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देख सखी मोहनमदन | Dekh Sakhi Mohanmadana
Pancham · पंचम · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी
देख सखी मोहनमदन गोपाल ।। वाघो घेरदार शिर पगिया पहेरें मोजा लाल ।।१।। पचरंग कवाय छीटकी फरगुल उर धरें
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तरणि तनया तीर | Tarani Tanaya Tir
Bibhas · बिभास · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
तरणि तनया तीर आवतहें प्रातसमें गेंद खेलत देख्योरी आनंदो कंदवा ।। काछिनी किंकणी कटि पीतांबर कस बांधे
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गिरिधर गेंद मांगत | Giridhar Gend Mangat
Lalit · ललित · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
गिरिधर गेंद मांगत आय । सेजतें उठ झांकत इत उत बैठे जहां नंदराय ।।१।। मधुर वानी सुन सयानी आई रोहिनी धा
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कहत नंदरानी गोपालसों | Kahat Nandrani Gopalsom
Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
कहत नंदरानी गोपालसों तातकों बुलाय लावो बडो परव उत्तरायन ।। द्विजनकों दान देंहो अशीश वचन पढेहों खेलन
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बोल पठाई श्यामपे | Bol Pathai Shyampe
Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
बोल पठाई श्यामपे जसोदा रोहिनी कीयो सनमान ।। अपनो परिकर सबे बुलावो मकरसंक्रांति बडो परव जान ।।१।। रीझ
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खेले सांवरो गोपाल | Khele Sanvaro Gopal
Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
खेले सांवरो गोपाल गोप कुंवर के साथ गेंदुक चलाय अवनी लिये सुहाग। लीजो रे लीजो रे बोलत भांवते अनुराग ॥
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गोपाल माई खेलत | Gopal Mai Khelat
Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
गोपाल माई खेलत हें चोगान ॥ व्रज कुमार बालक संग लीने वृन्दावन मैदान ॥१॥ चंचल बाजि नचावत आवत होड लगावत
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गोपी नेनसों नेन | Gopi Nainasom Nain
Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar · संक्रांति मकर
गोपी नेनसों नेन मिलावत ॥ मदन गोपाल छांड ग्वालनसों सन्मुख गेंद चलावत ॥१॥ लेय उठाय राधिका तिहिछिन गोपी
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भयो नंदरायके घर | Bhayo Nandaraya Ke Ghar
Pancham · पंचम · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
भयो नंदरायके घर खीच ॥ सब गोकुलके लरकन के संग बेठे हें आये बीच ॥१॥ परोस थार धरे ले आगें सद्य मांखन घ
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जानि परव संक्रांति | Jani Parav Sankranti
Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
जानि परव संक्रांति नंद-घर गर्गादिक मिलि आये हो । देखि तहां व्रजराज मुदित मन भीतर भवन बुलाये हो ॥१॥ द
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मात जसोदा परव | Mat Jasoda Parav
Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
मात जसोदा परव मनावे ॥ भोगीके दिन तिल लडुवा ले लाडिले लालनकोंजु जिमावे ॥१॥ गोद बेठाय निहारत सुत मुख न
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बैठे व्रजराज गोद | Baithe Vrajaraj God
Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
बैठे व्रजराज गोद मोद सों गोपाललाल देत द्विजजन कों दान । व्रजवधू मङ्गल थाल साजि कर मे लिये गावत सुघर
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भोजन कीजे जननी | Bhojan Kije Janani
Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
भोजन कीजे जननी सुखदाई । ओदन खोचरी सुरुचिसों लीजे सांवरे कुंवर कन्हाई ॥१॥ पापर सरस सधानोपूरी रोटीबरी
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लाल कछु कीजे | Lal Kachhu Kije
Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन
लाल कछु कीजे भोजन तिलतिल कारी हों वारी हो। अब जाय बेठो दोऊ भैया नंदबाबाकी थारीहो ॥१॥ कहियतहे आज संक्
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जमुनाके तीर कान्ह | Jamunake Tir Kanh
Hamir · हमीर · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग
जमुनाके तीर कान्ह चंग उडाय छबीसों रमैया ॥ हों जमुना जल भरन गईरी ओचक दृष्टि पर गई दैया ॥१॥ अँचन तनक म
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कान्ह अटा चढि | Kanh Ata Chadhi
Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग
कान्ह अटा चढि चंग उडावत हों अपुने आंगन हू ते हेरो। लोचन चार भये नंदनंदन काम कटाक्ष भयो भटु मेरो ॥१॥
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कान्ह अटा पर | Kanh Ata Par
Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग
कान्ह अटा पर चंग उडावत मैं इतने उत आंगन हेर्यो । नैन भये विभिचारी नारायन भाजत लाज किधों भट मेरो ॥१॥
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उडी उडावन लागे | Udi Udavan Lage
Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग
उडी उडावन लागे लाल । सुंदर पथक बांध मनमोहन बाजत मोरनके ताल ॥१॥ काऊ पकरत कोऊ एंचत कोऊ देखत नैन विशाल
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सुंदर बदनरी सुख | Sundar Badanari Sukh
Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग
सुंदर बदनरी सुख सदन श्यामको निरखि नेन मन थाक्यो ॥ हो ठाडी विथन व्हे निकस्यो उझकि झरोका झांक्यो ॥१॥ ल
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आज बधायो मंगलचार | Aaj Badhayo Mangalachar
Sarang · सारंग · Shri Harsaniji Ki Badhai · श्री हरसानीजी की बधाई
आज बधायो मंगलचार ॥ माघ मास शुक्ल चौथ हे हस्त नक्षत्र रविवार ॥१॥ प्रेम सुधा सागर रस प्रगट्यो आनंद बढ़
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प्रगटे भक्त शिरोमणीराई | Pragate Bhakta Shiromanirai
Sarang · सारंग · Shri Harsaniji Ki Badhai · श्री हरसानीजी की बधाई
प्रगटे भक्त शिरोमणीराई ॥ माघ मास शुक्ल चौथ अधिक लोक निधि आई ॥१॥ दैवी जीवके भाग्य उदय भये जिन यह दर्श
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आवत ललन पिया | Aavat Lalan Piya
Ramakali · रामकली · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन
आवत ललन पिया रस भीने ॥ शिथिल अंग डगमगात चरणगति मोतिनहार उरचीने ॥१॥ पारिजात मंदारमाल लपटात मधुप मधुपी
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आवत कुंजनतें पोंहोपीरी | Aavat Kunjantem Pohopiri
Ramakali · रामकली · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन
आवत कुंजनतें पोंहोपीरी ॥ पिय अलसात जूंभात रसभरे ललन खवावत बीरी ॥१॥ सुरत शिथिल अंगअंग शिथिल अति भुजभर
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चार पहेर रसरंगभरे | Char Paher Rasarangabhare
Kaphi · काफी · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन
चार पहेर रसरंगभरे रंगभीनेहो ॥ अरुन नेन अतिरसमसे लाल रंगभीनेहो ॥१॥ अधरन रंग लागत फीको लाल रंगभीनेहो ॥
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रसिक शिरोमनि नंदलाल | Rasik Shiromani Nandalal
Kaphi · काफी · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन
रसिक शिरोमनि नंदलाल रंगभीनेहो ॥ लाड लडयाये नवल बाल लाल रंगभीनेहो ॥१॥ भले मनाये भूरि भाग रंगभीनेहो ॥