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जहां गोपाल तहां जुरे | Jahan Gopal Tahan Jure
Malhar · मल्हार · Malhar Chhak Ke Pad · मल्हार - छाक के पद
जहां गोपाल तहां जुरे सब सब ग्वाल ॥ पनवारे अपने ले उठ धाये तिहिं काल ॥१ भोजन सब निकी विध किनो पातर सज
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श्याम चल कुंजनमें आये | Shyam Chal Kunjanmen Aye
Malhar · मल्हार · Malhar Chhak Ke Pad · मल्हार - छाक के पद
श्याम चल कुंजनमें आये दौर ॥ ऊँचे चढि टेरत ग्वालनकों आवो सबेमेरी ओर ॥१॥ गायन टेर दइ बलदाउन चोंकि चमकि
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बिराजत सघन कुंजकी ओट | Birajat Saghan Kunjki Ot
Malhar · मल्हार · Malhar Chhak Ke Pad · मल्हार - छाक के पद
बिराजत सघन कुंजकी ओट ॥ इत जेंवत मंडल मध्य माधो उठे मेघके कोट ॥१॥ न्हेनी न्हेनी बुंदन वरखन लाग्यो रुच
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कदम-तर भली भाँति | Kadam-Tar Bhali Bhanti
Malhar · मल्हार · Malhar Bhog Sarayave · मल्हार भोग सरवे
कदम-तर भली भाँति भयो भोजन । हलधर कहत करौ अब अचबन गैयाँ भूली जोजन ॥ जो भावै सो और कछु लैहौ करत सखा सब
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भोजन भयो लाल नीकी | Bhojan Bhayo Lal Niki
Malhar · मल्हार · Malhar Bhog Sarayave · मल्हार भोग सरवे
भोजन भयो लाल नीकी विधसों सदन कुंजकी मांह ॥ गरज गरज घन बरस्यो प्रबल अति कछु हम जान्यो नांह ॥१॥ कर अचव
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आज हरि जेवत अति | Aj Hari Jevat Ati
Malhar · मल्हार · Malhar Bhog Sarayave · मल्हार भोग सरवे
आज हरि जेवत अति सुख दिनो ॥ बरखत मेह नेह उपजावत रुचि रुचि भोजन कीनो । बिछरी धेनु करो एकठो रे तब हरि अ
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बरज बरज हारे बरजत | Baraj Baraj Hare Barajat
Malhar · मल्हार · Malhar Bhog Sarayave · मल्हार भोग सरवे
बरज बरज हारे बरजत डारें जूठन मांझ बिंजन भयो भोजन हरि ॥ नीके सब लीए अघाई कोरन मुख दीयो जाई जमुनादिक प
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भयो भोजन करत लाल | Bhayo Bhojan Karat Lal
Malhar · मल्हार · Malhar Bhog Sarayave · मल्हार भोग सरवे
भयो भोजन करत लाल अचवन जबें ॥ अति ही अघाय भए सुर मंडल सहित सखा संग ग्वाल करि पान आए सबें ॥१॥ करत बलिह
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पान मुख बीरी राची | Pan Mukh Biri Rachi
Malhar · मल्हार · Malhar Biri Khavay · मल्हार बीरी खवाय
पान मुख बीरी राची हरिकें रंग सुरंगे ॥ एसी कृपा सदा हम उपर टारी जिन तुम संगे ॥१॥ हरि हम तुम बिन कोन क
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बीरी सुबल श्याम कों | Biri Subal Shyam Kon
Malhar · मल्हार · Malhar Biri Khavay · मल्हार बीरी खवाय
बीरी सुबल श्याम कों देत ॥ श्याम सखा ग्वालन को बांटत उपजावत अति हेत ॥१॥ बरखा बरखत तें सब बिडरी गायन क
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अधर रंग राख्यो अरुन | Adhar Rang Rakhyo Arun
Malhar · मल्हार · Malhar Biri Khavay · मल्हार बीरी खवाय
अधर रंग राख्यो अरुन अति प्रेम प्रीतके पान हरत मन बीडा ॥ यह सुख रास व्रजवास नंदलाल संग नित गो चारन नि
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हमारे माई स्यामाजूको राज | Hamare Mai Shyamajuko Raj
Malhar · मल्हार · Malhar Rajabhog Darshan · मल्हार राजभोग
हमारे माई स्यामाजूको राज ॥ जाके आधीन सदाही सांवरो या व्रजको शिरताज ॥१॥ यह जोरी अविचल श्रीवृन्दावन नह
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यह ऋतु आई वर्षन | Yah Ritu Ai Varshan
Malhar · मल्हार · Malhar Rajabhog Darshan · मल्हार राजभोग
