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आये भोर जिस | Aaye Bhor Jis
Kaphi · काफी · Dvitiya Patotsav - Dol Utsav Ke Dusare Din · द्वितीया पाटोत्सव - डोल उत्सव के दूसरे दिन
आये भोर जिस कहाँ रहे रंगभीनेहो ॥ भली किनी भले आये प्रातः बाल रंगभीनेहो ॥१॥ बाकी पाग पेंच ऊरझे प्रीत
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ठाडे कुंज द्वार | Thade Kunj Dvar
Khat · खट · Gangaur · गनगोर
ठाडे कुंज द्वार पीय प्यारी करत परस्पर हसहस बतीयां ॥ रंगीली तीज गनगोर भोर सज आईं घर घर तें सब सखीयां
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कहत जसोदा सब | Kahat Jasoda Sab
Sarang · सारंग · Gangaur · गनगोर
कहत जसोदा सब सखीयन सों आवो बैठो मंगल गावो ॥ हे गनगोरकी तीज रंगीली मदन मोहनकों लाड लडावो ॥१॥ ललिता चन
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अरवीलो गरवीलो रंगीलो | Aravilo Garavilo Rangilo
Bilaval · बिलावल · Gangaur · गनगोर
अरवीलो गरवीलो रंगीलो छबीलो कान्ह करि के सिंगार ठाढौ देखो सखी कुँजद्वार । वाम भाग राधा प्यारी ओढे चुन
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भोर निकुंज भवन | Bhor Nikunj Bhavan
Bilaval · बिलावल · Gangaur · गनगोर
भोर निकुंज भवन पिय प्यारी करत परस्पर हँसि-हँसि बतियाँ । बाजत बीन पखावज अधोटी गावति चतुर ताल दै सखिया
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कमल दल चंद | Kamal Dal Chand
Nur Sarang · नूर सारंग · Gangaur · गनगोर
कमल दल चंद वदनी मृगनेनी ॥ ललिता विशाखा बनि बनि निकसीं फूलन गुहीहें बेनी ॥१ ॥ हंस चकोर कोकिला मृगगण ब
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क्यों बेठी राधे | Kyom Bethi Radhe
Sarang · सारंग · Gangaur Ke Din Chhak · गनगोर के दिन छाक
क्यों बेठी राधे सुकुमारी ।। बूझतहे व्रज जानके महेरी क्यों जेंबत बाबाकीथारी ।।१।। आज हमारो गोरी व्रत
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फूल गई वृषभान | Phul Gai Vrishabhan
Sarang · सारंग · Gangaur Ke Din Chhak · गनगोर के दिन छाक
फूल गई वृषभान दुलारी ।। पहेले तो निरखत नेनन भर क्यों पूजों एकांतन न्यारी ।।१।। कर अंजन नेनन दे मोहन
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बैठि रही राधे | Baithi Rahi Radhe
Sarang · सारंग · Gangaur Ke Din Chhak · गनगोर के दिन छाक
बैठि रही राधे सकुमारी । बूझति है वृषभानु की महरी क्यों न जेंवति बाबा की प्यारी ।।१।। आजु हमारें गौरी
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प्रकटी सूरज सुता | Prakati Suraj Suta
Bilaval · बिलावल · Shri Yamunaji Ki Badhai · श्री यमुनाजी की बधाई
प्रकटी सूरज सुता अधम उधारनकों को कहे महिमा जाकी ॥ छठी उजियारी चैत्रमासकी उपजी वेलि सुधाकी ॥१॥ पटरानी
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जयजय श्रीयमुना आनंद | Jayjay Shriyamuna Anand
Bilaval · बिलावल · Shri Yamunaji Ki Badhai · श्री यमुनाजी की बधाई
जयजय श्रीयमुना आनंद कंदिनी ॥ दरशपरश त्रिविध ताप जात दुख निकंदिनी ॥१॥ अंगअंग छबि तरंग शोभा सिंधुनी ॥
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जयजय श्रीसूरजा कलिन्द | Jayjay Shrisuraja Kalind
Bilaval · बिलावल · Shri Yamunaji Ki Badhai · श्री यमुनाजी की बधाई
जयजय श्रीसूरजा कलिन्द नंदिनी ॥ गुल्मलता तरुसुवास कुंज कुसुम मोद मत्त गुंजत अलि सुभग पुलिन वायु मंदिन
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वधावनो हेली भानके | Vadhavano Heli Bhanake
Todi · टोडी · Shri Yamunaji Ki Badhai · श्री यमुनाजी की बधाई
वधावनो हेली भानके आज जन्मीहे जीवन मूल ॥ध्रु०॥ धन्य धन्य संजा कूंख सजनी धन्य धन्य दिन ए जाम ॥ प्रकटी
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दिनकर घर आनन्द | Dinkar Ghar Anand
