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अन्कूट कोटिक भांतनसों | Ankoot Kotik Bhantanson
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे
अन्कूट कोटिक भांतनसों भोजन करत गोपाल ।। आपही कहत तात अपनेसों गिरि मूरति देखो तत्काल ।।१।। सुरपति से
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देखोरी हरि भोजन | Dekhori Hari Bhojan
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे
देखोरी हरि भोजन खात ।। सहस्र भुजाधर उत जेंमत हैं इत गोपनसों करतहैं बात ।।१।। ललिता कहत देखहो राधा जो
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यह लीला सब | Yah Lila Sab
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे
यह लीला सब करत कन्हाई ।। उत जेंमत गोवर्धनके संग इत राधासों प्रीति लगाई ।।१।। इत गोपिनसों कहत जिमावो
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आरोगत आपुन पर्वत | Arogat Apun Parvat
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Ayave · अन्कूट भोग आयवे
आरोगत आपुन पर्वत रूप ।। वे देखो जु मागी लेत है चौद भुवनको भूप ।।१।। बडभागी हैं नंद जसोदा जिन पायो हर
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भलीकरी पूजा तुम | Bhalikari Puja Tum
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Sarayave · अन्नकूट भोग सरायवे
भलीकरी पूजा तुम मेरी ।। बहुत भांत कर व्यंजन अरप्यो सो सब मान लई में तेरी ।।१।। सहस्र भुजा धर भोजन की
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आन ओर आन | Aan Or Aan
Sarang · सारंग · Annakut Bhog Sarayave · अन्नकूट भोग सरायवे
आन ओर आन आन कहत बिझक रहत व्रजके नारीनर ॥ कटुतिक्त आम्ल खार सलोने लोने प्रकार खटरससों प्रीत बाढी रसस
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अब न छांडों | Ab Na Chhandon
Sarang · सारंग · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग
अब न छांडों चरण कमल महिमा में जानी ॥ सुरपति मेरो नाम धर्यो लोक अभिमानी ॥१॥ अबलों में नहीं जानत ठाकुर
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आवोरे आवोरे भैया | Avore Avore Bhaiya
Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग
आवोरे आवोरे भैया ग्वालो या पर्वत की छैयां ॥ नाचो गावो करो बधाई सुखें चरावो गैयां ॥१॥ जिन तुमारो पकवा
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गोपी ग्वाल पुकारन | Gopi Gwal Pukaran
Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग
गोपी ग्वाल पुकारन लागे शरण तिहारी राखोजू ॥ बादर जुरजुर गाजन लागे भली होय सो भाखोजू ॥१॥ इंद्र कोप हम
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राख लेहो गोकुलके | Rakh Leho Gokulke
Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग
राख लेहो गोकुलके नायक ॥ भीजत गाय गोप गोसुत सब विषम बूंद लागत जानो सायक ॥१॥ मूशलधार बरखत सेनापर महा म
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राख लेहो अब | Rakh Leho Ab
Bilaval · बिलावल · Annakut Aarti - Indraman Bhang · अन्नकूट आरती - इन्द्रमान भंग
राख लेहो अब नंद किशोर ॥ तुमजो इंद्रकी पूजा मेटी वरखत है अतिजोर ॥१॥ व्रजबासी सब यों चितवतहें ज्यों कर
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सज्यो सुरराज व्रजराजके | Sajyo Surraj Vrajrajke
Maru · मारू · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग
सज्यो सुरराज व्रजराजके कुंवर पर चढ गजराज दियो दूरडेरो ॥ महीपति मद भरे नहीं मोसों डरे गोप गिरिकों दिय
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चढयो सुरराज व्रजराजके | Chadhayo Surraj Vrajrajke
Maru · मारू · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग
चढयो सुरराज व्रजराजके कुंवर पर घेर घन कटक आगें चलायो ॥ घरहरत भूमिपर धाक त्रैलोकमें झूंम व्रजदेशपर दो
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कान्ह कुंवर के | Kanh Kumar Ke
Kanharo · कान्हरो · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग
कान्ह कुंवर के कर पल्लव पर मानों गोवर्धन नृत्यकरे ॥ ज्यों ज्यों तान उठत मुरली में त्यों त्यों लालन अ
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सुरराज आज पांयन | Surraj Aaj Panyan
Adano · अडानो · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग
सुरराज आज पांयन पर्यो गिरिधरन आपुनो कर्यो ॥ तज गज व्रजरजलोटत आयो सुरभी उपहार लायो वदन निरख मगन भयो क
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नंद के लाल | Nand Ke Lal
Dhanashri · धनाश्री · Indraman Bhang · इन्द्रमान भंग
नंद के लाल गोवर्धन धार्यो । इन्द्र कोप कियो हम ऊपर पठए सीसाई मेघ सब हंकार्यो ॥१॥ सात घोस मूसलधारा बर
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गोवर्धन धरणी धर्यो | Govardhan Dharani Dharyo
Bilaval · बिलावल · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे
गोवर्धन धरणी धर्यो मेरे बारे कन्हैया ॥ दधि अक्षत फल फूल ले भुज पूजत मैया ॥१ ॥ विप्र बोल वरणी करी दीन
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धन्य वह कूँखि | Dhanya Vah Kunkhi
Sarang · सारंग · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे
धन्य वह कूँखि जन्म जहां लीनो गिरिधारी ॥ लरिका कहा बहुत सुत जाये जो न होय उपकारी ॥१ ॥ एक सो लाख बराबर
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हाहा हो हठीले | Haha Ho Hathile
Sarang · सारंग · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे
हाहा हो हठीले हरि जननीको कह्यो कर मेहतो बरष गयो अब गिरी धरनी धर ॥ देखोरे पिराई बांह सात घोस कीनी छां
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जीत्यो जीत्यो हो | Jityo Jityo Ho
Malav · मालव · Girirajji Niche Padharayave · गिरिराजजी निचे पधरायवे
जीत्यो जीत्यो हो यशोदाको नंदन मघवा वृष्टि निवारी ॥ वाम बाहु राख्यो गिरि नायक गोकुल आरति टारी ॥१॥ इन्
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आज दूज भैयाकी | Aaj Duj Bhaiyaki
Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज
आज दूज भैयाकी कहीयत करलीये कंचनथालकें ॥ करो तिलक तुम बहेंन सुभद्रा बल अरु श्रीगोपालकें ॥ आरती करत दे
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द्वेज दीवारीकों बलमोहन | Dvej Divarikon Balmohan
Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज
द्वेज दीवारीकों बलमोहन बेहेनसुभद्राके घर आये ॥ विविध शृंगार विविध पटभूषण लटकत चलत सुहाये ॥१॥ अति प्र
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यशोमति थारसाजकें | Yashomati Tharasajaken
Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज
यशोमति थारसाजकें बैठी मोहन तिलक करावेहो ॥ बैठ अंक भोजन करो लालन भाईदूज मनावेहो ॥१॥ देख नंद उपनंद गोप
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भाईदूज जानकें मोहन | Bhaidooj Janaken Mohan
Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज
भाईदूज जानकें मोहन बहेन सुभद्राकों न्योंतावत ॥ उबट न्हवाय दोउ भैया बल वागो अतलस लाल बनावत ॥१॥ चीरा ह
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लाडिले गोपाल आज | Ladile Gopal Aaj
Sarang · सारंग · Bhai Duj · भाई दूज
लाडिले गोपाल आज हमारे घर चलो भोजन कीजे ॥ बहुत भाँत पकवान मिठाई खटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घृत पापर खी