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तुम नंदमेहेरके लाल | Tum Nandameherake Lal
Bilaval · बिलावल · Daan Lila · दान लीला
तुम नंदमेहेरके लाल मोहन जान दै ॥ रानी जसुमति प्रान आधार ॥ मोहन जान दै ॥धृ.॥ श्रीगोवर्धनकी शिखरतें मो
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ठाढ़े लाल सखन मधि | Thadhe Lal Sakhan Madhi
Bilaval · बिलावल · Daan Lila · दान लीला
ठाढ़े लाल सखन मधि छबिसों दान केलि ब्रजवीथनि ठानी ॥ गोरस लै लै आवति सुंदरि बात करत सबहिन मनमानी ॥१॥ क
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दानही दान करी | Danahi Dan Kari
Bilaval · बिलावल · Daan Lila · दान लीला
दानही दान करी नकमानी कहा पर्यौ मेरे ख्याल लालरे । जो हम यह व्योहार छाँड़िदें दही महीकौ भये कहाँके दा
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मील पाच सात | Mil Pach Sat
Bilaval · बिलावल · Daan Lila · दान लीला
मील पाच सात निकसी दधि बेचन बीच मीले नंद नंदनरी॥ मुखचार तंबोल बड़ी अँखियाँ अलके भँवरे मन फंदनरी ॥१॥ म
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गोवर्धन गिरिधारी ठाढ़े | Govardhan Giridhari Thadhe
Asavari · आसावरी · Daan Lila · दान लीला
गोवर्धन गिरिधारी ठाढ़े दान हमारौ दीजै भामिनि ॥ साँमल पीतपट ओढ़ें ज्यों घनमें चमकत दामिनि ॥१॥ बग पंगत
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नवल किशोर नवल | Naval Kishor Naval
Bihag · बिहाग · Daan Ke Dinan Men Maan · दान के दिनन में मान
नवल किशोर नवल मृगनयनी नवल नेह तेरौ लाग रह्यौरी ॥ चल चलरी तोय स्याम बुलावत काहे न करत तू मेरौ कहौ री
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नंदनंदन दान निवेरत | Nandanandan Dan Niverat
Bilaval · बिलावल · Daan Ke Dinan Men Maan · दान के दिनन में मान
नंदनंदन दान निवेरत री ॥ राखै रोकि दधि समेत ग्वालिनी सखावृंद प्रति टेरत ॥१॥ जब उठि चलत प्रबल गोपीजन त
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जीती हो चंद्रावलि | Jiti Ho Chandravali
Sarang · सारंग · Daan Ke Dinan Men Maan · दान के दिनन में मान
जीती हो चंद्रावलि नारि जीती हैं ब्रजमंगल राधे जीती सुंदरि गोपकुमारि ॥१॥ हारे हैं व्रजराज लड़ैते रहे
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जमुना घाट रोकीहो | Jamuna Ghat Rokiho
Sarang · सारंग · Daan Ke Dinan Men Maan · दान के दिनन में मान
जमुना घाट रोकीहो रसिक चंद्रावलि ॥ हँसि मुसिक्याय कहति ब्रजसुंदरि छबीले छैल छाँड़ौ अंचल ॥१॥ दान निबेर
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सूधे न बोल | Sudhe Na Bol
Dhanashri · धनाश्री · Daan Ke Dinan Men Maan · दान के दिनन में मान
सूधे न बोल कहा इतरानो ॥ या ब्रज में कौन तें कौन बड़ो कहा रंक कहा रानो ॥१॥ कोन टेव दिन दिन नित प्रति
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आई हूँ अकेली | Ai Hum Akeli
Purvi · पूर्वी · Sanjhi · साँझी
आई हूँ अकेली साँझ साँझीके कुसुम लेंन भलौ मिल गयौ तू जात घर गायलै ॥ आयौ घनघोर मेह सूझत नहीं कछु गेह च
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पूजन चली री | Pujan Chali Ri
Hamir · हमीर · Sanjhi · साँझी
पूजन चली री साँझी शुभधरी शुभदिन शुभ महुरत रात ॥ चंचल चपल चपलासी डोलत चंपे जैसौ गात ॥१॥ अपने अपने मंद
