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हमारे बसन देहो | Hamare Basan Deho
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
हमारे बसन देहो गिरधारी ईतनि दया तुमे नही आवत हम जल माझ ऊधारी ॥१॥ तुम ब्रजराज कुमार को डर कांपत हे अत
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केसे बने जमुना | Kese Bane Jamuna
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
केसे बने जमुना असनान ॥ नंदको सुत तीर बेठ्यो बड़ो चतुर सुजान ॥१॥ हारतोरे चीर फारे नेन चले चुराय ॥ काल
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अब कहा करि | Ab Kaha Kari
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
अब कहा करि हे सुनि मेरी सजनी लालन खेल अनोखो पायो ॥ रूप भर्यो ईत रात चपल अति अंग अंग मनमथ निरखि लजायो
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गौरी पति पूजत | Gauri Pati Pujat
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
गौरी पति पूजत व्रजनारि ॥ नेमधरम सों रहंत क्रिया जुत बहुत करत मनुहारी ॥१॥ यह कहेंत पति उमापति गिरिधर
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ब्रजललनार विसोंकर जोरें | Brajlalanar Visonkar Joren
Ramakali · रामकली · Vratacharya Ke Pad · वृत्तचर्या के पद
ब्रजललनार विसोंकर जोरें ॥ सीततन ही करत छेहोरितु त्रिविध काल जमुना जल खोरें ॥१॥ गौरी पति पूजन तप साधत
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मंजन कर कंचन | Manjan Kar Kanchan
Todi · टोडी · Abhyang Aur Shringar Darshan Ke Pad · अभ्यंग और शृंगार दर्शन के पद
मंजन कर कंचन चोकी पर बेठी बांधत केशन झरोरी रुचिर भुजन की उपमा अनोपम ललित करन विच झलकत चूरोरी ॥१॥ लाल
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सोधें न्हाय बेठी | Sodhen Nhay Bethi
Todi · टोडी · Abhyang Aur Shringar Darshan Ke Pad · अभ्यंग और शृंगार दर्शन के पद
सोंधें न्हाय बेठी पेहेरिपर भूषन जहां फूलवारी तहां सुकवत अलकें ॥ सो मास कलकरनख केससंभारत मानो उडगन मे
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मंजन करि चित्र | Manjan Kari Chitra
Todi · टोडी · Abhyang Aur Shringar Darshan Ke Pad · अभ्यंग और शृंगार दर्शन के पद
मंज्जन करि चित्र चौकी वेगी प्यारी जू सहचरी चित्र विचित्र शृंगार करावत रतन जटित मनिन कें आभूषन सोहत त
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आज अति शोभित | Aaj Ati Shobhit
Todi · टोडी · Kulhe Tiparo Ke Pad · कुल्हे टीपारो के पद
आज अति शोभित नंदकिशोर ॥ सिरपर कुल्हे टिपारो राजत बनीहे चन्द्रिका मोर ॥१॥ मल्लकाछ कटि बांध प्रीतपट अं
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नाचत गोविंद संग | Nachat Govind Sang
Todi · टोडी · Tiparo Ke Pad · टीपारो के पद
नाचत गोविंद संग सखा मिल आवत नंदन आनंद हीये । उडपति निरख नयन छब लाज्यो पाय पयोध स्वरूप किये ॥१॥ कोउ म
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कटि बरनी के | Kati Barani Ke
Todi · टोडी · Tiparo Ke Pad · टीपारो के पद
कटि बरनी के लटपटात पीत पट ॥ शीश टिपारो मोर चंदसो मिल धात प्रवाल विचित्र भेख नट ॥१॥ पचरंग छींट उदार ओ
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निर्तत रस दोऊ | Nirtat Ras Dou
Todaी · टोड़ी · Tiparo Ke Pad · टीपारो के पद
निर्तत रस दोऊ माई रंग ॥ सुलप संच गतिभेद ग्रस्तकिट धिकिट ध्रुमधुम धाजत मृदंग ॥१॥ कनक वरण टिपारो सिर क
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छबीलो लाल दुहत | Chhabilo Lal Duhat
Sarang · सारंग · Tiparo Ke Pad · टीपारो के पद
