Pushti Kirtan

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  1. चहूंयुग वेद वचन | Chahuyug Ved Vachan

    Devagandhar · देवगंधार · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई

    चहूंयुग वेद वचन प्रति पार्यो ॥ धर्म ग्लानि भई जबहि जब तब तब तुम वपु धार्यो ॥१॥ सत्ययुग श्वेत बाराह र

  2. अबके द्विज वर | Abke Dvij Var

    Devagandhar · देवगंधार · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई

    अबके द्विज वर व्हे सुख दिनों ॥ तबकें नंद यशोदा नंदन व्हे हरि आनंद कीनों ॥१॥ तब कीनो गोपाल रूप अब वेद

  3. श्रीवल्लभकें आनंद भयो | Shrivallabhken Anand Bhayo

    Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई

    श्रीवल्लभकें आनंद भयो प्रकट भये श्रीविठ्ठलनाथ ॥ आनंदे व्रजबासी सकल गुण भक्त मित्र मिल गावहिं साथ ॥ आ

  4. श्री विठ्ठलजूके दर्शन | Shri Vitthaljuke Darshan

    Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ki Badhai · श्री गुसाईजी की बधाई

    श्री विठ्ठलजूके दर्शन देखत होत परमसुख आनंद ॥ प्रकट भये संतनहित कारण सकल कला वृन्दावन चंद ॥१॥ परम उदा

  5. तुमसे तुमही श्रीवल्लभ | Tumse Tumahi Shrivallabh

    Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई

    तुमसे तुमही श्रीवल्लभ नंद ॥ करुणासिंधु उदार कल्पतरु सुखनिधि आनंदकंद ॥१॥ रूपरासि गुणरसिक सुलक्षण पूरण

  6. श्रीविठ्ठलनाथ अनाथके तारण | Shriviththalnath Anathke Taran

    Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई

    श्रीविठ्ठलनाथ अनाथके तारण ॥ श्रीवल्लभ गृह प्रकट रूप यह धर्यो भक्तहित कारण ॥१॥ दीनबंधु कृपासिंधु सहजह

  7. जोपें श्रीविठ्ठल रूप | Jopen Shriviththal Rup

    Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई

    जोपें श्रीविठ्ठल रूप न धरते ॥ तो केसेंके घोर कलियुग के महापतित निस्तरते ॥१॥ सेवारीति प्रीति व्रजजनकी

  8. जोपें श्रीविठ्ठलनाथहि गावे | Jopen Shriviththalnathahi Gave

    Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई

    जोपें श्रीविठ्ठलनाथहि गावे ॥ दिशादिश विदिश रसातल भूतल कितकोऊ दुख पावे ॥१॥ काहेकों त्रैताप सहत जन कित

  9. कृपासिंधु श्रीविठ्ठलनाथ | Kripasindhu Shriviththalnath

    Nat · नट · Shri Gusainji Namratna Ki Badhai · श्री गुसाईजी नामरत्न की बधाई

    कृपासिंधु श्रीविठ्ठलनाथ ॥ हस्त कमल निस्तारे जे हुते अधम अनाथ ॥१॥ बाधा कछू न रही अब तनमें भये सुदृढ स

  10. श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले | Shrivitthalnath Palanejhule

    Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना

    श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ निरख निरख मुख कमल मनोहर आनंद उर न समावे हो ॥१॥ कबहु

  11. श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले | Shrivitthalnath Palanejhule

    Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना

    श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ वारंवार निहार कमल मुख भाव सहितगुण गावे हो ॥१॥ कबहुं

  12. मनिमय आंगन श्रीवल्लभके | Manimay Aangan Shrivallabhke

    Asavari · आसावरी · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना

    मनिमय आंगन श्रीवल्लभके कनक पालनो सोहेहो ॥ मात अक्काजू झुलावे श्रीविट्ठल देखि देखि मनमोहे हो ॥१॥ सुंद

  13. झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय | Jhule Shriviththalnath Manimay

    Dhanashri · धनाश्री · Shri Gusainji Ke Palna · श्री गुसाईजी के पलना

    झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय पालने ॥ निजजन किये सनाथ लालन लालने ॥ ध्रुव ॥ रमकि झमकि घुंघरु घंटावलि कनक

