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पावस ऋतुनीकी लागत हिंडोरें | Pavas Rituniki Lagat Hindoren
Malhar · मल्हार · Hindora Malhar · हिंडोरा मल्हार
पावस ऋतुनीकी लागत हिंडोरें हरिसंग झूलत व्रजनारी ॥ सावन मास फुहीं थोरी थोरी तेसीये भूमि हरियारी ॥१॥ न
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आज बन उमगि रही | Aj Ban Umagi Rahi
Malhar · मल्हार · Hindora Malhar · हिंडोरा मल्हार
आज बन उमगि रही व्रजनारी ॥ फुलीफिरत निशंक गुणगावत झुलवत प्राण पियारी ॥१॥ एक कुसुम ले डारत ऊपर एक चितव
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छबीलो गोपाल झूले छबीले | Chhabilo Gopal Jhule Chhabile
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
छबीलो गोपाल झूले छबीले हिंडोलना ॥ छबीलेसे खंभ दोऊ डांडी चार छबीली छबीले जराय हीरा हेम अमोलना ॥१॥ छबी
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व्रजयुवति संग लाल झूलत | Vrajayuvati Sang Lal Jhoolat
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
व्रजयुवति संग लाल झूलत वृन्दावन मध्य पचरंग सोहत सुरंग हिंडोरें ॥ नट अलाप लेत सुघर राग रंग विहंसविहंस
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आज सखी नव कुंजमहल | Aj Sakhi Nav Kunjamahal
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
आज सखी नव कुंजमहल में झूलत सुरंग हिंडोरे हैं। स्यामा स्याम चित चोरे हैं दोउ अरसपरस दग जोरे हैं ॥१॥ न
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झूलत व्रजराज कुंवर संजूत | Jhoolat Vrajaraj Kunvar Sanjut
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
झूलत व्रजराज कुंवर संजूत वृषभानु सुता कुंज सदन में हिंडोरनां बिराज हीं ॥ अंग अंग सोहत सिंगार पीतांबर
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हिंडोरे झूलत रंग रंगीले | Hindore Jhoolat Rang Rangile
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
हिंडोरे झूलत रंग रंगीले ॥ नव निकुंज रस पुंज सदन में छबि सौं छबीले ॥१ ॥ नव भूषन नव बसन अंग अंग नव नव
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सुरंग हिंडोरनाहो माई झूलत | Surang Hindoranaho Mai Jhoolat
Nat · नट · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
सुरंग हिंडोरनाहो माई झूलत रंग भरे ॥ तेसीये पियप्यारी पहेरें पीयरो पट कसुंभी सारी ऋतु पावसघन चहूंदिशा
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आईं आईं सकल व्रजनारी | Ain Ain Sakal Vrajanari
Malav · मालव · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
आंईं आंईं सकल व्रजनारी झूलन हरिके हिंडोरनां ॥ नवसत साज कुरंग नयनी आभूषण तन आछे सुरंगवसन अमोलनां ॥१॥
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झूलत गोकुलचंद हिंडोरें | Jhoolat Gokulachand Hindoren
Malav · मालव · Hindora Ke Pad · हिंडोरा के पद
झूलत गोकुलचंद हिंडोरें झुलावत सब व्रजनारी ॥ संगशोभित वृषभाननंदिनी पहेरें कसुंभी सारी ॥१॥ पचरंगी डोरी
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हिंडोरें माई झूलतरंग रह्यो | Hindore Mai Jhoolatarang Rahyo
Malhar · मल्हार · Hindora Jhuli Utarave · हिंडोरा झूलि उतरवे
हिंडोरें माई झूलतरंग रह्यो ॥ व्रजसुन्दरि मिलि देखन आई मंगलचार ठयो ॥१॥ मातयशोदा करत आरती मोतिनथार लिय
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झुकी झुकी झूलत लाल | Jhuki Jhuki Jhoolat Lal
Khamayachi · खमायची · Hindora Jhuli Utarave · हिंडोरा झूलि उतरवे
झुकी झुकी झूलत लाल विहारी । संग झूलत वृषभाननंदिनी पहरें कसुंभी सारी ॥१॥ ललितादिक मिल बेनु बजावत गावत
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हिंडोरें उतरे लाल विहारी | Hindore Utare Lal Vihari
Khamayachi · खमायची · Hindora Jhuli Utarave · हिंडोरा झूलि उतरवे
हिंडोरेतें उतरे लाल विहारी । रमकनि ठमकनि उतरि राधिका कोटि चन्द उजियारी ॥१॥ गोपीजन सब पाय परत हैं राई