छबीलो लाल दुहत धेनु धोरी ॥ माथे कमलवरणको टिपारो ओढे पीतपिछोरी ॥१॥ कहारी कहूं कछु कहत न आवे डारी कठिन
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हीं बलिहारी आजकी | Hin Balihari Aajki
Sarang · सारंग · Tiparo Ke Pad · टीपारो के पद
हौं बलिहारी आजकी बानिक पर । श्वेत काछ काछे नंदनंदन श्वेत टिपारो सोहत सिर पर ॥१॥ नख सीख लौं सिंगार कह
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अखियां काहूकी न | Akhiyan Kahuki Na
Sarang · सारंग · Paga Ke Pad · पगा के पद
अखियां काहूकी न लगो ॥ सांवरो सो ढोरा काहुको ता सिर ग्वाल पगो ॥१॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोमरोम प्रत
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सुन्दर श्याम छबिलो | Sundar Shyam Chhabilo
Todi · टोडी · Paga Ke Pad · पगा के पद
सुन्दर श्याम छबिलो ढोटा डार गयो मोपे मदन ठगोरी । निर्तत गावत वेनु बजावत संग सखा हलधर की जोरी । कबहुं
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अरि ये कोन | Ari Ye Kon
Gori · गोरी · Paga Ke Pad · पगा के पद
अरि ये कोन छबीलो याके शीश पगा । सांवरे वरन अंग अंग सुंदर धर्यो हे शीश पगा ॥१॥ कुटिल अलक बदन पर राजत
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बनतें बने माई | Banten Bane Mai
Gori · गोरी · Paga Ke Pad · पगा के पद
बनतें बने माई आवत नंदनंदन शीश पगका । ओरे पीत पिछोई रूप रात जदुपति जगवंदन संध्या समें खिरकके द्वारे अ
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गोपके भेख गोपाल | Gopke Bhekh Gopal
Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा शृंगार के पद
गोपके भेख गोपाल गायन हेटा दुगन सुख देत । शिर सुभग फेंटा सखि परच रह्यो भ्रों पर पेच पचभास ढर लागत सोह
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फूग्यो फेंटा सखि | Phugyo Phenta Sakhi
Bilaval · बिलावल · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा शृंगार के पद
फूग्यो फेंटा सखि ललित लाल के शिश पर निरखी छबि माधुरी अखियां सिरातरी प्रेमकी बावरी हों सखी व्हे रही स
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लालके फेंटाअँटा अमेटा | Lalke Phentaatta Ameta
Gori · गोरी · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा शृंगार के पद
लालके फेंटा अेंठा अमेठा बन्यो फब्यो भ्रगुटीभाल पर नवल नंदलाल के आवत बनते बने सांझ सुरभिन मांझ । अटक
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पूत महेरको खिरक | Put Maherko Khirak
Hamir · हमीर · Phenta Shringar Ke Pad · फेंटा शृंगार के पद
पूत महेरको खिरक दोहावत गैया । संध्या समें बांधे फेंटा गरे गुंजमाल पहेरे तनिया ठाडे हें अधपैया ॥१॥ को
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आज पिय नैनबान | Aaj Piy Nainban
Malakos · मालकोस · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
आज पिय नैनबान सज मारी । दृष्टि परी तबतें नंदनंदन सुरत सुध न रही हमारी । भूषन बिचित्र बन्ये सब अंग अं
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अधिक रजनी मानी | Adhik Rajani Mani
Asavari · आसावरी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
अधिक रजनी मानी हो नंदलाल । दुलहनि संग बिराजत चित्रसारी सुंदर नेन विसाल ॥१॥ पीत दुमालो सुखद गुनमें दर
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ए दोऊ एक | E Dou Ek
Asavari · आसावरी · Dumala Ke Pad · दुमाला के पद
ए दोऊ एक रंग रंग गहरे रंग मजीठ । हौं वाके मन वे मेरे मन बस रहे आली री कहां करेगो बसीठ ॥१॥ पीत दुमालो