Pushti Kirtan

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  1. निशदिन श्रीवल्लभगुण गायो | Nishadin Shrivallabhagun Gayo

    Bihag · बिहाग · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद

    निशदिन श्रीवल्लभगुण गायो ॥ भक्तकमल प्रकाशित कर निजजनहि सुधा पिवायो ॥१॥ ज्ञानयोग वैराग्य जपतप अन्य भज

  2. जय श्रीवल्लभ चरणकमल | Jay Shrivallabh Charanakamal

    Bihag · बिहाग · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद

    जय श्रीवल्लभ चरणकमल शिर नाइये ॥ परमानंद साकार शशि शरदमुख मधुरी बानी भक्तजनन संग गाइये ॥१॥ राजतमछांमध

  3. श्रीगोवर्धनवासी सांवरे लाल | Shrigovardhanavasi Sanvare Lal

    Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद

    श्रीगोवर्धनवासी सांवरे लाल तुमबिन रह्यो नजाय हो ॥ व्रजराज लडेंते लाडिले ॥ध्रु.॥ बंकचिते मुसिकायकें ल

  4. मुरली धुनि भईवनमें | Murali Dhuni Bhaiavanamen

    Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद

    मुरली धुनि भईवनमें आछो बन्योहै बिहारी लालहो ॥ अपने धामते सुन निकसी मिल उमगचली व्रजबालहो ॥१॥ एकतरुणी

  5. यशुमति सुत मोहि | Yashumati Sut Mohi

    Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद

    यशुमति सुत मोहि दीजें दरसन ॥ तनमन प्राणतपतहैं निशदिन छिन एक होत बराबर वरसन ॥१॥ सियरो होंतों पहलें हृ

  6. चरणशरण व्रजराजकुंवरके | Charanasharan Vrajarajakunvarake

    Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद

    चरणशरण व्रजराजकुंवरके ॥ हम विधि अविधि कछू नहिं समझत रहत भरोसे श्रीमुरलीधरके ॥१॥ रहत आसरें व्रजमंडलमे

  7. गिरिधरलाल शरण तेरे | Giridharalal Sharan Tere

    Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद

    गिरिधरलाल शरण तेरे आयो शरण तेरे आयो महापद पायो ॥ चरणकमलकी सेवादीजे चेरो कर राखो घरजायो ॥१॥ बलछल बांध

  8. मनरे तू भूल्यो | Manare Tu Bhulyo

    Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद

    मनरे तू भूल्यो जन्म गमावे ॥ खबर न परी तोको सिरऊपर काल सदा मंडरावे ॥१॥ खानपान अटक्यो निशिवासर जिभ्याल

  9. बिन गोपाल नहीं कोई अपुनो | Bin Gopal Nahin Koi Apuno

    Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद

    बिन गोपाल नहीं कोई अपुनो ॥ कौन पितामाता सुतघरनी यह सब जगत रैनको सपनो ॥१॥ धनकारन निसदिन जग भटकत वृथा

  10. सब दिन होत | Sab Din Hot

    Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद

    सब दिन होत न एक समान ॥ प्रगटतहै पूरव की करनी तजमन सोच अज्ञान ॥१॥ कबहुँक राजाहरिश्चंद्र गृहसंपति मेरु

  11. देखो दुर्मति यह संसारकी | Dekho Durmati Yaha Sansarki

    Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद

    देखो दुर्मति यह संसारकी ॥ हरिसो हीराछांडि हाथतें बांधत पोट विकारकी ॥१॥ झूठे सुखमें भूलरहेहैं सुधविसर

  12. भजन बिन जीवत | Bhajan Bin Jivat

    Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद

    भजन बिन जीवत जैसें प्रेत ॥ मनमलीन घरघर प्रति डोलत उदर भरनके हेत ॥१॥ कबहूँ पावत पापको पैसा गाड धूरमें

