Bado Parv Tyauhar
बड़ो पर्व त्यौहार
बड़ो पर्व त्यौहार दीवारी ॥ विविध शृंगार कियो लरिकन को रोरी तिलक सोहत रनी भारी ॥१॥ कंचन थाल साज ब्रज बनीता नंदराय घर आयी...
Raag
Read 233 Pushtimargiya kirtans in Bilaval · बिलावल with original Braj Bhasha text and English meanings.
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बड़ो पर्व त्यौहार
बड़ो पर्व त्यौहार दीवारी ॥ विविध शृंगार कियो लरिकन को रोरी तिलक सोहत रनी भारी ॥१॥ कंचन थाल साज ब्रज बनीता नंदराय घर आयी...
नंदहि कहति यशोदारानी
नंदहि कहति यशोदारानी ॥ सुरपति पूजा तुमही भुलानी ॥१॥ यह नही भली तुम्हारी बानी ॥ मैं गृह काज रहों लपटानी ॥२॥ लोभही लोभ रह...
घरन चली सब
घरन चली सब कही यशुमतिसों ॥ देव मनावत वचन विनतिसों ॥१॥ तुमविन ओर नहीं हम जानें ॥ मुख स्तुति करत हम कहा वखानें ॥२॥ जहांतह...
इतहि श्याम गोपन
इतहि श्याम गोपन संग ठाडे ॥ भोजन करत अधिक रुचिबाढे ॥१॥ गिरि तन शोभा श्याम बिराजे ॥ श्यामहि छबि गिरिवरकी छाजे ॥२॥ गिरिवर...
कोउ पहोंचे कोउ
कोउ पहोंचे कोउ मारगमांहीं ॥ बहुत गये घर बहुतकजाहीं ॥१॥ काहूके मन कहूं दुखनाहीं ॥ अरस परस हँसहँस लपटाहीं ॥२॥ आनंद करत सब...
बोल लिये सब
बोल लिये सब ग्वाल कन्हाई ॥ टेको गिरिगोवर्द्धन आई ॥१॥ आज सबे मिलहोहु सहाई ॥ हँसत देख बलराम कन्हाई ॥२॥ लकुट लियें कर टेकन...
हँसहँस कहत कृष्ण
हँसहँस कहत कृष्ण मुखबानी ॥ हमनांही रिस तुमपर आनी ॥१॥ तुम कित अति शंका जियमानी ॥ भलीकर व्रज वरख्यो पानी ॥२॥ यहसुन इंद्र...
गोदबैठ गोपाल कहत
गोदबैठ गोपाल कहत व्रजराजसों ॥ अहो तात एक बात श्रवण दे सुनोजो मेरी ॥ भवनमांझहों गयो धरी जहां सोंज घनेरी ॥ में हँस माँग्य...
अपने अपने टोल
अपने अपने टोल कहत व्रजवासियां ॥ शरद कुहू निश जान दीपमालिका जो आई ॥ गोपन मन आनंद फिरत उनमद अधिकाई ॥ ऐं पन थापे दीजियें घ...
हमारो कान्ह कहे
हमारो कान्ह कहे सो कीजे ॥ आवो सिमिट सकल व्रजवासी पर्वतकों बलि दीजे ॥१॥ मधुमेवा पकवान मिठाई षटरस व्यंजन लीजे ॥ आसकरण प्र...
आवोरे आवोरे भैया
आवोरे आवोरे भैया ग्वालो या पर्वत की छैयां ॥ नाचो गावो करो बधाई सुखें चरावो गैयां ॥१॥ जिन तुमारो पकवान जो खायो सोई रक्षा...
गोपी ग्वाल पुकारन
गोपी ग्वाल पुकारन लागे शरण तिहारी राखोजू ॥ बादर जुरजुर गाजन लागे भली होय सो भाखोजू ॥१॥ इंद्र कोप हम उपर कीनो मेघ समूह प...
