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ओर राग सब भये | Or Rag Sab Bhaye
Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद
ओर राग सब भये बाराती दूल्हे राग बसंत ॥ मदन महोच्छव आज सखिरी बिदा भयौ हेमंत ॥१॥ मधुरे सुर कोकिल कल कू
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गोपीजन वल्लभ जयमुकुंद | Gopijan Vallabh Jayamukund
Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद
गोपीजन वल्लभ जयमुकुंद ॥ मुख मुरलीनाद आनंदकंद ॥ध्रु॥ जयरास रसिक रवनी सुवेस ॥ सिखिन शिखंड विराजे केस ॥
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देखो रसिकलाल वागो रसाल | Dekho Rasikalal Vago Rasal
Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद
देखो रसिकलाल वागो रसाल ॥ खेलत वसंत पिय रसिक बाल ॥ध्रु०॥ घोषघोष की सुधर नारि ॥ रूप रंग सब एक सारि ॥ ग
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वंदो पदपंकज नंदलाल | Vando Padapankaj Nandalal
Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद
वंदो पदपंकज नंदलाल ॥ जे भवतारन पूरन कृपाल ॥ध्रु०॥ चित चिंतत होत बुधि विसाल ॥ कृपाकरन ओर दीनपाल ॥ सदा
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खेलत वसंत श्रीनंदलाल | Khelat Vasant Shrinandalal
Basant · बसंत · Basant Rajabhog Khel Sehra Ke Pad · बसंत राजभोग खेल - शेहरा के पद
खेलत वसंत श्रीनंदलाल ॥ भरे रंग सब ग्वालवाल ॥ध्रु०॥ जूथजूथ सब नवलवाल ॥ सजिसमाज उडवत गुलाल ॥ गावत पंचम
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फूल के सिंगार फूलन | Phool Ke Singar Phoolan
Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती
फूल के सिंगार फूलन की सारी पैहरै तन ॥ फूलन की कंचुकी फूलन की ओढ़नी, अंग अंग फूले ललना कैं मन ॥१॥ फूल
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विविध बसंत बनाएं चलों | Vividh Basant Banaen Chalon
Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती
विविध बसंत बनाऐं चलौं सब देखन कुँवर कन्हाई ॥ गिरिघटीयां द्रुमलता सुगंध अलि ठाडे सजि सुखदाई ॥१॥ बागों
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चलरी नवल निकुंज मंदिर | Chalari Naval Nikunj Mandir
Basant · बसंत · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती
चलरी नवल निकुंज मंदिर में बन बसंत बैठे पिय प्यारी ॥ बागो पीत रंग बन्यौं भूषन लाल रँग छबि न्यारी ॥१॥
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नंदनंदन नवल नागर किसोर | Nandanandan Naval Nagar Kisor
Hindol · हिंडोल · Basant Sandhya Aarti · बसंत संध्या आरती
नंदनंदन नवल नागर किसोर बर खेलति बसंत बन्यों रंग अति भारी राग हिंडोल गावति नवल नागरी अति हिं रस भीज र
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नृत्यत गावति बजावति मधुर | Nrityat Gavati Bajavati Madhur
Hindol · हिंडोल · Basant Tipare Ke Pad · बसंत टिपारे के पद
नृत्यत गावति बजावति मधुर मृदंग सप्तस्वरन मिलि राग हिंडोल ॥ पंचम स्वर लेअलापत उघटतहै सप्ततान मान थेईत
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सब मिल गावत राग हिंडोल | Sab Mil Gavat Rag Hindol
Hindol · हिंडोल · Basant Tipare Ke Pad · बसंत टिपारे के पद
सब मिल गावत राग हिंडोल बाजे बजावत घन सुं बरसे मिलि बधावन चली बसन्त ॥ बरन-बरन आभरन पहेरे नौतन हाथ लिय
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खेलत वसंत वरविद्लेश | Khelat Vasant Varavidlesh
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
खेलत वसंत वरविट्ठलेश ॥ आनंदकंद गोकुल सुदेस ॥धृ०॥ श्रीगिरिधर गोविंद संग ॥ श्रीबालकृष्ण लज्जित अनंग ॥
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वंदो पद पंकज विट्लेश | Vando Pad Pankaj Vitlesh
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
