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श्री विट्ठलगृह मंगलचार | Shri Vittalagrih Mangalchar
Bibhas · बिभास · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई
श्री विट्ठलगृह मंगलचार ॥ माता रुक्मिणी कूखि प्रकट भये श्रीयदुनाथ छठे सकुमार ॥१॥ जयजयकार भयो भुवि उपर
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महा सुख छायो | Maha Sukh Chhayo
Sarang · सारंग · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई
महा सुख छायो आज सुहायो श्रीविट्ठलेशके ओक ॥ ज्ञानरूप महाप्रभु प्रकट भये श्रीयदुपति या भुवलोक ॥१॥ ध्वज
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जयति यदुनाथ व्रज | Jayati Yadunath Vraj
Sarang · सारंग · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई
जयति यदुनाथ व्रज सकल पावन करन धीर गंभीर गुन कोन जाने ॥ जयति गोकुल सुभग नित्य रमणीयजे भक्ति एकत्र करि
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श्रीविट्ठलनाथके धाम बधाई | Shriviththalnathke Dham Badhai
Hamir · हमीर · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई
श्रीविट्ठलनाथके धाम बधाई ॥ ज्ञानरूप प्रकटे श्रीयदुपति छठे सुबन सुखदाई ॥१॥ छठ अमल मधु मास सुखद ऋतु मध
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प्रकट भये सुवन | Prakat Bhaye Suvan
Kedaro · केदारो · Shri Yadunathji Ki Badhai · श्रीयदुनाथजी की बधाई
प्रकट भये सुवन विट्ठलेशके आज ॥ कूखरानी सुभग रुक्मिणीकी मांझ शशिवदन यदुनाथ सकल शिरताज ॥१॥ बढ्यो आनंद
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प्रकट भये सदन | Prakat Bhaye Sadan
Khat · खट · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई
प्रकट भये सदन दुख दवन विट्ठलेशके सातमें सुवन घनश्याम अभिराम ॥ कृष्ण तेरस मास सुभग मार्गशिर्ष नाम मध्
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जयति पद्मावती सुवन | Jayati Padmavati Suvan
Sarang · सारंग · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई
जयति पद्मावती सुवन विट्ठल तनय नाम घनश्याम मुख चंद्र सरखो ॥ रुचिर अंग अंग बहु सजे भूषण वसन दरस करि ध्
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जयति घनश्याम गुण | Jayati Ghanshyam Gun
Sarang · सारंग · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई
जयति घनश्याम गुण धाम विश्राम जे वेद विधि विहित व्रत नित्यकारी ॥ भक्ति अनुरागिणी देत निजजननकों तेह प्
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जयति घनश्याम रसरूप | Jayati Ghanshyam Rasrup
Gauri · गौरी · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई
जयति घनश्याम रसरूप निज देह धरि प्रकट भये आप श्रीवल्लभ कुमार घर ॥ तरण तारण सकल दुख हरण सुख करन विरह अ
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जयति घनश्याम वपु | Jayati Ghanshyam Vapu
Bihagaro · बिहागरो · Shri Ghanshyamji Ki Badhai · श्रीघनश्यामजी की बधाई
जयति घनश्याम वपु प्रकट सप्तम तनय विरह रसरूप विठुलेश निज धाम ॥ बजत बाजे विविध वेणु सुरसों मिले भयो सु
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श्री लक्ष्मणसुत गृह | Shri Lakshmansut Grih
Nat · नट · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई
श्री लक्ष्मणसुत गृह बजत बधाई । प्रगटे श्री गोपीनाथ प्रथम सुत संकर्षण वपु माई ।।१।। छंद रूप नर रूप मन
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श्री वल्लभ सूत | Shri Vallabh Sut
Nat · नट · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई
श्री वल्लभ सूत परम प्रगटे प्रथम लीलारस भाव गुप्त जन जय जय श्री गोपीनाथ भक्तन सुखदाई । गावत है वेदोचा
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अश्विन वदी द्वादशी | Ashvin Vadi Dvadashi
Sarang · सारंग · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई
