Harikon Terat Phirat
हरिकों टेरत फिरत
हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥ आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥१॥ आज कलेऊ कियो प्रातही वछरा लेवन धाये ॥ मेवा मोदक मैया...
Raag
Read 192 Pushtimargiya kirtans in Sarang · सारंग with original Braj Bhasha text and English meanings.
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हरिकों टेरत फिरत
हरिकों टेरत फिरत गुवारी ॥ आन लेहो तुम छाक आपनी बालक बल बनवारी ॥१॥ आज कलेऊ कियो प्रातही वछरा लेवन धाये ॥ मेवा मोदक मैया...
तुमकों टेरटेर मैं
तुमकों टेरटेर मैं हारी ॥ कहांजो रहे अबलो मनमोहन लेहोन छाक तुम्हारी ॥१॥ भूल परी आवत मारगमें क्योंहूं न पेंडो पायो ॥ बूझत...
हरिजूको ग्वालिन भोजन
हरिजूको ग्वालिन भोजन लाई ॥ वृंदा विपिन विशद यमुनातट सुन ज्यों नार बनाई ॥१॥ सानसान दधिभात लियोहै सुखद सखनके हेत ॥ मध्यगो...
वांट वांट सबहिन
वांट वांट सबहिन कों देत ॥ ऐसे ग्वालहरिहैं जो भावत शेष रहत सोई आपन लेत ॥१॥ आछोदूध सद्य धोरीको ओट जमायो अपने हाथ ॥ हंडिया...
आगें आउरी छकहारी
आगें आउरी छकहारी ॥ जब तुम टेरे तबमैं बोली सुनी न टेर तिहारी ॥१॥ मैया छाक सवारे पठई तूं कित रही अवारी ॥ अहो गोपाल गैल हौ...
बिहारीलाल आई छाक
बिहारीलाल आई छाक सलोनी ॥ अति अद्भुत पठई चंद्रावलि एक गांठ द्वै दोहनी ॥१॥ टेरत स्याम भुजा ऊंची कर गई सुवास आग्योनी ॥ कृष...
बिहारीलाल आवहू आई
बिहारीलाल आवहू आई छाक ॥ गैया दूरगईहै मोहन वगदावो दे हांक ॥१॥ अर्जुन भोज सुबल श्रीदामा मधुमंगल एक ताक ॥ खटरसखीर खांड घृत...
तुमको मैया छाक
तुमकों मैया छाक पठाई ॥ टेरत फिरत ग्वालनंदलाल कित तुम दोऊ भाई ॥१॥ नईनई भांत नये डवरनमें अपने सिर धर आई ॥ नेक कहत सुनिहो...
लालन केतिक दूइ
लालन केतिक दूइ बन आवत ॥ यशोमति औसेर करतहैं ढिंगही क्यों न चरावत ॥१॥ हार परीहों यहां लो आवत घोस चढ्यो लखधावत व्रजजन त्य...
आज दधिमीठो मदनगोपाल
आज दधिमीठो मदनगोपाल ॥ भावत मोहि तिहारो जूठो चंचल नयन विशाल ॥१॥ आने पात बनाये दोना दिये सबनको बाँट ॥ जिन नहींपायो सुनोरे...
पक्वखजूरजंबूबदरीफल लेहो
पक्वखजूरजंबूबदरीफल लेहो काछन टेरीद्वार ॥ लरका यूथसंग बलमोहन चोके करत विहार ॥१॥ सुंदर कर जननीकेनोंदीनों ले धाये तब नंदकु...
ब्रजमें काछनी बेचन
ब्रजमें काछनी बेचन आई ॥ आनउतारी नंदगृह आंगन ओढी फलन सुहाई ॥१॥ ले दौरे हरिपेट अंजुली शुभकर कुंवरकन्हाई ॥ डारतही मुक्ता फ...
कोऊ माई आंबबेचनआई
कोऊ माई आंबबेचनआई ॥ टेर सुनत मोहन उठधाये भीतरभवन बुलाई ॥१॥ मैयामोहि आंब लेदेरी संगसखा बलभाई ॥ परमानंद यशोमति आनदिये खाय...
कोऊ माई बेर
कोऊ माई बेर बेचन आई ॥ सुनी टेर नंदरावर में भीतर भवन बुलाई ॥१॥ सूखत धान पर्यो आंगनमें कर अंजुली बनाई ॥ ठमकठमक चलत अपने र...
खरबूजा मिश्री आरोगत
खरबूजा मिश्री आरोगत रविजा तट कुंजनमें गिरिधर ॥ ललिताचन्द्रभगा चन्द्रावली लावत डला डलैया भर भर ॥१॥ कोउ गोवत कोउ बेनु बजा...
