Baraj Baraj Hare Barajat
बरज बरज हारे बरजत
बरज बरज हारे बरजत डारें जूठन मांझ बिंजन भयो भोजन हरि ॥ नीके सब लीए अघाई कोरन मुख दीयो जाई जमुनादिक पान करत अचवन करि ॥१॥...
Raag
Read 233 Pushtimargiya kirtans in Malhar · मल्हार with original Braj Bhasha text and English meanings.
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बरज बरज हारे बरजत
बरज बरज हारे बरजत डारें जूठन मांझ बिंजन भयो भोजन हरि ॥ नीके सब लीए अघाई कोरन मुख दीयो जाई जमुनादिक पान करत अचवन करि ॥१॥...
भयो भोजन करत लाल
भयो भोजन करत लाल अचवन जबें ॥ अति ही अघाय भए सुर मंडल सहित सखा संग ग्वाल करि पान आए सबें ॥१॥ करत बलिहारी चलि उलटि छकहारी...
पान मुख बीरी राची
पान मुख बीरी राची हरिकें रंग सुरंगे ॥ एसी कृपा सदा हम उपर टारी जिन तुम संगे ॥१॥ हरि हम तुम बिन कोन कामके परत प्रेममें भ...
बीरी सुबल श्याम कों
बीरी सुबल श्याम कों देत ॥ श्याम सखा ग्वालन को बांटत उपजावत अति हेत ॥१॥ बरखा बरखत तें सब बिडरी गायन की सुध काहे न लेत? च...
अधर रंग राख्यो अरुन
अधर रंग राख्यो अरुन अति प्रेम प्रीतके पान हरत मन बीडा ॥ यह सुख रास व्रजवास नंदलाल संग नित गो चारन नित बन क्रीडा ॥१॥ यह...
हमारे माई स्यामाजूको राज
हमारे माई स्यामाजूको राज ॥ जाके आधीन सदाही सांवरो या व्रजको शिरताज ॥१॥ यह जोरी अविचल श्रीवृन्दावन नही औरनसों काज ॥ श्री...
यह ऋतु आई वर्षन
यह ऋतु आई वर्षन पियविन हीयरा धरकें ॥ घनकी गरज ओर लरज मोरनकी सुनसुन छतियां दरकें ॥१॥ कोन भांत करूँ केसें धीरज धरूं पियमू...
कोऊमाई केसेंहीजो कहो
कोऊमाई केसेंहीजो कहो ॥ नवरंग गिरिधरलाल लाडिलो मम कुचबीच रहो ॥१॥ जेनहीं जानत मरम हिलगकी अपनीदेहदहो ॥ पियसंगमकी श्रमजल सर...
सखी अब मोपें रह्यो
सखी अब मोपें रह्यो न जाय ॥ चलिरी मिल उनहीपें जैये जहां चरावत गाय ॥१॥ अंगअंगकी सब सुधि भूली देखत नंदकिशोर ॥ मेरोमन हरिलि...
एसेमाई चहुँदिश तें घनघोरें
एसेमाई चहुँदिश तें घनघोरें ॥ मानों मत्त मदनकेहाथी बलकर बंधन तोरें ॥१॥ श्याम अंगपर चूँबत गंडमद वरखत थोरेथोरें ॥ धावत पवन...
लालमाई भीजत आये गेह
लालमाई भीजत आये गेह ।। पीत दुमालो अधि बिराजत कलगी अधिक स्नेह ।।१।। गरजत गगन मृदंग बजावत पवन झकोरत मेह ।। श्रीविट्ठल गिर...
सखीरी अब क्यों न
सखीरी अब क्यों न बरखत मेह ।। जोलों पीय आवें बनतें घर तोलों वीचनेकदेह ।।१।। नातर मोहि ले चलि भीजतही छांड देहु यह गेह ।।...
