Bhadon Sudi Panchami
भादों सुदी पंचमी
भादो सुदी पंचमी प्रगट भई सबहिनकी सुखदाई जु । श्री चन्द्रभान गोप गृह निधि सुखमा कूख सुहाई जु ॥१॥ गाम दिठोरा घरन घरन प्रत...
Raag
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भादों सुदी पंचमी
भादो सुदी पंचमी प्रगट भई सबहिनकी सुखदाई जु । श्री चन्द्रभान गोप गृह निधि सुखमा कूख सुहाई जु ॥१॥ गाम दिठोरा घरन घरन प्रत...
आज सखी सारदा
आज सखी सारदा कन्या जाई । भादों सुदि षष्टि है शुभदिन शुभनक्षत्र वर आई ॥१॥ भेरि मृदंग दुंदुभी बाजत नंदकुँवर सुखदाई । गोपी...
अतुलित प्रताप परिपूरन
अतुलित प्रताप परिपूरन रोहिनीनंदन बिराजे माई सूरना । अति विसाल अरु करन अरुन ऐती नेन कमल मधु घूरना ॥१॥ नील वसन परिधान मत्...
मांदल वाज्यौ री
मांदल वाज्यौ री ! ब्रजजन कें, प्रगटे श्रीबलराम । रोहिनी-कूँखि प्रगट पुरुषोत्तम ब्रजजन-मन अभिराम ॥ जो जन विनय करत, दुख त...
गोदलाल लै मंगल
गोदलाल लै मंगल गावति हमरे आँगन आई ॥१॥ भाव भरी पौढ़ी रानीजू नंदराय जगाई । चोंकि परी यह बात श्रवण सुनि गहि भुज राय उठाई ॥...
रावल रसिक बेलि
रावल रसिक बेलि नवफूली देखि कहत नहिं आवै । देवभानकें श्रीचंद्रावलि प्रगट भागिन भावै ॥१॥ ब्रजकौ भाग्य सुहाग येते सींच सीं...
रावल राधा प्रगट
रावल राधा प्रगट भई । अब ब्रजबसि सुख लेहु सखीरी प्रगटी कुँवरि रसमई ॥१॥ या निधिकों सब विधि चाहत हैं सो कीरति तुमही दई । र...
गोकुलतें गाजत बाजत
गोकुलतें गाजत बाजत युवतिनके यूथ लिये नंदरानी फूलि फूलि रावलमें आई । सुनि सुनि चहुँदिशितें नारी दौरीं देखनकों सबै एकसार...
प्रगटे श्रीवामन अवतार
प्रगटे श्रीवामन अवतार ॥ निरख अदिति मुख करत प्रशंसा जगजीवन आधार ॥१॥ तन घनश्याम पीतपट राजत शोभित हैं भुज चार ॥ कुंडल मुकु...
राजा एक पंडित
राजा एक पंडित पौरि तिहारी ॥ चार्यौ वेद पढ़त मुखपाटी है वामन वपुधारी ॥१॥ अपद द्विपद पशु भाषा जानत सूरज कोटि उजारी॥ नगरनम...
जयति वामनाकार विस्तार
जयति वामनाकार विस्तार सकुमार तन त्रिविक्रमा क्रांति त्रिभुवन उदारी ॥ प्रसर पदन स्वर निरभेद ब्रह्मांड वर विवर गति जनित स...
जीती हो चंद्रावलि
जीती हो चंद्रावलि नारि जीती हैं ब्रजमंगल राधे जीती सुंदरि गोपकुमारि ॥१॥ हारे हैं व्रजराज लड़ैते रहे हैं सबनके बदन निहार...
जमुना घाट रोकीहो
जमुना घाट रोकीहो रसिक चंद्रावलि ॥ हँसि मुसिक्याय कहति ब्रजसुंदरि छबीले छैल छाँड़ौ अंचल ॥१॥ दान निबेरि लैहों ब्रजसुंदर छ...
आज हमारे विजय
आज हमारे विजय दशहरा धरिये लाल जवारे हो ॥ कर सिंगार स्याम सुंदरको अपनो तन मन वारे हो ॥१॥ सब सखियन मिल मतो उपायो चलिये जम...
आज दशहरा शुभ
आज दशहरा शुभ दिन नीकौ विजय करौ पिय प्यारीपै आज॥ घेरी है बिकट मदन गढ़ गाढ़ें तोर मेंड़ लालन कर हो राज ॥१॥ इतनी बात सुनत...
