Pushti Kirtan

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  1. भोजन भली भांत | Bhojan Bhali Bhant

    Dhanashri · धनाश्री · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद

    भोजन भली भांत हरि कीनो ॥ खट रस व्यंजन मठा सलोना मांगमांग हरि लीनो ॥१॥ हसत लसत परोसत नंदरानी बालकेलि

  2. भोजनकर उठे दोऊ | Bhojankar Uthe Dou

    Dhanashri · धनाश्री · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद

    भोजनकर उठे दोऊ भैया ॥ हस्त पखार सुद्ध अचमन कर बीरी लेहु कन्हैया ॥१॥ मातयशोदा करत आरती पुनपुन लेत बलै

  3. अचमन कीजिये कृपानिधान | Achaman Kijiye Kripanidhan

    Dhanashri · धनाश्री · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद

    अचमन कीजिये कृपानिधान ॥ यमुनोदक कंचन झारी भरलाई चंद्रावली सुजान ॥१॥ पनवारों भक्तनकोंदीजे नारद तुंबरग

  4. अचवन करत लाडिली | Achavan Karat Ladili

    Dhanashri · धनाश्री · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद

    अचवन करत लाडिली लाल । कंचन झारी गहत परस्पर श्री राधा गोपाल ॥१॥ जलमुखलेत हसत हसावत देख सखीन की ओर । र

  5. किहिं मिस यशोमतिहीकें | Kihin Mis Yashomatihiken

    Ramakali · रामकली · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    किहिं मिस यशोमतिहीकें जाऊं ॥ सकलसुखनिधि-मुखअवलोकूं नयननतृषा बुझाऊं ॥१॥ द्वारआरज सभाजुरीहे निकसवेनहिं

  6. तुमकुटेरतहैजू कान्ह | Tumkuteratahaiju Kanh

    Ramakali · रामकली · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    तुमकुंटेरतहैजू कान्ह ॥ गोरीसी भोरीथोरे दिननकी कछुएकवेसउठान ॥१॥ छूटी अलकलालपट ओढेंनागरीचतुरसुजान ॥ कह

  7. सखीरी मोहि हरिदरशन | Sakhiri Mohi Haridarshan

    Ramakali · रामकली · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    सखीरी मोहि हरिदरशन की चाय ॥ सांवरेसोंप्रीति बाढीलाखलोगरिसाय ॥१॥ स्यामसुंदरलोललोचन देख मन ललचाय ॥ सूर

  8. नंदसदनगुरुजनकी भीरतामें | Nandsadangurujanki Bhirtamen

    Ramakali · रामकली · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    नंदसदनगुरुजनकी भीरतामें मोहनवदन नीकेदेखननपाऊं ॥ विन-देखें जिय अकुलायजाय दुःखपाययद्यपि बडरेछिनछिन उठध

  9. हिलगन कठिन हे | Hilagan Kathin He

    Ramakali · रामकली · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    हिलगन कठिन हे यामनकी ॥ जाके लियें सुनों मेरीसजनी लाजगईसबतनकी ॥१॥ लोकहसो परलोकहिजाओ ओर देओ कुलगारी ॥

  10. नंदलालसों मेरो मनमान्यों | Nandlalason Mero Manmanyo

    Asavari · आसावरी · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    नंदलालसों मेरो मनमान्यों कहाकरेंगो कोयरी ॥ होंतोचरणकमललपटानी जोभावेसोहोयरी ॥१॥ गृहपति मातपिता मोहि त

  11. जाको मन लाग्यो | Jako Man Lagyo

    Asavari · आसावरी · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    जाको मन लाग्यो गोपालसोंताहि और कैसें भावेहो ॥ लेकर मीन दूधमें राखोजलविन सचुनहीं पावेहो ॥१॥ ज्यों सूर

  12. मेरोमाई हरिनागरसों नेह | Meromai Harinagarson Neh

    Asavari · आसावरी · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    मेरोमाई हरिनागरसों नेह ॥ जबते दृष्टिपरेमनमोहन तबते विसरयोगेह ॥१॥ कोऊ निंदो कोऊ वंदो मो मनगयोसंदेह ॥

