Pushti Kirtan

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  1. ओर राग सब भये | Or Rag Sab Bhaye

    Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद

    ओर राग सब भये बाराती दूल्हे राग बसंत ॥ मदन महोच्छव आज सखिरी बिदा भयौ हेमंत ॥१॥ मधुरे सुर कोकिल कल कू

  2. गोपीजन वल्लभ जयमुकुंद | Gopijan Vallabh Jayamukund

    Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद

    गोपीजन वल्लभ जयमुकुंद ॥ मुख मुरलीनाद आनंदकंद ॥ध्रु॥ जयरास रसिक रवनी सुवेस ॥ सिखिन शिखंड विराजे केस ॥

  3. देखो रसिकलाल वागो रसाल | Dekho Rasikalal Vago Rasal

    Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद

    देखो रसिकलाल वागो रसाल ॥ खेलत वसंत पिय रसिक बाल ॥ध्रु०॥ घोषघोष की सुधर नारि ॥ रूप रंग सब एक सारि ॥ ग

  4. वंदो पदपंकज नंदलाल | Vando Padapankaj Nandalal

    Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद

    वंदो पदपंकज नंदलाल ॥ जे भवतारन पूरन कृपाल ॥ध्रु०॥ चित चिंतत होत बुधि विसाल ॥ कृपाकरन ओर दीनपाल ॥ सदा

  5. खेलत वसंत श्रीनंदलाल | Khelat Vasant Shrinandalal

    Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद

    खेलत वसंत श्रीनंदलाल ॥ भरे रंग सब ग्वालवाल ॥ध्रु०॥ जूथजूथ सब नवलवाल ॥ सजिसमाज उडवत गुलाल ॥ गावत पंचम

  6. फूल के सिंगार फूलन | Phool Ke Singar Phoolan

    Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती

    फूल के सिंगार फूलन की सारी पैहरै तन ॥ फूलन की कंचुकी फूलन की ओढ़नी, अंग अंग फूले ललना कैं मन ॥१॥ फूल

  7. विविध बसंत बनाएं चलों | Vividh Basant Banaen Chalon

    Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती

    विविध बसंत बनाऐं चलौं सब देखन कुँवर कन्हाई ॥ गिरिघटीयां द्रुमलता सुगंध अलि ठाडे सजि सुखदाई ॥१॥ बागों

  8. चलरी नवल निकुंज मंदिर | Chalari Naval Nikunj Mandir

    Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती

    चलरी नवल निकुंज मंदिर में बन बसंत बैठे पिय प्यारी ॥ बागो पीत रंग बन्यौं भूषन लाल रँग छबि न्यारी ॥१॥

  9. नंदनंदन नवल नागर किसोर | Nandanandan Naval Nagar Kisor

    Hindol · हिंडोल · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती

    नंदनंदन नवल नागर किसोर बर खेलति बसंत बन्यों रंग अति भारी राग हिंडोल गावति नवल नागरी अति हिं रस भीज र

  10. नृत्यत गावति बजावति मधुर | Nrityat Gavati Bajavati Madhur

    Hindol · हिंडोल · Basant Tipare Ke Pad · बसंत टिपारे के पद

    नृत्यत गावति बजावति मधुर मृदंग सप्तस्वरन मिलि राग हिंडोल ॥ पंचम स्वर लेअलापत उघटतहै सप्ततान मान थेईत

  11. सब मिल गावत राग हिंडोल | Sab Mil Gavat Rag Hindol

    Hindol · हिंडोल · Basant Tipare Ke Pad · बसंत टिपारे के पद

    सब मिल गावत राग हिंडोल बाजे बजावत घन सुं बरसे मिलि बधावन चली बसन्त ॥ बरन-बरन आभरन पहेरे नौतन हाथ लिय

  12. खेलत वसंत वरविद्लेश | Khelat Vasant Varavidlesh

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    खेलत वसंत वरविट्ठलेश ॥ आनंदकंद गोकुल सुदेस ॥धृ०॥ श्रीगिरिधर गोविंद संग ॥ श्रीबालकृष्ण लज्जित अनंग ॥

