Rup Mohini Dhari Braj
रूप मोहिनि धरि ब्रज
रूप मोहिनि धरि ब्रज आई । अद्भुत साजि सिंगार मनोहर असुर कंस दै पान पठाई ॥१॥ कुच बिच बाँटी लगाई कपट करी बालघातिनि परम सुह...
Raag
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रूप मोहिनि धरि ब्रज
रूप मोहिनि धरि ब्रज आई । अद्भुत साजि सिंगार मनोहर असुर कंस दै पान पठाई ॥१॥ कुच बिच बाँटी लगाई कपट करी बालघातिनि परम सुह...
प्रथम कंस पूतना पठाई
प्रथम कंस पूतना पठाई । नंद घरनि सुत लिये जहाँ बैठी चली चली निजधाम जु आई ॥१॥ अतिमोहनि नाम धरी लीनौ देखत ही सबके मन भाई ।...
पलना फूल भरतौ नंदरानी
पलना फूल भर्यो नंदरानी । ता मधिय झूलत छगन मगनवा निरखत नैन सिरानी ॥१॥ नानाबिधके खिलोना लै लै खिलावत मृदु मुसिकानी । रसिक...
पलना फूलन गूँथ बनायौ
पलना फूलन गूँथ बनायौ ॥ जाती जूही चमेली चंपा कनेर सुरंग सुहायौ ॥१॥ राईवेल गुलतुर्रा सोहत बीच फोंदना लै लटकायौ॥ लेकर गोद...
तुम ब्रजरानीके लाला
तुम ब्रजरानीके लाला । अहो दधि मथति सुहाई के लाला ॥ध्रु॥ दिव्य कनककौ पालनों लाल रतन जटित नगहीर । गजमोतिनके झूमिका लाल ऊप...
हे दैया मतवाला जोगी
हे दैया मतवाला जोगी द्वारे मेरे आया है । जटाजूट शिर गंग बिराजत त्रैलोचन मन भाया है । वृषभ ऊपर असवार होयके श्रीगोकुलकों...
आयो है अवधूत जोगी
आयो है अबधूत जोगी कन्हैया दिखलावै हो माई ॥ध्रुं॥ हाथ त्रिशूल दूजे कर डमरु सिंगीनाद बजावै । जटा जूटमें गंग विराजै गुन मु...
बाला मैं जोगी जस
बाला मैं जोगी जस गाया । धन्य जसुमति तेरे तनकों जिन ऐसा सुत जाया ॥१॥ गुनन बड़ौ छोटी जिन जानौ अलख पुरुष घर आया । जाकौ ध्या...
काहु जोगियाकी दृष्टि लागी
काहु जोगियाकी दृष्टि लागी कन्हैया मेरो रोवै हो माई । घरघर पूँछत फिरत जसोदा दूध पीवै ना सोवै ॥१॥ कहाँ गये जोगी नंदभवन ब्...
काहू जोगियाकी नजर लागी
काहू जोगियाकी नजर लागी मेरौ बारौ कान्ह रोवै । घर घर हाथ दिखावै यशोदा दूध पीवै नहीं सोवै ॥१॥ चार डाँडी सरल सुंदर पालने झ...
हे धन धन
हे धन धन जसोदा कौन पुन्य तप किनो ॥ जाके आंगन मध्य रेगन करत गोविन्द गौरज भीने ॥१॥ गोद लिये हुलरावत गावतः सबहीन हीत चीत द...
आजु गई हों
आजु गई हों नंदभवनमें कहा कहूँ गृह चैनरी । चहूँ ओर चतुरंग लक्ष्मी कोटिक दुहिये धैनुरी ॥१॥ घूमि रहे जित तित दधि मथना सुनत...
धौरीकौ पय पीजै
धौरीकौ पय पीजै हो गोपाल जासौं तेरी बैनी बढ़ै । सब लरिकनमें सुनि सुंदर सुत तुव शिर अधिक चढ़ै ॥१॥ देखि देखि और व्रजबालिक...
घुटुरुवन चलत श्याम
घुटुरुवन चलत श्याम मनि आँगन मात पिता दोऊ देखत री । कबहुँक किलकिलात मुख हेरत कबहूँ जननी मुख पेख तरी ॥१॥ लटकत लटकत ललित भ...
अदभुत एक चितै
अदभुत एक चितै धों सजनी नंदमहरके आंगन री ॥ सोमैं निरख अपनपो खोयोगई मथनियां माँगन री ॥१॥ बालदशा मुखकमल अवलोकत कछु जननीसों...
जादिन कन्हैया मोसों
जादिन कन्हैया मोसों मैया कहि बोलेगो । तादिन अति आनंद गीनोरी (माइ) रूनक झुनक ब्रज गलिन में डोलेगो ॥१॥ प्रातही खिरक जाय द...
कीरति रानी पालने
कीरति रानी पालने झुलावै । रतन जटित को पलना वन्यौ है मोतिन जाल गुथावै ॥१॥ बिबिध भांति पाटकी डोरी हीरा बहुत जरावै । गजमोत...
गोवर्धन गिरिधारी ठाढ़े
गोवर्धन गिरिधारी ठाढ़े दान हमारौ दीजै भामिनि ॥ साँमल पीतपट ओढ़ें ज्यों घनमें चमकत दामिनि ॥१॥ बग पंगति मोतिन की माला इंद...
तूतों ओघड बडो
तूतों ओघड बडो कन्हैया ॥ ऐहें काल देखवे तोकों हँसहँस कहत यशोदा मैया ॥ दुलहनि परम सलोंनी सुन्दर बाकी मोकों लगो बलैया ॥ मो...
