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महरि तोहिबडीकृपन | Mahari Tohibadikriipan
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
महरि तोहिबडीकृपन मैंपाई ॥ दूधदहीदियो जोविधातातोहि सोतोधरतछिपाई ॥१॥ बालकबहुत नहींरीतेरे एकहिकुंवरकन्ह
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दिनदिनदेन उराहनो | Dindindena Urahano
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
दिनदिनदेन उराहनो आवें ॥ यह ग्वालिनी जोवनमदमाती झूठेदोषलगावें ॥१॥ यह कहि भाजनधरेपराये कहामेरोमोहन पाव
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काहेआय नंदेखियेरानीजू | Kahe Aay Nandekhiyerani Ju
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
काहेआय नदेखियेरानीजू अपनेसुतकेकरम ॥ भाजन भवनएको नरह्यो कह्योतोआगें हंसपरीहै ऐसे जानेंको काहूकोमरम ॥१
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मैया मैं नाहीं माखन खायो | Maiya Main Nahin Makhan Khayo
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
मैया मैं नाहीं माखन खायो ॥ ख्यालपरे यह सखा सबै ले मेरे मुख लपटायो ॥१॥ देखतही छीकेपरभाजन ऊंचेधरलटकायो
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ग्वालिनी आपतनदेख | Gvalini Aapatan Dekh
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
ग्वालिनी आपतनदेख मेरे लालतनदेखरी भीत ज्योंहोय तोचित्रअबरेखरी ॥ध्रु.॥ मेरोललनहै पांचहीबरसको रोयकेंअजह
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सुनोथों अपनेसुतकी | Sunothon Apnesutki
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
सुनोधों अपनेसुतकी बात ॥ देखयशोमति कान नराखत लेमाखन दधिखात ॥१॥ भाजनभान डारसबगोरस वाटत हैं करपात ॥ जोब
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महरितुम ब्रजचाहत | Mahari Tum Vraj Chahat
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
महरितुम ब्रजचाहत कछुओर ॥ बात एक मैंकहतनाहीं आपलगावत झोर ॥१॥ जहांबसे पतनहीआपनी तजनकह्योसोठौर ॥ सुतकेभ
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लोगनकितहूँ झूझतबोरी | Logan Kitahun Jhujhat Bori
Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद
लोगनकितहूं झूझतबोरी ॥ दधिमाखन गठबंधनदेराखत करत-फिरतसुतचोरी ॥१॥ जाकेघरकीहानिहोतनित सोनहींआनकहेंरी ॥ ज
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यशोदामथमथप्यावत धैया | Yashoda Mathmath Pyavat Dhaiya
Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद
यशोदामथमथप्यावत धैया ॥ कर तबकडी धरतहैं आगें रुचिसोंलेत कन्हैया ॥१॥ बहोर धरत हरि लेत है पुनिपुनिसुंदर
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तुमकों लालकर्योहैधैया | Tumkon Lal Karyo Hai Dhaiya
Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद
तुमकों लालकर्योहैधैया ॥ आवोबेग जातमुरझानो बोलतयशोदा मैया ॥१॥ आनपतूकीपातनकीकर फिरलैहैंबलदाऊभैया ॥ बाव
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करत घैया भरत दोना | Karat Ghaiya Bharata Dona
Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद
करत घैया भरत दोना ग्वालनको देतरी मनमोहन ॥ हरखत निरखत निरख निरख फूल जब उपरत चलत सब दोना ॥१॥ उफनत उपफे
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दुहि दुहि लावत | Duhi Duhi Lavat
Asavari · आसावरी · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद
दुहि दुहि लावत धोरी गैया । कमल नैनको अति भावत है मथि मथि प्यावत घैया ॥ मोहन भूख अधिक जबलागी छाक बांट
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मैया दाऊ बहुत खिजायो | Maiya Dau Bahut Khijayo
Bilaval · बिलावल · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद
मैया दाऊ बहुत खिजायो ॥ मोसों कहत मोलको लियो तोय यसोमति कब जायो ॥१॥ कहा करों यह रसिके मारें खेलनहू नह
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मैया निपटबुरो बलदाऊ | Maiya Nipatburo Baldau
Bilaval · बिलावल · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद
मैया निपटबुरो बलदाऊ ॥ कहत है वन बडोतमासो सब लरकाजुर-आऊ ॥१॥ मोहूको चुचकारचलेलै जहां बहुतबनझाऊ ॥ बाँही
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खेलन अब मेरी | Khelan Ab Meri
Sarang · सारंग · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद
खेलन अब मेरी जाय बलैया ॥ जबही मोहि देखत लरिकनसंग तबही खीजत है बलभैया ॥१॥ मोसों कहे तात बसुदेवको देवक
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देखरी रोहणीमैया | Dekhri Rohani Maiya
Sarang · सारंग · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद
देखरी रोहणीमैया कैसेहैं बलदाऊभैया यमुनाकेतीर मोहि झुझुवावतायोरी ॥ सुबल श्रीदामासाथ हँसहँस बूझतवात आप
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हरिकों टेरत फिरत | Harikon Terat Phirat
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥ आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥१॥ आज कलेऊ कियो प्रातही वछरा लेवन धाय
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तुमकों टेरटेर मैं | Tumkon Terter Main
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
तुमकों टेरटेर मैं हारी ॥ कहांजो रहे अबलो मनमोहन लेहोन छाक तुम्हारी ॥१॥ भूल परी आवत मारगमें क्योंहूं
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हरिजूको ग्वालिन भोजन | Harijuko Gvalin Bhojan
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
हरिजूको ग्वालिन भोजन लाई ॥ वृंदा विपिन विशद यमुनातट सुन ज्यों नार बनाई ॥१॥ सानसान दधिभात लियोहै सुखद
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वांट वांट सबहिन | Vant Vant Sabahin
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
वांट वांट सबहिन कों देत ॥ ऐसे ग्वालहरिहैं जो भावत शेष रहत सोई आपन लेत ॥१॥ आछोदूध सद्य धोरीको ओट जमाय
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आगें आउरी छकहारी | Aage Auri Chhakhari
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
आगें आउरी छकहारी ॥ जब तुम टेरे तबमैं बोली सुनी न टेर तिहारी ॥१॥ मैया छाक सवारे पठई तूं कित रही अवारी
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बिहारीलाल आई छाक | Biharilal Aai Chhak
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
बिहारीलाल आई छाक सलोनी ॥ अति अद्भुत पठई चंद्रावलि एक गांठ द्वै दोहनी ॥१॥ टेरत स्याम भुजा ऊंची कर गई
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बिहारीलाल आवहू आई | Biharilal Aavahu Aai
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
बिहारीलाल आवहू आई छाक ॥ गैया दूरगईहै मोहन वगदावो दे हांक ॥१॥ अर्जुन भोज सुबल श्रीदामा मधुमंगल एक ताक
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तुमको मैया छाक | Tumko Maiya Chhak
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
तुमकों मैया छाक पठाई ॥ टेरत फिरत ग्वालनंदलाल कित तुम दोऊ भाई ॥१॥ नईनई भांत नये डवरनमें अपने सिर धर आ
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लालन केतिक दूइ | Lalan Ketik Dui
Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद
लालन केतिक दूइ बन आवत ॥ यशोमति औसेर करतहैं ढिंगही क्यों न चरावत ॥१॥ हार परीहों यहां लो आवत घोस चढ्य