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फुलवा बीनन हों | Phulava Binan Hom
Jangalo · जंगलो · Sanjhi · साँझी
फुलवा बीनन हों गईरी जमनाकूल कुसुमन की भीर ॥ उरझ रह्यो अरनी की डरीयाँ तिहिं छिन मेरौ अंचल चीर ॥१॥ तब
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री कोऊ स्याम | Ri Kou Syam
Jangalo · जंगलो · Sanjhi · साँझी
री कोऊ स्याम सखी री सांझी पूजन आवे री ॥ कर सिंगार चोली आभुखन डलियन कमल धरावे ॥१॥ भान भुवन राधाजूके ग
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रहेरी दोऊ वदन | Raheri Dou Vadan
Jangalo · जंगलो · Sanjhi · साँझी
रहेरी दोऊ वदन निहार निहार ॥ सांझी पूजत स्याम सखी इत उत राधा सकुमार ॥१॥ लता सघन में ह्वै गई इत उत सके
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अरी सखी सांमरी | Ari Sakhi Sammari
Jangalo · जंगलो · Kotki Aarti · कोटकी आरती
अरी सखी सांमरी हो, अकेली यह वन कहां ते आई ॥ तरुन तरुन तेरो तन प्यारी श्री राधे के मन भाई ॥१॥ नंदगाव
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हो राधे फूलन | Ho Radhe Phulan
Jangalo · जंगलो · Kotki Aarti · कोटकी आरती
हो राधे, फूलन मत ले । तूँ तो मेरी मदन सुखदा कुंज फूलन मत ले ॥ नित्य नित्य कलियां बीन जातहो अब वश परी
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जान्यौ जान्यौ री | Janyau Janyau Ri
Bhairav · भैरव · Murali · मुरली
जान्यौ जान्यौ री सयान तें प्रानेश्वर सों कीयौ मान भयौ है बिहान ॥ पियकों तेरौ ही ध्यान मेरी सीख सुनलै
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मुरली हरि तें | Murali Hari Tem
Bhairav · भैरव · Murali · मुरली
मुरली हरि तें न छूटतहै ॥ वाहीके वश भये निरंतर वह अधरन रसलूटतहै ॥१॥ तुमतें निठुर भई वह बोलत तन तें मन
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याके गुन मैं | Yake Gun Main
Bhairav · भैरव · Murali · मुरली
याके गुन मैं जानत हूँ ॥ अबतौ आय भई यहाँ मुरली वौ ही नातौ मानत हूँ ॥१॥ हरिकी कान करत वह को है कहा करो
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ये बंसी नाद | Ye Vamsi Nad
Bhairav · भैरव · Murali · मुरली
ये बंसी नाद सुर साधिकें बजाई प्रवीन कान्ह सात सुर सोधकें मधुर धुनि ॥ घरी घरी घूमत सुध न रही कछु कल न
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मुरली हमसों बैर | Murali Hamasom Bair
Ramakali · रामकली · Murali · मुरली
मुरली हमसों बैर दृढ़ायौ ॥ चली निपट इतराय नेंकही हरि अधरन परसायौ ॥१॥ फूली फिरत श्याम कर बैठी योंही गर
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परदेसनि नारि अकेली | Paradesani Nari Akeli
Maru · मारु · Shri Ramji Ke Karakha · श्री रामजी के करखा
परदेसनि नारि अकेली ॥ बिन रघुनाथ और नहीं कोऊ मात पिता न सहेली ॥१॥ रावण रूप धर्यौ तपसीकौ कितमें भिक्षा
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हो लक्ष्मण सीता | Ho Lakshman Sita
Maru · मारु · Shri Ramji Ke Karakha · श्री रामजी के करखा
हो लक्ष्मण सीता कौनें हरी ॥ यह जु मढी बैरिन भई हम कौं कंचन मृग जो छरी ॥१॥ जो पै सीता होय मढ़ी में झा
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जोपै राम रजा | Jopai Ram Raja
Maru · मारू · Shri Ramji Ke Karakha · श्री रामजी के करखा
जोपै राम रजा हौं पाऊँ ॥ न करौं शंक लंक गढ़ की कछु सायर खोद बहाऊँ ॥१॥ बढ़ूँ शरीर पैठ परमित कर सकल कटक