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मंगल रूप यशोदानंद | Mangal Roop Yashodanand
Bhairav · भैरव · Ushnakal Mangala Aarti Ke Pad · उष्णकाल मंगला आरती के पद
मंगल रूप यशोदानंद ॥ मंगल मुकुट कानन में कुंडल मंगल तिलक विराजत चंद ॥१॥ मंगल भूषण सब अंग सोहत मंगल मू
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मंगल आरती गोपालकी माई | Mangal Aarti Gopalki Maai
Bhairav · भैरव · Ushnakal Mangala Aarti Ke Pad · उष्णकाल मंगला आरती के पद
मंगल आरती गोपालकी माई ॥ नित्यप्रति मंगल होत निरख मुख चितवन नयन विशालकी ॥१॥ मंगल रूप स्याम सुंदरको मं
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भोर भये देखो | Bhor Bhaye Dekho
Bhairav · भैरव · Ushnakal Mangala Aarti Ke Pad · उष्णकाल मंगला आरती के पद
भोर भये देखो श्रीगिरिधरको कमलमुख ॥ मंगल आरती करो प्रातही नयन निरखत होत परम सुख ॥१॥ लोचयन विशाल छबि
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सुमरो नटनागर वर | Sumaro Natnagar Var
Bhairav · भैरव · Mangala Darshan Ke Pad · मंगला दर्शन के पद
सुमरो नटनागर वर सुंदर गोपाललाल ॥ सबदुख मिटजैहें बे चिंतित लोचन विशाल ॥१॥ अलकन की झलकन लख पलकन गति भू
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नागरी नंदलाल संग | Nagari Nandlal Sang
Bhairav · भैरव · Mangala Darshan Ke Pad · मंगला दर्शन के पद
नागरी नंदलाल संग रंग भरीराजें ॥ स्यामअंस बाहुदिये कुंवरि पुलक पुलकहिये मंदमंद हसन प्रिये कोटिमदन लाज
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बांकी भौंह टेढ़ी | Banki Bhaunh Tedhi
Bibhas · बिभास · Mangala Darshan Ke Pad · मंगला दर्शन के पद
बांकी भौंह टेढ़ी पागपियरे अनुराग पियरे पिछोर मध्य झलकत तनियां ॥ निसके उनीदे नयन तोतरात मीठेबेन काजर
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श्री वृंदावन नवनिकुंज | Shri Vrindavan Navnikunj
Bibhas · बिभास · Mangala Darshan Ke Pad · मंगला दर्शन के पद
श्री वृंदावन नवनिकुंज ठाढे उठभोर ॥ बाहें जोर बदन भोर हसत सुरत रतिसकुचत पुनकछु लजात नयन कोर ॥१॥ कबहुं
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स्यामसिंधुअंग चंदनादिगंध | Syamsindhuang Chandanadigandh
Bibhas · बिभास · Mangala Darshan Ke Pad · मंगला दर्शन के पद
स्यामसिंधुअंग चंदनादिगंध पूजत पटपीत मदन लजावत सुभगतरंगमा ॥ युवती सरिता अनंत मिलत शोभा समंत गुणसहित ग
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प्रातकाल प्यारेलाल आवनी | Pratkal Pyarelal Aavani
Bhairav · भैरव · Khandita Ke Pad · खण्डिता के पद
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी ॥ उरसोहे मरगजीमाल डगमगी सुदेशचालचरण कंज मदनजीत करतगामिनी ॥१॥ प्रियाप्रेम
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भोरही डगमगत जीत | Bhorahi Dagmagat Jit
Bhairav · भैरव · Khandita Ke Pad · खण्डिता के पद
भोरही डगमगत जीत मन्मथ चले ॥ सकल रजनी जगे नेक नहीं पल लगे अरुण आलस वलित नयन लागत भले ॥१॥ कितव नागरनटच
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करमोदकमाखनमिश्रीले | Karmodakmakhanmishrile
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
करमोदकमाखनमिश्रीले कुवरकेसंग डोलत नंदरानी ॥ मिसकर पकर न्हवायोचाहतबोलत मधुरी बानी ॥१॥ कनकपथ आंगनमें र
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प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी | Pratasmenuth Yashomatijanani
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
प्रातसमेंउठ यशोमतिजननी गिरीधरसुत को उबटन्हवावे ॥ करतशुंगार वसन भूषणले फूलन रुचिरुचिपागबनावे ॥१॥ छूटे
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कहा ओछीहवैजैहैजात | Kaha Ochhihavaijaihaijat
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