देख बदरिया सावनकी
देख बदरिया सावनकी ।। इकटक व्है ठाडी मगजोवत मनमोहनके आवनकी ।।१।। दामिनि दमक घन गरजन लाग्यो मंदमंद वरषा वनकी ।। तेसेई पीऊ...
लाडिलो लड्याय बुलावत धेनु
लाडिलो लड्याय बुलावत धेनु ।। चढ कदंब धूमर धौरी काजर पीयरी पूरत मधुर स्वरवेनु ।। चुचकारत पोंछत सुंदर कर सकल सुभग सुख एन...
माधो भलो बन्यो आवेहो
माधो भलो बन्यो आवेहो ।। देखत जिय भावे हो ।।ध्रु०।। मोर पंखके चंदुवा नीके माथे बांधलिये ।। गुंजा फलके हार बनाये सब शृंगा...
ब्यारु करत करकोर धरत
ब्यारु करत करकोर धरत मुख सुख उपजत कछु स्वाद अधिक अत । गरज गरज बरखत बडी बूंदन दामिनी दमकत चाहे रहत जित ॥१॥ सुर न तान रंग...
ब्यारु करत बलराम श्याम
ब्यारु करत बलराम श्याम जैसी घटा श्याम सुख श्याम देखत मन । पलक ओट अकुलात आरत अत तज न सकत एको घडी पल छिन ॥१॥ ओटभये लखलख छ...
अधर रंग राख्यो अरुन
अधर रंग राख्यो अरुन अति प्रेम प्रीतके पान हरत मन वीरा। यह सुखरास व्रजदास नंदलाल संग हित गौचारन हित वनक्रीडा ॥१॥ यह वरखा...
वरषा ऊदीत भई ऋतु
वरषा ऊदीत भई ऋतु मान ॥ संध्या समय ब्यारु की बीरीयां कित डोलत है कान्ह ॥१॥ नंद बाबा बैठें मग जोवत प्रीत जो सुत की जान ॥...
सुनि सुनि सुत की
सुनि सुनि सुत की बात जननी तात हँसी हँसी जात कोर ले ले खात त्यों त्यों अखियाँ सिरात ॥ संकरसन कहत केसी उमडि घूमडि घटा आई...
दूध पीवत मानौं घुट
दूध पीवत मानौं घुट प्रेम की हरि हलधर बिच होड परी री ॥ परसपर दोऊ पीवत पीवावत गोपी जन मानौं मोद भरी री ॥१॥ नेन्हीं नेन्ही...
पय पीवत करत बात
पय पीवत करत बात सकुचत मुसिकात जात रस भरे पीय प्यारी जहाँ ऊंची चित्रसारी ॥ बरषत घन हरखत मन बीजुरी की चमक देख उपजत आनंद स...
गिरिधर पीवत दूध सीराय
गिरिधर पीवत दूध सीराय पिय बैठे अटा घटा देखनको छतना हाथ लगाये ॥१॥ हरित भूमि तट ठाडे गावत राग मल्हार तापर धरी सजल रस मंजर...
दूध पीवत भर कनक
दूध पीवत भर कनक कटोरन हरि हलधर बीच होडपरी । अरसपरस दोऊ पीवत पिवावत गोपीजन मनमोद भरी ॥१॥ नेनी नेनी बूंदन वरखन लाग्यो दाम...
बदरिया तू काहेको व्रजपर
बदरिया तू काहेको व्रजपर दोरी ॥ चमकत बीच महाधन ओल्हर दुख पावत हें किसोरी ॥१॥ भीजत गोपी सघन कुंजतर चूंबत चुंदरी मोरी ॥ सू...
रंग महल में ठाढे
रंग महल में ठाढे पिय प्यारी दोऊन की छबि रहि मों जिय अटकि ॥ इनकें कसूंभी सारी लहेकारी सोहें भारी इन के सिर लाल पाग रही ल...