Asavari · आसावरी · Shri Yamunaji Ki Badhai · श्री यमुनाजी की बधाई
दिनकर घर आनन्द उदित बढ्यो अति चलि सखी आज वधावें ॥ प्रकट भई यमुना जगतारण सब मिलि मंगल गावें ॥१॥ धन्य
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मेरे रामलला को | Mere Ramlala Ko
Ramakali · रामकली · Shri Ram Navami Ki Badhai · श्री राम नवमी की बधाई
मेरे रामलला को सोहिलो सुन नाचो सुर नर नारीहो ॥ उमग उमग आनंदमें डोलें तन मन धन सब वारीहो ॥१॥ गृहगृहते
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नौमिके दिन नोबत | Naumike Din Nobat
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ki Badhai · श्री राम नवमी की बधाई
नौमिके दिन नोबत बाजे कौशल्या सुत जायो ॥ सातघरी दिन उदित भयोहे सब सखियन मंगल गायो ॥१॥ कांप्यो सिंधु क
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सोहिलो सुहायो आज | Sohilo Suhayo Aaj
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ki Badhai · श्री राम नवमी की बधाई
सोहिलो सुहायो आज ॥ घरघर मंगल होत अवधपुर भयेहें मनोरथ काज ॥१॥ फूली फिरत सुवासिन दाई अति आनंद महाराज ॥
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राम जन्म मानत | Ram Janma Manat
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ki Badhai · श्री राम नवमी की बधाई
राम जन्म मानत नंदराई । प्रथम फुलेल उबटनों सोंधो यह बिध लाल न्हवाई ॥१॥ रंग केसर वागो कुलही आभूषण पहिर
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आज महामंगल कौशलपुर | Aaj Mahamangal Kaushalapur
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ki Badhai · श्री राम नवमी की बधाई
आज महामंगल कौशलपुर सुन नृपकें सुत चार भये ॥ सदन सदन सोहिलो सुहायो नभ ओर नगर निसान हये ॥१॥ अति सुख वे
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झूलत रामपालने सोहें | Jhoolat Rampalane Sohain
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ke Palna · श्री राम नवमी के पालना
झूलत रामपालने सोहें ॥ भुरिभाग्य जननी जनजोहें ॥१॥ तन मृदुमंजुलमेचकताई ॥ झलकत चाल विभुषण झांई ॥२॥ अधर
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श्रीरघुनाथ पालने झूले | Shriraghunath Palane Jhule
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ke Palna · श्री राम नवमी के पालना
श्रीरघुनाथ पालने झूले कौसल्या गुण गावे ॥ बल अवतार देवमुनि वंदित राजीवलोचन भावे ॥१॥ राजा दशरथ पलना गढ
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कनक रतन मय | Kanak Ratan May
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Navami Ke Palna · श्री राम नवमी के पालना
कनक रतन मय पालनो रच्यो मारु सुत्रधार ॥ विविध खिलौना किंकिनी मंजुल मुक्ताहार ॥ रघुकुल मंडनराम रामललाह
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रामकृष्ण ऊठ कहीयें | Ramakrishna Uth Kahiyem
Vibhas · विभास · Shri Ram Ki Bal Lila · श्री राम की बाल लीला
रामकृष्ण ऊठ कहीयें भोर ॥ यह अवधेश वे व्रजजनजीवन यह धनुष धरन वे माखन चोर ॥१॥ इनकें चमर छत्र शिर सोहें
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सुभग सेज शोभित | Subhag Sej Shobhit
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Ki Bal Lila · श्री राम की बाल लीला
सुभग सेज शोभित कौशल्या रुचिर रामशिशु गोदलियें ॥ बाललीला गावत हुलरावत पुलकित प्रेम पीयूष पियें ॥१॥ कब
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कोंसल्या रघुनाथकों ले | Komsalya Raghunathakom Le
Bilaval · बिलावल · Shri Ram Ki Bal Lila · श्री राम की बाल लीला
कोंसल्या रघुनाथकों ले गोद खिलावे ॥ सुंदर वदन निहारकें हँस कंठ लगावे ॥१॥ पीत झंगुलिया तनलसे पग नूपुर