कहा ओछीह्वैजैहैजात ॥ सुनयशुमति तुमबडरन आगेंजोछिन एक बितात ॥१॥ अतिनीको सतभावभलाई जो यातनतेकीजे ॥ मायब
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यशुमति जबही कहो | Yashumati Jabahi Kaho
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
यशुमति जबही कह्यो न्हवावनरोय गयेहरि लोटतरी ॥ तेलउबटनोंले आगेंधर लालहीचोटीपोततरी ॥१॥ मैंबलजाऊ इनमोहनक
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मंजनकरत गोपालचौकीपर | Manjankarat Gopalchaukipar
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
मंजनकरत गोपालचौकीपर ॥ अतिसुगंधफुलेलउबटनो विविधभांत कीसोंझराखीधर ॥१॥ प्रथमन्हवाय फिरकेसरचर्चत शोभित अ
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करतशृंगार मैयामनभावत | Karatshringar Maiyamanbhavat
Devagandhar · देवगंधार · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
करतशृंगार मैयामनभावत ॥ सीतलजल उष्ण करराख्यो लेलालन को बैठ न्हवावत ॥१॥ अंगअंगोछ चौकीबैठारत प्रथमहीले
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आज मोही आगम | Aaj Mohi Aagam
Bilaval · बिलावल · Abhyang Ke Pad · अभ्यंग के पद
आज मोही आगम अगम जनायो ॥ सोंधों छानी अरगजा चंदन आंगन भवन लीपायों ॥१॥ आगम आवन जान प्रीतम कों गोपीजन मं
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आवो गोपाल शृंगार बनाऊं | Aavo Gopal Shringar Banau
Bilaval · बिलावल · Shringar Dharayave Ke Aur Darshan Ke Pad · शृंगार धरायवेके और दर्शन के पद
आवो गोपाल शृंगार बनाऊं ॥ विविधसुगंधन करो उबटनो पाछे उष्णजल लेजु न्हवाऊं ॥१॥ अंगअगोछ गुहूं तेरी बेनी
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माईरी प्रातकाल नंदलाल | Mairi Pratkal Nandlal
Bilaval · बिलावल · Shringar Dharayave Ke Aur Darshan Ke Pad · शृंगार धरायवेके और दर्शन के पद
माईरी प्रातकाल नंदलाल पागबंधावत बालदिखावत दर्पण भालरह्योलसि ॥ सुंदर नवकरनबीच मंजुमुकरकीछबि रहीफबिमान
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भोगशृंगारयशोदामैया | Bhogshringaryashodamaiya
Bilaval · बिलावल · Shringar Dharayave Ke Aur Darshan Ke Pad · शृंगार धरायवेके और दर्शन के पद
भोगशृंगारयशोदामैया श्रीविट्ठलनाथके हाथ को भावें ॥ नीकेंन्हायशृंगारकरतहै आछीरुचिसों मोहिपागबंधावें ॥१
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खुल्योहेमुकेसीचीरा | Khulyohemukesichira
Bilaval · बिलावल · Shringar Dharayave Ke Aur Darshan Ke Pad · शृंगार धरायवेके और दर्शन के पद
खुल्योहेमुकेसीचीरा कलगीनगजटितहीरा दिंगसिरपेचललित संभार्योहै ॥ जंघाऊपर कमलकाछिनी कंचन के विविधरंगएकछो
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पीतांबर को चोलना | Pitambar Ko Cholna
Bilaval · बिलावल · Shringar Dharayave Ke Aur Darshan Ke Pad · शृंगार धरायवेके और दर्शन के पद
पीतांबर को चोलना पहरावतमैया ॥ कनकछाप तापरधरी झीनी एक तनैया ॥१॥ लालइजारचुनायकी औरजरकसी चीरा ॥ पहुँचीर
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सुंदरमुख पर वारो | Sundarmukh Par Varo
Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद
सुंदरमुख पर वारो टोंना ॥ बेनीबारनकीमुदुवेना ॥१॥ खंजननयनन अंजसोहे भ्रोंहनलोयन लोना ॥ तिरछीचितवनयोंछबि
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ये दोऊनागर ढोटा | Ye Dou Nagar Dhota
Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद
ये दोऊनागर ढोटा माईकौनगोपकेबेटा ॥ इनकीबात कहा कहों तोसों गुणनबड़े देखन के छोटा ॥१॥ अग्रज अनुजसहोदरजो
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आजबन्योनवरंग पियारो | Aajbanyonvarang Piyaro
Bilaval · बिलावल · Shringar Sanmukh Ke Pad · शृंगारसन्मुख के पद
आजबन्योनवरंग पियारो ॥ व्रजवनितामिल क्योंननिहारो ॥१॥ लटपटीपाग महावरपागे ॥ कुंवरमनावत अतिबडभागे ॥२॥ नी