Govind Tiharo Svarup Nigam
गोविंद तिहारो स्वरूप निगम
गोविंद तिहारो स्वरूप निगम नेति नेति गावें ॥ भक्तके वश श्याम सुंदर देह धरें आवें ॥१॥ योगी मुनि ज्ञान ध्यान स्वपने नही पा...
Raag
Read 239 Pushtimargiya kirtans in Bilaval · बिलावल with original Braj Bhasha text and English meanings.
Open this collection in search
गोविंद तिहारो स्वरूप निगम
गोविंद तिहारो स्वरूप निगम नेति नेति गावें ॥ भक्तके वश श्याम सुंदर देह धरें आवें ॥१॥ योगी मुनि ज्ञान ध्यान स्वपने नही पा...
झगरिनि झगरत नंदसों
झगरिनि झगरत नंदसों थौरो नहि माँगें । ज्यों ज्यों मन हरि निहोरहीं त्यों त्यों उठि लागें ॥१॥ पूरन तप बड़भागिनि जसोदा सुत...
काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि
काहै झगरिनि मैं बड़भागिनि निरख्यौ है नंदजूको लाल । जाकौ दरस देव नहीं पावै मैं पायौ है इहि काल ॥१॥ यह औसरेमें कैसे पायौ...
देखौ यह विपरित नई
देखौ यह विपरित नई । अभुतरूप नारि एक आई कपट हेत क्यों सहे दई ॥१॥ कान्हहि लै जसुमति कोवातें रुचि लै कंठ लगाई । तब उन देह...
मथुरापति जिय अधिक डरानौ
मथुरापति जिय अधिक डरानौ सभा माँझ असुरनके आगें बारबार शिर धुनि पछितानौ ॥१॥ ब्रजभीतर उपज्यौ मेरो रिपु मैं जानि यह बात । द...
हों जु गई ही नंदभवनमें
हों जु गई ही नंदभवनमें देख्यौ अद्भुत पलना । गजमोतिनके झूमिका बाँधे बैठे सुंदर ललना ॥१॥ पीत झगुलिया अतिही बनीहै भूषनकी छ...
श्रीब्रजराजकें हो आनंद
श्रीब्रजराजकें हो आनंद मंगल भीर । देस देसके जाचक आये पढ़त बिरद आभीर ॥ध्रु.॥ एक ढाढ़ी सारों पाली । बोलन सीखई मानो आली ।...
निगम साखि देखौ
निगम साखि देखौ गोकुल हरि । जाकों दूरि दरस योग यज्ञ कियें बाँध्यौ जसोदा ऊखल सों धरि ॥१॥ चुटकी दै दै ग्वालि नचावत नाचत कृ...
जसोदा तेरौ कठिन
जसोदा तेरौ कठिन हियौरी माई । तनक दधि के कारनें तू बाँधे ऊखल ॥१॥ जे मूर्ति जल थल में व्यापक सुपनें न देत दिखाई । ते मूर्...
गोविंद बारबार मुख
गोविंद बारबार मुख जोवै । कमलनैंन हरि हिलकिन रोवत बंधन छोड़ि यह सोवै ॥१॥ जो तेरौ सुत खरौई अचगरौ अपनी कूखि कौ जायौ । कहा...
कबके बाँधे ऊखल
कबके बाँधे ऊखल श्याम । कमल नैन बाहिर ही राखे तू बैठी सुखधाम ॥१॥ है निर्दय दया तोहि नाँही लागि रही गृह काम । देखि क्षुधा...
चित दै चितै
चित दै चितै तनुज मुख ओर । सकुचत शीत भयौ जलरुह तुव कर लकुट निरखि शशि भोर ॥१॥ सुंदर ललित श्रवत अँसुवन अति अरुन चपल लोचन क...
कहौ तौ माखन
कहौ तौ माखन लाऊँ धरते । जाके काज लकुटिया लीनी डारत नाँहिन करते ॥१॥ देखि यशोदा बदन कमल की शोभा बाढ़ी डरते । ज्यों जलसुत...
यशोदा माई यह
यशोदा माई यह न बूझिये काम । कमलनैन की भुजा दूखि हैं बाँधे ऊखल दाम ॥१॥ पुत्रहू ते प्रीतम नहीं कोऊ कुल दीपक मनि धाम ॥ देख...
मोहन ब्रजकेरौ रतन
मोहन ब्रजकेरौ रतन । एक चरित्र आज में देख्यौ पूतना पतन ॥१॥ तृणावर्त लै गयौ अकाशें ताही कों धतन । जेजे दुष्ट उपद्रव ठाने...
मनिमय आँगन नंद
मनिमय आँगन नंद के खेलत दोऊ भैया । गौर श्याम जोरी बनी बलि कुँवर कन्हैया ॥१॥ नूपुर कंकन किंकनी रुनु झुनु बाजें । मोहि रही...
खेलत मदन सुंदर
खेलत मदन सुंदर अंग । युवती जन मन निरखि उपजत विविध भाँति अनंग ॥१॥ पकरि बछरा पूँछ ऐंचत अपनी दिश कर जोर । कबहुँ बच्छ लै भज...
बाल विनोद आँगनमेंकी
बाल विनोद आँगनमेंकी डोलनि । मनिमय भूमि सुभग नंदालय बलि बलि गई तोतरी बोलनि ॥१॥ कठुला कंठ रुचिर केहरि नख ब्रजमाल बहु मोलन...
अलबल बोलत बानी
अलबल बोलत बानी तोत री । सुनि सुनि ब्रज ललना कहें बलिबलि हिये लाय आनंद होत री ॥१॥ बालिक बचन परत समुझे नहीं हँसि हँसि गाल...
