Pushti Kirtan

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  1. जसोदा नाल न छेदन | Jasoda Nal Na Chedan

    Devagandhar / देवगंधार · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन

    जसोदा नाल न छेदन देहों । मनिमय जटित हारग्रीवाकौ वहै आज हों लैहों ॥१॥ औरनके हैं सकल गोप मेरे एकै भवन

  2. झगरिन तें हों बोहोत | Jhagarin Ten Hon Bohot

    Devagandhar / देवगंधार · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन

    झगरिन तें हों बोहोत खिजाई । कंचनहार दियें नहीं मानत तुही अनौखी दाई ॥१॥ बेगि तू नार छेदि बालककौ जातहै

  3. झगरिनि झगरत नंदसों | Jhagarini Jhagarat Nandasom

    Bilaval / बिलावल · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन

    झगरिनि झगरत नंदसों थौरो नहि माँगें । ज्यों ज्यों मन हरि निहोरहीं त्यों त्यों उठि लागें ॥१॥ पूरन तप ब

  4. काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि | Kahai Jhagarini Main Badabhagini

    Bilaval / बिलावल · 003 Shri Krishna Naal Chhedan / श्री कृष्णा नाल छेदन

    काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि निरख्यौ है नंदजूको लाल । जाकौ दरस देव नहीं पावै मैं पायौ है इहि काल ॥१॥ यह

  5. मंगल घोस छठीकी आयो | Mangal Ghos Chhathiki Aayo

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    मंगल घोस छठीकी आयो । आनंदे ब्रजराज यशोदा मनहुँ अधन धन पायो ॥१॥ कुँवर न्हवाई जसोदा रानी कुलदेवीके पाँ

  6. आज छठी जसुमतिके सुतकी | Aaj Chhathi Jasumatike Sutaki

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    आज छठी जसुमतिके सुतकी चलो बधावन माई । भूषन बसन साज मंगल लै सकल सिंगार बनाई ॥१॥ भली बात विधि करी बैस

  7. दूनों मंगलहै अति आज | Dunon Mangalahai Ati Aaj

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    दूनों मंगलहै अति आज । छै दिनके माई भये कुशलसों फूलत हैं ब्रजराज ॥१॥ हुलसी बहोत नंदजूकी रानी ये सुत प

  8. गोद लियें गोपाल यशोदा | God Liyen Gopal Yashoda

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    गोद लियें गोपाल यशोदा पूजत छठी मुदित मन प्यारी । बड़डे वार सनेह चुचाते चूँवत मुख दै दै चुचकारी ॥१॥ क

  9. पूजति छठी कान्ह कुँवरकी | Pujati Chhathi Kanh Kunvaraki

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    पूजति छठी कान्ह कुँवरकी थापे पीत लगाई । कंचनथार लिये ब्रज बनिता रोचन देत सुहाई ॥१॥ पनवारौ भरि खीर खा

  10. ब्रजपुर घरघर अति आनंद | Brajapur Gharaghar Ati Anand

    Sarang / सारंग · 004 Shri Krishna Chhathi / श्री कृष्णा छठी

    ब्रजपुर घरघर अति आनंद । प्रगटे हैं जसुमतिके ढोटा दूर गये दूख द्वन्द्व ॥१॥ साज छठीको लाई बनिता गावत

  11. देखौ यह विपरित नई | Dekhau Yah Viparit Nai

    Bilaval / बिलावल · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध

    देखौ यह विपरित नई । अभुतरूप नारि एक आई कपट हेत क्यों सहे दई ॥१॥ कान्हहि लै जसुमति कोवातें रुचि लै कं

  12. मथुरापति जिय अधिक डरानौ | Mathurapati Jiy Adhik Darano

    Bilaval / बिलावल · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध

    मथुरापति जिय अधिक डरानौ सभा माँझ असुरनके आगें बारबार शिर धुनि पछितानौ ॥१॥ ब्रजभीतर उपज्यौ मेरो रिपु

  13. रूप मोहिनि धरि ब्रज | Rup Mohini Dhari Braj

    Asavari / आसावरी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध

    रूप मोहिनि धरि ब्रज आई । अद्भुत साजि सिंगार मनोहर असुर कंस दै पान पठाई ॥१॥ कुच बिच बाँटी लगाई कपट कर

