Pushti Kirtan

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  1. महरि तोहिबडीकृपन | Mahari Tohibadikriipan

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    महरि तोहिबडीकृपन मैंपाई ॥ दूधदहीदियो जोविधातातोहि सोतोधरतछिपाई ॥१॥ बालकबहुत नहींरीतेरे एकहिकुंवरकन्ह

  2. दिनदिनदेन उराहनो | Dindindena Urahano

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    दिनदिनदेन उराहनो आवें ॥ यह ग्वालिनी जोवनमदमाती झूठेदोषलगावें ॥१॥ यह कहि भाजनधरेपराये कहामेरोमोहन पाव

  3. काहेआय नंदेखियेरानीजू | Kahe Aay Nandekhiyerani Ju

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    काहेआय नदेखियेरानीजू अपनेसुतकेकरम ॥ भाजन भवनएको नरह्यो कह्योतोआगें हंसपरीहै ऐसे जानेंको काहूकोमरम ॥१

  4. मैया मैं नाहीं माखन खायो | Maiya Main Nahin Makhan Khayo

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    मैया मैं नाहीं माखन खायो ॥ ख्यालपरे यह सखा सबै ले मेरे मुख लपटायो ॥१॥ देखतही छीकेपरभाजन ऊंचेधरलटकायो

  5. ग्वालिनी आपतनदेख | Gvalini Aapatan Dekh

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    ग्वालिनी आपतनदेख मेरे लालतनदेखरी भीत ज्योंहोय तोचित्रअबरेखरी ॥ध्रु.॥ मेरोललनहै पांचहीबरसको रोयकेंअजह

  6. सुनोथों अपनेसुतकी | Sunothon Apnesutki

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    सुनोधों अपनेसुतकी बात ॥ देखयशोमति कान नराखत लेमाखन दधिखात ॥१॥ भाजनभान डारसबगोरस वाटत हैं करपात ॥ जोब

  7. महरितुम ब्रजचाहत | Mahari Tum Vraj Chahat

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    महरितुम ब्रजचाहत कछुओर ॥ बात एक मैंकहतनाहीं आपलगावत झोर ॥१॥ जहांबसे पतनहीआपनी तजनकह्योसोठौर ॥ सुतकेभ

  8. लोगनकितहूँ झूझतबोरी | Logan Kitahun Jhujhat Bori

    Bilaval · बिलावल · Urahane Ke Pad · उराहने के पद

    लोगनकितहूं झूझतबोरी ॥ दधिमाखन गठबंधनदेराखत करत-फिरतसुतचोरी ॥१॥ जाकेघरकीहानिहोतनित सोनहींआनकहेंरी ॥ ज

  9. यशोदामथमथप्यावत धैया | Yashoda Mathmath Pyavat Dhaiya

    Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद

    यशोदामथमथप्यावत धैया ॥ कर तबकडी धरतहैं आगें रुचिसोंलेत कन्हैया ॥१॥ बहोर धरत हरि लेत है पुनिपुनिसुंदर

  10. तुमकों लालकर्योहैधैया | Tumkon Lal Karyo Hai Dhaiya

    Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद

    तुमकों लालकर्योहैधैया ॥ आवोबेग जातमुरझानो बोलतयशोदा मैया ॥१॥ आनपतूकीपातनकीकर फिरलैहैंबलदाऊभैया ॥ बाव

  11. करत घैया भरत दोना | Karat Ghaiya Bharata Dona

    Bilaval · बिलावल · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद

    करत घैया भरत दोना ग्वालनको देतरी मनमोहन ॥ हरखत निरखत निरख निरख फूल जब उपरत चलत सब दोना ॥१॥ उफनत उपफे

  12. दुहि दुहि लावत | Duhi Duhi Lavat

    Asavari · आसावरी · Dhaiya Ke Pad · धैया के पद

    दुहि दुहि लावत धोरी गैया । कमल नैनको अति भावत है मथि मथि प्यावत घैया ॥ मोहन भूख अधिक जबलागी छाक बांट

