Ek Riti Priti
एक रीति प्रीति
एक रीति प्रीति वश कीने मोहन याही तें ब्रजरीति न्यारी । जाकी माया सब जगत नचावत ताहि नचावत घोषकी नारी ॥१॥ जाकी चरन रज ब्र...
Raag
Read 73 Pushtimargiya kirtans in Kanharo · कान्हरो with original Braj Bhasha text and English meanings.
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एक रीति प्रीति
एक रीति प्रीति वश कीने मोहन याही तें ब्रजरीति न्यारी । जाकी माया सब जगत नचावत ताहि नचावत घोषकी नारी ॥१॥ जाकी चरन रज ब्र...
बल बल जाउँ
बल बल जाउँ मधुर सुर गावो ॥ अबकी वेर मेरे कुंवर कन्हैया नंद ही नाच दिखावो ॥१॥ हेरी दे बावा के आगे परम प्रीत उपजावो॥ रतन...
आछो नीकी सोहत
आछो नीकी सोहत हसन द्वै द्वै दुधकी दतियां । घुटुरुवन आंगन रिंगन मोहन खेलत आनआन भतियां ॥१॥ लरलटकन मटकन करपोहोंची बोलत तोत...
विजय दशहरा परव
विजय दशहरा परव बडो हे आज ॥ ब्रजबनिता सब मंगल गावत बाजन रह्यो ब्रज गाज ॥१॥ भरि बहुत अंगना तीबारी महेल अटारी छाज ॥ बडे पर...
कान जगावन चले
कान जगावन चले कन्हाई ॥ गिरिधर सिंध्द्वार चढटेरत सुन सब सखा मंडली आई ॥१॥ विविध सिंगार पेहेरे पट भूषण प्रफुल्लित उर आनंद...
घरमेंसुं बाहिर उठि
घरमेंसुं बाहिर उठि आये सब गायनके कान जगावन ॥ जेसें भोर हूंकके खेलें लागे लेले नाम बुलावन ॥१॥ गांग बुलाई धूमर धोरी कारी...
दीपदानदे श्याम मनोहर
दीपदानदे श्याम मनोहर सब गायनके कान जगावत ॥ गांग बुलाई धूमर धौरी ऊँचे लेले नाम बुलावत ॥१॥ होउ सचेत भोरखेलनकों दोरी आवत न...
बडो परवदिन दीपदिवारी
बडो परवदिन दीपदिवारी ॥ वागो श्वेत तासको सोहे सिरपें कुलही श्वेत संवारी ॥१॥ दीप दान दे खिरक सिधारे सबे सिंगारी गाय बुलाव...
आज कुहूकी रात्र
आज कुहूंकी रात्र माधो दीपमालिका मंगलचार ॥ खेलोजूथ सहित संकर्षण मोहन मूरति नंदकुमार ॥१॥ कहत यशोदा सुनों मन मोहन चंदन लेप...
आज अमावस दीपमालिका
आज अमावस दीपमालिका बड़ी पर्वणी हे गोपाल ॥ घर-घर गोपी मंगलगावें सुरभी वृषभ सिंगारो लाल ॥१॥ कहत यशोदा सुनो मनमोहन अपने ता...
श्रीगोवर्द्धन दीपमालिका सब
श्रीगोवर्द्धन दीपमालिका सब देखनकों आये ॥ अरसपरस व्यंजन करके सब व्रजवासी पूजनकों धाये ॥१॥ तब नंद उपनंद बुलाये व्रजवासी स...
दीपमालिका करन आई
दीपमालिका करन आई व्रजबधु मनहरनि ॥ कंचन थाल लसत कमलनकर नंदमहेर घर घरनि ॥१॥ गजमोतिनके चोक पुराये गावत मंगल गीत जुवती गन ॥...
आजदिपत दिव्य दीपमालिका
आजदिपत दिव्य दीपमालिका ॥ मानो कोटि रवि कोटि चंद छबि विमल भई निशि कालिका ॥१॥ गजमोतिनके चौक पुराये बिचबिच वज्र प्रवालिका...