  13. मेरोमाई नयनन ने | Meromai Nayanan Ne

    Asavari · आसावरी · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    मेरोमाई नयनन ने बढ्यो ॥ कमल नयन घनस्याम छबीलो चितमें रहतचढ़्यो ॥१॥ को जाने कहो धों कहा कीनो मोहन मंत

  14. नयना माई नाहिन | Nayana Mai Nahin

    Asavari · आसावरी · Shitakal Rajabhog Darshan Hilag Ke Pad · शीतकाल राजभोग दर्शन हिलग के पद

    नयना माई नाहिन करत कह्यो ॥ कहा करूं केसे नहिं छूटे जो हठ हरख गह्यो ॥१॥ आवत हुतीसहज मग अपने चपलन उलट

  15. सुरंग दुरंग सोहत | Surang Durang Sohat

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    सुरंग दुरंग सोहत पागकुरंगलाल केसेंलोयनलोने ॥ कपोल विलोलनमें झलकेकल कुंडल कानन कोने ॥१॥ रंगरंगीलेके अ

  16. मोहन मोहनी घाली | Mohan Mohani Ghali

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    मोहन मोहनी घाली सिरपर जोई मोहि रहत सदाई ॥ निशदिन सखीरी जोलों नहीं देखियत पिय व्रजराजकुंवर ॥१॥ यद्यपि

  17. लालन नाहिं नेरी | Lalan Nahin Neri

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    लालन नाहिं नेरी काहूके वसके ॥ बावरी भईरी त्रिया उनसों मन उरुझायो वेतो सदाई अपने रसके ॥१॥ निरखपरख देख

  18. प्रीतम प्रीतिहीते पैये | Pritam Pritihite Paiye

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    प्रीतम प्रीतिहीते पैये ॥ यद्यपि रूपगुण सील सुघरता इन वातन नरिझैये ॥१॥ सत कुल जन्म करम शुभलक्षणवेदपुर

  19. आज बनठन लालन | Aaj Banthan Lalan

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    आज बनठन लालन आयेरी तेरे मान कर न्योछावर ॥ यद्यपि बहुनायक कहूंनमन अरुझोरी तेरे गुणरूपमोहे ताते तोसोहै

  20. हँसत हँसत लालन | Hansat Hansat Lalan

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    हँसत हँसत लालन आयेरी तेरे अंगना ॥ होंतो तेरो रूपदेख ठग रही मेरी आली जोकछु कहि आवे छबिदेख भई मगना ॥१॥

  21. झूठी मीठी बतियां | Jhuthi Mithi Batiyan

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    झूठी मीठी बतियां ललन मनुहार करन आये ॥ कहा कहिये तेरे हृदयकी सुंदरताई जैसे तन स्याम तेसेई हो मन तातें

  22. चल अंगदुराये संग | Chal Angduraye Sang

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    चल अंगदुराये संग मेरे ॥ मुखही मौन धर अधर ओटदे दशन दामिनी चमकत तेरें ॥१॥ त्यज नूपुर कटि क्षुद्रघंटिका

  23. रूप देख नयना | Rup Dekh Nayana

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    रूप देख नयना पलक लागें नहीं ॥ गोवरधनधरके अंग अंग पर दृष्टि परत चित रहत तहीतहीं ॥१॥ कहारी कहों अंग अं

  24. मोहन नयननहुते नहिं | Mohan Nayananahute Nahin

    Nat · नट · Shitakal Bhog Samay Ke Pad · शीतकाल भोग समय के पद

    मोहन नयननहुते नहिं टरत ॥ विनदेखे तालावेलीसी लागत देखत मनजो हरत ॥१॥ अशनवसन सेननकी सुध आवे अब कछू नकरत

  25. गोविंद गिरिचढ टेरत | Govind Girichadh Terat

    Purvi · पूर्वी · Sandhya Aarti Ke Pad Ath Gai Bulayave Ke Pad · संध्या आरती के पद अथ गाय बुलायवेके पद

    गोविंद गिरिचढ टेरत गाय ॥ गांग बुलाई धौमर धौरी टेरत वेणु बजाय ॥१॥ श्रवण नादसुन मुख तृणधर सब चितई सीस