मिल जेवत लाडिलीलाल
मिल जेंवत लाडिलीलाल दुहुंकर व्यंजन चारु सबै सरसें ॥ करकंपत हाथते छूट परे कबहुं ग्रास मुखसों परसें ॥१॥ हठके मनमोहन हार प...
बैठे लाल कुंजनमें
बैठे लाल कुंजनमें जो पाऊं ॥ स्यामास्याम भावती जोरी अपने हाथ जिमाऊं ॥१॥ चंदन चर्चू पहोपकी माला हरख हरख पहराऊं ॥ श्रीभट द...
भोजन कुंजभवनमें भांवते
भोजन कुंजभवनमें भांवते करत भले नानाभायनसों ॥ अरसपरस कौर मधुररस देत समीर चलें चायनसों ॥१॥ तब हट करत हठीली हठसों पिय पसरत...
भोजन करत भांवते
भोजन करत भांवते जियके नवलनिकुंज महल में ॥ अरसपरस दोऊ खात खवावत जोसुख उपजत लोचन हियमें ॥१॥ कीनो कछुक मनोरथ मोहन हेत सवार...
जुगल रस भरे
जुगल रस भरे भोजन करत कुंज में तरनि तनया तीर अति सुहायो ॥ लेत झुक झुक कौर झपटी दोऊ हाथ ते बहु भांति मन करत लायौ ॥१॥ करत...
स्यामढाकतर मंडल जोर
स्यामढाकतर मंडल जोर जोर बेठे अबछाकखात दधीओदन ॥ सघन कुंजमध्य चंदनके महेल रचिउसीर रावटी चहुंओर छीरकत गुलाब जलसोदन ॥१॥ आसप...
श्यामढाकतर छाक आरोगत
श्यामढाकतर छाक आरोगत मंडलीरुची प्रेम सुखकारी ॥ उसीर महेल मध्य कुसुमरावटी बनी सधनकुंजलतामें राजत पियाप्यारीकेलि मनुहारी...
ए ग्वाल मंडली
ए ग्वाल मंडली जोर राजे कदंबखंडी मधि दुपहरीकी बिरियां बटतररावटी रची बनाय उसीरकी ॥ खटरस व्यंजन अद्भुत मनरंजन पठये नंदरानी...
उसीर महल में
उसीर महल में बिराजे मंडल मध्य मोहनछाकखात ॥ ओदनरोटी जंघाधरेलाल शाकपाक फल रसाल सीलापर गोरसकेपात ॥१॥ चहुंओर मेघज्यों छूटत...
सीतल सदनमें जेवत
सीतल सदनमें जेंवत मोहनग्वाल मंडली लेसंग जोर ॥ सीतल छांहसीतल बिंजनभाव सीतलतन मुदीतहोतलेतकोर ॥१॥ सीतल सुगंधमंद बहत वायुसी...
गोपी कोन की
गोपी कोन की छकहारी कहा तुमारो नाम ॥ आज बोहनी तुम पें करी है भयो तुमारो काम ॥१॥ प्रथम नाव तुम ही पें लायो गई बीत जुग जाम...
गोपी निपट सयानी
गोपी निपट सयानी लाइ छाक भली बीरियां ॥ भूख लागी अब ही देखत री चढि कदम की डरीयाँ ॥१॥ बैठी पार आइ हों कब की आई नाव यह घरीय...
ठाढी गोपी पार
ठाढी गोपी पार पुकारत मल्हा नाव किन लावो ॥ कान्ह कुँवर छाक आइ ले बेगि कृपा कर आवो ॥१॥ जेष्ठ मास मध्यान भयो हैं लागी भुख...
श्री जमुना पुलीन
श्री जमुना पुलीन की लोनन बाढी जेमन कों लाइ हरि छाक ॥ आइ आज सीदोसी धर तें बैठन कों पायो इक ढाक ॥१॥ ताकी छांय गाम में बैठ...
छाकें खाय खाय
छाकें खाय खाय धाय धाय जाय द्रुमन चढत फेंटामुख पोंछत अंगोछत हैं करकर ॥ आवरू दंडान डार दुरावत जाकी आर रोवनी रुवाय छांड हँ...
दृढ इन चरणन
दृढ इन चरणन केरो भरोसो ॥ श्रीवल्लभनख चंद्रछटाबिन सब जग मांझ अंधेरो ॥१॥ साधन और नहीं या कलिमें जासों होय निवेरो ॥ सूर कह...
सब ग्वाल नाचें गोपी गावै
सब ग्वाल नाचें गोपी गावै । प्रेम मगन कछु कहत न आवै ॥१॥ हमारे राय घर ढोटा जायौ । सुनि सब लोक बधाये आयौ ॥२॥ दूध दही घृत क...