Aangan Kheliye Jhanak
आंगन खेलिये झनक
आंगन खेलिये झनक भनक । कीरति कुँवरीको देत खिलौना झुनझुना खनक खनक ॥१॥ रानीजू हरखी मन ही मन मुख निरखत छिनक छिनक । 'कुंभनदा...
Raag
Read 37 Pushtimargiya kirtans in Bhairav · भैरव with original Braj Bhasha text and English meanings.
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आंगन खेलिये झनक
आंगन खेलिये झनक भनक । कीरति कुँवरीको देत खिलौना झुनझुना खनक खनक ॥१॥ रानीजू हरखी मन ही मन मुख निरखत छिनक छिनक । 'कुंभनदा...
जान्यौ जान्यौ री
जान्यौ जान्यौ री सयान तें प्रानेश्वर सों कीयौ मान भयौ है बिहान ॥ पियकों तेरौ ही ध्यान मेरी सीख सुनलै कान जामें बसे प्रा...
मुरली हरि तें
मुरली हरि तें न छूटतहै ॥ वाहीके वश भये निरंतर वह अधरन रसलूटतहै ॥१॥ तुमतें निठुर भई वह बोलत तन तें मन उचटावतहै ॥ आरज पथ...
याके गुन मैं
याके गुन मैं जानत हूँ ॥ अबतौ आय भई यहाँ मुरली वौ ही नातौ मानत हूँ ॥१॥ हरिकी कान करत वह को है कहा करों उनमानत हूँ। अबही...
ये बंसी नाद
ये बंसी नाद सुर साधिकें बजाई प्रवीन कान्ह सात सुर सोधकें मधुर धुनि ॥ घरी घरी घूमत सुध न रही कछु कल न परै मेरे तन मन ॥१॥...
हाहा हो हरि
हाहा हो हरि नृत्य करौ ॥ जैसें कर मैं तुमहि रिझाऊँ त्यौं मेरौ मन तुमहुँ हरौ ॥१॥ तुम जैसें श्रम बाहु करत हौ तैसें मैं हूँ...
सुधंग नाचत नवल
सुधंग नाचत नवल किशोरी ॥ थेईथेई करत चाहत प्रीतम दिश बदन चंद मानों तृषित चकोरी ॥१॥ तान बंधान मानमें भामिनी रीझे श्याम कहत...
रास रसिक भाव
रास रसिक भाव रूप स्वामिनी स्वरूप रूप प्रकट भये अति अनूप श्री हरिराय ।। अनिही शुन्य जीवजानि करुणा महा चित आनि सुंदर नर द...
श्रीवल्लभ देखे मैं जब जागे
श्रीवल्लभ देखे मैं जब जागे। घूमत नेनसों बोलत है जुं प्राणप्रिया रस पागे ॥१॥ सिथिल अंग जूंभात कछुकहि बैठ प्रिया अंग लागे...
श्रीवल्लभ रसरंग भरे
श्रीवल्लभ रसरंग भरे प्यारी उर बाँह धरे बैठे निकुंजधाम करत है कलेऊ। निज कर पिय सामग्री मेलत प्रिया के मुख वेहु हँसी देत...
वल्लभ प्रिया मिल करत
वल्लभ प्रिया मिल करत कलेउ। नव व्यंजन कर दियो ढाँपि जब प्रीत हृदैकी लख्यो न कोऊ ॥१॥ राख्यो थार अमरती घेवर माखन मिश्री मि...
प्रातकाल झुलत हिंडोरे दोउ
प्रातकाल झुलत हिंडोरे दोउ ॥ अरुणनेन अति जम्हात झपकजात वारवार अलस अंग छए घूमतमन मोहे ॥१॥ गंडनपर पीकलीक अधरन मस रेखबनी बि...
भोर भये नंदलाल संग
भोर भये नंदलाल संग लीयें ग्वालवाल फेंटन भरि लियें गुलाल बोलत मुख होरी ॥ केसरि भरि कलस साथ पिचकाई लियें हाथ छिरकतहें सों...
रात फाग खेलि प्रात आए
रात फाग खेलि प्रात आए लाल प्यारे ॥ अंग अंग मरगजे बागे सुंदर रंग सौंधे सुवास मंद मंद आवे अति उनीदे सिथिल - नैंन तारे ॥१॥...
प्रात समे नंदलाल खेलति
प्रात समै नंदलाल खेलति हो हो होरी ॥ सीस पाग जु कर हि भरै रंग बोरी ॥१॥ सब नारि जुरि कैं आई नंद जु की पौरी ॥ हाथन पिचकाई...
प्रात काल नंदलाल कुंजन
प्रात काल नंदलाल कुंजन मधि डोलै ॥ सांवरे तन अलक मानौं अलि बोर कमल नैंन देखत दमकि मधुरे बैन हो हो होरी बोलै ॥१॥ बाजत बीन...
वृंदावन बंसीबट के तट
वृंदावन बंसीबट के तट ब्रजभूषण खेलत हे होरी ॥ अगर अबीर गुलाल उडावत नंदलाल वृषभान किशोरी ॥१॥ अपनेअपुने गृहतें निकसी आली स...
बालकृष्ण जागहु मेरे
बालकृष्ण जागहु मेरे प्यारे ॥ध्रु.॥ बैठी सेज कहती है जननी । बार बार मुखकमल निहारे ॥१॥ सुन्यो वचन माता को जब ही । तनिक तन...