  14. प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर | Prakate Shriviththalnathke Giridhar

    Bilaval · बिलावल · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई

    प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर सुखदाई ॥ मात श्रीरुक्मिणी कूखतें प्रकट्यो शशिराई ॥१॥ भई चांदनी जगतमें

  15. प्रथम पुत्र प्रकट | Pratham Putra Prakat

    Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई

    प्रथम पुत्र प्रकट भये श्रीगिरिधर धर्मी स्वरूप षट् धर्मन सहित महा श्रीविठ्ठलेश धाम ॥ चहुँदिश अति होत

  16. जयति श्री गिरिधरन | Jayati Shri Giridharan

    Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई

    जयति श्री गिरिधरन भामिनी वर रमण धाम अवतार गिरिधराजधारी । जयति गंभीर गुन गनन कवि करे भक्त आरतहरन देहध

  17. श्रीविठ्ठलनाथकें बजत बधाई | Shriviththalnathken Bajat Badhai

    Nat · नट · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई

    श्रीविठ्ठलनाथकें बजत बधाई ॥ पूरन पुरुषोत्तम प्रकटेंहें श्रीगिरिधर गुण राई ॥१॥ बाजत झांझ पखावज मुरली

  18. श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर | Shriviththal Rajkumar Shrigiridhar

    Sarang · सारंग · Shri Giridharji Ki Badhai · श्रीगिरिधरजी की बधाई

    श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर अवलोकत मन भयो आनंद ॥ वेदपुराण सज्ञानसाध्य सब कलियुग उद्धरण आनंदकंद ॥१

  19. प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे | Prakate Shrivithulnathken Duje

    Bilaval · बिलावल · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई

    प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे सुत माई ॥ गुण ऐश्वर्यको रूपहे महिमा श्रुति गाई ॥१॥ कीनो पालन जगतको निज क

  20. जयति गोविंद आनंदमय | Jayati Govind Anandmay

    Sarang · सारंग · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई

    जयति गोविंद आनंदमय सर्वदा सकल व्रज ईश सेवो बिहारी ॥ गोपिका भाव उद्बोध निज दासकर दैवीजन हेत निज देह ध

  21. श्रीविठुलनाथजुके आज बधाईं | Shrivithulnathjuke Aaj Badhain

    Nat · नट · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई

    श्रीविठ्ठलनाथजुके आज बधाई ॥ मार्गशिर कृष्ण अष्टमीको शशी उदयो पूरण माई ॥१॥ पूरेचोक धाममोतिनके वंदनवार

  22. श्रीविठ्ठलेश धाम आज | Shriviththalesh Dham Aaj

    Iman · ईमन · Shri Govindrayji Ki Badhai · श्री गोविंदरायजी की बधाई

    श्रीविठ्ठलेश धाम आज अतिही सुहायो ॥ रानी श्रीरुक्मिणीने गोविंद सुत जायो ॥१॥ पायो अति दुर्लभ फल देख मा

  23. श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई | Shriviththalnathke Bajat Badhai

    Devagandhar · देवगंधार · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई

    श्रीविठ्ठलनाथके बजत बधाई ॥ अश्विन वदी तेरसकों प्रकटे श्रीबालकृष्ण सुखदाई ॥१॥ वीर्यरूप महा कीयो पराक्

  24. श्रीविठ्ठलेश धाम आज | Shriviththalesh Dham Aaj

    Sarang · सारंग · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई

    श्रीविठ्ठलेश धाम आज प्रकट भये वीर्य रूप श्रीबालकृष्ण अति अनूप तीजे सुतमाई ॥ गावत चहुँदिश बधाई झूंडन

  25. भयो श्रीविट्ठलके मनमोद | Bhayo Shriviththalke Manmod

    Sarang · सारंग · Shri Balkrishnaji Ki Badhai · श्रीबालकृष्णजी की बधाई

    भयो श्रीविट्ठलके मनमोद ॥ पूरण ब्रह्म श्रीबालकृष्ण प्रभु धायलिये जब गोद ॥१॥ वारंवार विधु वदन बिलोकत फ