देखो सखी ठाढे नंद
देखो सखी ठाढे नंद किसोर ॥ गोवरधन परवत के ऊपर तेसेई नाचत मोर ॥१॥ लाल पाग सिर सुभग लाल के लाल लकुटिया हाथ ॥ लाल रतन सिर प...
रिमझिम रिमझिम बरखत मेह
रिमझिम रिमझिम बरखत मेह तरु तर ठाढे प्रितम प्यारी ॥ लालन सिर सोहे पाग लाल लटकि रहि लाडिली के अंग बनी लाल सुभग सारी ॥१॥ अ...
कबही कहेति प्यारी अजहू
कबही कहेति प्यारी अजहू न रिसगई मोहनी मौनधर कहत कछूनरी ॥ कान न कछू करत सन्मुखही लरत ज्योंज्यों वरजी त्योंत्यों भई अति दू...
नवरंग तूं नवरंग यह
नवरंग तूं नवरंग यह अवसर नवरंग बनीरी भूमि हरियारी ॥ नव गरजन नव घोर मेघकी नवल पपैया बोले गगनविहारी ॥१॥ नवचातक पिक फिरत मन...
कितहोत अयानीरी काहूके
कितहोत अयानीरी काहूके कहें सुनें पियके औगुण मन मांझ धरत ॥ वेतो गुण पूरण सबहीके हितकारी तोसों तो अधिक प्रीति टारी न टरत...
जोलों माई हों जीवनभर
जोलों माई हों जीवनभर जीऊं ॥ तोलों मदनगोपाल लालके पंथ न पानी पीऊं ॥१॥ करूं न अंजन धरूं न मरकत मृगमद अंग न लाऊं ॥ असित कल...
सघन घटा घन घोर
सघन घटा घन घोर न्हेनी न्हेनी बूंदन हो पिय वर्षे ॥ तेसीय कनक चित्र सारी तामें पोढी पिय प्यारी तेसीय दामिनी अतिही दर्षे ॥...
पोढे श्रीराधिकाके गेह
पोढे श्रीराधिकाके गेह ॥ नवल धाम नवल शैया नवल बाढ्यो नेह ॥१॥ नवल सुंदर नवल जोबन नवल बरखत मेह ॥ कृष्णदास त्रैलोक नागर नवल...
दोउ मिल पोढे एकही
दोउ मिल पोढे एकही संग ॥ सीयरी ब्यार झरोखन आवत करत केलि रसरंग ॥१॥ गरजत गगन दामिनी कोंधत झलकत दोउ अंग ॥ रसिक प्रीतम ललिता...
आज झुमि झुमि आई
आज झुमि झुमि आई हो घनघटा ॥ नेक रहो सुंदर वर सोई पोढ रहो वृषभान अटा ॥१॥ श्यामाजुकी सुख सेज पोढिये निपट अंधेरी रेंन महा ब...
न्हेंनी न्हेंनी बूंदन हो
न्हेंनी न्हेंनी बूंदन हो पीय लाग्यो बरषन घन सघन घटा घन घोरें ॥ तेसीय कनक चित्र सारी तामें पोढे पीय प्यारी तेसीय दामिनी...
झुम -झूमि आईरी घन
झुम -झूमि आईरी घन घटा ॥ पोठि रहो घनस्याम सोई घर सोई रहो सोई नंद नंदन पोढि रहो बृषभानु अटा ॥१॥ निसी अंधीयारी कारी गेल हु...
देख श्रीवल्लभ रूपछटा
देख श्रीवल्लभ रूपछटा ॥ प्रेम कथा रस बरखत चहुंदिस उनये नवल घटा ॥१॥ चांपत चरन दमला निज कर पोढे ऊँची अटा ॥ रसिक प्रीतम श्र...
तेसोई वृन्दावन तेसीये हरित
तेसोई वृन्दावन तेसीये हरित भूमि तेसीये वीरवधू चलत सुहाई माई ॥ तेसेई कोकिला कल कुहकुहू कूजत तेसेई नाचतमोर निरखत नयना सुख...