Pavitra Peheren Nand Kumar
पवित्रा पेहेरें नंद कुमार
पवित्रा पेहेरें नंद कुमार ॥ पेहेर पवित्रा झूलन लागे अतिसे परम उदार ॥१॥ चंचल चपल मनोहर मूरत अति शोभा सुख सार ॥ कृष्णदास...
Raag
Read 192 Pushtimargiya kirtans in Sarang · सारंग with original Braj Bhasha text and English meanings.
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पवित्रा पेहेरें नंद कुमार
पवित्रा पेहेरें नंद कुमार ॥ पेहेर पवित्रा झूलन लागे अतिसे परम उदार ॥१॥ चंचल चपल मनोहर मूरत अति शोभा सुख सार ॥ कृष्णदास...
पवित्रा पेहेरें परमानंद
पवित्रा पेहेरें परमानंद ॥ श्रावन सुदि एकादशीके दिन गिरिधर गोकुलचंद ॥१॥ श्रीवृषभाननंदनी निजकर ग्रथित विविध पटभांत ॥ तामध...
पवित्रा पेहेरि हिंडोरें झूलें
पवित्रा पेहेरि हिंडोरें झूलें ॥ श्यामा स्याम बराबर बैठे निरखतही समतूलें ॥१॥ ललितादिक झुलावत ठाडी खंभन लग अनुकूलें ॥ व्र...
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल ॥ रुचिर पाटके फोंदना करि करि पहरावत सब बाल ॥१॥ आसपास सब सखा मंडली मानो कमल अलिमाल ॥ कुंभनदास प्र...
पवित्रा पहरत राजकुमार
पवित्रा पहरत राजकुमार ॥ तीन्यो लोक पवित्र कियेंहें श्रीविट्ठल गिरिधार ॥१॥ अतिही पवित्र प्रिया बहु बिलसत निरख मगन भयो मा...
पवित्रा पहरत श्रीगोकुल भूप
पवित्रा पहरत श्रीगोकुल भूप ॥ श्रावण शुक्लपक्ष एकादशी मंगलको निजरूप ॥१ ॥ आनंद चारु रसिकवर सुन्दर परमानन्द रस रूप ॥ वृन्द...
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल
पवित्रा पहरत गिरिधरलाल ॥ तीन्यो लोक पवित्र कियेंहें श्रीविट्ठल नयन विशाल ॥१ ॥ कहा कहों अंग अंगकी बानिक उर राजत वनमाल ॥...
पवित्रा पेहरन को दिन
पवित्रा पेहरन को दिन आयो ॥ केसर कुंकुम रसरंग वागो कुंदनहार बनायो ॥१ ॥ जयजयकार होत वसुधापर सुरमुनि मंगलगायो ॥ पतित पवित्...
पवित्रा पहेरत विठ्ठलनाथ
पवित्रा पहेरत विठ्ठलनाथ ॥ सुंदर शुभ पाटके रचेहें सातों बालक साथ ॥१॥ श्रीगिरिधर गोविंद मोदभरे गोकुलेश रघुनाथ ॥ श्रीयदुना...
पवित्रा पहरें श्रीगोकुलनाथ
पवित्रा पहरें श्रीगोकुलनाथ ॥ विप्र सबे मिल वेद उच्चारत निरखत सुरनर साथ ॥१॥ शिव ब्रह्मादिक कौतुक देखें आनन्द उर न समात ॥...
राखी बांधत यशोदा मैया
राखी बांधत यशोदा मैया ॥ बहु शृंगार सजे आभूषण गिरिधर भैया ॥१॥ रत्नखचित राखी बांधि कर पुनपुन लेत बलैया ॥ सकल भोग आगें धर...
बहेन सुभद्रा राखी बांधत
बहेन सुभद्रा राखी बांधत बल ओर श्रीगोपालकें ॥ कनकथार अक्षतभर कुंकुम तिलक करत नंदलालकें ॥१॥ आरती करत देत न्योछावर वारत मु...
राखी बांधतहे नंदरानी
राखी बांधतहे नंदरानी ॥ लालपाटकी डोरी राजत लालनके मनमानी ॥१॥ दक्षिणा दीनी बहुत द्विजनकों धन खरचत न अघानी ॥ ले आरती उतार...
राखी बांधत यशोदा मैया
राखी बांधत यशोदा मैया बलऔर श्रीगोपालकें ॥ सावनसुदी पून्योंको शुभदिन तिलक करत मध्यभालकें ॥ विप्र बुलाय दई बहु दक्षिणा वा...
मात यशोदा राखी बांधत
मात यशोदा राखी बांधत बलि अरु श्रीगोपालकें ॥ कंचनथारमे अक्षत कुंकुम तिलक कियो नंदलालकें ॥१ ॥ आरती करत न्योछावर वारत मुक्...
तिन मध्य बैठे छाक खात
तिन मध्य बैठे छाक खात मदन रूप मंडली रची । छप्पन भोग छतीसों व्यंजन आन आगे थार सची ॥१॥ एक खात एक हसत परस्पर सबहिन मन सेना...
छप्पन भोग अरोगन लागे
छप्पन भोग अरोगन लागे । श्री वृषभान कुँवरी नंदनंदन ले अपनो गन संग अनुरागे ॥१ ॥ विविध भांति पकवान मिठाई बिंजन विविध रस पा...
मंडल रचना रुचिसों रचि
मंडल रचना रुचिसों रचि चित्र विचित्र व्रजकी बालन । दधि पय नवनीत मध्य सर्करा पलासनके पत्रनके पुटनकी पंक्ति रची ॥१॥ नाना प...
