Pushti Kirtan

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  1. मोहनलालके चरणारविंद | Mohanlalke Charanaravind

    Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद

    मोहनलालके चरणारविंद त्रिविधतापहारी ॥ कहिनजात कौनपुण्य करजूसिरधारी ॥१॥ निगमजाकीसाखबोले सेवकअधिकारी ॥

  2. शोभाआज भलीबनि | Shobhaaaj Bhalibani

    Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद

    शोभाआज भलीबनि आई ॥ जलसुतऊपरहंसबिराजत तापरइंद्र बधूदरसाई ॥१॥ दधिसुतलियो दियोदधिसुतमें यह छबिदेख नंदमु

  3. अतर गुलाब नीर | Atar Gulab Neer

    Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद

    अतर गुलाब नीर परदा लपटें उसीर त्रिविध समीर की झकोर हैऔं करें ॥ छूटति फुहारे हौद भरे अति भारे सारे ना

  4. लरकाई में जोबनकी | Larkai Men Jobanki

    Pancham · पंचम · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद

    लरकाई में जोबनकी छबि देखो सुंदर नयनन भरभर ॥ बिथुरी अलक बदन छबि राजत सुरत केलि मानो सीख दई हर ॥१॥ गंड

  5. मुखसों मुख मिलाय | Mukhsong Mukh Milay

    Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद

    मुखसों मुख मिलाय देखत आरसी ॥ विकसत नीलकमल ढिंग उदित भयो कैधों शशी ॥१॥ निरख बदन मुसकाय परस्पर करत बिह

  6. मेरो मुखनीकोकै तेरोरी प्यारी | Mero Mukhnikokai Terori Pyari

    Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद

    मेरो मुखनीकोकै तेरोरी प्यारी ॥ दर्पनले देखो मृगनयनी सांची कहो वृषभान दुलारी ॥१॥ तुमहो नंदजूके छैलछबी

  7. सुमन मन गोपाललाल | Suman Man Gopallal

    Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद

    सुमन मन गोपाललाल सुंदर अति रूपजाल मिटहें जंजाल निरखत सब गोपबाल ॥ मोरमुकुट सीसधरे बनमाला सुभगगरे सबको

  8. सुंदर श्याम छबीलो | Sundar Shyam Chhabilo

    Bilaval · बिलावल · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद

    सुंदर श्याम छबीलो ढोटा डार गयो मोपे मदन ठगोरी ॥ निर्तत गावत वेनु बजावत संग सखा हलधर की जोरी ॥१॥ कबहु

  9. बन्यो माई पगा | Banyo Mai Paga

    Sarang · सारंग · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद

    बन्यो माई पगा स्याम सिर नीको ॥ धोती ओर उपरना ओढे ओर गहेनो मोतीको ॥१॥ अंग अरगजा कमल हाथ में लीने मिल्

  10. अखियां काहू की | Akhiyan Kahu Ki

    Sarang · सारंग · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद

    अखियां काहू की न लगो ॥ सांवरो सो ढोटा काहू को जासीर ग्वाल पगो ॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोम रोम प्रत

  11. अरि येह कोन | Ari Yeh Kon

    Gauri · गौरी · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद

    अरि येह कोन छबीलो या के शीश पगा ॥ सांवरे वरन अंग अंग सुंदर धर्यो है शीश पगा ॥१॥ कुटिल अलक वदन पर राज

  12. बनते बने आवत | Bante Bane Aavat

    Gauri · गौरी · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद

    बनते बने आवत नंद नंदन शीश पगा ॥ ओरे पीत पिछोई रूपरात जदुपति जगवंदन ॥१॥ संध्या समें खिरक के द्वारे अप

  13. गोप के भेख | Gop Ke Bhekh

    Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद

    गोप के भेख गोपाल गायन हेत दृगन सुखदेत ॥ शिर सुभग फेंटा सखी ॥ परस रह्यो भ्रों पर पेज पच भास ढर लागत स

  14. फब्यों फेंटा ललित | Phabyon Phenta Lalit

    Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद

    फब्यों फेंटा ललित लाल के शिश पर निरखी छबी माधुरी अखियां सिरातरी ॥ प्रेमड़ी बावरी हों सखी ने रही सुध

  15. लालके फेंटा ऐंठा | Lalke Phenta Aintha

    Hamir · हमीर · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद

    लालके फेंटा ऐंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटी भाल पर नवल नंदलालके आवत बनतें बने सांझ सुरभिन मांझ ॥ अटक

  16. पूत महरको खिरक | Put Maharko Khirak

    Hamir · हमीर · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद

    पूत महरको खिरक दोहावत गैया ॥ संध्यासमे बांधे फेंटा गरे गुंजमाल पहेरे तनिया ठाडे हें अधपैया ॥१॥ कोंधन

  17. लटपटी पाग बनी | Latpati Pag Bani

    Bilaval · बिलावल · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका

    लटपटी पाग बनी सिर आज । टेढी धरी चंद्रिका सुन्दर भई मन्मथ मन लाज ॥१॥ नखसिख बानिक कहत न आवे लटपटे भूषन

  18. पूछत जननी कहाँ | Puchhat Janani Kahan

    Asavari · आसावरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका

    पूछत जननी कहां ते आये । आज गयो श्रीवल्लभ के घर बहोतक लाड लडाये ॥१॥ विविध भांति पट भूषन ले ले सरस सिं

  19. आज बने मोहन | Aaj Bane Mohan

    Asavari · आसावरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका

    आज बने मोहन रंग भीने । केसरी पाग सिथिल अलकावलि सीस चन्द्रिका दीने ॥१॥ केसरी वागो अति ही राजे हरी इजा

  20. धरे बांकी पाग | Dhare Banki Pag

    Purvi · पूर्वी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका

    धरे बांकी पाग बांकी चन्द्रिका बांक बिहारीलाल ॥ बांकी चाल बांकी गति बांके वचना रसाल ॥१॥ बांको तिलक बा

  21. वे देखो आवत | Ve Dekho Aavat

    Gauri · गौरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका

    वे देखो आवत हैं गिरिधारी । कछुक गाय आगे अरु पाछे सोभित संग सखा री ॥१॥ खस रही पाग लटपटी सुन्दर अपने ह

  22. सुमिरि मन गोपाललाल | Sumiri Man Gopallal

    Bhairav · भैरव · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद

    सुमिरि मन गोपाललाल सुंदर अति रूप-जाल । मिटि है जंजाल सकल निरखत सँग गोप-बाल ॥१॥ मोर-मुकुट सीस धरैं बन

  23. देखरी देख नवकुंज | Dekhri Dekh Navkunj

    Bilaval · बिलावल · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद

    देखरी देख नवकुंज घन सघन तर ठाडे गिरिवरधरन रंग भीने। मुकुट सिर लाल कटि काछिनी बेनु कर राधिका संग भुज

  24. मेरी अखियन देख्यो | Meri Akhiyan Dekhyo

    Bilaval · बिलावल · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद

    मेरी अखियन देख्यो गिरिधरभावे ॥ कहा कहूं तोसों सुन सजनी उतहीं क्यों उठि धावे ॥१॥ मोर मुकुट काननकुंडल

  25. सखी नंदको नंदन | Sakhi Nandko Nandan

    Bhairav · भैरव · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद

    सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी ॥ रूप अनुप दिखायके सखी गयो है अचानक आयरी ॥१॥ टेढी चलनि मधुर