Aaj Nandarai Ken Anand Bhayo
आज नंदरायकें आनंद भयौ
आज नंदरायकें आनंद भयौ । नाचत गोपी करत कुलाहल मंगलचार ठयौ ॥१॥ राती पीरी चोली पहरें नौतन झूमकसारी चोवा चंदन अंग लगाये सें...
Raag
Read 258 Pushtimargiya kirtans in Sarang · सारंग with original Braj Bhasha text and English meanings.
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आज नंदरायकें आनंद भयौ
आज नंदरायकें आनंद भयौ । नाचत गोपी करत कुलाहल मंगलचार ठयौ ॥१॥ राती पीरी चोली पहरें नौतन झूमकसारी चोवा चंदन अंग लगाये सें...
जाकों वेद रटत ब्रह्मा
जाकों वेद रटत ब्रह्मा रटत शंभु रटत शेष रटत नारद शुक व्यास रटत पावत नहीं पाररी ॥ ध्रुवजन प्रल्हाद रटत कुंतीके कुंवर रटत...
मंगल घोस छठीकी आयो
मंगल घोस छठीकी आयो । आनंदे ब्रजराज यशोदा मनहुँ अधन धन पायो ॥१॥ कुँवर न्हवाई जसोदा रानी कुलदेवीके पाँय परायो । बहुत प्रक...
आज छठी जसुमतिके सुतकी
आज छठी जसुमतिके सुतकी चलो बधावन माई । भूषन बसन साज मंगल लै सकल सिंगार बनाई ॥१॥ भली बात विधि करी बैस बड़ सुत पायो नंदराई...
दूनों मंगलहै अति आज
दूनों मंगलहै अति आज । छै दिनके माई भये कुशलसों फूलत हैं ब्रजराज ॥१॥ हुलसी बहोत नंदजूकी रानी ये सुत पुन्यन पये । फिरि-फि...
गोद लियें गोपाल यशोदा
गोद लियें गोपाल यशोदा पूजत छठी मुदित मन प्यारी । बड़डे वार सनेह चुचाते चूँवत मुख दै दै चुचकारी ॥१॥ कुलदेवता मनाई सबनकूँ...
पूजति छठी कान्ह कुँवरकी
पूजति छठी कान्ह कुँवरकी थापे पीत लगाई । कंचनथार लिये ब्रज बनिता रोचन देत सुहाई ॥१॥ पनवारौ भरि खीर खाँड घृत पापर बरा बना...
ब्रजपुर घरघर अति आनंद
ब्रजपुर घरघर अति आनंद । प्रगटे हैं जसुमतिके ढोटा दूर गये दूख द्वन्द्व ॥१॥ साज छठीको लाई बनिता गावत गीत सुछन्द । नंदराय...
चौकतें उठिकें नंदरानीनें
चौकतें उठिकें नंदरानीनें ढोटा पलना माँझ सुवायौ । पहलें डोरि लई जसुमति कर थोरे थोरे बैठि झुलायौ ॥१॥ झगुली पीत कुलह पहराई...
यमुना पूजन आज चली
यमुना पूजन आज चली नंदरानी जू रुचिर सिंगार कराये । सब कोऊ लेति बलाय महरि की बाहर निकसी ढोटा जाये ॥१॥ बाजन बजत संग मिलि ग...
दोऊ ढोटा और नंदरानी
दोऊ ढोटा और नंदरानी बड़े चौक बैठे ब्रजराज । बाजे बजत सिंध द्वारे पै मंगल होत चौगुनौ आज ॥१॥ छिरकत खरिक भरे गायन के सौने...
माँडे द्वार हरद रोरीसों
मांडे द्वार हरद रोरीसों लागत परम सुहाये । वंदनवार साथिये कोरेन आछे चित्र बनाये ॥१॥ गलिन गलिनमें यह कौतूहल कहत कहा निधिप...
मासदिनाकौ चौक आज
मासदिनाकौ चौक आज नंदरानी बैठी ढोटा लियें । हाथ पाँइ माँडे रोरीसों पीरे अक्षत माथें दियें ॥१॥ नंदराय और मात यशोदा रहसि क...
आनंदराय गृह गावति
आनंदराय गृह गावति खेलति आवति है व्रजनारी । नये नये आभूषन अंग पहरे अरु तन उत्तम सारी ॥१॥ बैठी जुरी नंदगृह देत परस्पर गार...
सुवरन कलश ध्वजा
सुवरन कलश ध्वजा पौरिनपै आछी भाँति सँभारे । हरद दही रोरीतें छिरके सब गोपिनके द्वारे ॥१॥ भीर रहत नरनारिन की गृह गावत गीत...
तेल भरे भरे केश
तेल भरे भरे केश सोंधें अंग भरे स्वच्छ सारी । ऊर्मित कुंभ भरे उर दोउ तँबोल भरे मुख चुचकारी ॥१॥ जसुमतिके अंक त्रिभुवन मंड...
आयौ कर्णवेध दिन
आयौ कर्णवेध दिन नीको । गुरकी भेली हाथ निवाई कियौ रोचन कौ टीकौ ॥१॥ गुरु शशि नक्षत्र बार बल पहुँच्यौ दिन मनि अति सुखदाई ।...
गोपालके वेध कर्णकौ
गोपालके वेध कर्णकौ कीजै । गुरुबल तिथि बल नक्षत्र बार बल शुभ घरी बिचार लीजै ॥१॥ गणिक निपुण द्वै चारि बैठिकें मतौ बिचारयौ...
सूची पढ़ि दीनी
सूची पढ़ि दीनी द्विज वर देवा । जाते पीर न होई कर्णकों हम करिहें तब सेवा ॥१॥ कहत यशोदा द्विज वर देवा तुव मन भायौ कहिये ।...
