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ब्रज में हरि होरी मचाई | Braj Men Hari Hori Machai
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
ब्रज में हरि होरी मचाई ॥ टेक ॥ इतते आई सुघर राधिका उततें कुंवर कन्हाई ॥ हिलमिल फाग परस्पर खेलें शोभा
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नेह लग्यो मेरो स्याम सुंदरसों | Neh Lagyo Mero Syam Sundarason
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
नेह लग्यो मेरो स्याम सुंदरसों ॥ टेक ॥ आयो वसंत सबी बन फूले खेतन फूलीहै सरसों ॥ में पीरी पियाके विरह
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माहि सब विधि रंगन रंगी | Mahi Sab Vidhi Rangan Rangi
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
माहि सब विधि रंगन रंगी निपट निडर व्है कें ॥ तकि मारी पिचकारी मो तन उर में आँन लगी ॥१॥ नयौ फागु खेलि
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भोर भये नंदलाल संग | Bhor Bhaye Nandalal Sang
Bhairav · भैरव · Basant Dhamar Ke Pad Mangala · बसंत धमार के पद मंगला
भोर भये नंदलाल संग लीयें ग्वालवाल फेंटन भरि लियें गुलाल बोलत मुख होरी ॥ केसरि भरि कलस साथ पिचकाई लिय
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रात फाग खेलि प्रात आए | Rat Phag Kheli Prat Aye
Bhairav · भैरव · Basant Dhamar Ke Pad Mangala · बसंत धमार के पद मंगला
रात फाग खेलि प्रात आए लाल प्यारे ॥ अंग अंग मरगजे बागे सुंदर रंग सौंधे सुवास मंद मंद आवे अति उनीदे सि
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प्रात समे नंदलाल खेलति | Prat Same Nandalal Khelati
Bhairav · भैरव · Basant Dhamar Ke Pad Mangala · बसंत धमार के पद मंगला
प्रात समै नंदलाल खेलति हो हो होरी ॥ सीस पाग जु कर हि भरै रंग बोरी ॥१॥ सब नारि जुरि कैं आई नंद जु की
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प्रात काल नंदलाल कुंजन | Prat Kal Nandalal Kunjan
Bhairav · भैरव · Basant Dhamar Ke Pad Mangala · बसंत धमार के पद मंगला
प्रात काल नंदलाल कुंजन मधि डोलै ॥ सांवरे तन अलक मानौं अलि बोर कमल नैंन देखत दमकि मधुरे बैन हो हो हो
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वृंदावन बंसीबट के तट | Vrindavan Bansibat Ke Tat
Bhairav · भैरव · Basant Dhamar Ke Pad Mangala · बसंत धमार के पद मंगला
वृंदावन बंसीबट के तट ब्रजभूषण खेलत हे होरी ॥ अगर अबीर गुलाल उडावत नंदलाल वृषभान किशोरी ॥१॥ अपनेअपुने
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भोर भयो जागो | Bhor Bhayo Jago
Bibhas · बिभास · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
भोर भयो जागो नंदनन्द ॥ संग सखा ठाढे जगवंद ॥१॥ सुरभिन पय हित वत्स पिवाये ॥ पंछी यूथ दसोदिश धाये ॥२॥ म
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दधिके मतवारे कान्ह | Dadhike Matware Kanh
Bibhas · बिभास · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
दधिके मतवारे कान्ह खोलो क्यों न पलकें ॥ शिश मुकुटकी लटा छुटि और छुटि अलकें ॥१॥ सुरनरमुनि द्वार ठाडे
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बालकृष्ण जागहु मेरे | Balkrishna Jagahu Mere
Bhairav · भैरव · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
बालकृष्ण जागहु मेरे प्यारे ॥ध्रु.॥ बैठी सेज कहती है जननी । बार बार मुखकमल निहारे ॥१॥ सुन्यो वचन मात
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उठो मेरे लाल | Utho Mere Lal
Bhairav · भैरव · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
उठो मेरे लाल गोपाल लाडले रजनी वीती बिमल भयो भोर ॥ घर घर दधि मथत गोपिका द्विज करत वेदकी सोर ॥१॥ करो क
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जागो गोपाललाल दुहो | Jago Gopallal Duho