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ निरख निरख मुख कमल मनोहर आनंद उर न समावे हो ॥१॥ कबहुंक सुरंग खिलोना ले...
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले
श्रीविट्ठलनाथ पालनेझूले मात अक्कांजु झुलावे हो ॥ वारंवार निहार कमल मुख भाव सहितगुण गावे हो ॥१॥ कबहुंक सुरंग खिलोनां लेल...
मनिमय आंगन श्रीवल्लभके
मनिमय आंगन श्रीवल्लभके कनक पालनो सोहेहो ॥ मात अक्काजू झुलावे श्रीविट्ठल देखि देखि मनमोहे हो ॥१॥ सुंदर मुख मृदुहास मनोहर...
श्रीवल्लभ सुतकें सुत
श्रीवल्लभ सुतकें सुत प्रकटे श्रीरघुपति रस रूपरी ॥ श्रीस्वरूप मुख शोभा अद्भुत व्रजपति पूरण रूपरी ॥१॥ चलो सबे मिलि साज सि...
भोगी भोग करत
भोगी भोग करत सब रसको ।। नंदनंदन जसोदाको जीवन गोपीन मान पति सर्वसको ।।१।। तिलभर संग तजत नही निजजन गान करत मनमोहन जसको ।।...
जानि परव संक्रांति
जानि परव संक्रांति नंद-घर गर्गादिक मिलि आये हो । देखि तहां व्रजराज मुदित मन भीतर भवन बुलाये हो ॥१॥ दोऊ कर जोरि किये पद...
मात जसोदा परव
मात जसोदा परव मनावे ॥ भोगीके दिन तिल लडुवा ले लाडिले लालनकोंजु जिमावे ॥१॥ गोद बेठाय निहारत सुत मुख नानाविध के दान दिवाव...
बैठे व्रजराज गोद
बैठे व्रजराज गोद मोद सों गोपाललाल देत द्विजजन कों दान । व्रजवधू मङ्गल थाल साजि कर मे लिये गावत सुघर सुजान तरंग तान ॥१॥...
भोजन कीजे जननी
भोजन कीजे जननी सुखदाई । ओदन खोचरी सुरुचिसों लीजे सांवरे कुंवर कन्हाई ॥१॥ पापर सरस सधानोपूरी रोटीबरी कढोजु बनाई । माखन म...
दिनकर घर आनन्द
दिनकर घर आनन्द उदित बढ्यो अति चलि सखी आज वधावें ॥ प्रकट भई यमुना जगतारण सब मिलि मंगल गावें ॥१॥ धन्य कूंख संजारानीकी एसी...
इलम्मा श्रीवल्लभ लालहि झूलावे
इलम्मा श्रीवल्लभ लालहि झूलावे ॥ लाले झूलावे मन हुलसावे प्रमुदित मंगल गावे ॥१॥ गहि करडोर पाटकी करसों मनहि मन हुलसावे ॥ क...
श्रीवल्लभलाल पालने झूले
श्रीवल्लभलाल पालने झूले मात इलम्मा झुलावे हो ॥ निरख निरख छबि अपने लालकी तनकी तपत बुझावे हो ॥१॥ कठुला कंठ वज्रके हरि नख...
मात इलम्मा श्रीवल्लभ
मात इलम्मा श्रीवल्लभ लाडिलो लडावे ॥ रतन जटित पोढाय पालनें प्रेम नेह हुलरावे ॥१॥ चरन कमल भक्तन लख देत आनंद रस हेत ॥ पलना...
श्रीवल्लभलाल आंगन मध्य
श्रीवल्लभलाल आंगन मध्य खेलन ॥ पहले प्रगट श्रीयशोदा नंदन गोपीनकों रस देनन ॥१॥ अबही प्रगट श्रीलक्ष्मण नंदन श्रीभागवत रस ए...
आशा कर रही है
आशा कर रही है कुमारी विरह व्यथा तन भारी। विनवे चंद्रावली प्यारी करो सहाय ललिता सुकुमारी ॥१॥ समुझावत स्यामा विवेकी सखी र...
अधिक रजनी मानी
अधिक रजनी मानी हो नंदलाल । दुलहनि संग बिराजत चित्रसारी सुंदर नेन विसाल ॥१॥ पीत दुमालो सुखद गुनमें दरसी सीमावारो करत अधर...
ए दोऊ एक
ए दोऊ एक रंग रंग गहरे रंग मजीठ । हौं वाके मन वे मेरे मन बस रहे आली री कहां करेगो बसीठ ॥१॥ पीत दुमालो लाल सिर सोहे तासो...
अति छबि देत
अति छबि देत दुमालो सीस। मनमथ मान हरे हसि चितवत बने है गोकुलके ईस ॥१॥ ठाडे सिंधपोर अपने रंग संग सखा दस वीस। 'चत्रभुज' प्...
हरि को शृंगार
हरि को शृंगार हर्यो देख के मो मन अर्यो ॥ हर्यो बागो सिर टिपारो पाग कटि सुंथन विराजे है ॥१॥ ओढे हैं कवाय हर्यो पटुका हर्...
क्योरी तूं द्वारे
क्योंरी तूं द्वारे बोली आय ॥ तेरो बोल सुनत मेरो मोहन भोजन कछू न खाय ॥१॥ दोर चले भींतरते बाहिर उखट्यो होतो पाय ॥ श्रीविठ...
हरि भोजन करत
हरि भोजन करत विनोदसों ॥ करकर कोर मुखारविंद में देंत यशोदा मोदसों ॥१॥ मधु मेवा पकवान मिठाई दूध दह्यो वृत ओदसो ॥ परमानंदप...