Pushti Kirtan

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  1. देख सखी मोहनमदन | Dekh Sakhi Mohanmadana

    Pancham · पंचम · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी

    देख सखी मोहनमदन गोपाल ।। वाघो घेरदार शिर पगिया पहेरें मोजा लाल ।।१।। पचरंग कवाय छीटकी फरगुल उर धरें

  2. तरणि तनया तीर | Tarani Tanaya Tir

    Bibhas · बिभास · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    तरणि तनया तीर आवतहें प्रातसमें गेंद खेलत देख्योरी आनंदो कंदवा ।। काछिनी किंकणी कटि पीतांबर कस बांधे

  3. गिरिधर गेंद मांगत | Giridhar Gend Mangat

    Lalit · ललित · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    गिरिधर गेंद मांगत आय । सेजतें उठ झांकत इत उत बैठे जहां नंदराय ।।१।। मधुर वानी सुन सयानी आई रोहिनी धा

  4. कहत नंदरानी गोपालसों | Kahat Nandrani Gopalsom

    Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    कहत नंदरानी गोपालसों तातकों बुलाय लावो बडो परव उत्तरायन ।। द्विजनकों दान देंहो अशीश वचन पढेहों खेलन

  5. बोल पठाई श्यामपे | Bol Pathai Shyampe

    Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    बोल पठाई श्यामपे जसोदा रोहिनी कीयो सनमान ।। अपनो परिकर सबे बुलावो मकरसंक्रांति बडो परव जान ।।१।। रीझ

  6. खेले सांवरो गोपाल | Khele Sanvaro Gopal

    Pancham · पंचम · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    खेले सांवरो गोपाल गोप कुंवर के साथ गेंदुक चलाय अवनी लिये सुहाग। लीजो रे लीजो रे बोलत भांवते अनुराग ॥

  7. गोपाल माई खेलत | Gopal Mai Khelat

    Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    गोपाल माई खेलत हें चोगान ॥ व्रज कुमार बालक संग लीने वृन्दावन मैदान ॥१॥ चंचल बाजि नचावत आवत होड लगावत

  8. गोपी नेनसों नेन | Gopi Nainasom Nain

    Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar · संक्रांति मकर

    गोपी नेनसों नेन मिलावत ॥ मदन गोपाल छांड ग्वालनसों सन्मुख गेंद चलावत ॥१॥ लेय उठाय राधिका तिहिछिन गोपी

  9. भयो नंदरायके घर | Bhayo Nandaraya Ke Ghar

    Pancham · पंचम · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    भयो नंदरायके घर खीच ॥ सब गोकुलके लरकन के संग बेठे हें आये बीच ॥१॥ परोस थार धरे ले आगें सद्य मांखन घ

  10. जानि परव संक्रांति | Jani Parav Sankranti

    Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    जानि परव संक्रांति नंद-घर गर्गादिक मिलि आये हो । देखि तहां व्रजराज मुदित मन भीतर भवन बुलाये हो ॥१॥ द

  11. मात जसोदा परव | Mat Jasoda Parav

    Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    मात जसोदा परव मनावे ॥ भोगीके दिन तिल लडुवा ले लाडिले लालनकोंजु जिमावे ॥१॥ गोद बेठाय निहारत सुत मुख न

  12. बैठे व्रजराज गोद | Baithe Vrajaraj God

    Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    बैठे व्रजराज गोद मोद सों गोपाललाल देत द्विजजन कों दान । व्रजवधू मङ्गल थाल साजि कर मे लिये गावत सुघर

  13. भोजन कीजे जननी | Bhojan Kije Janani

    Asavari · आसावरी · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    भोजन कीजे जननी सुखदाई । ओदन खोचरी सुरुचिसों लीजे सांवरे कुंवर कन्हाई ॥१॥ पापर सरस सधानोपूरी रोटीबरी