राख लेहो गोकुलके
राख लेहो गोकुलके नायक ॥ भीजत गाय गोप गोसुत सब विषम बूंद लागत जानो सायक ॥१॥ मूशलधार बरखत सेनापर महा मेघ मघवाके पायक ॥ एस...
राख लेहो अब
राख लेहो अब नंद किशोर ॥ तुमजो इंद्रकी पूजा मेटी वरखत है अतिजोर ॥१॥ व्रजबासी सब यों चितवतहें ज्यों कर चंद चकोर ॥ जिन डरप...
गोवर्धन धरणी धर्यो
गोवर्धन धरणी धर्यो मेरे बारे कन्हैया ॥ दधि अक्षत फल फूल ले भुज पूजत मैया ॥१ ॥ विप्र बोल वरणी करी दीनी बहु गैया ॥ ग्वाल...
गाय चरावन कहत
गाय चरावन कहत गोपाल ॥ बन बन डोलत नही डराउं संग देहु बल ग्वाल ॥१॥ यह सुन हरख जसोदा ततछिन सहज न्हवाये लाल ॥ मोर मुकुट पीत...
प्रथम गोचरन चले
प्रथम गोचरन चले कन्हाई ॥ माथे मुकुट पीतांबरकी छबि वनमाला पहराई ॥१॥ कुंडल श्रवण कपोल बिराजत सुंदरता बनि आई ॥ घरघरते सब छ...
लालको सिंगार करावत
लालको सिंगार करावत मैया ॥ करउबटनो न्हवाये रुचिसों हरि हलधर दोउ भैया ॥१॥ हँसुली हेम हमेल अरुदुलरी बनमाला उर पहरैया ॥ परम...
शुक्ल पक्ष और
शुक्ल पक्ष और शुक्ल एकादसी हरि प्रबोध दिन आयो ॥ चंदन भवन लिपाय जसोदा मोतिन चौक पुरायो ॥१ ॥ मंडप रच्यो समार ईख सों बंदनव...
माई मेरो लाल
माई मेरो लाल दूल्हे बनि आयो ॥ रत्नजटितको सीस सेहरो हीरा मोतिन लाल जरायो ॥१॥ नंदरायको कुंवर कन्हैया जसुमति लाड लडायो ॥ र...
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर
प्रकटे श्रीविठ्ठलनाथके गिरिधर सुखदाई ॥ मात श्रीरुक्मिणी कूखतें प्रकट्यो शशिराई ॥१॥ भई चांदनी जगतमें भक्ति-सरसाई ॥ कृष्ण...
प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे
प्रकटे श्रीविठुलनाथकें दूजे सुत माई ॥ गुण ऐश्वर्यको रूपहे महिमा श्रुति गाई ॥१॥ कीनो पालन जगतको निज किरणन राईं ॥ सुंदररू...
उत्सव अलौकिक कह्यो
उत्सव अलौकिक कह्यो न जाई ॥ भक्तनके उर सदा बसत प्रभु प्रगट भये सुखदाई ॥१॥ श्रीगोकुलेश प्रागट्य सर्वोपर लीला रसिक सुहाई ॥...
आज आनंद भरी
आज आनंद भरी डोलत जुवती जन वीथन मंगल गावे ॥ विविध भांत भूखन पहरे तन नव सिंगार बनावे ॥१॥ गृह गृहतें निकसी मिलि युवती प्रफ...
रुनझुन रुनझुन बाजत
रुनझुन रुनझुन बाजत घुघरियां। पग धरनी धरत करत मातसों अरियां चंचल कर चरन चंचल मन चलत सुकुमार सुंदर नेन अश्रुबा ढरियां ॥१॥...
व्रजपति तुम बिन
व्रजपति तुम बिन कोन करे। उत मघवा को मान भंग कर इत व्रज गोपिन गोप भरे ॥१॥ वेणु बजावत कर पर गिरिवर वाम भुजा ले शंख धरे। द...
