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चहूंयुग वेद वचन | Chahuyug Ved Vachan
Devagandhar · देवगंधार · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई
चहूंयुग वेद वचन प्रति पार्यो ॥ धर्म ग्लानि भई जबहि जब तब तब तुम वपु धार्यो ॥१॥ सत्ययुग श्वेत बाराह र
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अबके द्विज वर | Abke Dvij Var
Devagandhar · देवगंधार · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई
अबके द्विज वर व्हे सुख दिनों ॥ तबकें नंद यशोदा नंदन व्हे हरि आनंद कीनों ॥१॥ तब कीनो गोपाल रूप अब वेद
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श्रीवल्लभकें आनंद भयो | Shrivallabhken Anand Bhayo
Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई
श्रीवल्लभकें आनंद भयो प्रकट भये श्रीविठ्ठलनाथ ॥ आनंदे व्रजबासी सकल गुण भक्त मित्र मिल गावहिं साथ ॥ आ
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श्री विठ्ठलजूके दर्शन | Shri Vitthaljuke Darshan
Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई
श्री विठ्ठलजूके दर्शन देखत होत परमसुख आनंद ॥ प्रकट भये संतनहित कारण सकल कला वृन्दावन चंद ॥१॥ परम उदा
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तुमसे तुमही श्रीवल्लभ | Tumse Tumahi Shrivallabh
Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई
तुमसे तुमही श्रीवल्लभ नंद ॥ करुणासिंधु उदार कल्पतरु सुखनिधि आनंदकंद ॥१॥ रूपरासि गुणरसिक सुलक्षण पूरण
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श्रीविठ्ठलनाथ अनाथके तारण | Shriviththalnath Anathke Taran
Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई
श्रीविठ्ठलनाथ अनाथके तारण ॥ श्रीवल्लभ गृह प्रकट रूप यह धर्यो भक्तहित कारण ॥१॥ दीनबंधु कृपासिंधु सहजह
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जोपें श्रीविठ्ठल रूप | Jopen Shriviththal Rup
Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई
जोपें श्रीविठ्ठल रूप न धरते ॥ तो केसेंके घोर कलियुग के महापतित निस्तरते ॥१॥ सेवारीति प्रीति व्रजजनकी
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जोपें श्रीविठ्ठलनाथहि गावे | Jopen Shriviththalnathahi Gave
Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई
जोपें श्रीविठ्ठलनाथहि गावे ॥ दिशादिश विदिश रसातल भूतल कितकोऊ दुख पावे ॥१॥ काहेकों त्रैताप सहत जन कित
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कृपासिंधु श्रीविठ्ठलनाथ | Kripasindhu Shriviththalnath
Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई
कृपासिंधु श्रीविठ्ठलनाथ ॥ हस्त कमल निस्तारे जे हुते अधम अनाथ ॥१॥ बाधा कछू न रही अब तनमें भये सुदृढ स
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श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले | Shrivitthalnath Palanejhule
Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ निरख निरख मुख कमल मनोहर आनंद उर न समावे हो ॥१॥ कबहु
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श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले | Shrivitthalnath Palanejhule
Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ वारंवार निहार कमल मुख भाव सहितगुण गावे हो ॥१॥ कबहुं
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मनिमय आंगन श्रीवल्लभके | Manimay Aangan Shrivallabhke
Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना
मनिमय आंगन श्रीवल्लभके कनक पालनो सोहेहो ॥ मात अक्काजू झुलावे श्रीविट्ठल देखि देखि मनमोहे हो ॥१॥ सुंद
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झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय | Jhule Shriviththalnath Manimay
Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना
झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय पालने ॥ निजजन किये सनाथ लालन लालने ॥ ध्रुव ॥ रमकि झमकि घुंघरु घंटावलि कनक
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प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर | Prakate Shriviththalnathke Giridhar
Bilaval · बिलावल · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर सुखदाई ॥ मात श्रीरुक्मिणी कूखतें प्रकट्यो शशिराई ॥१॥ भई चांदनी जगतमें
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प्रथम पुत्र प्रकट | Pratham Putra Prakat
Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई
प्रथम पुत्र प्रकट भये श्रीगिरिधर धर्मी स्वरूप षट् धर्मन सहित महा श्रीविठ्ठलेश धाम ॥ चहुँदिश अति होत
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जयति श्री गिरिधरन | Jayati Shri Giridharan
Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई
जयति श्री गिरिधरन भामिनी वर रमण धाम अवतार गिरिधराजधारी । जयति गंभीर गुन गनन कवि करे भक्त आरतहरन देहध
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श्रीविठ्ठलनाथकें बजत बधाई | Shriviththalnathken Bajat Badhai
Nat · नट · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई
श्रीविठ्ठलनाथकें बजत बधाई ॥ पूरन पुरुषोत्तम प्रकटेंहें श्रीगिरिधर गुण राई ॥१॥ बाजत झांझ पखावज मुरली
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श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर | Shriviththal Rajkumar Shrigiridhar
Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई
श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर अवलोकत मन भयो आनंद ॥ वेदपुराण सज्ञानसाध्य सब कलियुग उद्धरण आनंदकंद ॥१
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प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे | Prakate Shrivithulnathken Duje
Bilaval · बिलावल · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई
प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे सुत माई ॥ गुण ऐश्वर्यको रूपहे महिमा श्रुति गाई ॥१॥ कीनो पालन जगतको निज क
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जयति गोविंद आनंदमय | Jayati Govind Anandmay
Sarang · सारंग · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई
जयति गोविंद आनंदमय सर्वदा सकल व्रज ईश सेवो बिहारी ॥ गोपिका भाव उद्बोध निज दासकर दैवीजन हेत निज देह ध
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श्रीविठुलनाथजुके आज बधाईं | Shrivithulnathjuke Aaj Badhain
Nat · नट · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई
श्रीविठ्ठलनाथजुके आज बधाई ॥ मार्गशिर कृष्ण अष्टमीको शशी उदयो पूरण माई ॥१॥ पूरेचोक धाममोतिनके वंदनवार
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श्रीविठ्ठलेश धाम आज | Shriviththalesh Dham Aaj
Iman · ईमन · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई
श्रीविठ्ठलेश धाम आज अतिही सुहायो ॥ रानी श्रीरुक्मिणीने गोविंद सुत जायो ॥१॥ पायो अति दुर्लभ फल देख मा
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श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई | Shriviththalnathke Bajat Badhai
Devagandhar · देवगंधार · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई
श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई ॥ अश्विन वदी तेरसकों प्रकटे श्रीबालकृष्ण सुखदाई ॥१॥ वीर्यरूप महा कीयो पराक्
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श्रीविठ्ठलेश धाम आज | Shriviththalesh Dham Aaj
Sarang · सारंग · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई
श्रीविठ्ठलेश धाम आज प्रकट भये वीर्य रूप श्रीबालकृष्ण अति अनूप तीजे सुतमाई ॥ गावत चहुँदिश बधाई झूंडन
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भयो श्रीविट्ठलके मनमोद | Bhayo Shriviththalke Manmod
Sarang · सारंग · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई
भयो श्रीविट्ठलके मनमोद ॥ पूरण ब्रह्म श्रीबालकृष्ण प्रभु धायलिये जब गोद ॥१॥ वारंवार विधु वदन बिलोकत फ