Search kirtans
-
अब डरकौनको रे | Ab Darakaunako Re
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Namkaran · श्री कृष्णा नामकरण
अब डरकौनको रे भैया । गर्ग बचन गोकुलमें पैठे हमारे मीत कन्हैया ॥१॥ कहत ग्वाल जसुमतिके आगें है त्रिभुव
-
देत गजदान आज | Det Gajadan Aaj
Todi · टोडी · Shri Krishna Namkaran · श्री कृष्णा नामकरण
देत गजदान आज व्रजराज विराजत गोपनके सिरताज ॥ देशदेश तें खट दर्शन आवत मन ईच्छा फल पावत किरत समुद्रपार
-
आयौ कर्णवेध दिन | Aayau Karnavedh Din
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
आयौ कर्णवेध दिन नीको । गुरकी भेली हाथ निवाई कियौ रोचन कौ टीकौ ॥१॥ गुरु शशि नक्षत्र बार बल पहुँच्यौ द
-
गोपालके वेध कर्णकौ | Gopalake Vedh Karnakau
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
गोपालके वेध कर्णकौ कीजै । गुरुबल तिथि बल नक्षत्र बार बल शुभ घरी बिचार लीजै ॥१॥ गणिक निपुण द्वै चारि
-
सूची पढ़ि दीनी | Suchi Padhi Dini
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
सूची पढ़ि दीनी द्विज वर देवा । जाते पीर न होई कर्णकों हम करिहें तब सेवा ॥१॥ कहत यशोदा द्विज वर देवा
-
सुतके कान छेदत | Sutake Kan Chhedat
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
सुतके कान छेदत नंदरानी । सूची देखत भाजि चले हरि बहोरि पकरिकें आनी ॥१॥ छेद कर्ण सबहिन पहरायौ मनमें अत
-
कुँवरकौ वर्णबेध करि | Kunvarakau Varnabedh Kari
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
कुँवरकौ वर्णबेध करि लीनौ । जाति कुटुंब पाटंबर पहरौ जिन जो माँग्यौ सो दीनौ ॥१॥ अन्नदान गो दान कर इमि
-
कान्हकौ कर्ण छेदन | Kanhakau Karn Chhedan
Sarang · सारंग · Shri Krishna Kaan Chhedan · श्री कृष्णा कान छेदन
कान्हकौ कर्ण छेदन हाथ सुहारी भेली गुरकी । विधि बिहँसत हँसत हेरि हेरि जसुमतिकें धकधकी उरकी ॥१॥ रोचन भ
-
आज कान्ह करि | Aaj Kanh Kari
Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन
आज कान्ह करि है अन्न प्रासन । मनि कंचनके थार भराये भाँति भाँतिके वासन ॥१॥ नंदघरनी ब्रज बधू बुलाई जे
-
अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ | Annaprasan Din Nandalalakau
Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन
अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ करत यशोदा माय । ब्राह्मण देव पूजि कुलदेवी बोहोत दक्षना पाय ॥१॥ कुटुंब जिमाय
-
यह मेरे लालकौ | Yah Mere Lalakau
Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन
यह मेरे लालकौ अन्नप्रासन । भोजन दक्षना बोहोत द्विजनकों देहू मणि मय आसन ॥१॥ पायस भरि हर पल्लव लै हो स
-
सुदिन सवारौ शोधिकें | Sudin Savarau Shodhiken
Sarang · सारंग · Shri Krishna Anna Prashan · श्री कृष्णा अन्न प्राशन
सुदिन सवारौ शोधिकें लालजू भोजन कीजै । कुलदेवता मनाई हरखसों यह मानि मन लीजै ॥१॥ ब्राह्मण भोजन और दक्ष
-
मोहन तें माटी | Mohan Tem Mati
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण
मोहन तें माटी क्यों खाई । ठाड़े ग्वाल कहत सब बालिक जे तेरे समुदाई ॥१॥ मुकरि गये मैं सुनी न देखी झूठे
-
उगलौ प्यारे बाल | Ugalau Pyare Bal
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण
उगलौ प्यारे बाल गोपाल माँटी । बार बार अनरुचि उपजावत जसुमति हाथ लिये साँटी ॥१॥ महतारीकौ कह्यो न मानत
-
देखौ गोपालजूकी लीला | Dekhau Gopalajuki Lila
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण
देखौ गोपालजूकी लीला ठाटी । सूर ब्रह्मादिक अचरज ह्वे हे जसुमति हाथ लिये रजु साँटी ॥१॥ ये सब ग्वाल प्र
-
तें माटी क्यों | Tem Mati Kyon
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Mrittika Bhakshan · श्री कृष्णा मृतिका भक्षण
तें माटी क्यों खाई मेरे मोहन । ठाड़े कहत गोप बालिक सब जैहें तेरे गोहन ॥१॥ मुकरि गये मैं कछु न देखी झ
-
निगम साखि देखौ | Nigam Sakhi Dekhau
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
निगम साखि देखौ गोकुल हरि । जाकों दूरि दरस योग यज्ञ कियें बाँध्यौ जसोदा ऊखल सों धरि ॥१॥ चुटकी दै दै ग
-
जसोदा तेरौ कठिन | Jasoda Terau Kathin
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
जसोदा तेरौ कठिन हियौरी माई । तनक दधि के कारनें तू बाँधे ऊखल ॥१॥ जे मूर्ति जल थल में व्यापक सुपनें न
-
गोविंद बारबार मुख | Govind Barabar Mukh
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
गोविंद बारबार मुख जोवै । कमलनैंन हरि हिलकिन रोवत बंधन छोड़ि यह सोवै ॥१॥ जो तेरौ सुत खरौई अचगरौ अपनी
-
कबके बाँधे ऊखल | Kabake Bandhe Ukhal
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
कबके बाँधे ऊखल श्याम । कमल नैन बाहिर ही राखे तू बैठी सुखधाम ॥१॥ है निर्दय दया तोहि नाँही लागि रही गृ
-
चित दै चितै | Chit Dai Chitai
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
चित दै चितै तनुज मुख ओर । सकुचत शीत भयौ जलरुह तुव कर लकुट निरखि शशि भोर ॥१॥ सुंदर ललित श्रवत अँसुवन
-
कहौ तौ माखन | Kahau Tau Makhan
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
कहौ तौ माखन लाऊँ धरते । जाके काज लकुटिया लीनी डारत नाँहिन करते ॥१॥ देखि यशोदा बदन कमल की शोभा बाढ़ी
-
यशोदा माई यह | Yashoda Mai Yah
Bilaval · बिलावल · Shri Krishna Ukhal · श्री कृष्णा ऊखल
यशोदा माई यह न बूझिये काम । कमलनैन की भुजा दूखि हैं बाँधे ऊखल दाम ॥१॥ पुत्रहू ते प्रीतम नहीं कोऊ कुल
-
आँगन स्याम नचावहीं | Aangan Syam Nachavahim
Suh · सूहा · Shri Krishna Ki Bal Lila · श्री कृष्णा की बाललीला
आँगन स्याम नचावहीं जसुमति नंदरानी ॥ तारी दै दै गावहीं मधुरे सुरबानी ॥१॥ पाँयन नूपुर वाजहीं कटि किंकि
-
यशोमति मन अभिलाष | Yashomati Man Abhilash
Ramakali · रामकली · Shri Krishna Ki Bal Lila · श्री कृष्णा की बाललीला
यशोमति मन अभिलाष करै । कब मेरौ मोहन घटुरुवन रैंगै कब द्वैक पग धरनी धरै ॥१॥ कब दतियाँ द्वै दूधकी देखो