Pushti Kirtan

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  1. श्री विट्ठलगृह मंगलचार | Shri Vittalagrih Mangalchar

    Bibhas · बिभास · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई

    श्री विट्ठलगृह मंगलचार ॥ माता रुक्मिणी कूखि प्रकट भये श्रीयदुनाथ छठे सकुमार ॥१॥ जयजयकार भयो भुवि उपर

  2. महा सुख छायो | Maha Sukh Chhayo

    Sarang · सारंग · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई

    महा सुख छायो आज सुहायो श्रीविट्ठलेशके ओक ॥ ज्ञानरूप महाप्रभु प्रकट भये श्रीयदुपति या भुवलोक ॥१॥ ध्वज

  3. जयति यदुनाथ व्रज | Jayati Yadunath Vraj

    Sarang · सारंग · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई

    जयति यदुनाथ व्रज सकल पावन करन धीर गंभीर गुन कोन जाने ॥ जयति गोकुल सुभग नित्य रमणीयजे भक्ति एकत्र करि

  4. श्रीविट्ठलनाथके धाम बधाई | Shriviththalnathke Dham Badhai

    Hamir · हमीर · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई

    श्रीविट्ठलनाथके धाम बधाई ॥ ज्ञानरूप प्रकटे श्रीयदुपति छठे सुबन सुखदाई ॥१॥ छठ अमल मधु मास सुखद ऋतु मध

  5. प्रकट भये सुवन | Prakat Bhaye Suvan

    Kedaro · केदारो · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई

    प्रकट भये सुवन विट्ठलेशके आज ॥ कूखरानी सुभग रुक्मिणीकी मांझ शशिवदन यदुनाथ सकल शिरताज ॥१॥ बढ्यो आनंद

  6. प्रकट भये सदन | Prakat Bhaye Sadan

    Khat · खट · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई

    प्रकट भये सदन दुख दवन विट्ठलेशके सातमें सुवन घनश्याम अभिराम ॥ कृष्ण तेरस मास सुभग मार्गशिर्ष नाम मध्

  7. जयति पद्मावती सुवन | Jayati Padmavati Suvan

    Sarang · सारंग · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई

    जयति पद्मावती सुवन विट्ठल तनय नाम घनश्याम मुख चंद्र सरखो ॥ रुचिर अंग अंग बहु सजे भूषण वसन दरस करि ध्

  8. जयति घनश्याम गुण | Jayati Ghanshyam Gun

    Sarang · सारंग · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई

    जयति घनश्याम गुण धाम विश्राम जे वेद विधि विहित व्रत नित्यकारी ॥ भक्ति अनुरागिणी देत निजजननकों तेह प्

  9. जयति घनश्याम रसरूप | Jayati Ghanshyam Rasrup

    Gauri · गौरी · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई

    जयति घनश्याम रसरूप निज देह धरि प्रकट भये आप श्रीवल्लभ कुमार घर ॥ तरण तारण सकल दुख हरण सुख करन विरह अ

  10. जयति घनश्याम वपु | Jayati Ghanshyam Vapu

    Bihagaro · बिहागरो · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई

    जयति घनश्याम वपु प्रकट सप्तम तनय विरह रसरूप विठुलेश निज धाम ॥ बजत बाजे विविध वेणु सुरसों मिले भयो सु

  11. श्री लक्ष्मणसुत गृह | Shri Lakshmansut Grih

    Nat · नट · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई

    श्री लक्ष्मणसुत गृह बजत बधाई । प्रगटे श्री गोपीनाथ प्रथम सुत संकर्षण वपु माई ।।१।। छंद रूप नर रूप मन

  12. श्री वल्लभ सूत | Shri Vallabh Sut

    Nat · नट · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई

    श्री वल्लभ सूत परम प्रगटे प्रथम लीलारस भाव गुप्त जन जय जय श्री गोपीनाथ भक्तन सुखदाई । गावत है वेदोचा

