Aaj Duj Bhaiyaki
आज दूज भैयाकी
आज दूज भैयाकी कहीयत करलीये कंचनथालकें ॥ करो तिलक तुम बहेंन सुभद्रा बल अरु श्रीगोपालकें ॥ आरती करत देत नोंछावर वारत मुक्...
Raag
Read 192 Pushtimargiya kirtans in Sarang · सारंग with original Braj Bhasha text and English meanings.
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आज दूज भैयाकी
आज दूज भैयाकी कहीयत करलीये कंचनथालकें ॥ करो तिलक तुम बहेंन सुभद्रा बल अरु श्रीगोपालकें ॥ आरती करत देत नोंछावर वारत मुक्...
द्वेज दीवारीकों बलमोहन
द्वेज दीवारीकों बलमोहन बेहेनसुभद्राके घर आये ॥ विविध शृंगार विविध पटभूषण लटकत चलत सुहाये ॥१॥ अति प्रसन्न आनंदित आनन भये...
यशोमति थारसाजकें
यशोमति थारसाजकें बैठी मोहन तिलक करावेहो ॥ बैठ अंक भोजन करो लालन भाईदूज मनावेहो ॥१॥ देख नंद उपनंद गोप सब दोरदोर दुलरावे...
भाईदूज जानकें मोहन
भाईदूज जानकें मोहन बहेन सुभद्राकों न्योंतावत ॥ उबट न्हवाय दोउ भैया बल वागो अतलस लाल बनावत ॥१॥ चीरा हर्यो बांध शिर उपर आ...
लाडिले गोपाल आज
लाडिले गोपाल आज हमारे घर चलो भोजन कीजे ॥ बहुत भाँत पकवान मिठाई खटरस व्यंजन लीजे ॥१॥ सद्य घृत पापर खीचरी खीर खोवा साकर ल...
गोधन चारत मदन
गोधन चारत मदन गोपाल ॥ धुक धुक मिल ग्वाल मंडली कमल नैन को ख्याल ॥१॥ धोरी धूमर गौरी सांवरी नंद नंदन के गाय ॥ बाजत बैन रहत...
चढि गोवर्धन शिखर
चढि गोवर्धन शिखर सांवरो बोलत धोरी धेनु ॥ पीत वसन शिर मोरचंद्रिका धरि मुख मुरली बेनु ॥१॥ बनमाला गले धातु विचित्र ग्वाल स...
दिन दूल्हे मेरो
दिन दूल्हे मेरो कुंवर कन्हैया ॥ नित्य उठ सखा शृंगार बनावे ॥ नित्यही आरती उतारत मैया ॥१॥ नित्य उठ आंगन चंदन लिपावे नित्य...
प्रथम पुत्र प्रकट
प्रथम पुत्र प्रकट भये श्रीगिरिधर धर्मी स्वरूप षट् धर्मन सहित महा श्रीविठ्ठलेश धाम ॥ चहुँदिश अति होत बधाई बाजत मुरली सहन...
जयति श्री गिरिधरन
जयति श्री गिरिधरन भामिनी वर रमण धाम अवतार गिरिधराजधारी । जयति गंभीर गुन गनन कवि करे भक्त आरतहरन देहधारी ॥१॥ जयति तैलंग...
श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर
श्रीविठ्ठल राजकुमार श्रीगिरिधर अवलोकत मन भयो आनंद ॥ वेदपुराण सज्ञानसाध्य सब कलियुग उद्धरण आनंदकंद ॥१॥ विमल शरीर नाम यश...
जयति गोविंद आनंदमय
जयति गोविंद आनंदमय सर्वदा सकल व्रज ईश सेवो बिहारी ॥ गोपिका भाव उद्बोध निज दासकर दैवीजन हेत निज देह धारी ॥१॥ सूर सब ईशको...