देखो इन दीपनकी
देखो इन दीपनकी सुंदराई ॥ जानो घनमें विधु मंडल राजत तमनिश परम सुहाई ॥१॥ नंदराय अगणित पांती रचि अद्भुत युक्ति बनाई ॥ विवि...
दीपदान दे हटरी बैठे
दीपदान दे हटरी बैठे बड़ो पर्वहे आज दिवारी ॥ चहुं ओर पांत बनी दीपनकी रानीजु अपने हाथ संवारी ॥१ ॥ दिव्य कपूर सुगंध आदि रच...
दीपदान व्रजराज देत
दीपदान व्रजराज देत दोऊ ढोटनकों गोद बैठारी ॥ दीपदानकी होत आरती मंगल गावत सब व्रजनारी ॥१॥ दीपदान शोभित भवनन पर धरत-फिरत ख...
दीपदानदे हटरी बैठे
दीपदानदे हटरी बैठे नवललाल गोवर्द्धनधारी ॥ दोहरी पांत बनी दीपनकी व्रजशोभा लागत अति भारी ॥१॥ तैसेही बने नंदके नंदन तैसी ब...
हटरी बैठे श्रीगोपाल
हटरी बैठे श्रीगोपाल ॥ रत्न जटितकी हटरी बनाई हीरामोती परम रसाल ॥१॥ डलाडलैया और कुल्हैया भरभर धरे पकवान रसाल ॥ पान फूल सो...
हटरी बैठे सोभित
हटरी बैठे सोभित लाल ॥ श्रीब्रखभान नंदिनी संग ले राजत सब ठाडी ब्रजबाल ॥१॥ मधुमेवा पकवान मिठाई जसुमति साजि धरी तिहिं काल...
दीपदानदे कान जगाये
दीपदानदे कान जगाये सुंदर हटरी सुभग संवारी ॥ चित्र विचित्र बहुत रंग चीती गादी तकिया धरे सुधारी ॥१॥ चहुं ओर पांति बनी दीप...
रूप उज्यारो दीप
रूप उज्यारो दीप जगमगे खेलतहें पिय प्यारी ॥ दाव पर्यो सुंदरि राधाको रुठयो कुंजबिहारी ॥१॥ केलि करत हँसत चहुंदिशतें रंग बढ...
पासा खेलतहें पिय
पासा खेलतहें पिय प्यारी ॥ रतन खचित चोकीपर डारत हंसत करत किलकारी ॥१॥ पहेले दाव पर्यो स्यामाको पीत पिछोरी हारी ॥ अबकी बेर...
पीया पीतांबर मुरली
पीया पीतांबर मुरली जीती ॥ हाहाकरत न देत लडेंती पांय परत निसबीती ॥१॥ राखी दुराय सघन कुंजनमें ललितादिक रहत सचीती ॥ विठ्ठल...
मुरली जीती राधा
मुरली जीती राधा रानी ॥ दाव पर्यो वृषभानु सुताको मोहन रूंगट ठानी ॥१॥ लीयो जीत पीतांबर पीयको खेलत हंसत सयानी ॥ विठ्ठल विप...
अद्भुत एक अनूपम
अद्भुत एक अनूपम नार ॥ नेन बेन चोवीस चोगुने सोरह चरन वरन हें चार ॥१॥ चतुराननसों प्रीत तीनपति ताके इक्कीस दूने नेन ॥ श्या...
सखियन रचिरचि सेज
सखियन रचिरचि सेज बनाई ॥ मणिमय जटितपर्यक कनकके मुक्तनकी अधिकाई ॥१॥ पोढे श्रीसहित सुंदरवर झलमलदीप झरोखन झांई ॥ मानदास बलज...
