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अति छबि देत | Ati Chhabi Det
Asavari · आसावरी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
अति छबि देत दुमालो सीस। मनमथ मान हरे हसि चितवत बने है गोकुलके ईस ॥१॥ ठाडे सिंधपोर अपने रंग संग सखा द
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देख सखी नव | Dekh Sakhi Nav
Bilaval · बिलावल · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
देख सखी नव छेल छबीलो चिते लियो मेरो चित चोर। अरविलो आनत ऐंडानी ओर आकृति नेननकी कोर ॥१॥ शोभा अंग प्रत
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देखो सखि ठाडो | Dekho Sakhi Thado
Todi · टोडी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
देखो सखि ठाडो मदन गोपाल। पहेर कवाय धरे सिर टोपा फल गुल ओढे लाल ॥१॥ बागो सरस तासको सोहे सुथन मोजलाल।
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लालही सुंथन लालही | Lalhi Sunthan Lalhi
Sarang · सारंग · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार
लालही सुंथन लालही बागो लालही पाग बनी अतिभारी ॥ लालही ठाडे आभूखन राजत लालही लाल व्रखभान दुलारी ॥१॥ ला
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बागो लाल सुनेरी | Bago Lal Suneri
Sarang · सारंग · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार
बागो लाल सुनेरी चीरा ॥ तापर मोर चंद्रिका धरके उर सोहत गिरिधरजुके हीरा ॥१॥ सूंथन बनी अनार रंगकी हंसूल
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लाल लालके लाल | Lal Lalke Lal
Todi · टोडी · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार
लाल लालके लाल जु लोचन लाल ही के मुख लाल जु बीरा। लाल बनी काछनी अति सुन्दर लालके सीस लाल ही चीरा ॥१॥
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लालही लाल के | Lalhi Lal Ke
Dhanashri · धनाश्री · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार
लालही लाल के लालही लोचन लालही के मुख लालही बीरा ॥ लाल बनी कटि काछनी लाल की लाल के शीश मुकेसी चीरा ॥१
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हरि को शृंगार | Hari Ko Shringar
Asavari · आसावरी · Ghata Ke Pad Shringara · घटा के पद शृंगार
हरि को शृंगार हर्यो देख के मो मन अर्यो ॥ हर्यो बागो सिर टिपारो पाग कटि सुंथन विराजे है ॥१॥ ओढे हैं क
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जामो बन्यो जरतासको | Jamo Banyo Jartasko
Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार
जामो बन्यो जरतासको सुन्दरलाल बन्द अरु जरद किनारी । झालरदार बन्यो पटुका झटक्यो दिल ता बीच जात कहां री
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बंकचितवन चिते | Bankchitavan Chite
Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार
बंकचितवन चिते रसिकतन गुमप्रीतिको भेद जनायो ॥ मुखकी रुखाई मिटत नहीं कबहू हृदयको प्रेम कैसे जात दुरायो
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भलें पाउधारें मेरे | Bhalen Paudhare Mere
Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार
भलें पाउधारें मेरे अंगना यशोदाके छगनमगना ॥ जो पगधरो मेरी अखियन पर हों बलबलजाऊ न्योछावरकरो हारचीर कंग
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आधो मुखनीलाम्बरसो | Aadho Mukhneelambarso
Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार
आधो मुखनीलाम्बरसो ढांप्योविथुरी अलके सोहे ॥ एक दिशामानों मकरचांदनी एकदिशा घनबिजरी कोंधत हसे हरें मनम
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बहुत प्रसन्न भये | Bahut Prasann Bhaye
Todi · टोडी · Shitakal Ke Pad Shringar · शीतकाल के पद - शृंगार
बहुत प्रसन्न भये पियप्यारी टोडीराग वेणुधरगायो ॥ सुरसंगीत बधानमधुरस्वर ऐसो अद्भुत भेद बनायो ॥१॥ बीन त
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जेवत कान्ह करत | Jevat Kanh Karat
Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
जेंवत कान्ह करत किलकारी ॥ भर बुकटा मेलत मुखभीतर कर पकरत महतारी ॥१॥ फूक फूक दूध मुख लावत डारत बाहां उ
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सुतहि जिमावत यशोदा | Sutahi Jimavat Yashoda
Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
सुतहि जिमावत यशोदा मैया ॥ सानत कोर मधुर मृदु मीठो देमुख लेत बलैया ॥१॥ खेलनकों उठ उठ भाजत हें राखतहैं
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लालको रोटी और वडी | Lalko Roti Aur Vadi
Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
लालको रोटी और वडी ॥ हींग लगाय मिरच पुटदीनो करुबे तेल तरी ॥१॥ आन कनिक द्वयविरिया छानी बेलन बेल करी पत
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लालको मीठी खीर जो भावे | Lalko Mithi Khir Jo Bhave
Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
लालको मीठी खीर जो भावे ॥ बेला भर भर लावत यशोदा बूरो अधिक मिलाव ॥१॥ कनिया लियें यशोदा ठाढी रुचिकर कोर
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क्योरी तूं द्वारे | Kyori Tun Dvare
Asavari · आसावरी · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
क्योंरी तूं द्वारे बोली आय ॥ तेरो बोल सुनत मेरो मोहन भोजन कछू न खाय ॥१॥ दोर चले भींतरते बाहिर उखट्यो
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हरि भोजन करत | Hari Bhojan Karat
Asavari · आसावरी · Shitakal Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के भोजन के पद
हरि भोजन करत विनोदसों ॥ करकर कोर मुखारविंद में देंत यशोदा मोदसों ॥१॥ मधु मेवा पकवान मिठाई दूध दह्यो
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आज गोपाल पाहुने | Aaj Gopal Pahune
Dhanashri · धनाश्री · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद
आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन अघायरी ॥ सुंदरवदन कमलकी शोभा मोमन रह्योहे लुभायरी ॥१॥ के निरखूं के टहल
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कछु भूलगईहों परोसत | Kachhu Bhulgaihon Parosat
Asavari · आसावरी · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद
कछु भूलगईहों परोसत फिरलाई मुसकाई ॥ झूठे मिसकर आयो चाहत सोतो सांची भईहो लालरी झरहेत केंहभाई ॥१॥ जो भू
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चित्र सराहत चितवत | Chitra Sarahat Chitavat
Todi · टोडी · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद
चित्र सराहत चितवत मुरमुर गोपी बहुत सयानी ॥ टक झकमें झुक वदन निहारत अलक संवारत पलक नमारत जान गई नंदरा
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आज हमारे भोजन | Aaj Hamare Bhojan
Sarang · सारंग · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद
आज हमारे भोजन कीजे ॥ बहुत भांत पकवान मिठाई षटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घी खिचरी और खोवा स्याम सलोने ली
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जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी | Jevant Shrivrishbhananandini
Sarang · सारंग · Shitakal Shri Vraj Bhaktan Ke Bhojan Ke Pad · शीतकाल के श्री व्रज भक्तन के भोजन के पद
जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी कान्हकुंवरकी परछाई ॥ जोड़ जोड़ व्यंजन भावत रुचिसों सोइ सोइ सब ललिता लेआई ॥१॥
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खंभकी ओझल ठाढो | Khambhki Ojhal Thadho
Todi · टोडी · Bhog Sarayave Ke Pad · भोग सरायये के पद
खंभकी ओझल ठाढो सुबल प्रवीण सखा करमें जटितडबा वीरासों भर्यो जेमतहेंरी मोहन ॥ परदापरे तिवारी तीन्यो ता