श्रीविठ्ठलेश धाम आज
श्रीविठ्ठलेश धाम आज प्रकट भये वीर्य रूप श्रीबालकृष्ण अति अनूप तीजे सुतमाई ॥ गावत चहुँदिश बधाई झूंडन जुरि नारि आई मंगल स...
भयो श्रीविट्ठलके मनमोद
भयो श्रीविट्ठलके मनमोद ॥ पूरण ब्रह्म श्रीबालकृष्ण प्रभु धायलिये जब गोद ॥१॥ वारंवार विधु वदन बिलोकत फूले अंग न समाय ॥ बा...
आनंद भूतल परमहे
आनंद भूतल परमहे आज ॥ श्रीविठ्ठलजुके गृह प्रकटे श्रीबालकृष्ण महाराज ॥१॥ आश्र्विन वदी तेरसदिन शुभ अति हरखे भक्त समाज ॥ स्...
सुनो सखी गोकुल
सुनो सखी गोकुल बजत बधाई ॥ श्रीविठ्ठल गृह प्रकट भये श्रीबालकृष्ण सुखदाई ॥१॥ सुंदर स्वरूप कोन गुण वरने लीला सब जगछाई ॥ जे...
जयति रघुनाथ गुणगाथ
जयति रघुनाथ गुणगाथ विख्यात व्रज जीत पंडितकों शरण लीने ॥ शास्त्र सब जानि अभिमान करि वादीजन आये मद गर्व सब खंडकीने ॥१॥ कप...
महा सुख छायो
महा सुख छायो आज सुहायो श्रीविट्ठलेशके ओक ॥ ज्ञानरूप महाप्रभु प्रकट भये श्रीयदुपति या भुवलोक ॥१॥ ध्वजा पताका पोहोप माल म...
जयति यदुनाथ व्रज
जयति यदुनाथ व्रज सकल पावन करन धीर गंभीर गुन कोन जाने ॥ जयति गोकुल सुभग नित्य रमणीयजे भक्ति एकत्र करिवास ठाने ॥१॥ जयति द...
जयति पद्मावती सुवन
जयति पद्मावती सुवन विट्ठल तनय नाम घनश्याम मुख चंद्र सरखो ॥ रुचिर अंग अंग बहु सजे भूषण वसन दरस करि ध्यान निज रूप परखो ॥१...
जयति घनश्याम गुण
जयति घनश्याम गुण धाम विश्राम जे वेद विधि विहित व्रत नित्यकारी ॥ भक्ति अनुरागिणी देत निजजननकों तेह प्रभु सकल लीला बिहारी...
अश्विन वदी द्वादशी
अश्विन वदी द्वादशी सुभग दिन श्री लक्ष्मन सुत के - सुत जायो । हलधर रूप देखी श्री वल्लभ महागुनन अज्ञान गणिक बुलवायो ।।१।।...
घर घर आनंद
घर घर आनंद होत बधाई श्री वल्लभ गृह प्रगट भये है, श्री गोपीनाथ कुँवर सुखदाई ।।१।। धन-धन अश्विन वदी द्वादशी दिन धन धन वार...
श्री वल्लभ सूतके
श्री वल्लभ सूतके सूत प्रगटे परिपूरन पुरुषोत्तम नाम । श्री गोपीनाथ निरखी मन फूले मंगल गावत चहुं दिश वाम ।।१।। अति आनंद ब...
श्रीकल्याणराय घर नीकी
श्रीकल्याणराय घर नीकी बाजत आज बधाई ।। प्रकटे श्रीहरिराय महाप्रभु श्रीविट्ठल अतिरूप कहाई ।।१।। निज पथ दृढ अति करन काजही...
जय जय श्री
जय जय श्री रसिकराय रसिक रसकी निधि ।। ध्रुव ।। भूतल पर प्रगट होय भक्तन के कलेश खोय । दई देवीजनन शिक्षा देत फलकी सिद्धि ।...