सुतके कान छेदत
सुतके कान छेदत नंदरानी । सूची देखत भाजि चले हरि बहोरि पकरिकें आनी ॥१॥ छेद कर्ण सबहिन पहरायौ मनमें अति हरखानी । हँसि दीन...
कुँवरकौ वर्णबेध करि
कुँवरकौ वर्णबेध करि लीनौ । जाति कुटुंब पाटंबर पहरौ जिन जो माँग्यौ सो दीनौ ॥१॥ अन्नदान गो दान कर इमि धन जो जाकौ अधिकारी।...
कान्हकौ कर्ण छेदन
कान्हकौ कर्ण छेदन हाथ सुहारी भेली गुरकी । विधि बिहँसत हँसत हेरि हेरि जसुमतिकें धकधकी उरकी ॥१॥ रोचन भरि लै देत सूची श्रव...
आज कान्ह करि
आज कान्ह करि है अन्न प्रासन । मनि कंचनके थार भराये भाँति भाँतिके वासन ॥१॥ नंदघरनी ब्रज बधू बुलाई जे सब अपनी पाँतिन। कोऊ...
अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ
अन्नप्रासन दिन नंदलालकौ करत यशोदा माय । ब्राह्मण देव पूजि कुलदेवी बोहोत दक्षना पाय ॥१॥ कुटुंब जिमाय पाटंबर दीने भवन आपु...
यह मेरे लालकौ
यह मेरे लालकौ अन्नप्रासन । भोजन दक्षना बोहोत द्विजनकों देहू मणि मय आसन ॥१॥ पायस भरि हर पल्लव लै हो सब गुरजन अनुशासन। पर...
सुदिन सवारौ शोधिकें
सुदिन सवारौ शोधिकें लालजू भोजन कीजै । कुलदेवता मनाई हरखसों यह मानि मन लीजै ॥१॥ ब्राह्मण भोजन और दक्षना अति आदरसों दीजै...
रहीरी ग्वालि जोबन
रहीरी ग्वालि जोबन मदमाती । मेरे छगन मगन से लालहिं कित लै उछंग लगावति छाती ॥१॥ खीजततें अबही राखे हैं शोभित न्हानी न्हानी...
अद्भुत तेरी बात
अद्भुत तेरी बात कन्हैया । तुम जो तनक गोवर्धन धार्यो एकही हाथ लियौ कैसे भैया ॥१॥ यमुना पैठि गह्यौ पुनि काली रहे सब लोक द...
जब मेरी मोहन
जब मेरौ मोहन चलैगो घुटुरुवन तब हौं री करौंगी बधाई । सर्वसु बारी दैहुँगी तिहिं छिनु मैया कहि तुतराई ॥१॥ यशोदाके बचन सुनत...
ठाड़ी लियें खिलावत
ठाड़ी लियें खिलावत कनियाँ । प्रमुदित मन गावत जसोदा हरि लीला मोहनियाँ ॥१॥ काजर तिलक पीत तन झगुली क्वणित पाँइ पैंजनियाँ।...
आवौ मेरे छगन
आवौ मेरे छगन मगन । बालगोपाल लेहु बलैयाँ दधि माखन चलेहु आँगन ॥१॥ सिखवत चलन जसोदा मैया अँगुरी लगन । कोमल चरन कहौ कैसें की...
हरिहिं जो बालकलीला
हरिहिं जो बालकलीला भावै । माखन दूध दही की चोरी सोई यसोदा गावै ॥१॥ शकटभंजन पूतना सोषी तृणावर्त दलन कीनौ । केशी हतन यमुला...
ज्यों ज्यों नूपुर
ज्यों ज्यों नूपुर बाजें त्यों त्यों धरनी धरें पाँय । बिच बिच मनिमय जरायकें राखे पाट पुहाय ॥१॥ दुलरी कंठ दुकानन दुर हीरा...
तुमारे लाल रूप
तुमारे लाल रूप पर वारी । मृगमद तिलक कंठ कटुला वलि मुख मुसिकान पियारी ॥१॥ घूँघरवारे बार श्यामके लर लटकत गजमोती । देखि स्...
खेलन जान न
खेलन जान न दैहौं लाल । काल्हि जो दृष्टि लगी मन मोहन दीयौ चखोड़ा गाल ॥१॥ ताही तें नहीं पट पहिरावत नहीं मेलत गलमाल । आसकर...
माई मेरी गोपाल
माई मेरी गोपाल लड़ैतौ । अपनौ काहू छुवन न दैहौं याहीते लोग बड़ैतौ ॥१॥ मेरेई धन गोरस बहुतेरौ लैन उधार न जाइवौ । राखोंगी क...
एकसमें जसुमति सखियनसों
एकसमें जसुमति सखियनसों बात कहत मुसिकाय । मो देखत कबधों मेरी लालन भूमि धरैगौ पाँय ॥१॥ पुनि मैया मोसों कब कहि है कुँवर कछ...
मैयारी तू मोहि
मैयारी तू मोहि बड़ौ कर लैरी । दूध दही घृत माखन मेवा जो माँगों सो देरी ॥१॥ कछु दुराव राखै जिन मोसों जोइ जोइ मोइ रुचैरी ।...
तेरी गोपाल रन-सूरी
तेरौ गोपाल रन-सूरौ । जहि जहि फिरत पचारि सांवरौ तहीं परत है पूरौ ॥ वृषभ रूप इक दानव आयो सो छिनु में लै मार्यौ । दोऊ हाथ...
कोलाहल जमुना के
कोलाहल जमुना के तीर । कालीनाग कहत हैं नाथ्यो संकरषन के बीर ॥ लागी पुकार सकल ब्रजबासी नंद जसोमति संग । उछटत परत सीस कच छ...