  13. मैया दाऊ बहुत खिजायो | Maiya Dau Bahut Khijayo

    Bilaval · बिलावल · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद

    मैया दाऊ बहुत खिजायो ॥ मोसों कहत मोलको लियो तोय यसोमति कब जायो ॥१॥ कहा करों यह रसिके मारें खेलनहू नह

  14. मैया निपटबुरो बलदाऊ | Maiya Nipatburo Baldau

    Bilaval · बिलावल · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद

    मैया निपटबुरो बलदाऊ ॥ कहत है वन बडोतमासो सब लरकाजुर-आऊ ॥१॥ मोहूको चुचकारचलेलै जहां बहुतबनझाऊ ॥ बाँही

  15. खेलन अब मेरी | Khelan Ab Meri

    Sarang · सारंग · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद

    खेलन अब मेरी जाय बलैया ॥ जबही मोहि देखत लरिकनसंग तबही खीजत है बलभैया ॥१॥ मोसों कहे तात बसुदेवको देवक

  16. देखरी रोहणीमैया | Dekhri Rohani Maiya

    Sarang · सारंग · Baldevji Ke Pad · बलदेवजी के पद

    देखरी रोहणीमैया कैसेहैं बलदाऊभैया यमुनाकेतीर मोहि झुझुवावतायोरी ॥ सुबल श्रीदामासाथ हँसहँस बूझतवात आप

  17. हरिकों टेरत फिरत | Harikon Terat Phirat

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥ आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥१॥ आज कलेऊ कियो प्रातही वछरा लेवन धाय

  18. तुमकों टेरटेर मैं | Tumkon Terter Main

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    तुमकों टेरटेर मैं हारी ॥ कहांजो रहे अबलो मनमोहन लेहोन छाक तुम्हारी ॥१॥ भूल परी आवत मारगमें क्योंहूं

  19. हरिजूको ग्वालिन भोजन | Harijuko Gvalin Bhojan

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    हरिजूको ग्वालिन भोजन लाई ॥ वृंदा विपिन विशद यमुनातट सुन ज्यों नार बनाई ॥१॥ सानसान दधिभात लियोहै सुखद

  20. वांट वांट सबहिन | Vant Vant Sabahin

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    वांट वांट सबहिन कों देत ॥ ऐसे ग्वालहरिहैं जो भावत शेष रहत सोई आपन लेत ॥१॥ आछोदूध सद्य धोरीको ओट जमाय

  21. आगें आउरी छकहारी | Aage Auri Chhakhari

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    आगें आउरी छकहारी ॥ जब तुम टेरे तबमैं बोली सुनी न टेर तिहारी ॥१॥ मैया छाक सवारे पठई तूं कित रही अवारी

  22. बिहारीलाल आई छाक | Biharilal Aai Chhak

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    बिहारीलाल आई छाक सलोनी ॥ अति अद्भुत पठई चंद्रावलि एक गांठ द्वै दोहनी ॥१॥ टेरत स्याम भुजा ऊंची कर गई

  23. बिहारीलाल आवहू आई | Biharilal Aavahu Aai

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    बिहारीलाल आवहू आई छाक ॥ गैया दूरगईहै मोहन वगदावो दे हांक ॥१॥ अर्जुन भोज सुबल श्रीदामा मधुमंगल एक ताक

  24. तुमको मैया छाक | Tumko Maiya Chhak

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    तुमकों मैया छाक पठाई ॥ टेरत फिरत ग्वालनंदलाल कित तुम दोऊ भाई ॥१॥ नईनई भांत नये डवरनमें अपने सिर धर आ

  25. लालन केतिक दूइ | Lalan Ketik Dui

    Sarang · सारंग · Nitya Chhak Ke Pad · नित्य छाक के पद

    लालन केतिक दूइ बन आवत ॥ यशोमति औसेर करतहैं ढिंगही क्यों न चरावत ॥१॥ हार परीहों यहां लो आवत घोस चढ्‌य