Pushti Kirtan

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  1. अति छबि देत | Ati Chhabi Det

    Asavari · आसावरी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद

    अति छबि देत दुमालो सीस। मनमथ मान हरे हसि चितवत बने है गोकुलके ईस ॥१॥ ठाडे सिंधपोर अपने रंग संग सखा द

  2. देख सखी नव | Dekh Sakhi Nav

    Bilaval · बिलावल · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद

    देख सखी नव छेल छबीलो चिते लियो मेरो चित चोर। अरविलो आनत ऐंडानी ओर आकृति नेननकी कोर ॥१॥ शोभा अंग प्रत

  3. देखो सखि ठाडो | Dekho Sakhi Thado

    Todi · टोडी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद

    देखो सखि ठाडो मदन गोपाल। पहेर कवाय धरे सिर टोपा फल गुल ओढे लाल ॥१॥ बागो सरस तासको सोहे सुथन मोजलाल।

  4. लालही सुंथन लालही | Lalhi Sunthan Lalhi

    Sarang · सारंग · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार

    लालही सुंथन लालही बागो लालही पाग बनी अतिभारी ॥ लालही ठाडे आभूखन राजत लालही लाल व्रखभान दुलारी ॥१॥ ला

  5. बागो लाल सुनेरी | Bago Lal Suneri

    Sarang · सारंग · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार

    बागो लाल सुनेरी चीरा ॥ तापर मोर चंद्रिका धरके उर सोहत गिरिधरजुके हीरा ॥१॥ सूंथन बनी अनार रंगकी हंसूल

  6. लाल लालके लाल | Lal Lalke Lal

    Todi · टोडी · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार

    लाल लालके लाल जु लोचन लाल ही के मुख लाल जु बीरा। लाल बनी काछनी अति सुन्दर लालके सीस लाल ही चीरा ॥१॥

  7. लालही लाल के | Lalhi Lal Ke

    Dhanashri · धनाश्री · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार

    लालही लाल के लालही लोचन लालही के मुख लालही बीरा ॥ लाल बनी कटि काछनी लाल की लाल के शीश मुकेसी चीरा ॥१

  8. हरि को शृंगार | Hari Ko Shringar

    Asavari · आसावरी · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार

    हरि को शृंगार हर्यो देख के मो मन अर्यो ॥ हर्यो बागो सिर टिपारो पाग कटि सुंथन विराजे है ॥१॥ ओढे हैं क

  9. जामो बन्यो जरतासको | Jamo Banyo Jartasko

    Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार

    जामो बन्यो जरतासको सुन्दरलाल बन्द अरु जरद किनारी । झालरदार बन्यो पटुका झटक्यो दिल ता बीच जात कहां री

  10. बंकचितवन चिते | Bankchitavan Chite

    Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार

    बंकचितवन चिते रसिकतन गुमप्रीतिको भेद जनायो ॥ मुखकी रुखाई मिटत नहीं कबहू हृदयको प्रेम कैसे जात दुरायो

  11. भलें पाउधारें मेरे | Bhalen Paudhare Mere

    Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार

    भलें पाउधारें मेरे अंगना यशोदाके छगनमगना ॥ जो पगधरो मेरी अखियन पर हों बलबलजाऊ न्योछावरकरो हारचीर कंग

  12. आधो मुखनीलाम्बरसो | Aadho Mukhneelambarso

    Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार

    आधो मुखनीलाम्बरसो ढांप्योविथुरी अलके सोहे ॥ एक दिशामानों मकरचांदनी एकदिशा घनबिजरी कोंधत हसे हरें मनम

  13. बहुत प्रसन्न भये | Bahut Prasann Bhaye

    Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार

    बहुत प्रसन्न भये पियप्यारी टोडीराग वेणुधरगायो ॥ सुरसंगीत बधानमधुरस्वर ऐसो अद्भुत भेद बनायो ॥१॥ बीन त

  14. जेवत कान्ह करत | Jevat Kanh Karat

    Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    जेंवत कान्ह करत किलकारी ॥ भर बुकटा मेलत मुखभीतर कर पकरत महतारी ॥१॥ फूक फूक दूध मुख लावत डारत बाहां उ

  15. सुतहि जिमावत यशोदा | Sutahi Jimavat Yashoda

    Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    सुतहि जिमावत यशोदा मैया ॥ सानत कोर मधुर मृदु मीठो देमुख लेत बलैया ॥१॥ खेलनकों उठ उठ भाजत हें राखतहैं

  16. लालको रोटी और वडी | Lalko Roti Aur Vadi

    Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    लालको रोटी और वडी ॥ हींग लगाय मिरच पुटदीनो करुबे तेल तरी ॥१॥ आन कनिक द्वयविरिया छानी बेलन बेल करी पत

  17. लालको मीठी खीर जो भावे | Lalko Mithi Khir Jo Bhave

    Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    लालको मीठी खीर जो भावे ॥ बेला भर भर लावत यशोदा बूरो अधिक मिलाव ॥१॥ कनिया लियें यशोदा ठाढी रुचिकर कोर

  18. क्योरी तूं द्वारे | Kyori Tun Dvare

    Asavari · आसावरी · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    क्योंरी तूं द्वारे बोली आय ॥ तेरो बोल सुनत मेरो मोहन भोजन कछू न खाय ॥१॥ दोर चले भींतरते बाहिर उखट्यो

  19. हरि भोजन करत | Hari Bhojan Karat

    Asavari · आसावरी · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद

    हरि भोजन करत विनोदसों ॥ करकर कोर मुखारविंद में देंत यशोदा मोदसों ॥१॥ मधु मेवा पकवान मिठाई दूध दह्यो

  20. आज गोपाल पाहुने | Aaj Gopal Pahune

    Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद

    आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन अघायरी ॥ सुंदरवदन कमलकी शोभा मोमन रह्योहे लुभायरी ॥१॥ के निरखूं के टहल

  21. कछु भूलगईहों परोसत | Kachhu Bhulgaihon Parosat

    Asavari · आसावरी · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद

    कछु भूलगईहों परोसत फिरलाई मुसकाई ॥ झूठे मिसकर आयो चाहत सोतो सांची भईहो लालरी झरहेत केंहभाई ॥१॥ जो भू

  22. चित्र सराहत चितवत | Chitra Sarahat Chitavat

    Todi · टोडी · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद

    चित्र सराहत चितवत मुरमुर गोपी बहुत सयानी ॥ टक झकमें झुक वदन निहारत अलक संवारत पलक नमारत जान गई नंदरा

  23. आज हमारे भोजन | Aaj Hamare Bhojan

    Sarang · सारंग · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद

    आज हमारे भोजन कीजे ॥ बहुत भांत पकवान मिठाई षटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घी खिचरी और खोवा स्याम सलोने ली

  24. जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी | Jevant Shrivrishbhananandini

    Sarang · सारंग · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद

    जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी कान्हकुंवरकी परछाई ॥ जोड़ जोड़ व्यंजन भावत रुचिसों सोइ सोइ सब ललिता लेआई ॥१॥

  25. खंभकी ओझल ठाढो | Khambhki Ojhal Thadho

    Todi · टोडी · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद

    खंभकी ओझल ठाढो सुबल प्रवीण सखा करमें जटितडबा वीरासों भर्यो जेमतहेंरी मोहन ॥ परदापरे तिवारी तीन्यो ता