Padma Dharyau Jan Tap
पद्म धर्यौ जन ताप
पद्म धर्यौ जन ताप निवारन चक्रसुदर्शन धर्यौ कमल कर भक्तनकी रक्षाके कारन ॥१॥ शंख धर्यौ रिपु उदर विदारन । गदा धरी दुष्टन स...
Raag
Read 23 Pushtimargiya kirtans in Malav · मालव with original Braj Bhasha text and English meanings.
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पद्म धर्यौ जन ताप
पद्म धर्यौ जन ताप निवारन चक्रसुदर्शन धर्यौ कमल कर भक्तनकी रक्षाके कारन ॥१॥ शंख धर्यौ रिपु उदर विदारन । गदा धरी दुष्टन स...
प्रथम बिलास कियौ
प्रथम बिलास कियौ श्यामाजू कीनौ बिपिन बिहारजू ॥ उनके बिधकी शोभा बरनों कहत न आवै पारजू ॥१॥ बाके यूथकी गणना नाहीं निर्गुण...
द्वितीय बिलास कियौ
द्वितीय बिलास कियौ श्यामाजू खेल समस्या कीनी ॥ ताकी मुख्य सखी ललिताजू आनंद महारस भीनी ॥१॥ चली संकेत विहार करन बलि पूजा स...
तृतीय बिलास कियौ
तृतीय बिलास कियौ स्यामाजू प्रवीन । खेलनकौ उच्छाह सखी एकत्र कीन ॥१॥ तिनमें मुख्यसखी विशाखाजू ऐन ॥ चलीनिकुंज महेलमें कोकि...
चौथो बिलास कियो
चौथो बिलास कियौ श्यामाजू परासौली बन माँई ॥ ताके वृक्षलता द्रुमवेली तन पुलकित आनंद न समाई ॥१॥ चंद्रभगा मुख्य यूथावलि अपन...
पाँचौ बिलास कियो
पाँचौ बिलास कियौ श्यामाजू कदली बन संकेत ॥ ताकी सखी मुख्य संजावलि पिया मिलनके हेत ॥१॥ चली रली उमगी युवती सब पूजनदेवी निक...
छठौ बिलास कियौ
छठौ बिलास कियौ श्यामाजू ॥ गोधन बनकों चली भामाजू ॥ पहेरें रंगरंग सारी ॥ हाथन पूजा थारी ॥१॥ ताकी मुख्य सहचरी राई ॥ खेलनको...
सातौ बिलास कियौ
सातौ बिलास कियौ स्यामाजू गहवरवनमें मतौजु कीन ॥ मुख्य कृष्णावती सहचरी लघु लाघव अतिही प्रवीन ॥१॥ बनदेवी हे गुंजाकुंजा पुह...
आठों बिलास कियौ
आठों बिलास कियौ श्यामाजू शांतनकुंड प्रवेशजू ॥ उनकी मुख्य भामा सारंगी खेलत जनित आवेशजू ॥१॥ सूरज मंदिर पूजन कर मेवा सामग्...
नवमों बिलास कियौ
नवमों बिलास कियौ जु लड़ैती नवधा भक्त बुलाये ॥ अपने अपने सिंगार सबै सज बहु उपहार लिवाये ॥१॥ सब स्यामा जुर चलीं रंगभीनी ज...
दश उल्लास, श्री हरिराय महाप्रभु विरचित
(१) श्री पुरुषोत्तम करूं प्रनांउ, इनको उल्लास परम रुचि गाऊं, श्रीवल्लभकृपा अनुग्रह करही, मो मतिहीन शारदा शुद्ध धरही, एक...
जीत्यो जीत्यो हो
जीत्यो जीत्यो हो यशोदाको नंदन मघवा वृष्टि निवारी ॥ वाम बाहु राख्यो गिरि नायक गोकुल आरति टारी ॥१॥ इन्द्र खिस्याय जोर कर...
श्रीकल्याणराय घर प्रकटे
श्रीकल्याणराय घर प्रकटे श्रीहरिराय महारसरूप ।। आश्विन कृष्ण पंचमी शुभदिन रसिकराय मन आनंद रूप ।।१।। बाजत मंगलचार बधाई झा...
हिंडोरे झूलत हें भामिनी
हिंडोरे झूलत हें भामिनी ॥ श्यामाश्याम बराबर बैठे शरद सुहाई यामिनी ॥१ ॥ पांचबरसके श्याम मनोहर सातबरसकी बाला ॥ कमलनयन हरि...
फुलनको हिंडोरो फुलन की
फुलनको हिंडोरो फुलन की डोरी फुले नंदलाल फुली नवल किसोरी ॥ फुलन के खम्भ दोऊ डांडी फुलन की पटली बैठे एक जोरी ॥१ ॥ फुले सघ...
झूलत मदनमोहन राधा संग
झूलत मदनमोहन राधा संग गिरिवरपर लागत छबि भारी ॥ पानखात मुसकात परस्पर अरुण अधर कुंतल सटकारी ॥१॥ मंदमंद सुरगावत दोउ मालवरा...
झूलत ललना लाल हिंडोरें
झूलत ललना लाल हिंडोरें गोवर्धनकी शिखर सुहाये ॥ सखीयन कुंजरची अति अद्भुत वरन वरन फल फूल लगाये ॥१॥ तेसोई कुसुम विचित्र हि...
झूलत कुंज हिंडोरें गिरिपर
झूलत कुंज हिंडोरें गिरिपर मन्मथ मोहन संग श्यामाजु ॥ सारी पचरंग अरु कटि लहेंगा कंचुकी पियमन अभिरामाजु ॥१॥ पिय शिर मुकुट...
झूलत सुभग हिंडोरें गिरिधर
(५) झूलत सुभग हिंडोरें गिरिधर गोवर्धन पर्वतके ऊपर ॥ दुहुंओर झूलवत गावत त्रिय वरणवरण पेहेरें तन अंबर ॥१॥ तेसीये दामिनी द...
हिंडोरो नवरंग्यो सजनी
हिंडोरो नवरंग्यो सजनी तहां झुले श्रीविट्टलेशराय ॥ चलो सखी देखनकूं जैयें यह सुख शोभा कही न जाय ॥१॥ नवरंग कनक खंभ द्वय रा...
श्रीविट्ठलराय लालगिरिधरन झुलावत
श्रीविट्ठलराय लालगिरिधरन झुलावत सुरंगहिंडोरें ॥ सुन्दरवदन निहारत फिरफिर चितवत नयना जोरें ॥१॥ अतिशोभित शिरपाग संवारी केस...
आईं आईं सकल व्रजनारी
आंईं आंईं सकल व्रजनारी झूलन हरिके हिंडोरनां ॥ नवसत साज कुरंग नयनी आभूषण तन आछे सुरंगवसन अमोलनां ॥१॥ कंचन खंभ आछे जटित म...
झूलत गोकुलचंद हिंडोरें
झूलत गोकुलचंद हिंडोरें झुलावत सब व्रजनारी ॥ संगशोभित वृषभाननंदिनी पहेरें कसुंभी सारी ॥१॥ पचरंगी डोरी गुहिलीनी डांडी सरस...