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निशदिन श्रीवल्लभगुण गायो | Nishadin Shrivallabhagun Gayo
Bihag · बिहाग · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद
निशदिन श्रीवल्लभगुण गायो ॥ भक्तकमल प्रकाशित कर निजजनहि सुधा पिवायो ॥१॥ ज्ञानयोग वैराग्य जपतप अन्य भज
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जय श्रीवल्लभ चरणकमल | Jay Shrivallabh Charanakamal
Bihag · बिहाग · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद
जय श्रीवल्लभ चरणकमल शिर नाइये ॥ परमानंद साकार शशि शरदमुख मधुरी बानी भक्तजनन संग गाइये ॥१॥ राजतमछांमध
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श्रीगोवर्धनवासी सांवरे लाल | Shrigovardhanavasi Sanvare Lal
Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद
श्रीगोवर्धनवासी सांवरे लाल तुमबिन रह्यो नजाय हो ॥ व्रजराज लडेंते लाडिले ॥ध्रु.॥ बंकचिते मुसिकायकें ल
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मुरली धुनि भईवनमें | Murali Dhuni Bhaiavanamen
Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद
मुरली धुनि भईवनमें आछो बन्योहै बिहारी लालहो ॥ अपने धामते सुन निकसी मिल उमगचली व्रजबालहो ॥१॥ एकतरुणी
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यशुमति सुत मोहि | Yashumati Sut Mohi
Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद
यशुमति सुत मोहि दीजें दरसन ॥ तनमन प्राणतपतहैं निशदिन छिन एक होत बराबर वरसन ॥१॥ सियरो होंतों पहलें हृ
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चरणशरण व्रजराजकुंवरके | Charanasharan Vrajarajakunvarake
Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद
चरणशरण व्रजराजकुंवरके ॥ हम विधि अविधि कछू नहिं समझत रहत भरोसे श्रीमुरलीधरके ॥१॥ रहत आसरें व्रजमंडलमे
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गिरिधरलाल शरण तेरे | Giridharalal Sharan Tere
Gori · गोरी · Nitya Nitya Nem Ke Pad · नित्य नेमके पद
गिरिधरलाल शरण तेरे आयो शरण तेरे आयो महापद पायो ॥ चरणकमलकी सेवादीजे चेरो कर राखो घरजायो ॥१॥ बलछल बांध
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मनरे तू भूल्यो | Manare Tu Bhulyo
Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद
मनरे तू भूल्यो जन्म गमावे ॥ खबर न परी तोको सिरऊपर काल सदा मंडरावे ॥१॥ खानपान अटक्यो निशिवासर जिभ्याल
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बिन गोपाल नहीं कोई अपुनो | Bin Gopal Nahin Koi Apuno
Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद
बिन गोपाल नहीं कोई अपुनो ॥ कौन पितामाता सुतघरनी यह सब जगत रैनको सपनो ॥१॥ धनकारन निसदिन जग भटकत वृथा
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सब दिन होत | Sab Din Hot
Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद
सब दिन होत न एक समान ॥ प्रगटतहै पूरव की करनी तजमन सोच अज्ञान ॥१॥ कबहुँक राजाहरिश्चंद्र गृहसंपति मेरु
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देखो दुर्मति यह संसारकी | Dekho Durmati Yaha Sansarki
Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद
देखो दुर्मति यह संसारकी ॥ हरिसो हीराछांडि हाथतें बांधत पोट विकारकी ॥१॥ झूठे सुखमें भूलरहेहैं सुधविसर
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भजन बिन जीवत | Bhajan Bin Jivat
Bihag · बिहाग · Nitya Vairagya Ke Pad · नित्य वैराग्य के पद
भजन बिन जीवत जैसें प्रेत ॥ मनमलीन घरघर प्रति डोलत उदर भरनके हेत ॥१॥ कबहूँ पावत पापको पैसा गाड धूरमें
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जो रस रसिक | Jo Ras Rasik
Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद
जो रस रसिक कीर मुनि गायो ॥ सो रस रटत रहत निशिवासर शेष सहस्रमुख पार न पायो ॥१॥ गावत शिव शारद मुनि नार
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जाके मन बसे | Jake Man Base
Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद
जाके मन बसे स्यामघन माधो ॥ सो सुंदर सोधनीदक्ष सोई सोई कुलीन सोई साधो ॥१॥ सो पंडित सोगुणपुंज सोई जो ग
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कमल नयन कमलापति | Kamal Nayan Kamalapati
Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद
कमल नयन कमलापति त्रिभुवन के नाथ ॥ एक प्रेमतें सबबने जो मन होवे हाथ ॥१॥ सकल लोककी संपदा ले आगें धरिये
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जापर कमलकांत ढरे | Japar Kamalakant Dhare
Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद
जापर कमलकांत ढरै ॥ लकरी घासको बेचनहारो तासिर छत्र-धरै ॥१॥ विद्यानाथ अविद्या समरथ जो कछु चाहे सोई करै
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दास अनन्य मेरो | Das Ananya Mero
Bihag · बिहाग · Nitya Mahatmay Ke Pad · नित्य माहात्म्य के पद
दास अनन्य मेरो निजरूप ॥ दर्शनमात्र ताप त्रय नासत छुडावै गृहबंधन कूप ॥१॥ मेरीबांधी भक्तछुडावें भक्तकी
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हरिरस तबहीं तो | Hariras Tabahin To
Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
हरिरस तबहीं तो जाय पैये ॥ स्वाद विवाद हर्ष आतुरता इतने दंडजो सहिये ॥१॥ कोमलवचन दीनता सबसों सदां प्रफ
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लगेजो श्रीवृंदावनको रंग | Lagejo Shrivrindavanako Rang
Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
लगेजो श्रीवृंदावनको रंग ॥ मनके मैल सबे छुट जैहे अरु विषयनकों संग ॥१॥ राधावर सेवत अरु सुमरत उपजत लहर
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जोलों हरि अपुनपो | Jolon Hari Apunapo
Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
जोलों हरि अपुनपो न जनावे ॥ तोलों सकलसिद्धान्त मारगको पढ़ें सुनें नहिं आवे ॥१॥ सुनब्रह्मा नारायण मुखत
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रे मन चिंता | Re Man Chinta
Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
रे मन चिंता न कर पेटकी ॥ हलन चलन यामें कछुनाहिन कलम लिखीजो ठेटकी ॥१॥ जीवजंतु जेते जलथलके तिन निधि कह
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तुम तज कौन | Tum Taj Kaun
Bihag · बिहाग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
तुम तज कौन सनेही कीजे ॥ सदा एकरसको निबहतहै जाकी चरणरज लीजे ॥१॥ यह नहोय अपनी जननीते पिताकरत नहीं ऐसी
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दृढ इन चरणन | Dridh In Charanan
Sarang · सारंग · Nitya Ashray Ke Pad · नित्य आश्रय के पद
दृढ इन चरणन केरो भरोसो ॥ श्रीवल्लभनख चंद्रछटाबिन सब जग मांझ अंधेरो ॥१॥ साधन और नहीं या कलिमें जासों
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सब ग्वाल नाचें गोपी गावै | Sab Gwalan Nache Gopi Gave
Sarang · सारंग · Shri Krishna Janmashtami Ki Badhai · श्री कृष्णा जन्माष्टमी की बधाई
सब ग्वाल नाचें गोपी गावै । प्रेम मगन कछु कहत न आवै ॥१॥ हमारे राय घर ढोटा जायौ । सुनि सब लोक बधाये आय
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आगम अषाढी मेह | Agam Ashadi Meh
Malhar · मल्हार · Malhar Shayan Darshan · मल्हार शयन दर्शन
आगम अषाढी मेह बरसे हरियारी भोम चंद वधु सेन सुख हिमत बढाई है। दामिनी बली नानाल गरज तुरंग पौन मोरउ नवा