यह ऋतु आई वर्षन पियविन हीयरा धरकें ॥ घनकी गरज ओर लरज मोरनकी सुनसुन छतियां दरकें ॥१॥ कोन भांत करूँ के
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कोऊमाई केसेंहीजो कहो | Koumai Kesenhijo Kaho
Malhar · मल्हार · Malhar Rajabhog Darshan · मल्हार राजभोग
कोऊमाई केसेंहीजो कहो ॥ नवरंग गिरिधरलाल लाडिलो मम कुचबीच रहो ॥१॥ जेनहीं जानत मरम हिलगकी अपनीदेहदहो ॥
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सखी अब मोपें रह्यो | Sakhi Ab Mopen Rahyo
Malhar · मल्हार · Malhar Rajabhog Darshan · मल्हार राजभोग
सखी अब मोपें रह्यो न जाय ॥ चलिरी मिल उनहीपें जैये जहां चरावत गाय ॥१॥ अंगअंगकी सब सुधि भूली देखत नंदक
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एसेमाई चहुँदिश तें घनघोरें | Esemayi Chahundish Ten Ghanaghoren
Malhar · मल्हार · Malhar Rajabhog Darshan · मल्हार राजभोग
एसेमाई चहुँदिश तें घनघोरें ॥ मानों मत्त मदनकेहाथी बलकर बंधन तोरें ॥१॥ श्याम अंगपर चूँबत गंडमद वरखत थ
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लालमाई भीजत आये गेह | Lalamai Bhijat Aye Geh
Malhar · मल्हार · Malhar Sandhya Aarti · मल्हार संध्या आरती
लालमाई भीजत आये गेह ।। पीत दुमालो अधि बिराजत कलगी अधिक स्नेह ।।१।। गरजत गगन मृदंग बजावत पवन झकोरत मे
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सखीरी अब क्यों न | Sakhiri Ab Kyon Na
Malhar · मल्हार · Malhar Sandhya Aarti · मल्हार संध्या आरती
सखीरी अब क्यों न बरखत मेह ।। जोलों पीय आवें बनतें घर तोलों वीचनेकदेह ।।१।। नातर मोहि ले चलि भीजतही छ
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देख बदरिया सावनकी | Dekh Badariya Savanki
Malhar · मल्हार · Malhar Sandhya Aarti · मल्हार संध्या आरती
देख बदरिया सावनकी ।। इकटक व्है ठाडी मगजोवत मनमोहनके आवनकी ।।१।। दामिनि दमक घन गरजन लाग्यो मंदमंद वरष
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लाडिलो लड्याय बुलावत धेनु | Ladilo Ladyay Bulavat Dhenu
Malhar · मल्हार · Malhar Sandhya Aarti · मल्हार संध्या आरती
लाडिलो लड्याय बुलावत धेनु ।। चढ कदंब धूमर धौरी काजर पीयरी पूरत मधुर स्वरवेनु ।। चुचकारत पोंछत सुंदर
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माधो भलो बन्यो आवेहो | Madho Bhalo Banyo Aveho
Malhar · मल्हार · Malhar Sandhya Aarti · मल्हार संध्या आरती
माधो भलो बन्यो आवेहो ।। देखत जिय भावे हो ।।ध्रु०।। मोर पंखके चंदुवा नीके माथे बांधलिये ।। गुंजा फलके
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ब्यारु करत करकोर धरत | Byaru Karat Karakor Dharat
Malhar · मल्हार · Malhar Byaru · मल्हार ब्यारु
ब्यारु करत करकोर धरत मुख सुख उपजत कछु स्वाद अधिक अत । गरज गरज बरखत बडी बूंदन दामिनी दमकत चाहे रहत जि
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ब्यारु करत बलराम श्याम | Byaru Karat Balaram Shyam
Malhar · मल्हार · Malhar Byaru · मल्हार ब्यारु
ब्यारु करत बलराम श्याम जैसी घटा श्याम सुख श्याम देखत मन । पलक ओट अकुलात आरत अत तज न सकत एको घडी पल छ
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अधर रंग राख्यो अरुन | Adhar Rang Rakhyo Arun
Malhar · मल्हार · Malhar Byaru · मल्हार ब्यारु
अधर रंग राख्यो अरुन अति प्रेम प्रीतके पान हरत मन वीरा। यह सुखरास व्रजदास नंदलाल संग हित गौचारन हित व
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वरषा ऊदीत भई ऋतु | Varsha Udit Bhai Ritu
Malhar · मल्हार · Malhar Byaru · मल्हार ब्यारु
वरषा ऊदीत भई ऋतु मान ॥ संध्या समय ब्यारु की बीरीयां कित डोलत है कान्ह ॥१॥ नंद बाबा बैठें मग जोवत प्र