Pushti Kirtan

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  1. अन्कूट कोटिक भांतनसों | Ankoot Kotik Bhantanson

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे

    अन्कूट कोटिक भांतनसों भोजन करत गोपाल ।। आपही कहत तात अपनेसों गिरि मूरति देखो तत्काल ।।१।। सुरपति से

  2. देखोरी हरि भोजन | Dekhori Hari Bhojan

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे

    देखोरी हरि भोजन खात ।। सहस्र भुजाधर उत जेंमत हैं इत गोपनसों करतहैं बात ।।१।। ललिता कहत देखहो राधा जो

  3. यह लीला सब | Yah Lila Sab

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे

    यह लीला सब करत कन्हाई ।। उत जेंमत गोवर्धनके संग इत राधासों प्रीति लगाई ।।१।। इत गोपिनसों कहत जिमावो

  4. आरोगत आपुन पर्वत | Arogat Apun Parvat

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे

    आरोगत आपुन पर्वत रूप ।। वे देखो जु मागी लेत है चौद भुवनको भूप ।।१।। बडभागी हैं नंद जसोदा जिन पायो हर

  5. भलीकरी पूजा तुम | Bhalikari Puja Tum

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Sarayave · अन्नकूट भोग सरायवे

    भलीकरी पूजा तुम मेरी ।। बहुत भांत कर व्यंजन अरप्यो सो सब मान लई में तेरी ।।१।। सहस्र भुजा धर भोजन की

  6. आन ओर आन | Aan Or Aan

    Sarang · सारंग · Annakut Bhog Sarayave · अन्नकूट भोग सरायवे

    आन ओर आन आन कहत बिझक रहत व्रजके नारीनर ॥ कटुतिक्त आम्ल खार सलोने लोने प्रकार खटरससों प्रीत बाढी रसस

  7. अब न छांडों | Ab Na Chhandon

    Sarang · सारंग · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग

    अब न छांडों चरण कमल महिमा में जानी ॥ सुरपति मेरो नाम धर्यो लोक अभिमानी ॥१॥ अबलों में नहीं जानत ठाकुर

  8. आवोरे आवोरे भैया | Avore Avore Bhaiya

    Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग

    आवोरे आवोरे भैया ग्वालो या पर्वत की छैयां ॥ नाचो गावो करो बधाई सुखें चरावो गैयां ॥१॥ जिन तुमारो पकवा

  9. गोपी ग्वाल पुकारन | Gopi Gwal Pukaran

    Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग

    गोपी ग्वाल पुकारन लागे शरण तिहारी राखोजू ॥ बादर जुरजुर गाजन लागे भली होय सो भाखोजू ॥१॥ इंद्र कोप हम

  10. राख लेहो गोकुलके | Rakh Leho Gokulke

    Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग

    राख लेहो गोकुलके नायक ॥ भीजत गाय गोप गोसुत सब विषम बूंद लागत जानो सायक ॥१॥ मूशलधार बरखत सेनापर महा म

  11. राख लेहो अब | Rakh Leho Ab

    Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग

    राख लेहो अब नंद किशोर ॥ तुमजो इंद्रकी पूजा मेटी वरखत है अतिजोर ॥१॥ व्रजबासी सब यों चितवतहें ज्यों कर

  12. सज्यो सुरराज व्रजराजके | Sajyo Surraj Vrajrajke

    Maru · मारू · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग

    सज्यो सुरराज व्रजराजके कुंवर पर चढ गजराज दियो दूरडेरो ॥ महीपति मद भरे नहीं मोसों डरे गोप गिरिकों दिय

  13. चढयो सुरराज व्रजराजके | Chadhayo Surraj Vrajrajke

    Maru · मारू · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग

    चढयो सुरराज व्रजराजके कुंवर पर घेर घन कटक आगें चलायो ॥ घरहरत भूमिपर धाक त्रैलोकमें झूंम व्रजदेशपर दो

  14. कान्ह कुंवर के | Kanh Kumar Ke

    Kanharo · कान्हरो · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग

    कान्ह कुंवर के कर पल्लव पर मानों गोवर्धन नृत्यकरे ॥ ज्यों ज्यों तान उठत मुरली में त्यों त्यों लालन अ

  15. सुरराज आज पांयन | Surraj Aaj Panyan

    Adano · अडानो · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग

    सुरराज आज पांयन पर्यो गिरिधरन आपुनो कर्यो ॥ तज गज व्रजरजलोटत आयो सुरभी उपहार लायो वदन निरख मगन भयो क

  16. नंद के लाल | Nand Ke Lal

    Dhanashri · धनाश्री · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग

    नंद के लाल गोवर्धन धार्यो । इन्द्र कोप कियो हम ऊपर पठए सीसाई मेघ सब हंकार्यो ॥१॥ सात घोस मूसलधारा बर

  17. गोवर्धन धरणी धर्यो | Govardhan Dharani Dharyo

    Bilaval · बिलावल · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे

    गोवर्धन धरणी धर्यो मेरे बारे कन्हैया ॥ दधि अक्षत फल फूल ले भुज पूजत मैया ॥१ ॥ विप्र बोल वरणी करी दीन

  18. धन्य वह कूँखि | Dhanya Vah Kunkhi

    Sarang · सारंग · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे

    धन्य वह कूँखि जन्म जहां लीनो गिरिधारी ॥ लरिका कहा बहुत सुत जाये जो न होय उपकारी ॥१ ॥ एक सो लाख बराबर

  19. हाहा हो हठीले | Haha Ho Hathile

    Sarang · सारंग · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे

    हाहा हो हठीले हरि जननीको कह्यो कर मेहतो बरष गयो अब गिरी धरनी धर ॥ देखोरे पिराई बांह सात घोस कीनी छां

  20. जीत्यो जीत्यो हो | Jityo Jityo Ho

    Malav · मालव · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे

    जीत्यो जीत्यो हो यशोदाको नंदन मघवा वृष्टि निवारी ॥ वाम बाहु राख्यो गिरि नायक गोकुल आरति टारी ॥१॥ इन्

  21. आज दूज भैयाकी | Aaj Duj Bhaiyaki

    Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज

    आज दूज भैयाकी कहीयत करलीये कंचनथालकें ॥ करो तिलक तुम बहेंन सुभद्रा बल अरु श्रीगोपालकें ॥ आरती करत दे

  22. द्वेज दीवारीकों बलमोहन | Dvej Divarikon Balmohan

    Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज

    द्वेज दीवारीकों बलमोहन बेहेनसुभद्राके घर आये ॥ विविध शृंगार विविध पटभूषण लटकत चलत सुहाये ॥१॥ अति प्र

  23. यशोमति थारसाजकें | Yashomati Tharasajaken

    Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज

    यशोमति थारसाजकें बैठी मोहन तिलक करावेहो ॥ बैठ अंक भोजन करो लालन भाईदूज मनावेहो ॥१॥ देख नंद उपनंद गोप

  24. भाईदूज जानकें मोहन | Bhaidooj Janaken Mohan

    Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज

    भाईदूज जानकें मोहन बहेन सुभद्राकों न्योंतावत ॥ उबट न्हवाय दोउ भैया बल वागो अतलस लाल बनावत ॥१॥ चीरा ह

  25. लाडिले गोपाल आज | Ladile Gopal Aaj

    Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज

    लाडिले गोपाल आज हमारे घर चलो भोजन कीजे ॥ बहुत भाँत पकवान मिठाई खटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घृत पापर खी