  14. लाल कछु कीजे | Lal Kachhu Kije

    Dhanashri · धनाश्री · Sankranti Makar Bhojan · संक्रांति मकर भोजन

    लाल कछु कीजे भोजन तिलतिल कारी हों वारी हो। अब जाय बेठो दोऊ भैया नंदबाबाकी थारीहो ॥१॥ कहियतहे आज संक्

  15. जमुनाके तीर कान्ह | Jamunake Tir Kanh

    Hamir · हमीर · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग

    जमुनाके तीर कान्ह चंग उडाय छबीसों रमैया ॥ हों जमुना जल भरन गईरी ओचक दृष्टि पर गई दैया ॥१॥ अँचन तनक म

  16. कान्ह अटा चढि | Kanh Ata Chadhi

    Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग

    कान्ह अटा चढि चंग उडावत हों अपुने आंगन हू ते हेरो। लोचन चार भये नंदनंदन काम कटाक्ष भयो भटु मेरो ॥१॥

  17. कान्ह अटा पर | Kanh Ata Par

    Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग

    कान्ह अटा पर चंग उडावत मैं इतने उत आंगन हेर्यो । नैन भये विभिचारी नारायन भाजत लाज किधों भट मेरो ॥१॥

  18. उडी उडावन लागे | Udi Udavan Lage

    Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग

    उडी उडावन लागे लाल । सुंदर पथक बांध मनमोहन बाजत मोरनके ताल ॥१॥ काऊ पकरत कोऊ एंचत कोऊ देखत नैन विशाल

  19. सुंदर बदनरी सुख | Sundar Badanari Sukh

    Adano · अडानो · Sankranti Patang · संक्रांति पतंग

    सुंदर बदनरी सुख सदन श्यामको निरखि नेन मन थाक्यो ॥ हो ठाडी विथन व्हे निकस्यो उझकि झरोका झांक्यो ॥१॥ ल

  20. आज बधायो मंगलचार | Aaj Badhayo Mangalachar

    Sarang · सारंग · Shri Harsaniji Ki Badhai · श्री हरसानीजी की बधाई

    आज बधायो मंगलचार ॥ माघ मास शुक्ल चौथ हे हस्त नक्षत्र रविवार ॥१॥ प्रेम सुधा सागर रस प्रगट्यो आनंद बढ़

  21. प्रगटे भक्त शिरोमणीराई | Pragate Bhakta Shiromanirai

    Sarang · सारंग · Shri Harsaniji Ki Badhai · श्री हरसानीजी की बधाई

    प्रगटे भक्त शिरोमणीराई ॥ माघ मास शुक्ल चौथ अधिक लोक निधि आई ॥१॥ दैवी जीवके भाग्य उदय भये जिन यह दर्श

  22. आवत ललन पिया | Aavat Lalan Piya

    Ramakali · रामकली · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन

    आवत ललन पिया रस भीने ॥ शिथिल अंग डगमगात चरणगति मोतिनहार उरचीने ॥१॥ पारिजात मंदारमाल लपटात मधुप मधुपी

  23. आवत कुंजनतें पोंहोपीरी | Aavat Kunjantem Pohopiri

    Ramakali · रामकली · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन

    आवत कुंजनतें पोंहोपीरी ॥ पिय अलसात जूंभात रसभरे ललन खवावत बीरी ॥१॥ सुरत शिथिल अंगअंग शिथिल अति भुजभर

  24. चार पहेर रसरंगभरे | Char Paher Rasarangabhare

    Kaphi · काफी · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन

    चार पहेर रसरंगभरे रंगभीनेहो ॥ अरुन नेन अतिरसमसे लाल रंगभीनेहो ॥१॥ अधरन रंग लागत फीको लाल रंगभीनेहो ॥

  25. रसिक शिरोमनि नंदलाल | Rasik Shiromani Nandalal

    Kaphi · काफी · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन

    रसिक शिरोमनि नंदलाल रंगभीनेहो ॥ लाड लडयाये नवल बाल लाल रंगभीनेहो ॥१॥ भले मनाये भूरि भाग रंगभीनेहो ॥