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तिन मध्य बैठे छाक खात | Tin Madhya Baithe Chhak Khat
Sarang · सारंग · Chhappan Bhog · छप्पन भोग
तिन मध्य बैठे छाक खात मदन रूप मंडली रची । छप्पन भोग छतीसों व्यंजन आन आगे थार सची ॥१॥ एक खात एक हसत प
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छप्पन भोग अरोगन लागे | Chhappan Bhog Arogan Lage
Sarang · सारंग · Chhappan Bhog · छप्पन भोग
छप्पन भोग अरोगन लागे । श्री वृषभान कुँवरी नंदनंदन ले अपनो गन संग अनुरागे ॥१ ॥ विविध भांति पकवान मिठा
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मंडल रचना रुचिसों रचि | Mandal Rachana Ruchison Rachi
Sarang · सारंग · Chhappan Bhog · छप्पन भोग
मंडल रचना रुचिसों रचि चित्र विचित्र व्रजकी बालन । दधि पय नवनीत मध्य सर्करा पलासनके पत्रनके पुटनकी पं
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गोपी मन अति आनंद | Gopi Man Ati Anand
Gauri · गौरी · Chhappan Bhog · छप्पन भोग
गोपी मन अति आनंद ऊमग भरि। विनति प्रेम पुलकित तन नंद समीप दोऊ कर जोर करि ॥१॥ न्योतो हमारो आवो सब ही ज
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मैया अपने सुतहि जिमावत | Maiya Apane Sutahi Jimavat
Iman · ईमन · Chhappan Bhog · छप्पन भोग
मैया अपने सुतहि जिमावत ॥ खीर खांड घृत लोणी लाडू जोईजोई स्यामहि भावत ॥१॥ यमुनोदक कंचनझारी भर संज्या ब
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लाल आज बना बन्यो | Lal Aj Bana Banyo
Sarang · सारंग · Vivah Utsav · विवाह उत्सव
लाल आज बना बन्यो अति भाई, वागो विचित्र बनाई, जरकसी पाघ चोलना सुंदर अरगजा सोधो लगाई ॥१॥ तापर फुलनके ह
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आज ललनकी होत सगाई | Aj Lalanaki Hot Sagai
Bilaval · बिलावल · Byah Ke Pad · ब्याह के पद
आज ललनकी होत सगाई ॥ आवोरी गोपीजन मिलके गावो मंगल चार वधाई ॥१॥ चोटी सुपर गुहुं सुत तेरी छांडो चंचलताई
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मैया मोहि ऐसी दुलहनी | Maiya Mohi Aisi Dulahani
Ashavari · आशावरी · Byah Ke Pad · ब्याह के पद
मैया मोहि ऐसी दुलहनी भावे ॥ जैसी ये काहुकी डीठोनीया रूनक झुनक घर आवे ॥१॥ कर कर पाक रसाल रसोई अपने कर
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दिन दुल्हे मेरो कुंवर | Din Dulhe Mero Kunvar
Sarang · सारंग · Byah Ke Pad · ब्याह के पद
दिन दुल्हे मेरो कुंवर कन्हैया ॥ नित्य ऊठ सखा शींगार बनावे नित्य आरती उतारत मैया ॥१॥ नित्य ऊठ आंगन चं
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अपने लालको ब्याह करूंगी | Apane Lalako Byah Karungi
Sarang · सारंग · Byah Ke Pad · ब्याह के पद
अपने लालको ब्याह करूंगी, बडे गोपकी बेटी ॥ जासो हमसों जतिया चारो भोजन भेटा भेटी ॥१॥ मात यशोदा लाड लडा
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रत्न जडितको वल्लभलालके | Ratan Jaditako Vallabhalalake
Kanharo · कान्हरो · Byah Ke Pad · ब्याह के पद
रत्न जडितको वल्लभलालके सीस सोहे सेहरा; धर्यो शीश पर छबिसों बनायके फूल रंग-रंग केवरा ॥१॥ आवो सुंदरी म
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आज की बानिक पर | Aj Ki Banik Par
Bilaval · बिलावल · Basant Bahar Ke Pad · बसंत बहार के पद
वसंत पंचमी के दिन मंगला में बिलावल ॥ चोताल ॥ आज की बानिक पर हो लाल हों बलि बलि गई बिगलित कच सुवन पाग
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लहेकन लागी बसंतबहार | Lahekan Lagi Basantabahar
Malakauns · मालकौंस · Basant Bahar Ke Pad · बसंत बहार के पद
लहेकन लागी बसंतबहार सखि त्यों त्यों बनवारी लाग्यो बहेकन ॥ फूले पलास नखनाहार केसे तेसें कानन लाग्यो म