उठो मेरे लाल
उठो मेरे लाल गोपाल लाडले रजनी वीती बिमल भयो भोर ॥ घर घर दधि मथत गोपिका द्विज करत वेदकी सोर ॥१॥ करो कलेऊ दधि ओर ओदन मिश्...
जागो गोपाललाल दुहो
जागो गोपाललाल दुहो धौरी गैयां ॥ सद्दूध मथ पीवो घैयां ॥१॥ भोर भयो वन तमचर बोले ॥ घरघर गोप वगर सब खोले ॥२॥ गोपी रई मथनिया...
जागिये गोपाललाल जननी
जागिये गोपाललाल जननी बलजाई ॥ उठो तात प्रात भयो रजनीको तिमिर गयो टेरत सब ग्वालबाल मोहनाकन्हाई ॥१॥ उठो मेरे आनंदकंद गगनचं...
करो कलेऊ रामकृष्ण
करो कलेऊ रामकृष्ण मिल कहत यशोदा मैया ॥ पाछें वछ ग्वाल सब लेकें चलो चरावन गैया ॥१॥ पायस सिता घृत सुरभिनको रुचिकर भोजन की...
छगन मगन प्यारे
छगन मगन प्यारे लाल कीजिये कलेवा ॥ छींकते सगरी दधि उखल चढ काढलेहो पहर लेहो झगुली फेंट बांधलेहो मेवा ॥१॥ यमुना तट खेलन जा...
मंगल मंगलम् ब्रज भुवि मंगलम्
मंगल मंगलम् ब्रज भुवि मंगलम् ॥ मंगलमिह श्रीनंदयशोदा नाम स्वकीर्तनमे तद्रूचिरोत्संग सुलालित पालित रूपम् ॥१॥ श्री श्रीकृष...
मंगल माधो नाम उच्चार
मंगल माधो नाम उच्चार ॥ मंगल वदन कमल कर मंगल मंगल जनकी सदा संभार ॥१॥ देखत मंगल पूजत मंगल गावत मंगल चरित उदार ॥ मंगल श्रव...
मंगल रूप यशोदानंद
मंगल रूप यशोदानंद ॥ मंगल मुकुट कानन में कुंडल मंगल तिलक विराजत चंद ॥१॥ मंगल भूषण सब अंग सोहत मंगल मूर्ति आनंद कंद ॥ मंग...
मंगल आरती गोपालकी माई
मंगल आरती गोपालकी माई ॥ नित्यप्रति मंगल होत निरख मुख चितवन नयन विशालकी ॥१॥ मंगल रूप स्याम सुंदरको मंगल भृकुटी सुभालकी ॥...
भोर भये देखो
भोर भये देखो श्रीगिरिधरको कमलमुख ॥ मंगल आरती करो प्रातही नयन निरखत होत परम सुख ॥१॥ लोचयन विशाल छबि संचि हृदयमें धरो कृप...
सुमरो नटनागर वर
सुमरो नटनागर वर सुंदर गोपाललाल ॥ सबदुख मिटजैहें बे चिंतित लोचन विशाल ॥१॥ अलकन की झलकन लख पलकन गति भूलजात भुवविलास मंदहा...
नागरी नंदलाल संग
नागरी नंदलाल संग रंग भरीराजें ॥ स्यामअंस बाहुदिये कुंवरि पुलक पुलकहिये मंदमंद हसन प्रिये कोटिमदन लाजें ॥१॥ तरूतमाल स्या...
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी
प्रातकाल प्यारेलाल आवनी बनी ॥ उरसोहे मरगजीमाल डगमगी सुदेशचालचरण कंज मदनजीत करतगामिनी ॥१॥ प्रियाप्रेम अंगराग सगमगी सुरंग...
भोरही डगमगत जीत
भोरही डगमगत जीत मन्मथ चले ॥ सकल रजनी जगे नेक नहीं पल लगे अरुण आलस वलित नयन लागत भले ॥१॥ कितव नागरनटचिन्ह प्रकटित करत वस...
सुमिरि मन गोपाललाल
सुमिरि मन गोपाललाल सुंदर अति रूप-जाल । मिटि है जंजाल सकल निरखत सँग गोप-बाल ॥१॥ मोर-मुकुट सीस धरैं बनमाला सुभग गरैं । सब...
सखी नंदको नंदन
सखी नंदको नंदन सांवरो मेरो चित चोर जायरी ॥ रूप अनुप दिखायके सखी गयो है अचानक आयरी ॥१॥ टेढी चलनि मधुर चंचल गति टेढे नेन...
देयशुमति नैक अपनीरई
देयशुमति नेंक अपनीरई योंहीपरयो है बिनामथनकीये दई ॥ अपनी हौढूँढआई उठ अंधियारेमाँझपाई न भवनमें कहांधोंगई ॥१॥ याहीते आतुरध...
सीतल खरन बाहु
सीतल खरन बाहु भुज बलमें जमुनातीर गोकुल ब्रज महीयां ॥ सीतल पान खरी सुध चरनन नित्य दुध जटी अति जतन कहीयां ॥१॥ गोवर्धन अरु...
संगत्रियन वन में
संग त्रियन वन में खेलत रविजा-तट मुरलीधर मध्य रास नृत्यकला गुननिधान ।। सप्त सुरन तीन ग्राम बजाय लिये आरोही-अवरोही धरन मु...