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जसोदा नाल न छेदन | Jasoda Nal Na Chedan
Devagandhar / देवगंधार · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन
जसोदा नाल न छेदन देहों । मनिमय जटित हारग्रीवाकौ वहै आज हों लैहों ॥१॥ औरनके हैं सकल गोप मेरे एकै भवन
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झगरिन तें हों बोहोत | Jhagarin Ten Hon Bohot
Devagandhar / देवगंधार · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन
झगरिन तें हों बोहोत खिजाई । कंचनहार दियें नहीं मानत तुही अनौखी दाई ॥१॥ बेगि तू नार छेदि बालककौ जातहै
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झगरिनि झगरत नंदसों | Jhagarini Jhagarat Nandasom
Bilaval / बिलावल · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन
झगरिनि झगरत नंदसों थौरो नहि माँगें । ज्यों ज्यों मन हरि निहोरहीं त्यों त्यों उठि लागें ॥१॥ पूरन तप ब
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काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि | Kahai Jhagarini Main Badabhagini
Bilaval / बिलावल · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन
काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि निरख्यौ है नंदजूको लाल । जाकौ दरस देव नहीं पावै मैं पायौ है इहि काल ॥१॥ यह
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मंगल घोस छठीकी आयो | Mangal Ghos Chhathiki Aayo
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
मंगल घोस छठीकी आयो । आनंदे ब्रजराज यशोदा मनहुँ अधन धन पायो ॥१॥ कुँवर न्हवाई जसोदा रानी कुलदेवीके पाँ
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आज छठी जसुमतिके सुतकी | Aaj Chhathi Jasumatike Sutaki
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
आज छठी जसुमतिके सुतकी चलो बधावन माई । भूषन बसन साज मंगल लै सकल सिंगार बनाई ॥१॥ भली बात विधि करी बैस
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दूनों मंगलहै अति आज | Dunon Mangalahai Ati Aaj
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
दूनों मंगलहै अति आज । छै दिनके माई भये कुशलसों फूलत हैं ब्रजराज ॥१॥ हुलसी बहोत नंदजूकी रानी ये सुत प
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गोद लियें गोपाल यशोदा | God Liyen Gopal Yashoda
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
गोद लियें गोपाल यशोदा पूजत छठी मुदित मन प्यारी । बड़डे वार सनेह चुचाते चूँवत मुख दै दै चुचकारी ॥१॥ क
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पूजति छठी कान्ह कुँवरकी | Pujati Chhathi Kanh Kunvaraki
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
पूजति छठी कान्ह कुँवरकी थापे पीत लगाई । कंचनथार लिये ब्रज बनिता रोचन देत सुहाई ॥१॥ पनवारौ भरि खीर खा
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ब्रजपुर घरघर अति आनंद | Brajapur Gharaghar Ati Anand
Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी
ब्रजपुर घरघर अति आनंद । प्रगटे हैं जसुमतिके ढोटा दूर गये दूख द्वन्द्व ॥१॥ साज छठीको लाई बनिता गावत
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देखौ यह विपरित नई | Dekhau Yah Viparit Nai
Bilaval / बिलावल · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध
देखौ यह विपरित नई । अभुतरूप नारि एक आई कपट हेत क्यों सहे दई ॥१॥ कान्हहि लै जसुमति कोवातें रुचि लै कं
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मथुरापति जिय अधिक डरानौ | Mathurapati Jiy Adhik Darano
Bilaval / बिलावल · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध
मथुरापति जिय अधिक डरानौ सभा माँझ असुरनके आगें बारबार शिर धुनि पछितानौ ॥१॥ ब्रजभीतर उपज्यौ मेरो रिपु
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रूप मोहिनि धरि ब्रज | Rup Mohini Dhari Braj
Asavari / आसावरी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध
रूप मोहिनि धरि ब्रज आई । अद्भुत साजि सिंगार मनोहर असुर कंस दै पान पठाई ॥१॥ कुच बिच बाँटी लगाई कपट कर
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प्रथम कंस पूतना पठाई | Pratham Kans Putana Pathai
Asavari / आसावरी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध
प्रथम कंस पूतना पठाई । नंद घरनि सुत लिये जहाँ बैठी चली चली निजधाम जु आई ॥१॥ अतिमोहनि नाम धरी लीनौ दे
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आज हों राजकाज करी | Aaj Hon Rajakaj Kari
Todi / टोडी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध
आज हों राजकाज करी आँऊँ । बेग संघारूँ सकल घोष शिशु जो मुख आइसो पाऊँ ॥१॥ मोहन मूर्छन बसीकरन पढ़ि अगनित
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प्रेख पर्यकशयनम् | Prekha Paryakashayanam
Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना
प्रेंख पर्यंकशयनम् | चिरविरहताप हरमति रुचिर मीक्षणं प्रकट प्रेमायानम् || प्रेंख. || तनुतर द्रिज पंक्
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झूलो पालनें बलि जाऊं | Jhulo Palanen Bali Jaun
Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना
झूलो पालनें बलि जाऊं । स्याम सुंदर कमल लोचन निरखि अति सचुपाऊं ॥१॥ अति उदार विलोकि आनन पावत नहीं अघाऊ
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श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत | Shrivallabharaj Kumar Jhulavat
Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना
श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत श्रीनवनीत प्रिये पलना । गावत गुण गोविंदके चहुँ दिस जुरि सगरी व्रजकी ललना ॥
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गोकुलचंद पालनें झुलत | Gokulachand Palanen Jhulat
Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना
गोकुलचंद पालनें झुलत । हौलें हौलें ब्रजरानी झुलावति किलकि किलकि देख मन फूलत ॥१॥ कीरतिलली बुलाई हरखसो
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हों जु गई ही नंदभवनमें | Hon Ju Gai Hi Nandabhavanamen
Bilaval / बिलावल · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना
हों जु गई ही नंदभवनमें देख्यौ अद्भुत पलना । गजमोतिनके झूमिका बाँधे बैठे सुंदर ललना ॥१॥ पीत झगुलिया अ
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चक्षुश्रवा प्रियकौ पलना | Chakshushrava Priyakau Palana
Ramakali / रामकली · 007 Shri Krishna Chandan Ke Palna / श्री कृष्णा चंदन के पलना
चक्षुश्रवा प्रियकौं पलना ललना तिहि माँझ झुलावत हैं । युवती मुख पंकज बंक चितै मिलिकैं क्षितिकौ सुत गा
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अरी मेरी माई लराऊँ | Ari Meri Mai Laraun
Devagandhar / देवगंधार · 007 Shri Krishna Chandan Ke Palna / श्री कृष्णा चंदन के पलना
अरी मेरी माई लराऊँ हुलराऊँ हाल री । अगर चंदनकौ पालना घड़ायौ बिच बिच हीरा मोती लाल री ॥१॥ सखी सहेली म
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पलना फूल भरतौ नंदरानी | Palana Phul Bharatau Nandarani
Asavari / आसावरी · 008 Shri Krishna Phool Ke Palna / श्री कृष्णा फूल के पलना
पलना फूल भर्यो नंदरानी । ता मधिय झूलत छगन मगनवा निरखत नैन सिरानी ॥१॥ नानाबिधके खिलोना लै लै खिलावत म
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पलना फूलन गूँथ बनायौ | Palana Phoolan Gunth Banayo
Asavari / आसावरी · 008 Shri Krishna Phool Ke Palna / श्री कृष्णा फूल के पलना
पलना फूलन गूँथ बनायौ ॥ जाती जूही चमेली चंपा कनेर सुरंग सुहायौ ॥१॥ राईवेल गुलतुर्रा सोहत बीच फोंदना ल
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अपने लालके गुन गाऊँगी | Apane Lalake Gun Gaungi
Ramakali / रामकली · 009 Shri Krishna Kulhe / श्री कृष्णा कुल्हे
अपने लालके गुन गाऊँगी । सुंदर रतन जटित पलनामें छगनमगनको झुलाऊँगी ॥१॥ लाल कुलहि पीत झगुली तन नाक नथुल