अरवीलो गरवीलो रंगीलो
अरवीलो गरवीलो रंगीलो छबीलो कान्ह करि के सिंगार ठाढौ देखो सखी कुँजद्वार । वाम भाग राधा प्यारी ओढे चुनरी की सारी कंचुकी उ...
भोर निकुंज भवन
भोर निकुंज भवन पिय प्यारी करत परस्पर हँसि-हँसि बतियाँ । बाजत बीन पखावज अधोटी गावति चतुर ताल दै सखियाँ ॥१ ॥ तुम पहरो बाग...
प्रकटी सूरज सुता
प्रकटी सूरज सुता अधम उधारनकों को कहे महिमा जाकी ॥ छठी उजियारी चैत्रमासकी उपजी वेलि सुधाकी ॥१॥ पटरानी प्यारी श्रीयमुना श...
जयजय श्रीयमुना आनंद
जयजय श्रीयमुना आनंद कंदिनी ॥ दरशपरश त्रिविध ताप जात दुख निकंदिनी ॥१॥ अंगअंग छबि तरंग शोभा सिंधुनी ॥ ताहीके अघ कुठार जाक...
जयजय श्रीसूरजा कलिन्द
जयजय श्रीसूरजा कलिन्द नंदिनी ॥ गुल्मलता तरुसुवास कुंज कुसुम मोद मत्त गुंजत अलि सुभग पुलिन वायु मंदिनी ॥१॥ हरि समान धर्म...
नौमिके दिन नोबत
नौमिके दिन नोबत बाजे कौशल्या सुत जायो ॥ सातघरी दिन उदित भयोहे सब सखियन मंगल गायो ॥१॥ कांप्यो सिंधु कंगूरा ढरियो लंका अग...
सोहिलो सुहायो आज
सोहिलो सुहायो आज ॥ घरघर मंगल होत अवधपुर भयेहें मनोरथ काज ॥१॥ फूली फिरत सुवासिन दाई अति आनंद महाराज ॥ रघुकुल तिलक भानुव्...
राम जन्म मानत
राम जन्म मानत नंदराई । प्रथम फुलेल उबटनों सोंधो यह बिध लाल न्हवाई ॥१॥ रंग केसर वागो कुलही आभूषण पहिराई ॥ सबको व्रज एक ल...
आज महामंगल कौशलपुर
आज महामंगल कौशलपुर सुन नृपकें सुत चार भये ॥ सदन सदन सोहिलो सुहायो नभ ओर नगर निसान हये ॥१॥ अति सुख वेग बोल सुरगुरु मुनि...
झूलत रामपालने सोहें
झूलत रामपालने सोहें ॥ भुरिभाग्य जननी जनजोहें ॥१॥ तन मृदुमंजुलमेचकताई ॥ झलकत चाल विभुषण झांई ॥२॥ अधर पाणि हित लोहितलोने...
श्रीरघुनाथ पालने झूले
श्रीरघुनाथ पालने झूले कौसल्या गुण गावे ॥ बल अवतार देवमुनि वंदित राजीवलोचन भावे ॥१॥ राजा दशरथ पलना गढायो नवचंदनको साज ॥...
कनक रतन मय
कनक रतन मय पालनो रच्यो मारु सुत्रधार ॥ विविध खिलौना किंकिनी मंजुल मुक्ताहार ॥ रघुकुल मंडनराम रामललाहोहो ॥१॥ जननी ऊबट न्...
सुभग सेज शोभित
सुभग सेज शोभित कौशल्या रुचिर रामशिशु गोदलियें ॥ बाललीला गावत हुलरावत पुलकित प्रेम पीयूष पियें ॥१॥ कबहूं पोढ पयपान करावत...
कोंसल्या रघुनाथकों ले
कोंसल्या रघुनाथकों ले गोद खिलावे ॥ सुंदर वदन निहारकें हँस कंठ लगावे ॥१॥ पीत झंगुलिया तनलसे पग नूपुर बाजे ॥ चलन सिखावे र...