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मोहनलालके चरणारविंद | Mohanlalke Charanaravind
Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद
मोहनलालके चरणारविंद त्रिविधतापहारी ॥ कहिनजात कौनपुण्य करजूसिरधारी ॥१॥ निगमजाकीसाखबोले सेवकअधिकारी ॥
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शोभाआज भलीबनि | Shobhaaaj Bhalibani
Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद
शोभाआज भलीबनि आई ॥ जलसुतऊपरहंसबिराजत तापरइंद्र बधूदरसाई ॥१॥ दधिसुतलियो दियोदधिसुतमें यह छबिदेख नंदमु
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अतर गुलाब नीर | Atar Gulab Neer
Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद
अतर गुलाब नीर परदा लपटें उसीर त्रिविध समीर की झकोर हैऔं करें ॥ छूटति फुहारे हौद भरे अति भारे सारे ना
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लरकाई में जोबनकी | Larkai Men Jobanki
Pancham · पंचम · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद
लरकाई में जोबनकी छबि देखो सुंदर नयनन भरभर ॥ बिथुरी अलक बदन छबि राजत सुरत केलि मानो सीख दई हर ॥१॥ गंड
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मुखसों मुख मिलाय | Mukhsong Mukh Milay
Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद
मुखसों मुख मिलाय देखत आरसी ॥ विकसत नीलकमल ढिंग उदित भयो कैधों शशी ॥१॥ निरख बदन मुसकाय परस्पर करत बिह
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मेरो मुखनीकोकै तेरोरी प्यारी | Mero Mukhnikokai Terori Pyari
Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद
मेरो मुखनीकोकै तेरोरी प्यारी ॥ दर्पनले देखो मृगनयनी सांची कहो वृषभान दुलारी ॥१॥ तुमहो नंदजूके छैलछबी
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सुमन मन गोपाललाल | Suman Man Gopallal
Bilaval · बिलावल · Khasakhane Ke Pad · खसखाने के पद
सुमन मन गोपाललाल सुंदर अति रूपजाल मिटहें जंजाल निरखत सब गोपबाल ॥ मोरमुकुट सीसधरे बनमाला सुभगगरे सबको
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सुंदर श्याम छबीलो | Sundar Shyam Chhabilo
Bilaval · बिलावल · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद
सुंदर श्याम छबीलो ढोटा डार गयो मोपे मदन ठगोरी ॥ निर्तत गावत वेनु बजावत संग सखा हलधर की जोरी ॥१॥ कबहु
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बन्यो माई पगा | Banyo Mai Paga
Sarang · सारंग · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद
बन्यो माई पगा स्याम सिर नीको ॥ धोती ओर उपरना ओढे ओर गहेनो मोतीको ॥१॥ अंग अरगजा कमल हाथ में लीने मिल्
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अखियां काहू की | Akhiyan Kahu Ki
Sarang · सारंग · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद
अखियां काहू की न लगो ॥ सांवरो सो ढोटा काहू को जासीर ग्वाल पगो ॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोम रोम प्रत
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अरि येह कोन | Ari Yeh Kon
Gauri · गौरी · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद
अरि येह कोन छबीलो या के शीश पगा ॥ सांवरे वरन अंग अंग सुंदर धर्यो है शीश पगा ॥१॥ कुटिल अलक वदन पर राज
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बनते बने आवत | Bante Bane Aavat
Gauri · गौरी · Shringar Darshan Ke Pad Subah Se Sham Tak Paga Shringar Ke Pad · शृंगार दर्शन के पद सुबह से शाम तक पगा शृंगार के पद
बनते बने आवत नंद नंदन शीश पगा ॥ ओरे पीत पिछोई रूपरात जदुपति जगवंदन ॥१॥ संध्या समें खिरक के द्वारे अप
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गोप के भेख | Gop Ke Bhekh
Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद
गोप के भेख गोपाल गायन हेत दृगन सुखदेत ॥ शिर सुभग फेंटा सखी ॥ परस रह्यो भ्रों पर पेज पच भास ढर लागत स
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फब्यों फेंटा ललित | Phabyon Phenta Lalit
Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद
फब्यों फेंटा ललित लाल के शिश पर निरखी छबी माधुरी अखियां सिरातरी ॥ प्रेमड़ी बावरी हों सखी ने रही सुध
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लालके फेंटा ऐंठा | Lalke Phenta Aintha
Hamir · हमीर · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद
लालके फेंटा ऐंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटी भाल पर नवल नंदलालके आवत बनतें बने सांझ सुरभिन मांझ ॥ अटक
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पूत महरको खिरक | Put Maharko Khirak
Hamir · हमीर · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा सिंगार के पद
पूत महरको खिरक दोहावत गैया ॥ संध्यासमे बांधे फेंटा गरे गुंजमाल पहेरे तनिया ठाडे हें अधपैया ॥१॥ कोंधन
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लटपटी पाग बनी | Latpati Pag Bani
Bilaval · बिलावल · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका
लटपटी पाग बनी सिर आज । टेढी धरी चंद्रिका सुन्दर भई मन्मथ मन लाज ॥१॥ नखसिख बानिक कहत न आवे लटपटे भूषन
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पूछत जननी कहाँ | Puchhat Janani Kahan
Asavari · आसावरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका
पूछत जननी कहां ते आये । आज गयो श्रीवल्लभ के घर बहोतक लाड लडाये ॥१॥ विविध भांति पट भूषन ले ले सरस सिं
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आज बने मोहन | Aaj Bane Mohan
Asavari · आसावरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका
आज बने मोहन रंग भीने । केसरी पाग सिथिल अलकावलि सीस चन्द्रिका दीने ॥१॥ केसरी वागो अति ही राजे हरी इजा
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धरे बांकी पाग | Dhare Banki Pag
Purvi · पूर्वी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका
धरे बांकी पाग बांकी चन्द्रिका बांक बिहारीलाल ॥ बांकी चाल बांकी गति बांके वचना रसाल ॥१॥ बांको तिलक बा
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वे देखो आवत | Ve Dekho Aavat
Gauri · गौरी · Pag Chandrika · पाग चंद्रिका
वे देखो आवत हैं गिरिधारी । कछुक गाय आगे अरु पाछे सोभित संग सखा री ॥१॥ खस रही पाग लटपटी सुन्दर अपने ह
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सुमिरि मन गोपाललाल | Sumiri Man Gopallal
Bhairav · भैरव · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद
सुमिरि मन गोपाललाल सुंदर अति रूप-जाल । मिटि है जंजाल सकल निरखत सँग गोप-बाल ॥१॥ मोर-मुकुट सीस धरैं बन
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देखरी देख नवकुंज | Dekhri Dekh Navkunj
Bilaval · बिलावल · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद
देखरी देख नवकुंज घन सघन तर ठाडे गिरिवरधरन रंग भीने। मुकुट सिर लाल कटि काछिनी बेनु कर राधिका संग भुज
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मेरी अखियन देख्यो | Meri Akhiyan Dekhyo
Bilaval · बिलावल · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद
मेरी अखियन देख्यो गिरिधरभावे ॥ कहा कहूं तोसों सुन सजनी उतहीं क्यों उठि धावे ॥१॥ मोर मुकुट काननकुंडल
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सखी नंदको नंदन | Sakhi Nandko Nandan
Bhairav · भैरव · Mugat Shringar Ke Pad · मुगट शृंगार के पद
सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी ॥ रूप अनुप दिखायके सखी गयो है अचानक आयरी ॥१॥ टेढी चलनि मधुर