  13. वंदो पद पंकज विट्लेश | Vando Pad Pankaj Vitlesh

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    वंदो पद पंकज विट्ठलेश ॥ श्रीवल्लभ कुल दीपक सुवेस ॥१॥ जिनकी महिमा जे कहें उदार ॥ अतिजस प्रकट कियो संस

  14. खेलत वसंत वर विट्लेश | Khelat Vasant Var Vitlesh

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    खेलत वसंत वर विट्ठलेश ॥ मिलि रसिकराय गोवर्धनेश ॥धृ०॥ मृगमद कपूर केसरि सुरंग ॥ अति सोंधो सान्यों कुसु

  15. खेलत वसंत वल्लभ कुमार | Khelat Vasant Vallabh Kumar

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    खेलत वसंत वल्लभ कुमार ॥ सोभा समुद्र बाढ्यो अपार ॥१॥ श्रीगिरिधर गिरिधरन साथ ॥ रंगभरत कनिक पिचकाई हाथ

  16. आज वसंत बधायोहे श्रीवल्लभ | Aj Vasant Badhayohe Shrivallabh

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    आज वसंत बधायोहे श्रीवल्लभ राजदुवार ॥ श्री विट्ठलनाथ कीयो हे रचिरुचि नव वसंत को सिंगार ॥१॥ वल्लभीसृष्

  17. केसरी उपरना ओढ़ें | Kesari Uparana Odhen

    Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल

    केसरी उपरना ओढ़ें केसर की धौती ॥ केसर को तिलक सोहे श्रीविट्ठल छबि जौती ॥१॥ खट मुद्रा सोभित माला उर आ

  18. रिंगन करत कान्ह आंगन | Ringan Karat Kanh Angan

    Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद

    रिंगन करत कान्ह आंगन में करलीयें नवनीत ॥ सोभित नील जलद तन सुंदर पहरें झंगुलीपीत ॥१॥ रुनझुन रुनझुन नू

  19. देखत वन व्रजनाथ आज | Dekhat Van Vrajanath Aj

    Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद

    देखत वन व्रजनाथ आज अति उपजतहे अनुराग ॥ मानों मदन वसंत मिले दोऊ खेलत डोलत फाग ॥१॥ द्रुमगन मध्य पलाश म

  20. मोहन वदन विलोकत अलियन | Mohan Vadan Vilokat Aliyan

    Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद

    मोहन वदन विलोकत अलियन उपजतहे अनुराग ॥ तरनि तप्त तलफत चकरो शशि पीवत पीयूष पराग ॥१॥ लोचननलिन नयेराजत र

  21. लालनसंग खेलन फागचली | Lalanasang Khelan Phagachali

    Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद

    लालनसंग खेलन फागचली ॥ चोवा चंदन अगर कुंकुमा छिरकत घोषगली ॥१॥ ऋतुवसंत आगम नवनागरि जोवन भार भरी ॥ देखन

  22. जुवतिन संग खेलत फागहरी | Juvatin Sang Khelat Phagahari

    Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद

    जुवतिन संग खेलत फागहरी ॥ बालकवृंद करत कोलाहल सुनतन कानपरी ॥ बाजत ताल मृदंग बांसुरी किन्नरसुर कोमलरी

  23. मेरा नवरंग बिहारी | Mera Navarang Bihari

    Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद

    मेरा नवरंग बिहारी ॥ बलबल जाऊं तिहारी ॥१॥ बाजे बहु भांत बजावें ॥ गाना रसरंग बढावें ॥२॥ गावें गुण गीत

  24. राधावर खेलत होरी | Radhavar Khelat Hori

    Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद

    राधावर खेलत होरी ॥ नंद गाम के ग्वाल इते उत बरसाने की गोरी ॥ डफ करताल बजावत गावत केशर कुंकुम घोरी ॥ प

  25. सांवरे मोहि रंग में बोरी | Sanvare Mohi Rang Men Bori

    Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद

    सांवरे मोहि रंग में बोरी ॥ बैयां पकर मेरी सिर की गगरीया छीनकें सिरतें ढोरी ॥ रंगमें लालन रसबस कीनो