वंदो पद पंकज विट्ठलेश ॥ श्रीवल्लभ कुल दीपक सुवेस ॥१॥ जिनकी महिमा जे कहें उदार ॥ अतिजस प्रकट कियो संस
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खेलत वसंत वर विट्लेश | Khelat Vasant Var Vitlesh
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
खेलत वसंत वर विट्ठलेश ॥ मिलि रसिकराय गोवर्धनेश ॥धृ०॥ मृगमद कपूर केसरि सुरंग ॥ अति सोंधो सान्यों कुसु
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खेलत वसंत वल्लभ कुमार | Khelat Vasant Vallabh Kumar
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
खेलत वसंत वल्लभ कुमार ॥ सोभा समुद्र बाढ्यो अपार ॥१॥ श्रीगिरिधर गिरिधरन साथ ॥ रंगभरत कनिक पिचकाई हाथ
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आज वसंत बधायोहे श्रीवल्लभ | Aj Vasant Badhayohe Shrivallabh
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
आज वसंत बधायोहे श्रीवल्लभ राजदुवार ॥ श्री विट्ठलनाथ कीयो हे रचिरुचि नव वसंत को सिंगार ॥१॥ वल्लभीसृष्
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केसरी उपरना ओढ़ें | Kesari Uparana Odhen
Basant · बसंत · Basant Shri Gusainji Bhadre Khel · बसंत श्रीगुसाईजी भद्रे खेल
केसरी उपरना ओढ़ें केसर की धौती ॥ केसर को तिलक सोहे श्रीविट्ठल छबि जौती ॥१॥ खट मुद्रा सोभित माला उर आ
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रिंगन करत कान्ह आंगन | Ringan Karat Kanh Angan
Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद
रिंगन करत कान्ह आंगन में करलीयें नवनीत ॥ सोभित नील जलद तन सुंदर पहरें झंगुलीपीत ॥१॥ रुनझुन रुनझुन नू
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देखत वन व्रजनाथ आज | Dekhat Van Vrajanath Aj
Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद
देखत वन व्रजनाथ आज अति उपजतहे अनुराग ॥ मानों मदन वसंत मिले दोऊ खेलत डोलत फाग ॥१॥ द्रुमगन मध्य पलाश म
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मोहन वदन विलोकत अलियन | Mohan Vadan Vilokat Aliyan
Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद
मोहन वदन विलोकत अलियन उपजतहे अनुराग ॥ तरनि तप्त तलफत चकरो शशि पीवत पीयूष पराग ॥१॥ लोचननलिन नयेराजत र
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लालनसंग खेलन फागचली | Lalanasang Khelan Phagachali
Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद
लालनसंग खेलन फागचली ॥ चोवा चंदन अगर कुंकुमा छिरकत घोषगली ॥१॥ ऋतुवसंत आगम नवनागरि जोवन भार भरी ॥ देखन
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जुवतिन संग खेलत फागहरी | Juvatin Sang Khelat Phagahari
Basant · बसंत · Basant Ke Pad · बसंत के पद
जुवतिन संग खेलत फागहरी ॥ बालकवृंद करत कोलाहल सुनतन कानपरी ॥ बाजत ताल मृदंग बांसुरी किन्नरसुर कोमलरी
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मेरा नवरंग बिहारी | Mera Navarang Bihari
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
मेरा नवरंग बिहारी ॥ बलबल जाऊं तिहारी ॥१॥ बाजे बहु भांत बजावें ॥ गाना रसरंग बढावें ॥२॥ गावें गुण गीत
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राधावर खेलत होरी | Radhavar Khelat Hori
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
राधावर खेलत होरी ॥ नंद गाम के ग्वाल इते उत बरसाने की गोरी ॥ डफ करताल बजावत गावत केशर कुंकुम घोरी ॥ प
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सांवरे मोहि रंग में बोरी | Sanvare Mohi Rang Men Bori
Kaphi · काफी · Basant Dhamar Ke Pad Mangala Darshan Hori - Khayal Ke Pad · बसंत धमार के पद मंगलादर्शन होरी - खयाल के पद
सांवरे मोहि रंग में बोरी ॥ बैयां पकर मेरी सिर की गगरीया छीनकें सिरतें ढोरी ॥ रंगमें लालन रसबस कीनो