अश्विन वदी द्वादशी सुभग दिन श्री लक्ष्मन सुत के - सुत जायो । हलधर रूप देखी श्री वल्लभ महागुनन अज्ञान
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घर घर आनंद | Ghar Ghar Anand
Sarang · सारंग · Shri Gopinathji Ki Badhai · श्रीगोपीनाथजी की बधाई
घर घर आनंद होत बधाई श्री वल्लभ गृह प्रगट भये है, श्री गोपीनाथ कुँवर सुखदाई ।।१।। धन-धन अश्विन वदी द्
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श्री वल्लभ सूतके | Shri Vallabh Sutke
Sarang · सारंग · Shri Purushottamji Ki Badhai · श्रीपुरुषोत्तमजी की बधाई
श्री वल्लभ सूतके सूत प्रगटे परिपूरन पुरुषोत्तम नाम । श्री गोपीनाथ निरखी मन फूले मंगल गावत चहुं दिश व
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प्रगटे श्री वल्लभ | Pragte Shri Vallabh
Nayaki · नायकी · Shri Purushottamji Ki Badhai · श्रीपुरुषोत्तमजी की बधाई
प्रगटे श्री वल्लभ सूतके सूत श्री पुरुषोत्तम यह नाम ।। आश्विन कृष्ण अष्टमी शुभ दिन प्रमान श्री पाय कि
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रास रसिक भाव | Ras Rasik Bhav
Bhairav · भैरव · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
रास रसिक भाव रूप स्वामिनी स्वरूप रूप प्रकट भये अति अनूप श्री हरिराय ।। अनिही शुन्य जीवजानि करुणा महा
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प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसाई | Prakate Shriviththalnath Gusai
Ramakali · रामकली · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथ गुसांई निजकुलहीमें फेर ।। दे चर्चित तांबूल पौत्रकों निकट आपने टेर ।।१।। सो प्रभ
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श्रीकल्याणराय घर नीकी | Shrikalyanray Ghar Niki
Sarang · सारंग · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
श्रीकल्याणराय घर नीकी बाजत आज बधाई ।। प्रकटे श्रीहरिराय महाप्रभु श्रीविट्ठल अतिरूप कहाई ।।१।। निज पथ
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जय जय श्री | Jay Jay Shri
Sarang · सारंग · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
जय जय श्री रसिकराय रसिक रसकी निधि ।। ध्रुव ।। भूतल पर प्रगट होय भक्तन के कलेश खोय । दई देवीजनन शिक्ष
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श्रीकल्याणराय घर प्रकटे | Shrikalyanray Ghar Prakate
Malav · मालव · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
श्रीकल्याणराय घर प्रकटे श्रीहरिराय महारसरूप ।। आश्विन कृष्ण पंचमी शुभदिन रसिकराय मन आनंद रूप ।।१।। ब
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प्रकटे श्रीहरिराय श्रीकल्याण | Prakate Shrihariray Shrikalyan
Nayaki · नायकी · Shri Harirayji Ki Badhai · श्री हरिरायजी की बधाई
प्रकटे श्रीहरिराय श्रीकल्याण रायके धाम ।। श्रीवृन्दावनचंद मनोहर रास रसिक लीला अभिराम ।।१।। लिये बोल
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बनठन भोगी रस | Banthan Bhogi Ras
Malakos · मालकोस · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी
बनठन भोगी रस बिलसनकों भोर भवन ठाडे पिय प्यारी ।। ओढे कवाय फरगुल जो परस्पर सीत समय सुंदर सुख कारी ।।१
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भोगीके दिन अभ्यंग | Bhogike Din Abhyang
Malakos · मालकोस · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी
भोगीके दिन अभ्यंग स्नान कर साज सिंगार श्याम सुभगतन ।। पुनि फूलि तिलवा भोग धरके परम सुंदर आरोगावत सब
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भोगी भोग करत | Bhogi Bhog Karat
Asavari · आसावरी · Sankranti Bhogi · संक्रांति भोगी
भोगी भोग करत सब रसको ।। नंदनंदन जसोदाको जीवन गोपीन मान पति सर्वसको ।।१।। तिलभर संग तजत नही निजजन गान