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सीतल सदनमें सीतल | Sital Sadanmen Sital
Sarang · सारंग · Ushnakal Bhog Sarayave Ke Pad - Achavan Sadhe · उष्णकालभोगसरायवे के पद अचवन साधे
सीतल सदनमें सीतल भोजनभयो सीतल करन को आइसब सखियां॥ छीरक्यो गुलाबजल नीले पीरे पाननमें बीरी अरोगत नाथ स
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लटक लालरहे श्रीराधाके | Latak Lal Rahe Shriradhake
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
लटक लालरहे श्रीराधाके भर॥ सुंदरबीरी बनाय सुंदरी हँस हँस जातदेत मोहनकर॥१॥ गोपीसब सन्मुखभाई ठाढीतिनसों
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बैठे लाल कालिंदीके | Baithe Lal Kalindike
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
बैठे लाल कालिंदीके तीरा॥ ले राधे गिरिवर दे पठयो यह प्रसादी वीरा॥१॥ समाचार सुनि ये श्रीमुखके जे कही स
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हरिकों बीरी खवावत | Harikon Biri Khavavat
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
हरिकों बीरी खवावत बाला॥ अतिसुगंध बहुविधिसों सँवारी लीजे हो नंदलाला॥१॥ खासाको कटिधर्यो पिछोरा उरराजतव
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कृष्णको बीरी देत | Krishnako Biri Det
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
कृष्णको बीरी देत व्रजनारी॥ पानसुपारी काथो गुलाबी लोंगन कील संवारी॥१॥ व्रजनारीजो कुंजल ठाढी कंचनकीसीव
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लीजे बीरी परम | Lije Biri Param
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
लीजे बीरी परम उदार ॥ लाई स्वच्छ समार मनोहर अति सुगंध सीतलता डार ॥१॥ निरख निरख छबि मन आनंदे लीनी सुहस
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तुम जावौ जावौ | Tum Javo Javo
Sarang · सारंग · Usir Biri Ke Pad · उसीर बीरी के पद
तुम जावौ जावौ बीरी कौन पै मैया। कब के करि अँचवन मांगत हैं हलधर कुँवर कन्हैया ॥ इतनी बोल सुनत उठि धाय
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आरती गोपिकारमण गिरिधरनकी | Arati Gopikarman Giridharanki
Sarang · सारंग · Rajabhog Aarti Ke Pad · राजभोग आरती के पद
आरती गोपिकारमण गिरिधरनकी निरख व्रजयुवति आनंदभीनी ॥ मणि खचित थार घनसार वाती बरें ललित ललितादि सखी हाथ
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आरती वारत राधिका | Arati Varat Radhika
Sarang · सारंग · Rajabhog Aarti Ke Pad · राजभोग आरती के पद
आरती वारत राधिका नागरी ॥ तन कनकथार भूषणरत्नदीपक कियें कमलमुक्तावली मंगल उजागरी ॥१॥ रुणित कटिमेखला सु
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आरती करत यसोदा | Arati Karat Yasoda
Sarang · सारंग · Rajabhog Aarti Ke Pad · राजभोग आरती के पद
आरती करत यसोदा प्रमुदित फूली अंग न समात ॥ बलबल कहि दुलरावत आनंदमग्न भई पुलकात ॥१॥ कनक थार रत्नदीपावल
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रानीजू करत सिंगार | Raniju Karat Singar
Sarang · सारंग · Rajabhog Aarti Ke Pad · राजभोग आरती के पद
रानीजू करत सिंगार आरती ॥ नखसिख अंग अंग छबि अनुपम निरख नैन पलक नहीं पारती ॥१॥ कनक कुसुम अरु मनिगन मुक
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ले राधे गिरिधर | Le Radhe Giridhar
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
ले राधे गिरिधर दें पठई अपने मुखकी सुंदर बीरी ॥ सुनोहो संदेशो प्राणपियारेको कित सँकुचित आवो किननीरी ॥
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ले राधे प्रीतम | Le Radhe Pritam
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