लाल आज बना बन्यो
लाल आज बना बन्यो अति भाई, वागो विचित्र बनाई, जरकसी पाघ चोलना सुंदर अरगजा सोधो लगाई ॥१॥ तापर फुलनके हार भुषण बहु, सेहरो...
दिन दुल्हे मेरो कुंवर
दिन दुल्हे मेरो कुंवर कन्हैया ॥ नित्य ऊठ सखा शींगार बनावे नित्य आरती उतारत मैया ॥१॥ नित्य ऊठ आंगन चंदन लिपावे नित्य ही...
अपने लालको ब्याह करूंगी
अपने लालको ब्याह करूंगी, बडे गोपकी बेटी ॥ जासो हमसों जतिया चारो भोजन भेटा भेटी ॥१॥ मात यशोदा लाड लडावे अंग शृंगार करावे...
छबीलो लाल दुहत
छबीलो लाल दुहत धेनु धोरी ॥ माथे कमलवरणको टिपारो ओढे पीतपिछोरी ॥१॥ कहारी कहूं कछु कहत न आवे डारी कठिन ठगोरी ॥ कुमनदासप्र...
हीं बलिहारी आजकी
हौं बलिहारी आजकी बानिक पर । श्वेत काछ काछे नंदनंदन श्वेत टिपारो सोहत सिर पर ॥१॥ नख सीख लौं सिंगार कहा कहौं जमुना पुलिन...
अखियां काहूकी न
अखियां काहूकी न लगो ॥ सांवरो सो ढोरा काहुको ता सिर ग्वाल पगो ॥१॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोमरोम प्रति मेन जग्यो ॥ कुंभन...
लालही सुंथन लालही
लालही सुंथन लालही बागो लालही पाग बनी अतिभारी ॥ लालही ठाडे आभूखन राजत लालही लाल व्रखभान दुलारी ॥१॥ लालके चरण जेहर अति रा...
बागो लाल सुनेरी
बागो लाल सुनेरी चीरा ॥ तापर मोर चंद्रिका धरके उर सोहत गिरिधरजुके हीरा ॥१॥ सूंथन बनी अनार रंगकी हंसूली हिम ग्रथित मन धीर...
आज हमारे भोजन
आज हमारे भोजन कीजे ॥ बहुत भांत पकवान मिठाई षटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घी खिचरी और खोवा स्याम सलोने लीजे ॥ उरदके वरा दहीम...
जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी
जेवंत श्रीवृषभाननंदिनी कान्हकुंवरकी परछाई ॥ जोड़ जोड़ व्यंजन भावत रुचिसों सोइ सोइ सब ललिता लेआई ॥१॥ हितसों जिमावत मोहन...
बन्यो माई पगा
बन्यो माई पगा स्याम सिर नीको ॥ धोती ओर उपरना ओढे ओर गहेनो मोतीको ॥१॥ अंग अरगजा कमल हाथ में लीने मिल्यो भावतो जीकों ॥ ने...
अखियां काहू की
अखियां काहू की न लगो ॥ सांवरो सो ढोटा काहू को जासीर ग्वाल पगो ॥ रूप रंग्यो मेरो मन वाके रोम रोम प्रति मदन जग्यो ॥ सुनि...
देखो सखी राजत
देखो सखी राजत है नंदलाल । सीस किरीट सवन मनि कुंडल उर राजत वनमाल ॥१॥ वागो सरस जरकसी सोहे फेंटा जोर रसाल । सुरत केलिरस मु...
आज अतिशोभित है
आज अतिशोभित है नंदलाल ॥ कोर केसरी धोति पहेरे अरु उपरना लाल ॥१॥ चंदन अंग लगाय सांवरो उर राजत बनमाल ॥ अति अनुराग भरी व्रज...
अति छबी देत
अति छबी देत दुमालो सीस ॥ मन्मथ मान हरत हसि चितवत बने गोकुलके ईस ॥१॥ ठाडे सिंध पोर मध्यराजत संग सखा दसबीस ॥ हियो सिराहत...
आई हो अबही
आई हो अबही देख सुधर सुंदर भेख ठाडोरी लरिका एक रूपको बावरो ॥ परदनी फबत पटुका कंठ फरहरतहे करत उनमान मैन बनत नहि रावरो ॥१॥...
देख सखी नव
देख सखी नव छेल छबिलो । लियो मेरो चित चोरी । अरविलो आनत एंडानो ओर आक्रत नैन ही की चोर । शोभा अंग प्रीत रूपमाधुरी शीशदुमा...
लाल के केसर
लाल के केसर भोर सुहाई ॥ शीश बन्यो है पीत दुमालो छबि निरख सुख पाई ॥१॥ धोती उपरना पीतरंग के उर मुक्तामणि माल ॥ कर में मुर...
तू चल नंद
तू चल नंद नंदनको देखन । सीस धर्यो है दुमालो लाल रंग सोहत मन अब लेखन ॥१॥ रहे ब्रज जन सब मिल गावत निरखि निरखि मन फूले ॥ '...
श्याम सुन्दर बन
श्याम सुन्दर बन खेलत सखन संग बिबिध केल ॥ कालिंदनी तट बांधी फेंट पट करत जुध भुज जु परस्पर पेल ॥१॥ काहुकी मुरली चोरत काहु...
खेलन अब मेरी
खेलन अब मेरी जाय बलैया ॥ जबही मोहि देखत लरिकनसंग तबही खीजत है बलभैया ॥१॥ मोसों कहे तात बसुदेवको देवकी तेरी मैया ॥ मोललि...
देखरी रोहणीमैया
देखरी रोहणीमैया कैसेहैं बलदाऊभैया यमुनाकेतीर मोहि झुझुवावतायोरी ॥ सुबल श्रीदामासाथ हँसहँस बूझतवात आप डरपे औरमोहि डरपायो...