देखत दरपन कहत
देखत दरपन कहत गोपाल । अरी मैया यह कौन दूसरौ मोहीसौ तेरौ लाल ॥१॥ याहि गोद लै बैठि जिमावै हों न जेंऊंगो आज । हों बाबाकी ग...
देखि प्रतिबिंब गोपाल
देखि प्रतिबिंब गोपाल खिजावै । लै लडुवा मेलत बाके मुख खेलन संग बुलावै ॥१॥ बोलि बोलि उठि चलैरे भैया हट करि करि पकरावै। अप...
दोऊ भैया घुटुरुवन
दोऊ भैया घुटुरुवन चलत । हरत दुख ब्रज भूमि कौ दे मोद दैत्यन दलत ॥१॥ अलक बिधुरे बदन मृगमद तिलक सोहै भाल । दृगन अंजन भौंह...
यह तन कमल
यह तन कमल नैन पर वारों सामलिया मोहि भावैरी । चरन कमलकी रेंनु यशोदा लै लै शीश चढ़ावैरी ॥१॥ लै उछंग मुख निरखन लागी राई लौ...
बालदशा गोपालकी
बालदशा गोपालकी सब काहू भावै । जाके भवनमें जात है सो लै गोद खिलावै ॥१॥ श्यामसुंदर मुख निरखिकें अबला सचुपावै । लाल लाल कह...
बाल विनोद गोपाल
बाल विनोद गोपाल के देखत मोहि भावें । प्रेम पुलकि आनंदभरी जसुमति गुन गावें ॥१॥ बलि समेत घन सामरौ आँगनमें धावै । बदन चूमि...
हरि लीला गावत
हरि लीला गावत गोपीजन आनंदमें निशि दिन जाई । बालचरित विचित्र मनोहर कमल नैन ब्रज जन सुखदाई ॥१॥ दोहन मथन खंडन गृह लेपन मंड...
हौं भोरी मेरी
हौं भोरी मेरी कान्ह सयानौ । याहीते लाल खीजत ही तुमसों दूधकों गई तोलों माट दुरानौ ॥१॥ कौन उपाय करौं सुनि सजनी मंदिर में...
नाँहिन गोकुल बास
नाँहिन गोकुल बास हमारौ । बैरी कंस बसत शिर ऊपर नित उठि करै खगारौ ॥१॥ गाम गाम प्रति देश देश प्रति लोक लोक प्रति जानी । यह...
भावत हरिके बाल
भावत हरिके बाल विनोद । केशव राम निरखि अति बिहँसत मुदित रोहिनी मात यशोद ॥१॥ आँगन पंक राग तन सोहत चल नूपुर धुनि सुनि मन म...
बाल विनोद खरे
बाल विनोद खरे जिय भावत । मुख प्रतिबिंब पकरिबे कों हरि हुलसि घुटुरुवन धावत ॥१॥ कमलनैन माखनके कारन करि करि सैन बतावत । शब...
शोभित कर नवनीत
शोभित कर नवनीत लियें । घुटुरुवन चलत रेंनु तन मंडित मुख दधि लेप कियें ॥१॥ चारु कपोल लोल लोचन छबि गोरोचनकौ तिलक दियें । ल...
दूरि खेलन जिन
दूरि खेलन जिन जाऊ लला मेरे आयो है हाऊ ॥धृ.॥ कुंजन कुंजन गौ चराई निशदिन यमुना जाऊँ । बैठि पाताल कालीनाग नाथ्यौ तहाँ न दे...
करबलतें हरि हरि
करबलतें हरि हारि परे । नौतन संग नवीन जलद चढ़ि मानों द्वै शशि आनि अरे ॥१॥ तब गिरि कमठ सुरासुर सर्पहिं धरत न मनमें नेंक ड...
नंदजूके लालन की
नंदजूके लालन की छबि आछी । पाय पेंजनी रुनुझुनु बाजत चलन पूँछ गहि बाछी ॥१॥ अरुन अधर दधि मुख लपटानौ तन राजत छींट छाछी । पर...
एक समें सुतकों
एक समें सुतकों हुलरावति जसुमति मुदित करत मृदुगानें। बिधुसौ बदन कमलदल लोचन सुंदर श्याम तबै जूभानें ॥१॥ तब विलोकी व्याकुल...
बलि बलि जाँऊँ
बलि बलि जाँऊँ लला इन बोलन की । घुँघरवारी लट लटकें छवि कुंडल लोल कपोलन की ॥१॥ दंत की पंगति कुंदकली अधरामृत बोलन खोलन की...
सोहत जरुली घुँघरवारी
सोहत जरुली घुँघरवारी । लट लटकत लिलाट बिंदुली अति सोहै पोहोंची देत करतारी ॥१॥ सोहत कंठ कनक केहरि नख मंद हँसन मोहत खगवारी...
बलि गई बालचरित्र
बलि गई बालचरित्र मुरारि । पाँय पैजनियाँ बजत रुनझुन नचवति नंदकी नारि ॥१॥ कबहुँ हरिकों लाय अँगुरियन चलन सिखावत ग्वारि ॥२॥...
गिरिधर डोलत पाँइन
गिरिधर डोलत पाँइन पाँइन । अँगुरी गहें नंदबाबा की घुटुरुवन के चाइन ॥१॥ लटपटाइ पग धरत अटपटे जसुमति लेत बलाइन । कठुला कंठ...
मेरी साँवरो कन्हाई
मेरै साँवरो कन्हाई माई एकौ द्वै न जानें । दूध और दावानल दोऊ एकही करिकें मानें ॥१॥ कमल और गोवर्धन लाला दोऊ एक करि लेखे ।...