  13. अश्विन वदी द्वादशी | Ashvin Vadi Dvadashi

    Sarang · सारंग · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई

    अश्विन वदी द्वादशी सुभग दिन श्री लक्ष्मन सुत के - सुत जायो । हलधर रूप देखी श्री वल्लभ महागुनन अज्ञान

  14. घर घर आनंद | Ghar Ghar Anand

    Sarang · सारंग · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई

    घर घर आनंद होत बधाई श्री वल्लभ गृह प्रगट भये है, श्री गोपीनाथ कुँवर सुखदाई ।।१।। धन-धन अश्विन वदी द्

  15. श्री वल्लभ सूतके | Shri Vallabh Sutke

    Sarang · सारंग · Shri Purushottamji Ki Badhai · श्रीपुरुषोत्तमजी की बधाई

    श्री वल्लभ सूतके सूत प्रगटे परिपूरन पुरुषोत्तम नाम । श्री गोपीनाथ निरखी मन फूले मंगल गावत चहुं दिश व

  16. प्रगटे श्री वल्लभ | Pragte Shri Vallabh

    Nayaki · नायकी · Shri Purushottamji Ki Badhai · श्रीपुरुषोत्तमजी की बधाई

    प्रगटे श्री वल्लभ सूतके सूत श्री पुरुषोत्तम यह नाम ।। आश्विन कृष्ण अष्टमी शुभ दिन प्रमान श्री पाय कि

  17. रास रसिक भाव | Ras Rasik Bhav

    Bhairav · भैरव · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    रास रसिक भाव रूप स्वामिनी स्वरूप रूप प्रकट भये अति अनूप श्री हरिराय ।। अनिही शुन्य जीवजानि करुणा महा

  18. प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसाई | Prakate Shriviththalnath Gusai

    Ramakali · रामकली · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसांई निजकुलहीमें फेर ।। दे चर्चित तांबूल पौत्रकों निकट आपने टेर ।।१।। सो प्रभ

  19. श्रीकल्याणराय घर नीकी | Shrikalyanray Ghar Niki

    Sarang · सारंग · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    श्रीकल्याणराय घर नीकी बाजत आज बधाई ।। प्रकटे श्रीहरिराय महाप्रभु श्रीविट्ठल अतिरूप कहाई ।।१।। निज पथ

  20. जय जय श्री | Jay Jay Shri

    Sarang · सारंग · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    जय जय श्री रसिकराय रसिक रसकी निधि ।। ध्रुव ।। भूतल पर प्रगट होय भक्तन के कलेश खोय । दई देवीजनन शिक्ष

  21. श्रीकल्याणराय घर प्रकटे | Shrikalyanray Ghar Prakate

    Malav · मालव · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    श्रीकल्याणराय घर प्रकटे श्रीहरिराय महारसरूप ।। आश्विन कृष्ण पंचमी शुभदिन रसिकराय मन आनंद रूप ।।१।। ब

  22. प्रकटे श्रीहरिराय श्रीकल्याण | Prakate Shrihariray Shrikalyan

    Nayaki · नायकी · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई

    प्रकटे श्रीहरिराय श्रीकल्याण रायके धाम ।। श्रीवृन्दावनचंद मनोहर रास रसिक लीला अभिराम ।।१।। लिये बोल

  23. बनठन भोगी रस | Banthan Bhogi Ras

    Malakos · मालकोस · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी

    बनठन भोगी रस बिलसनकों भोर भवन ठाडे पिय प्यारी ।। ओढे कवाय फरगुल जो परस्पर सीत समय सुंदर सुख कारी ।।१

  24. भोगीके दिन अभ्यंग | Bhogike Din Abhyang

    Malakos · मालकोस · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी

    भोगीके दिन अभ्यंग स्नान कर साज सिंगार श्याम सुभगतन ।। पुनि फूलि तिलवा भोग धरके परम सुंदर आरोगावत सब

  25. भोगी भोग करत | Bhogi Bhog Karat

    Asavari · आसावरी · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी

    भोगी भोग करत सब रसको ।। नंदनंदन जसोदाको जीवन गोपीन मान पति सर्वसको ।।१।। तिलभर संग तजत नही निजजन गान