  14. प्रथम कंस पूतना पठाई | Pratham Kans Putana Pathai

    Asavari / आसावरी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध

    प्रथम कंस पूतना पठाई । नंद घरनि सुत लिये जहाँ बैठी चली चली निजधाम जु आई ॥१॥ अतिमोहनि नाम धरी लीनौ दे

  15. आज हों राजकाज करी | Aaj Hon Rajakaj Kari

    Todi / टोडी · 005 Shri Krishna Putana Vadh / श्री कृष्णा पूतना वध

    आज हों राजकाज करी आँऊँ । बेग संघारूँ सकल घोष शिशु जो मुख आइसो पाऊँ ॥१॥ मोहन मूर्छन बसीकरन पढ़ि अगनित

  16. प्रेख पर्यकशयनम् | Prekha Paryakashayanam

    Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना

    प्रेंख पर्यंकशयनम् | चिरविरहताप हरमति रुचिर मीक्षणं प्रकट प्रेमायानम् || प्रेंख. || तनुतर द्रिज पंक्

  17. झूलो पालनें बलि जाऊं | Jhulo Palanen Bali Jaun

    Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना

    झूलो पालनें बलि जाऊं । स्याम सुंदर कमल लोचन निरखि अति सचुपाऊं ॥१॥ अति उदार विलोकि आनन पावत नहीं अघाऊ

  18. श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत | Shrivallabharaj Kumar Jhulavat

    Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना

    श्रीवल्लभराज कुमार झुलावत श्रीनवनीत प्रिये पलना । गावत गुण गोविंदके चहुँ दिस जुरि सगरी व्रजकी ललना ॥

  19. गोकुलचंद पालनें झुलत | Gokulachand Palanen Jhulat

    Ramakali / रामकली · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना

    गोकुलचंद पालनें झुलत । हौलें हौलें ब्रजरानी झुलावति किलकि किलकि देख मन फूलत ॥१॥ कीरतिलली बुलाई हरखसो

  20. हों जु गई ही नंदभवनमें | Hon Ju Gai Hi Nandabhavanamen

    Bilaval / बिलावल · 006 Shri Krishna Palna / श्री कृष्णा पलना

    हों जु गई ही नंदभवनमें देख्यौ अद्भुत पलना । गजमोतिनके झूमिका बाँधे बैठे सुंदर ललना ॥१॥ पीत झगुलिया अ

  21. चक्षुश्रवा प्रियकौ पलना | Chakshushrava Priyakau Palana

    Ramakali / रामकली · 007 Shri Krishna Chandan Ke Palna / श्री कृष्णा चंदन के पलना

    चक्षुश्रवा प्रियकौं पलना ललना तिहि माँझ झुलावत हैं । युवती मुख पंकज बंक चितै मिलिकैं क्षितिकौ सुत गा

  22. अरी मेरी माई लराऊँ | Ari Meri Mai Laraun

    Devagandhar / देवगंधार · 007 Shri Krishna Chandan Ke Palna / श्री कृष्णा चंदन के पलना

    अरी मेरी माई लराऊँ हुलराऊँ हाल री । अगर चंदनकौ पालना घड़ायौ बिच बिच हीरा मोती लाल री ॥१॥ सखी सहेली म

  23. पलना फूल भरतौ नंदरानी | Palana Phul Bharatau Nandarani

    Asavari / आसावरी · 008 Shri Krishna Phool Ke Palna / श्री कृष्णा फूल के पलना

    पलना फूल भर्यो नंदरानी । ता मधिय झूलत छगन मगनवा निरखत नैन सिरानी ॥१॥ नानाबिधके खिलोना लै लै खिलावत म

  24. पलना फूलन गूँथ बनायौ | Palana Phoolan Gunth Banayo

    Asavari / आसावरी · 008 Shri Krishna Phool Ke Palna / श्री कृष्णा फूल के पलना

    पलना फूलन गूँथ बनायौ ॥ जाती जूही चमेली चंपा कनेर सुरंग सुहायौ ॥१॥ राईवेल गुलतुर्रा सोहत बीच फोंदना ल

  25. अपने लालके गुन गाऊँगी | Apane Lalake Gun Gaungi

    Ramakali / रामकली · 009 Shri Krishna Kulhe / श्री कृष्णा कुल्हे

    अपने लालके गुन गाऊँगी । सुंदर रतन जटित पलनामें छगनमगनको झुलाऊँगी ॥१॥ लाल कुलहि पीत झगुली तन नाक नथुल