ले राधे प्रीतम दे पठई श्री मुखकी आधी बीरी ॥ वेगि बुलाई तू छैलछबीली नागर तजि तनमन भोरी ॥१॥ तव लगी निस
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बेनी सुन्दर श्याम | Beni Sundar Shyam
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
बेनी सुन्दर श्याम गुही री ॥ राजत रुचिर शीश श्यामा के चम्पक और जुही री ॥१॥ नख शिख कर सिंगार श्यामा को
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बीरी देत बनाय | Biri Det Banay
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
बीरी देत बनाय बनाय ॥ पीरे पीरे पान सोपारी लोंगन कील लगाय ॥१॥ लेत लाल कर जोर देत वे मुख मेलत मुसकाय ॥
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लालको बीरी देत | Lalko Biri Det
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
लालको बीरी देत बनाय ॥ अपनेकर राधा मृगनेनिः अतआनंद मन मांय ॥१॥ निरखत बदन कमल प्रीतम को चितवत मुरमुसक्
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प्यारी तोही श्याम | Pyari Tohi Shyam
Kanharo · कान्हरो · Biri Ke Pad · बीरी के पद
प्यारी तोही श्याम बुलावे झमक चल राधे ॥ तोविन मोहन पान न खातहें कोन मंत्र पठ साधे ॥१॥ निशवासर तेरो ध्
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खंजन नयन रूपरसमाते | Khanjan Nayan Ruparasamate
Adano · अडानो · Kunj Shayan Darshan Ke Pad · कुंज शयन दर्शन के पद
खंजन नयन रूपरसमाते ॥ अतिशय चारू चपल अनियारे पलपिंजरा न समाते ॥१॥ उडउड जात निकट श्रवणनके उलट फिरत ताट
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नंदनंदन एक कहूं | Nandanandan Ek Kahun
Bihagaro · बिहागरो · Nitya Kahani Ke Pad · नित्य कहानी के पद
नंदनंदन एक कहूं कहानी ॥ रामचंद्र राजादशरथ के जनकसुता याके घर रानी ॥१॥ तातवचनसुन पंचवटीबन छांडचले ऐसी
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यशुमति सुत पलका | Yashumati Sut Palaka
Bihag · बिहाग · Nitya Kahani Ke Pad · नित्य कहानी के पद
यशुमति सुत पलका पोढावे ॥ अरी मेरो सबदिनको बिछुर्यो यों कहिके मधुर स्वरगावे ॥१॥ पोढ़ो लाल कहूं एक कहान
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सुन सुत एक कथा कहूं प्यारी | Sun Sut Ek Katha Kahu Pyari
Bihagaro · बिहागरो · Nitya Kahani Ke Pad · नित्य कहानी के पद
सुन सुत एक कथा कहूं प्यारी ॥ नंदनंदन मन आनंद उपज्यो रसिकशिरोमणि देत हुंकारी ॥ दशरथ नृप जो हते रघुवंश
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रागकृष्ण दोऊ अतिही | Ragakrishna Dou Atihi
Bihagaro · बिहागरो · Nitya Kahani Ke Pad · नित्य कहानी के पद
रागकृष्ण दोऊ अतिही सोये माई ॥ कहानी कहत यशोदारोहिणी सुनतहैं दोऊ अतिही मनलाई ॥१॥ जब जान्यो हरि सोय गय
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ताहीकों सिर नाइये | Tahikon Sir Naiye
Kanharo · कान्हरो · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद
ताहीकों सिर नाइये जो श्रीवल्लभसुत पदरज रति होहि ॥ कीजे कहा आन ऊंचेपद तिनसो कहासगाई मोहि ॥१॥ जाके मनम
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उत्तमकुल अवतार कहा | Uttamakul Avatar Kaha
Kanharo · कान्हरो · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद
उत्तमकुल अवतार कहा जो श्रीवल्लभकुमार न जान्यो ॥ चरचा न कीनी वरवल्लभकी रचि पाखंडकियो बहुबानो ॥१॥ रसिक
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गायो न गोपाल | Gayo Na Gopal
Bihag · बिहाग · Nitya Vinati Ke Pad · विनती के पद
गायो न गोपाल मनलायो न निवारलाज पायो न प्रसाद साधुमंडली में जायके ॥ धायो न धमक वृंदाविपिनकी कुंजनमें