Pushti Kirtan

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  1. अब डरकौनको रे | Ab Darakaunako Re

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Namkaran · श्री कृष्णा नामकरण

    अब डरकौनको रे भैया । गर्ग बचन गोकुलमें पैठे हमारे मीत कन्हैया ॥१॥ कहत ग्वाल जसुमतिके आगें है त्रिभुव

  2. देत गजदान आज | Det Gajadan Aaj

    Todi · टोडी · Shri Krishna Namkaran · श्री कृष्णा नामकरण

    देत गजदान आज व्रजराज विराजत गोपनके सिरताज ॥ देशदेश तें खट दर्शन आवत मन ईच्छा फल पावत किरत समुद्रपार

  3. आयौ कर्णवेध दिन | Aayau Karnavedh Din

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    आयौ कर्णवेध दिन नीको । गुरकी भेली हाथ निवाई कियौ रोचन कौ टीकौ ॥१॥ गुरु शशि नक्षत्र बार बल पहुँच्यौ द

  4. गोपालके वेध कर्णकौ | Gopalake Vedh Karnakau

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    गोपालके वेध कर्णकौ कीजै । गुरुबल तिथि बल नक्षत्र बार बल शुभ घरी बिचार लीजै ॥१॥ गणिक निपुण द्वै चारि

  5. सूची पढ़ि दीनी | Suchi Padhi Dini

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    सूची पढ़ि दीनी द्विज वर देवा । जाते पीर न होई कर्णकों हम करिहें तब सेवा ॥१॥ कहत यशोदा द्विज वर देवा

  6. सुतके कान छेदत | Sutake Kan Chhedat

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    सुतके कान छेदत नंदरानी । सूची देखत भाजि चले हरि बहोरि पकरिकें आनी ॥१॥ छेद कर्ण सबहिन पहरायौ मनमें अत

  7. कुँवरकौ वर्णबेध करि | Kunvarakau Varnabedh Kari

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    कुँवरकौ वर्णबेध करि लीनौ । जाति कुटुंब पाटंबर पहरौ जिन जो माँग्यौ सो दीनौ ॥१॥ अन्नदान गो दान कर इमि

  8. कान्हकौ कर्ण छेदन | Kanhakau Karn Chhedan

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन

    कान्हकौ कर्ण छेदन हाथ सुहारी भेली गुरकी । विधि बिहँसत हँसत हेरि हेरि जसुमतिकें धकधकी उरकी ॥१॥ रोचन भ

  9. आज कान्ह करि | Aaj Kanh Kari

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन

    आज कान्ह करि है अन्न प्रासन । मनि कंचनके थार भराये भाँति भाँतिके वासन ॥१॥ नंदघरनी ब्रज बधू बुलाई जे

  10. अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ | Annaprasan Din Nandalalakau

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन

    अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ करत यशोदा माय । ब्राह्मण देव पूजि कुलदेवी बोहोत दक्षना पाय ॥१॥ कुटुंब जिमाय

  11. यह मेरे लालकौ | Yah Mere Lalakau

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन

    यह मेरे लालकौ अन्नप्रासन । भोजन दक्षना बोहोत द्विजनकों देहू मणि मय आसन ॥१॥ पायस भरि हर पल्लव लै हो स

  12. सुदिन सवारौ शोधिकें | Sudin Savarau Shodhiken

    Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन

    सुदिन सवारौ शोधिकें लालजू भोजन कीजै । कुलदेवता मनाई हरखसों यह मानि मन लीजै ॥१॥ ब्राह्मण भोजन और दक्ष

  13. मोहन तें माटी | Mohan Tem Mati

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण

    मोहन तें माटी क्यों खाई । ठाड़े ग्वाल कहत सब बालिक जे तेरे समुदाई ॥१॥ मुकरि गये मैं सुनी न देखी झूठे

  14. उगलौ प्यारे बाल | Ugalau Pyare Bal

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण

    उगलौ प्यारे बाल गोपाल माँटी । बार बार अनरुचि उपजावत जसुमति हाथ लिये साँटी ॥१॥ महतारीकौ कह्यो न मानत

  15. देखौ गोपालजूकी लीला | Dekhau Gopalajuki Lila

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण

    देखौ गोपालजूकी लीला ठाटी । सूर ब्रह्मादिक अचरज ह्वे हे जसुमति हाथ लिये रजु साँटी ॥१॥ ये सब ग्वाल प्र

  16. तें माटी क्यों | Tem Mati Kyon

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण

    तें माटी क्यों खाई मेरे मोहन । ठाड़े कहत गोप बालिक सब जैहें तेरे गोहन ॥१॥ मुकरि गये मैं कछु न देखी झ

  17. निगम साखि देखौ | Nigam Sakhi Dekhau

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    निगम साखि देखौ गोकुल हरि । जाकों दूरि दरस योग यज्ञ कियें बाँध्यौ जसोदा ऊखल सों धरि ॥१॥ चुटकी दै दै ग

  18. जसोदा तेरौ कठिन | Jasoda Terau Kathin

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    जसोदा तेरौ कठिन हियौरी माई । तनक दधि के कारनें तू बाँधे ऊखल ॥१॥ जे मूर्ति जल थल में व्यापक सुपनें न

  19. गोविंद बारबार मुख | Govind Barabar Mukh

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    गोविंद बारबार मुख जोवै । कमलनैंन हरि हिलकिन रोवत बंधन छोड़ि यह सोवै ॥१॥ जो तेरौ सुत खरौई अचगरौ अपनी

  20. कबके बाँधे ऊखल | Kabake Bandhe Ukhal

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    कबके बाँधे ऊखल श्याम । कमल नैन बाहिर ही राखे तू बैठी सुखधाम ॥१॥ है निर्दय दया तोहि नाँही लागि रही गृ

  21. चित दै चितै | Chit Dai Chitai

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    चित दै चितै तनुज मुख ओर । सकुचत शीत भयौ जलरुह तुव कर लकुट निरखि शशि भोर ॥१॥ सुंदर ललित श्रवत अँसुवन

  22. कहौ तौ माखन | Kahau Tau Makhan

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    कहौ तौ माखन लाऊँ धरते । जाके काज लकुटिया लीनी डारत नाँहिन करते ॥१॥ देखि यशोदा बदन कमल की शोभा बाढ़ी

  23. यशोदा माई यह | Yashoda Mai Yah

    Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल

    यशोदा माई यह न बूझिये काम । कमलनैन की भुजा दूखि हैं बाँधे ऊखल दाम ॥१॥ पुत्रहू ते प्रीतम नहीं कोऊ कुल

  24. आँगन स्याम नचावहीं | Aangan Syam Nachavahim

    Suh · सूहा · Shri Krishna Ki Bal Lila · श्री कृष्णा की बाललीला

    आँगन स्याम नचावहीं जसुमति नंदरानी ॥ तारी दै दै गावहीं मधुरे सुरबानी ॥१॥ पाँयन नूपुर वाजहीं कटि किंकि

  25. यशोमति मन अभिलाष | Yashomati Man Abhilash

    Ramakali · रामकली · Shri Krishna Ki Bal Lila · श्री कृष्णा की बाललीला

    यशोमति मन अभिलाष करै । कब मेरौ मोहन घटुरुवन रैंगै कब द्वैक पग धरनी धरै ॥१॥ कब दतियाँ द्वै दूधकी देखो