  13. जो रस रसिक | Jo Ras Rasik

    Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद

    जो रस रसिक कीर मुनि गायो ॥ सो रस रटत रहत निशिवासर शेष सहस्रमुख पार न पायो ॥१॥ गावत शिव शारद मुनि नार

  14. जाके मन बसे | Jake Man Base

    Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद

    जाके मन बसे स्यामघन माधो ॥ सो सुंदर सोधनीदक्ष सोई सोई कुलीन सोई साधो ॥१॥ सो पंडित सोगुणपुंज सोई जो ग

  15. कमल नयन कमलापति | Kamal Nayan Kamalapati

    Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद

    कमल नयन कमलापति त्रिभुवन के नाथ ॥ एक प्रेमतें सबबने जो मन होवे हाथ ॥१॥ सकल लोककी संपदा ले आगें धरिये

  16. जापर कमलकांत ढरे | Japar Kamalakant Dhare

    Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद

    जापर कमलकांत ढरै ॥ लकरी घासको बेचनहारो तासिर छत्र-धरै ॥१॥ विद्यानाथ अविद्या समरथ जो कछु चाहे सोई करै

  17. दास अनन्य मेरो | Das Ananya Mero

    Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद

    दास अनन्य मेरो निजरूप ॥ दर्शनमात्र ताप त्रय नासत छुडावै गृहबंधन कूप ॥१॥ मेरीबांधी भक्तछुडावें भक्तकी

  18. हरिरस तबहीं तो | Hariras Tabahin To

    Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    हरिरस तबहीं तो जाय पैये ॥ स्वाद विवाद हर्ष आतुरता इतने दंडजो सहिये ॥१॥ कोमलवचन दीनता सबसों सदां प्रफ

  19. लगेजो श्रीवृंदावनको रंग | Lagejo Shrivrindavanako Rang

    Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    लगेजो श्रीवृंदावनको रंग ॥ मनके मैल सबे छुट जैहे अरु विषयनकों संग ॥१॥ राधावर सेवत अरु सुमरत उपजत लहर

  20. जोलों हरि अपुनपो | Jolon Hari Apunapo

    Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    जोलों हरि अपुनपो न जनावे ॥ तोलों सकलसिद्धान्त मारगको पढ़ें सुनें नहिं आवे ॥१॥ सुनब्रह्मा नारायण मुखत

  21. रे मन चिंता | Re Man Chinta

    Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    रे मन चिंता न कर पेटकी ॥ हलन चलन यामें कछुनाहिन कलम लिखीजो ठेटकी ॥१॥ जीवजंतु जेते जलथलके तिन निधि कह

  22. तुम तज कौन | Tum Taj Kaun

    Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    तुम तज कौन सनेही कीजे ॥ सदा एकरसको निबहतहै जाकी चरणरज लीजे ॥१॥ यह नहोय अपनी जननीते पिताकरत नहीं ऐसी

  23. दृढ इन चरणन | Dridh In Charanan

    Sarang · सारंग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद

    दृढ इन चरणन केरो भरोसो ॥ श्रीवल्लभनख चंद्रछटाबिन सब जग मांझ अंधेरो ॥१॥ साधन और नहीं या कलिमें जासों

  24. सब ग्वाल नाचें गोपी गावै | Sab Gwalan Nache Gopi Gave

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Janmashtami Ki Badhai · श्री कृष्णा जन्माष्टमी की बधाई

    सब ग्वाल नाचें गोपी गावै । प्रेम मगन कछु कहत न आवै ॥१॥ हमारे राय घर ढोटा जायौ । सुनि सब लोक बधाये आय

  25. आगम अषाढी मेह | Agam Ashadi Meh

    Malhar · मल्हार · Malhar Shayan Darshan · मल्हार शयन दर्शन

    आगम अषाढी मेह बरसे हरियारी भोम चंद वधु सेन सुख हिमत बढाई है। दामिनी बली नानाल गरज तुरंग पौन मोरउ नवा