Aajbani Vrishabhankunvariduti
आजबनी वृषभानकुंवरिदूती
आजबनी वृषभानकुंवरिदूती अंचलवारत तृणतोरत कहैत भलेजु भलें भामा ॥ वदनजोति कंठपोति छोटी छोटी लरमोतिन की सादाशृंगारहार कुचवि...
Raag
Read 53 Pushtimargiya kirtans in Kanharo · कान्हरो with original Braj Bhasha text and English meanings.
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आजबनी वृषभानकुंवरिदूती
आजबनी वृषभानकुंवरिदूती अंचलवारत तृणतोरत कहैत भलेजु भलें भामा ॥ वदनजोति कंठपोति छोटी छोटी लरमोतिन की सादाशृंगारहार कुचवि...
मानिनी मान निहोरो
मानिनी मान निहोरो ॥ हों पठई तोहि लेन सांवरे चलरी गर्व कर थोरो ॥१॥ कुंजमहल ठाढे मनमोहन चितवत चंदचकोरो ॥ हरी दासके स्वामी...
चढबढ विडर गई
चढबढ विडर गई अंगअंग मानवेली तेरें सयानी ॥ हृदय आलवाल मध्य प्रकटभईरी आली प्रीतिपालीनीके कर छिन छिन रूसबो भयोपानी ॥१॥ कोन...
अरी तू काहे
अरी तू काहे अनमनी बोलतनाहिं बुलायें ॥ अवलोंतो तू हसत खेलतही कहाभयो मोहिं आये ॥१॥ नयन नीचेंकियें चितवन रुखदियें तिरछिभ्र...
हरिहोंते हारीहों
हरिहोंते हारीहों लालतिहारी प्यारीके पायंन परपर ॥ रही सिरधरचरणन बडीबारभई लीजिये मनाय रूठी मानत मानिह क्योंहूं कर ॥१॥ जेस...
ले राधे गिरिधर
ले राधे गिरिधर दें पठई अपने मुखकी सुंदर बीरी ॥ सुनोहो संदेशो प्राणपियारेको कित सँकुचित आवो किननीरी ॥१॥ घूंघट खोल नयन भर...
ले राधे प्रीतम
ले राधे प्रीतम दे पठई श्री मुखकी आधी बीरी ॥ वेगि बुलाई तू छैलछबीली नागर तजि तनमन भोरी ॥१॥ तव लगी निस गिरिधर नवरंगको जब...
बेनी सुन्दर श्याम
बेनी सुन्दर श्याम गुही री ॥ राजत रुचिर शीश श्यामा के चम्पक और जुही री ॥१॥ नख शिख कर सिंगार श्यामा को बीरी मुख में दई री...
बीरी देत बनाय
बीरी देत बनाय बनाय ॥ पीरे पीरे पान सोपारी लोंगन कील लगाय ॥१॥ लेत लाल कर जोर देत वे मुख मेलत मुसकाय ॥ दासन देत उगार गोवि...
लालको बीरी देत
लालको बीरी देत बनाय ॥ अपनेकर राधा मृगनेनिः अतआनंद मन मांय ॥१॥ निरखत बदन कमल प्रीतम को चितवत मुरमुसक्याय ॥ रसिक प्रीतम क...
प्यारी तोही श्याम
प्यारी तोही श्याम बुलावे झमक चल राधे ॥ तोविन मोहन पान न खातहें कोन मंत्र पठ साधे ॥१॥ निशवासर तेरो ध्यान धरतहें विरह अग्...
ताहीकों सिर नाइये
ताहीकों सिर नाइये जो श्रीवल्लभसुत पदरज रति होहि ॥ कीजे कहा आन ऊंचेपद तिनसो कहासगाई मोहि ॥१॥ जाके मनमें उग्रभरमहै श्रीवि...
उत्तमकुल अवतार कहा
उत्तमकुल अवतार कहा जो श्रीवल्लभकुमार न जान्यो ॥ चरचा न कीनी वरवल्लभकी रचि पाखंडकियो बहुबानो ॥१॥ रसिक कथासुनीनहीं श्रवणन...