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चल बन देख सयानी | Chal Ban Dekh Sayani
Malakauns · मालकौंस · Basant Bahar Ke Pad · बसंत बहार के पद
चल बन देख सयानी यमुना तट ठाडो छेल गुमानी ॥ फूले कदंब नाहर पलास द्रुम त्रिविध पवन सुखसानी ॥१॥ बहुरंग
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लहेकन लागीरी बसंत बहार | Lahekan Lagiri Basant Bahar
Malakauns · मालकौंस · Basant Bahar Ke Pad · बसंत बहार के पद
लहेकन लागीरी बसंतबहार मानो बनवारी लाग्यो बहकन ॥ ना जानो जब कहा करेंगे लागे हे पलास द्रुम डहकन ॥१॥ मद
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फूल्योरी सघन बनता में | Phoolyori Saghan Banata Men
Malakauns · मालकौंस · Basant Bahar Ke Pad · बसंत बहार के पद
फूल्योरी सघन बनता में कोकिला करत गान ॥ चलरी बेग वृषभान नंदिनी छाड कठिन मनमान ॥१॥ नव ऋतुराज आयो नेरे
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ईमन मान मेरो कह्यो | Iman Man Mero Kahyo
Iman · ईमन · Basant Ragamala Shayan Darshan · बसंत रागमाला शयन दर्शन
ईमन मान मेरो कह्यो काहेकी प्यारे प्यारी तु ॥ प्रथमही भरी गुन गाईए यही ते सुधराई होतु ॥१॥ मालकौंस की
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आई ऋतु-बसंत की | Aai Ritu-Basant Ki
Basant · बसंत · Basant Panchami Ke Pad · बसंत पंचमी के पद
॥ साखी ॥ आई ऋतु-बसंत की गोपीन किये सिंगार ॥ कुमकुम बरनी राधिका सो निरखति नंदकुमार ॥१॥ आई ऋतु-बसंत की
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आई बसंतऋतु अनुपनूत | Aai Basant Ritu Anupanut
Basant · बसंत · Basant Panchami Ke Pad · बसंत पंचमी के पद
आई बसंतऋतु अनुपनूत कंतमोरे ॥ बोलत वन कोकिला मानों कुहकुहु रस ढोरे ॥१॥ फूली वन राई जाई कुंद कुसम घोरे
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आज सुभगदिन वसंतपंचमी | Aaj Subhagdin Vasantpanchami
Basant · बसंत · Basant Panchami Ke Pad · बसंत पंचमी के पद
आज सुभगदिन वसंतपंचमी जसुमति करति बधाई ॥ विविध सुगंध उवटिकें लालकों ताते नीर न्हवाई ॥१॥ बांधीपाग बनाय
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प्रथम समाज आज वृंदावन | Pratham Samaj Aaj Vrindavan
Basant · बसंत · Basant Panchami Ke Pad · बसंत पंचमी के पद
प्रथम समाज आज वृंदावन विहरतलाल विहारी ॥ पांचे नवल वसंत वृंदावन उमगि चलीं व्रजनारी ॥१॥ मंगलकलश लिये व
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आज मदन महोत्सव राधा | Aaj Madan Mahotsav Radha
Basant · बसंत · Basant Panchami Ke Pad · बसंत पंचमी के पद
आज मदन महोत्सव राधा ॥ मदन गोपाल बसंत खेलतहें नागर रूप अगाधा ॥१॥ निधिबुधवार पंचमी मंगल ऋतुकुसमाकर आई
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जागि हो लाल, गुपाल | Jagi Ho Lal, Gupal
Basant · बसंत · Basant Jagayave Ke Pad · बसंत जगायवे के पद
जागि हो लाल, गुपाल, गिरिवरधरन, सरस ऋतुराज बसंत आयौ ॥ फूले द्रुमवेली, फल, फूल, बौरे, अंब, मधुप, कोकिल
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प्रात समें गिरिधरनलाल कौ | Prat Samen Giridharanlal Kau
Basant · बसंत · Basant Jagayave Ke Pad · बसंत जगायवे के पद
प्रात समैं गिरिधरनलाल कौ करति प्रबोध जसोदा मैया ॥ जागौ लाल, चिरैया बोलीं, सुंदर मेरे कुँवर कन्हैया ॥
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खिलावन आवेंगी ब्रजनारी | Khilavan Avengi Brajanari
Bibhas · बिभास · Basant Jagayave Ke Pad · बसंत जगायवे के पद
खिलावन आवेंगी ब्रजनारी ॥ जागो लाल चिरैयां बोलीं कहे जसुमति महतारी ॥१॥ ओट्यो दूधपान करि मोहन बेगि करो