Hon Vrajavasinako Maga
हों व्रजवासिनको मगा
हों व्रजवासिनको मगा । श्रीवल्लभराज गोप कुल मंडन ए दोउ घरकों जगा ॥१॥ नंदराय एक दियो पिछौरा तामें कनक तगा । श्रीवृषभान दि...
Raag
Read 30 Pushtimargiya kirtans in Dhanashri · धनाश्री with original Braj Bhasha text and English meanings.
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हों व्रजवासिनको मगा
हों व्रजवासिनको मगा । श्रीवल्लभराज गोप कुल मंडन ए दोउ घरकों जगा ॥१॥ नंदराय एक दियो पिछौरा तामें कनक तगा । श्रीवृषभान दि...
आज गोपाल हमहींको
आज गोपाल हमहींकों दैरी । देखों बदन कमल नैनन भरि पुनि तू लाल आपनौ लैरी ॥१॥ अति कोमल कर चारु सरोजें अधर दशन नासा सोहैरी ।...
पैजनी पग मनोहर
पैंजनी पग मनोहर । चलत श्याम बाजत राजत निरखि विनोद मगन मोहे सुर ॥१॥ अरु मन मुदित यशोदा जननी पाछें फिरत गहाय अँगुरी कर ।...
माई लैन देहु
माई लैंन देहु जो मेरे लालहि भावै । दधि माखन चौगुनो दैहुँगी सुतके लेखें जाकौ जितनौ आवै ॥१॥ पालनें झूलै कुलदेव अराधे जतन...
अँगुरिया छाँडि अरग
अँगुरिया छाँडि अरग थरग । नूपुर बाजत त्यौं त्यौं धरनि धरत पग ॥१॥ कबहुंक यशोदामाई भुजा पसारत हँसि उगमगाइकें उलटि भरत डग ।...
लाल तेरे मुख
लाल तेरे मुख ऊपर वारी । बलि केशव मेरे नयनन लागै रोग बलाय तुम्हारी ॥१॥ सुंदरता कौ पार न पावत रूप देखि महतारी । उर अंतर आ...
लाल मैं या
लाल मैं या छबि ऊपर बारी । बलि गोपाल लगै इन नयनन रोग बलाय तुम्हारी ॥१॥ कुटिल अलक मोहन मुख बिहँसन भ्रकुटी बिकट लिलारी । म...
झूली झूली राजकुमारी
झूली झूली राजकुमारी छबीली प्यारी । श्रीकीरति प्रान आधार छबीली हो प्यारी ॥ सब सुंदरताकी सार छबीली हो प्यारी ॥टेक॥ नवल कन...
हरिको वामन रूप
हरिको वामन रूप बनायौ ॥ नंदराय यह रूप बनायौ ॥ नंदराय यह मानी जयंति उबटि सुगंध न्हवायौ ॥१॥ शिर किरीट पीतांबर काछनी आभूषन...
वामन आये बलिपैं
वामन आये बलिपैं माँगन ॥ अति अनूप रूप कहा कहिये ठाढ़े पौरके आँगन ॥१॥ पढ़त वेद धुनि कहत सुकंठन गावत मधुरे रागन ॥ सुनत राग...
सूधे न बोल
सूधे न बोल कहा इतरानो ॥ या ब्रज में कौन तें कौन बड़ो कहा रंक कहा रानो ॥१॥ कोन टेव दिन दिन नित प्रति की तकत अंग बिरानो ॥...
नंद के लाल
नंद के लाल गोवर्धन धार्यो । इन्द्र कोप कियो हम ऊपर पठए सीसाई मेघ सब हंकार्यो ॥१॥ सात घोस मूसलधारा बरस्यो एक छिन बीच न प...
श्रीवल्लभकें आनंद भयो
श्रीवल्लभकें आनंद भयो प्रकट भये श्रीविठ्ठलनाथ ॥ आनंदे व्रजबासी सकल गुण भक्त मित्र मिल गावहिं साथ ॥ आनंदे त्रैलोक अमरगण...
श्री विठ्ठलजूके दर्शन
श्री विठ्ठलजूके दर्शन देखत होत परमसुख आनंद ॥ प्रकट भये संतनहित कारण सकल कला वृन्दावन चंद ॥१॥ परम उदार कृपाल कृपानिधि रस...
झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय
झूलें श्रीविठ्ठलनाथ मणिमय पालने ॥ निजजन किये सनाथ लालन लालने ॥ ध्रुव ॥ रमकि झमकि घुंघरु घंटावलि कनक जटित मनिहीर ॥ रत्न...
गोपाल माई खेलत
गोपाल माई खेलत हें चोगान ॥ व्रज कुमार बालक संग लीने वृन्दावन मैदान ॥१॥ चंचल बाजि नचावत आवत होड लगावत आन ॥ सबही हस्त ले...
गोपी नेनसों नेन
गोपी नेनसों नेन मिलावत ॥ मदन गोपाल छांड ग्वालनसों सन्मुख गेंद चलावत ॥१॥ लेय उठाय राधिका तिहिछिन गोपीजन मुसक्यावत ॥ लीनी...
लाल कछु कीजे
लाल कछु कीजे भोजन तिलतिल कारी हों वारी हो। अब जाय बेठो दोऊ भैया नंदबाबाकी थारीहो ॥१॥ कहियतहे आज संक्रांति भलोदिन करिके...
हिंडोरनाहो रोप्यो नंद अवास
हिंडोरनाहो रोप्यो नंद अवास ॥ हिंडोरनाहो मणिमय भूमि सुवास ॥ हिंडोरनाहो विश्वकर्मा सूत्रधार ॥ हिंडोरनाहो कंचन खंभ सुढार ॥...
श्रीवृन्दाविपिन सुहावनों रंग
श्रीवृन्दाविपिन सुहावनों रंग छायो आज ॥ झूलत गिरिधरलाल सुरंग हिंडोरना ॥ रंग छायो आज ॥धु० ॥ श्रीयमुना पुलिन सुहावनो ॥रंग॥...
लालही लाल के
लालही लाल के लालही लोचन लालही के मुख लालही बीरा ॥ लाल बनी कटि काछनी लाल की लाल के शीश मुकेसी चीरा ॥१॥ लालही बागो सोहत स...
जेवत कान्ह करत
जेंवत कान्ह करत किलकारी ॥ भर बुकटा मेलत मुखभीतर कर पकरत महतारी ॥१॥ फूक फूक दूध मुख लावत डारत बाहां उछारी तैसें ही चपल ह...
सुतहि जिमावत यशोदा
सुतहि जिमावत यशोदा मैया ॥ सानत कोर मधुर मृदु मीठो देमुख लेत बलैया ॥१॥ खेलनकों उठ उठ भाजत हें राखतहैं बोहोरैया ॥ आवो चिर...
लालको रोटी और वडी
लालको रोटी और वडी ॥ हींग लगाय मिरच पुटदीनो करुबे तेल तरी ॥१॥ आन कनिक द्वयविरिया छानी बेलन बेल करी पतरी ॥ कटहरियाप्रभुको...
लालको मीठी खीर जो भावे
लालको मीठी खीर जो भावे ॥ बेला भर भर लावत यशोदा बूरो अधिक मिलाव ॥१॥ कनिया लियें यशोदा ठाढी रुचिकर कोर बनावे ॥ ग्वालबाल व...
आज गोपाल पाहुने
आज गोपाल पाहुने आये निरखे नयन अघायरी ॥ सुंदरवदन कमलकी शोभा मोमन रह्योहे लुभायरी ॥१॥ के निरखूं के टहलकरूं एको नहिं बनत उ...
भोजन भली भांत
भोजन भली भांत हरि कीनो ॥ खट रस व्यंजन मठा सलोना मांगमांग हरि लीनो ॥१॥ हसत लसत परोसत नंदरानी बालकेलि रस भीनो ॥ परमानंद उ...
भोजनकर उठे दोऊ
भोजनकर उठे दोऊ भैया ॥ हस्त पखार सुद्ध अचमन कर बीरी लेहु कन्हैया ॥१॥ मातयशोदा करत आरती पुनपुन लेत बलैया ॥ परमानंददासको ठ...
अचमन कीजिये कृपानिधान
अचमन कीजिये कृपानिधान ॥ यमुनोदक कंचन झारी भरलाई चंद्रावली सुजान ॥१॥ पनवारों भक्तनकोंदीजे नारद तुंबरगान ॥ जेंवत युगल उठे...
अचवन करत लाडिली
अचवन करत लाडिली लाल । कंचन झारी गहत परस्पर श्री राधा गोपाल ॥१॥ जलमुखलेत हसत हसावत देख सखीन की ओर । राधा माधो खेलत रसभर...