Vrishabhan Kunvari Radha
वृषभान कुंवरी राधा
वृषभान कुंवरी राधा नामिनी । प्रगटी है मंगल मनी ब्रज जीवनकी प्राण संजीवनी अद्भुत अभिरामिनी ॥१॥ ब्रजदेवी सुरनर मुनि सेवी...
Raag
Read 18 Pushtimargiya kirtans in Kedaro · केदारो with original Braj Bhasha text and English meanings.
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वृषभान कुंवरी राधा
वृषभान कुंवरी राधा नामिनी । प्रगटी है मंगल मनी ब्रज जीवनकी प्राण संजीवनी अद्भुत अभिरामिनी ॥१॥ ब्रजदेवी सुरनर मुनि सेवी...
बेग चलि साजि
बेग चलि साजि दल चतुर चंद्रावली । कसब कंचुकी बंद राखि आनन्दकन्द नंदनंदनकुंवर मिलन को दावरी ॥१॥ नैन पंकज लोल मधुर मोहन बो...
शरद उजियारी कैसी
शरद उजियारी कैसी नीकी लागै निकस कुंजतें ठाढ़े ॥ बरन बरन फूल फूलनके आभूषण सोंधे भींजे बागे ॥१॥ गावत राग रागिनिसों मिलि म...
कुंजभवनमें मंगलचार
कुंजभवनमें मंगलचार ॥ नव दुलहनि वृषभान नंदिनी दुल्हे श्रीव्रजराज कुमार ॥१॥ नयेनये पुष्प कुंजके तोरन नवपल्लवकी बंदनवार ॥...
प्रकट भये सुवन
प्रकट भये सुवन विट्ठलेशके आज ॥ कूखरानी सुभग रुक्मिणीकी मांझ शशिवदन यदुनाथ सकल शिरताज ॥१॥ बढ्यो आनंद चहुं ओर दश दिशनमें...
झूलत नव रंग संग
झूलत नव रंग संग राधिका गिरिधरनचन्द सहचरी दुहुं ओर ठाडी आनंद भर गावें ॥ सप्तस्वरन रागरंग झपताल मिली मृदंग उघटत वर सुघर त...
सोतु राखलेरी झोटा तरण
सोतु राखलेरी झोटा तरण भये ॥ इत नवकुंज द्वार कदंब परस जात उत यमुनालों गये ॥१ ॥ आवत जात लपटात लतनसों ताऊपर द्रुम फूलछये ॥...
झूलत दोऊ कुंजकुटीर
झूलत दोऊ कुंजकुटीर ॥ कंचन खंभ हिंडोरें बिराजत तरणि तनयातीर ॥१॥ मुकुलित कुसुम मल्लिका प्रफुल्लित रुचि दायक तहां वहत समीर...
लालमुनिनके झुंडन झूलन आईं
लालमुनिनके झुंडन झूलन आईं एहो हिंडोरें ॥ एक रंग सरस कसुंभी सारी पहेरें कंचुकी सोंधे बोरें ॥१॥ सबे एक वेष वे छूटी दामिनि...
नवल लालके संग झूलन
नवल लालके संग झूलन आईं एहो हिंडोरें ॥ लटपटात पाटकी चुंनरि बदलपरी कछुभोरें ॥१॥ सगबगात गिरिधर पियके संग बतियां कहत थोरें...
आज वृषभानकी ललीके वदन
आज वृषभानकी ललीके वदन पर दूनी छबि रही फबि ॥ यशोदाको लाल वीर सहोद्राको राखी बांधि झुलतहें अति बाढी छबि ॥१॥ चहूं ओर झोटाद...
हिंडोरे माई झुले श्रीविट्टुलनाथ
हिंडोरे माई झुले श्रीविठ्ठलनाथ। सब भक्तन मिल प्रेम झुलावत आनंद उर न समात ॥१॥ श्रीगिरिधर गोविंद संग झूलत श्री बालकृष्ण न...
आज में देखे
आज में देखे आलीरी सो दोऊ मिल पोढे बातें करत ॥ वदननिहारत परस कपोलन हँसहँस आंको भरत ॥१॥ कबहुक रतिकी सुरत भईरी जीयमनो एक ल...
पोढेमाई ललन
पोढेमाई ललन सेज सुखकारी ॥ मणिगण खचित रंगमहल में संग श्रीराधाप्यारी ॥१॥ सहचरी गानकरत मधुरेस्वर श्रवणसुनत सुरत हितकारी ॥...
सखियन रुचिरुचि
सखियन रुचिरुचि सेज बनाई ॥ रंगमहलमें पेरेहें परदा धरी अंगीठी सुखदाई ॥१॥ सीतसमें ग्रीष्म ऋतुकीनी अतिसुंदर वरराई ॥ श्रीविट...
सोवत नींद आय
सोवत नींद आय गई स्यामहीं ॥ महरि उठ पोढाय दुहनको आपन लगी गृहकामही ॥१॥ वरजतहें घर के लोगनकों हरी ये लेले नामही ॥ गाढेबोल...
देखत नंदकान्ह
देखत नंदकान्ह अतिसोवत ॥ भूखेभये आप वन भीतर यह कहि कहि मुख जोवत ॥१॥ कह्यो नहीं मानत काहूको आप हठीले दोऊ वीर ॥ वारवार तन...
जाग उठे तब
जाग उठे तब कुंवर कन्हाई ॥ मैया कहांगई मो ढिंगते संगसोवत जान्यो बलभाई ॥१॥ जागे नंद यशोदा जागी बोललिये हरिपास ॥ सोवत झिझक...