Bhairav · भैरव · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
जागो गोपाललाल दुहो धौरी गैयां ॥ सद्दूध मथ पीवो घैयां ॥१॥ भोर भयो वन तमचर बोले ॥ घरघर गोप वगर सब खोले
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जागिये गोपाललाल जननी | Jagiye Gopallal Janani
Bhairav · भैरव · Jagayave Ke Pad · जगायवे के पद
जागिये गोपाललाल जननी बलजाई ॥ उठो तात प्रात भयो रजनीको तिमिर गयो टेरत सब ग्वालबाल मोहनाकन्हाई ॥१॥ उठो
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करो कलेऊ रामकृष्ण | Karo Kaleu Ramkrishna
Bhairav · भैरव · Kaleu Ke Pad · कलेऊ के पद
करो कलेऊ रामकृष्ण मिल कहत यशोदा मैया ॥ पाछें वछ ग्वाल सब लेकें चलो चरावन गैया ॥१॥ पायस सिता घृत सुरभ
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जयति आभीर नागरी | Jayati Abhir Nagari
Ramakali · रामकली · Kaleu Ke Pad · कलेऊ के पद
जयति आभीर नागरी प्राणनाथे ॥ जयति व्रजराज भूषण यशोमति ललन देत नवनीत मिश्री सुहाथे ॥१॥ जयति पातपर भात
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मैया मोहि माखन | Maiya Mohi Makhan
Ramakali · रामकली · Kaleu Ke Pad · कलेऊ के पद
मैया मोहि माखन मिश्री भावे ॥ मीठो दधि मिठाई मधु घृत अपनो करसों क्यों न खवावे ॥१॥ कनक दोहनी दे कर मेर
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लाल तोहे दुलहनि | Lal Tohe Dulhani
Malakos · मालकोस · Kaleu Ke Pad · कलेऊ के पद
लाल तोहे दुलहनि लाउंगी छोटी ॥ चलो बेग अब करो कलेऊ माखन मिश्री रोटी ॥१॥ चंदन घसकें ऊबट न्हवाऊं तब बाढ
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छगन मगन प्यारे | Chhagan Magan Pyare
Bhairav · भैरव · Kaleu Ke Pad · कलेऊ के पद
छगन मगन प्यारे लाल कीजिये कलेवा ॥ छींकते सगरी दधि उखल चढ काढलेहो पहर लेहो झगुली फेंट बांधलेहो मेवा ॥
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ग्वालिन मांगत बसन | Gvalin Mangat Basan
Bibhas · बिभास · Vratacharya Ke Pad Mangala Shringar · व्रतचर्या के पद मंगला शृंगार
ग्वालिन मांगत बसन आपने ॥ सीतकाल जलभीतरठाडी आवतनहीं दयाने ॥१॥ तुम व्रजराज कुमार प्रबल अतिकोन परी यहबा
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ग्वालिनि आपनेचीरलेहो | Gvalini Aapnechirleho
Bibhas · बिभास · Vratacharya Ke Pad Mangala Shringar · व्रतचर्या के पद मंगला शृंगार
ग्वालिनि आपनेचीरलेहो ॥ जलतेनिकसनिहार नेकव्हैदोऊकरजोर आसीसलेहो ॥१॥ कितहुंसीतसहत ब्रजसुंदरिहोत असित- क
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तुमहरि हरे केवलचीर | Tumhari Hare Kevalchir
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad Mangala Shringar · व्रतचर्या के पद मंगला शृंगार
तुमहरि हरे केवलचीर ॥ करत मुरलीवसनभूषणपराक्रमकुलधीर ॥१॥ तुम आपजाय मनायलावत चतुरहलधरवीर ॥ मुरलीकाध्वनि
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मोहन देहो वसन | Mohan Deho Vasan
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad Mangala Shringar · व्रतचर्या के पद मंगला शृंगार
मोहन देहो वसन हमारे ॥ जाय कहों व्रजपतिजूके आगें आगें करतअनीतललारे ॥१॥ तुम व्रजराजकुमारलाडिले औरसबहिन
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अहो हरि हमहारी | Aho Hari Hamhari
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad Mangala Shringar · व्रतचर्या के पद मंगला शृंगार
अहो हरि हमहारी तुमजीते ॥ नागरनटपट देहो हमारे कांपतहै तनसीते ॥१॥ कानन कुंडल मुकुट बिराजत कान्हकुंवरके
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तिहारे बसन लेहो | Tihare Basan Leho
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
तिहारे बसन लेहो सुकुमारी तुम जल मांझ ऊधारी न्हाँई दोस लग्यो हे भारी ॥१॥ जलतें न्यारी होओ सबें तुम दो