कान्ह कुंवर के
कान्ह कुंवर के कर पल्लव पर मानों गोवर्धन नृत्यकरे ॥ ज्यों ज्यों तान उठत मुरली में त्यों त्यों लालन अधर धरे ॥१॥ मेघ मृदं...
आज परव दिन
आज परव दिन देव दिवारी ॥ बागो अतलस पीरो सोहे कुलही श्वेत सिरधारी ॥१ ॥ बावानंद जगाय देवकों तुलसीकी कीनी पूजारी ॥ कर विवाह...
आज प्रबोधिनी परम
आज प्रबोधिनी परम मोद कर चल प्यारी पियपे ले जाउं ॥ बहुत ईख रस कुंज पुंज रच चहूं ओर दीपकन सुहाउं ॥१॥ चित्रविचित्र भूमि अत...
आजप्रबोधिनी शुभदिन
आजप्रबोधिनी शुभदिन नीको अमलपक्ष एकादशी आई ॥ बहुत ईख कुंजन रचिकें सखी चहूं ओर दीपकन सुहाई ॥१॥ घरघर गोपी चौक पूरत सब बंदन...
देव जगावत यशोदा
देव जगावत यशोदा रानी बहु उपहार पूजाके करकें ॥ इक्षु दंड मंडप पोहोपनके चौक चहूं दिश दीवाधरकें ॥१॥ ताल पखावज भेरि शंख ध्व...
धन धन माता तुलसी बडी
धन धन माता तुलसी बडी ॥ नारायण के चरनन चढी ॥१॥ जोकोई तुलसीकी सेवा करहें ॥ कोटिक पाप छिनमें परिहरहें ॥ जो कोई तुलसीके फेर...
सोहे शीश सुहावनो
सोहे शीश सुहावनो दिन दुल्हेतेरे ॥ मणि मोतिनको सेहरो सोहे बसियो मन मेरे ॥१॥ मुख पून्योको चंदहे मुक्ताहल तारे ॥ उनके नयन...
दुलह हो बनि
दुलह हो बनि आयो सुंदर दुलहनिजूसों नेह लगायो ॥ रत्न जटितको शीश सेहरो गजमोतिनसों गूंथ बनायो ॥१॥ वागो लाल सुनहरी छापो लालइ...
यह व्रत माधो प्रथमलीयो
यह व्रत माधो प्रथमलीयो ॥ जो मेरे भक्तनकों दुखदे ताकोफारूं नखनहीयो ॥१॥ जो भक्तनसों वैरकरतहे परमेश्वरसों वैरकरे ॥ रखवारीक...
तोलों हो वैकुंठ न
तोलों हो वैकुंठ न जेहों ॥ सुन प्रल्हाद प्रतिज्ञा मेरी जोलों तो शिरछत्र न देहों ॥१॥ मनकर्म वचन मानजिय अपने जहीं जहीं जान...
जाकों तुम अंगीकार कियो
जाकों तुम अंगीकार कियो तिनके कोटि विघ्न हरिटारे अभयदान भक्तनकों दियो ॥१॥ बहु सनमान दियो प्रल्हादे सबही निशंक जियो ॥ निक...
हरिराखे ताहि डर काको
हरिराखे ताहि डर काको ॥ महापुरुष समर्थ कमलापति नरहरीसो ईशहे जाको ॥१ ॥ अनेक शासना करकर देखी निष्फल भई खिस्याय रह्यो ॥ ता...
श्रीनरसिंह भक्त भय
श्रीनरसिंह भक्त भय भंजन जन रंजन मन सुखकारी ॥ भूत प्रेत पिशाच डाकिनी यंत्र मंत्र भव भय हारी ॥१ ॥ सबे मंत्रते अधिक नाम जन...
झुलत वल्लभवर सुखदाई
झुलत वल्लभवर सुखदाई ॥ रसना एक कहां लों अंगअंग सुंदरताई ॥१॥ व्रजजन नयन चकोर चंद्रमुख पीवत रूप सुधाई ॥ झोटा देत भक्त बडभा...