आज बधायो मंगलचार
आज बधायो मंगलचार ॥ माघ मास शुक्ल चौथ हे हस्त नक्षत्र रविवार ॥१॥ प्रेम सुधा सागर रस प्रगट्यो आनंद बढ़्यो अपार ॥ दास रसिक...
प्रगटे भक्त शिरोमणीराई
प्रगटे भक्त शिरोमणीराई ॥ माघ मास शुक्ल चौथ अधिक लोक निधि आई ॥१॥ दैवी जीवके भाग्य उदय भये जिन यह दर्शन पाई ॥ करि करुणा प...
कहत जसोदा सब
कहत जसोदा सब सखीयन सों आवो बैठो मंगल गावो ॥ हे गनगोरकी तीज रंगीली मदन मोहनकों लाड लडावो ॥१॥ ललिता चन्द्रभगा चन्द्रावली...
क्यों बेठी राधे
क्यों बेठी राधे सुकुमारी ।। बूझतहे व्रज जानके महेरी क्यों जेंबत बाबाकीथारी ।।१।। आज हमारो गोरी व्रत ताकी विध ताहीपे पाउ...
फूल गई वृषभान
फूल गई वृषभान दुलारी ।। पहेले तो निरखत नेनन भर क्यों पूजों एकांतन न्यारी ।।१।। कर अंजन नेनन दे मोहन अपने हाथ जीमायो ।।...
बैठि रही राधे
बैठि रही राधे सकुमारी । बूझति है वृषभानु की महरी क्यों न जेंवति बाबा की प्यारी ।।१।। आजु हमारें गौरी को व्रतु ताकी विधि...
रघुवंशी जिजमान तिहारो
रघुवंशी जिजमान तिहारो ढाढी आयोहो ॥ रामजन्म सुनकें हों आयो राख हमारो मान ॥१॥ एक वार हों पहलें आयो अब कोसल्याजाई ॥ दे गहन...
सांची प्रीत भई इक
सांची प्रीत भई इक ठोर ॥ मृगनयनी कमलदल लोचन लाल स्याम राधा तन गोर ॥१॥ इत सर सोहत पाटकी दोरी हरि सिर रुचिर चन्द्रिका मोर...
यमुना पुलिन सुभग बृन्दावन
यमुना पुलिन सुभग बृन्दावन नवल लाल श्रीगोवर्द्धन धारी ॥ नवल निकुंज नवल कुसुमित दल नवल नवल बृषभान दुलारी ॥१॥ नवल हास नवल...
राधे सों रस रीत
राधे सों रस रीत बढ़ी ॥ आदर करि भेटी नंदनंदन दूने चाव चढ़ी ॥१॥ बृन्दावन में क्रीड़ित दोऊ जैसे कुंजर संग करनी ॥ परमानन्द...
रूखरी मधुवन मोहन संग
रूखरी मधुवन मोहन संग निसदिन रहत खरी। जबतें परस भयो मोहनको तबतें रहत हरी ॥१॥ सीतल जल जमुनाको सींचत प्रफुल्लित द्रुमलता स...
प्यारी तुहेरी गजगामिनी
प्यारी तुंहेरी गजगामिनी ॥ हंस चाल तेरी नहीं पावे ओर कोन हें कामिनी ॥१॥ मनमोहन तोहिपें रीझे छोड सकल व्रज भामिनी ॥ सूर स्...
यह ढोटा हठ हरत
यह ढोटा हठ हरत परायो मन ॥ देखत रूप ठगोरी सी लागत जगत विमोहन स्याम बरन तन ॥१॥ दिन दिन चोंप चोगनीसी लागत पावस ऋतु मानौं न...
पहेर पवित्रा बैठे हिंडोरें
पहेर पवित्रा बैठे हिंडोरें दोऊ निरखत नेन सिराने ॥ नवनिकुंज महलमें राजत कोटिक काम लजाने ॥१॥ हास विलास हरत सबके मन अंग अं...