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पवित्रा पहरत गिरिधरलाल | Pavitra Paharat Giridharalal
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad · पवित्रा धरायवे के पद
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल ॥ रुचिर पाटके फोंदना करि करि पहरावत सब बाल ॥१॥ आसपास सब सखा मंडली मानो कमल अल
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पवित्रा पहरत राजकुमार | Pavitra Paharat Rajakumar
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad · पवित्रा धरायवे के पद
पवित्रा पहरत राजकुमार ॥ तीन्यो लोक पवित्र कियेंहें श्रीविट्ठल गिरिधार ॥१॥ अतिही पवित्र प्रिया बहु बि
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पवित्रा पहरत श्रीगोकुल भूप | Pavitra Paharat Shrigokul Bhup
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad · पवित्रा धरायवे के पद
पवित्रा पहरत श्रीगोकुल भूप ॥ श्रावण शुक्लपक्ष एकादशी मंगलको निजरूप ॥१ ॥ आनंद चारु रसिकवर सुन्दर परमा
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पवित्रा पहरत गिरिधरलाल | Pavitra Paharat Giridharalal
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad · पवित्रा धरायवे के पद
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल ॥ तीन्यो लोक पवित्र कियेंहें श्रीविट्ठल नयन विशाल ॥१ ॥ कहा कहों अंग अंगकी बान
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पवित्रा पेहरन को दिन | Pavitra Peharan Ko Din
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad · पवित्रा धरायवे के पद
पवित्रा पेहरन को दिन आयो ॥ केसर कुंकुम रसरंग वागो कुंदनहार बनायो ॥१ ॥ जयजयकार होत वसुधापर सुरमुनि मं
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पवित्रा पहेरत विठ्ठलनाथ | Pavitra Peherat Vitthalnath
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad Shri Acharyaji Ke · पवित्रा धरायवे के पद श्री आचार्यजी के
पवित्रा पहेरत विठ्ठलनाथ ॥ सुंदर शुभ पाटके रचेहें सातों बालक साथ ॥१॥ श्रीगिरिधर गोविंद मोदभरे गोकुलेश
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पवित्रा पहरें श्रीगोकुलनाथ | Pavitra Paharen Shrigokulnath
Sarang · सारंग · Pavitra Dharayave Ke Pad Shri Acharyaji Ke · पवित्रा धरायवे के पद श्री आचार्यजी के
पवित्रा पहरें श्रीगोकुलनाथ ॥ विप्र सबे मिल वेद उच्चारत निरखत सुरनर साथ ॥१॥ शिव ब्रह्मादिक कौतुक देखे
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राखी बांधत यशोदा मैया | Rakhi Bandhat Yashoda Maiya
Sarang · सारंग · Rakhi Ke Pad · राखी के पद
राखी बांधत यशोदा मैया ॥ बहु शृंगार सजे आभूषण गिरिधर भैया ॥१॥ रत्नखचित राखी बांधि कर पुनपुन लेत बलैया
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बहेन सुभद्रा राखी बांधत | Bahen Subhadra Rakhi Bandhat
Sarang · सारंग · Rakhi Ke Pad · राखी के पद
बहेन सुभद्रा राखी बांधत बल ओर श्रीगोपालकें ॥ कनकथार अक्षतभर कुंकुम तिलक करत नंदलालकें ॥१॥ आरती करत द
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राखी बांधतहे नंदरानी | Rakhi Bandhatahe Nandarani
Sarang · सारंग · Rakhi Ke Pad · राखी के पद
राखी बांधतहे नंदरानी ॥ लालपाटकी डोरी राजत लालनके मनमानी ॥१॥ दक्षिणा दीनी बहुत द्विजनकों धन खरचत न अघ
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राखी बांधत यशोदा मैया | Rakhi Bandhat Yashoda Maiya
Sarang · सारंग · Rakhi Ke Pad · राखी के पद
राखी बांधत यशोदा मैया बलऔर श्रीगोपालकें ॥ सावनसुदी पून्योंको शुभदिन तिलक करत मध्यभालकें ॥ विप्र बुला
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मात यशोदा राखी बांधत | Mat Yashoda Rakhi Bandhat
Sarang · सारंग · Rakhi Ke Pad · राखी के पद
मात यशोदा राखी बांधत बलि अरु श्रीगोपालकें ॥ कंचनथारमे अक्षत कुंकुम तिलक कियो नंदलालकें ॥१ ॥ आरती करत