्सव आज ॥ श्री लक्ष्मणगृह प्रकट भयेहें श्रीवल्लभ महाराज ॥१॥ आज्ञादई दयाकर श्रीहरि पुष्टि प्रकटवे काज ॥ कलिम...
भाग्यन वल्लभ जन्म
भाग्यन वल्लभ जन्म भयो शुभ वैशाख कृष्णएकादशी पूरण विधु उदयो ॥१॥ संतन मन मायामत्तको अति गहवर तिमिर गयो ॥ रसस्वरूप व्रजभूप...
भाग्यन वल्लभ भूतल
भाग्यन वल्लभ भूतल आये ॥ कर करुणा लक्ष्मणगृह कलिमें व्रजपति प्रकट कराये ॥१॥ चिंता तजो भजो इनके पद महा पदारथ पाये ॥ दास ज...
वल्लभ उठी प्रातःकाल
वल्लभ उठी प्रातःकाल दरस दियो अति रसाल भई हैं निहाल सखी राजत संग प्यारी। दोऊनके चिह्न देख ललिता मुसकाय कह्यो आज हो जु बे...
करमोदकमाखनमिश्रीले
करमोदकमाखनमिश्रीले कुवरकेसंग डोलत नंदरानी ॥ मिसकर पकर न्हवायोचाहतबोलत मधुरी बानी ॥१॥ कनकपथ आंगनमें राख्यो सीतउष्णधर्यो...
प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी
प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी गिरीधरसुत को उबटन्हवावे ॥ करतशुंगार वसन भूषणले फूलन रुचिरुचिपागबनावे ॥१॥ छूटेबंदबागो अति सोहत वि...
कहा ओछीहवैजैहैजात
कहा ओछीह्वैजैहैजात ॥ सुनयशुमति तुमबडरन आगेंजोछिन एक बितात ॥१॥ अतिनीको सतभावभलाई जो यातनतेकीजे ॥ मायबापको नामलिवावत लोकम...
यशुमति जबही कहो
यशुमति जबही कह्यो न्हवावनरोय गयेहरि लोटतरी ॥ तेलउबटनोंले आगेंधर लालहीचोटीपोततरी ॥१॥ मैंबलजाऊ इनमोहनकी कितरोवत बिन काजे...
मंजनकरत गोपालचौकीपर
मंजनकरत गोपालचौकीपर ॥ अतिसुगंधफुलेलउबटनो विविधभांत कीसोंझराखीधर ॥१॥ प्रथमन्हवाय फिरकेसरचर्चत शोभित अंगअंग सुंदरवर ॥ व्र...
करतशृंगार मैयामनभावत
करतशृंगार मैयामनभावत ॥ सीतलजल उष्ण करराख्यो लेलालन को बैठ न्हवावत ॥१॥ अंगअंगोछ चौकीबैठारत प्रथमहीले तनिया पहरावत ॥ देखो...