आलीरी तेरी लटकनमें
आलीरी तेरी लटकनमें अटक्यौ पीयकौ मन नैंकु न इत उत अटक्यौ ॥१॥ देख रूप ठगी तबतें मन अनत न गोंहन हटक्यौ ॥ एते पर तू मान करत...
आली री मानिनी
आली री मानिनी मानगढ़ कर लीयें रहत ताकी ओट ॥ नैन बंदूक तामें सकुच दारु भरें बोल गोला चलावत झक झोट ॥१॥ भौंह धनुष तामें अं...
आभूषण अंगअंग तेऊ
आभूषण अंगअंग तेऊ अनुचर संग रूप भूप लीयें राजत शोभा पाय ॥ नवयौवन छत्र धरें सौभगता चमर ढरें गर्व सिंहासन बैठी आय ॥१॥ मानो...
यह दीवारी वरस
यह दीवारी वरस दीवारी तुमकों नित्य नित्य आवो ॥ नंदराय नंदरानी यह ढोटा पूजें अति सुख पावो ॥१॥ पुजवो मनोरथ सब व्रजजनके देव...
गुरके गुंजा पूआ
गुरके गुंजा पूआ सुहारी ॥ गोधन पूजत व्रजकी नारी ॥१॥ घरघर गोमय प्रतिमा धारी ॥ बाजत रुचिर पखावज थारी ॥२॥ गोदलियें मंगल गुण...
मदन गोपाल गोवर्धन
मदन गोपाल गोवर्धन पूजत ॥ बाजत ताल मृदंग शंखध्वनि मधुर मधुर मुरली कल कूजत ॥१॥ कुंकुम तिलक लिलाट दियें नव वसन साज आई गोपी...
टेरटेर बोलत नंदनंदन
टेरटेर बोलत नंदनंदन गांग बुलाई धूमरि धौरी ॥ वछरा छोर दिये खरिकनतें हूंकहूंक आवत सब दौरी ॥१॥ मारत कूंक सुबल श्रीदामा भाज...
बड़े खिरकमें धूमरि
बड़े खिरकमें धूमरि खेलत ॥ मोहनलाल खिलावत रंगभर गगन गरज घंटा ध्वनि पेलत ॥१॥ उसर जात व्रजराज लाडिले धेनु डाढ़ जबमेलत ॥ नं...
गायखिलायो चाहत गिरिवरधर
गायखिलायो चाहत गिरिवरधर बरजतहें नंदराई ॥ धेनु बहुत बाढ़ी हैं मोहन देखहूकी क्यों धाई ॥१॥ राखेंहे रखवारे चहुँदिश व्रजराजे...
गाय खिलावत श्याम
गाय खिलावत श्याम सुजान ॥ कूकें ग्वाल टेरदे हीही बाजत बेणु विषाण ॥१॥ कियोहे शृंगार धेनु सगरिनको को करि सके वखान ॥ फिरफिर...
गाय खिलावन चले
गाय खिलावन चले गोपाल ॥ वागोश्वेत तासको पहेरें गोकर्णाकृति छोगालाल ॥१॥ फरहरात पीतांबर करमें दुरिमुरि देखत सब व्रजबाल ॥ ध...
गोवर्द्धन पूजन चलेरी
गोवर्द्धन पूजन चलेरी गोपाल ॥ मत्त गयंद देख जिय लज्जित निरख मंदगति चाल ॥१॥ व्रजनारिन पकवान बहुत कर भर भर लीने थाल ॥ अंग...
बडडेनकों आगेंदे गिरिधर
बडडेनकों आगेंदे गिरिधर श्रीगोवर्द्धन पूजन आवत ॥ मानसीगंगा जल न्हवायकें पाछें दूध धोरीको नावत ॥१॥ बहोरि पखार अरगजा चरचित...
गोवर्धन पूजत हें
गोवर्धन पूजत हें नंदराय ॥ चोवा चंदन बैठ चढावत काचे दूध न्हवाय ॥१॥ आभूषण वस्त्र पहेरावत द्विजपें वेद पढाय ॥ बिन मर्याद स...
हमारो देव गोवर्धन
हमारो देव गोवर्धन रानो ॥ जाकी छत्र छांह हम बैठे ताकों त्यज ओरे क्यों मानों ॥१॥ नीको तृण सुंदर जल नीको नीको गोधन रहेत अघ...
गोवर्धन पूज सबे
गोवर्धन पूज सबे रंग भीने । सहस्रभुजा गिरिधरन दूसरो जेवत श्याम सखन संग लीने ।।१।। उमड़े सुन सुन बाल वृद्ध सब अगणित शाक प...
अन्कूट कोटिक भांतनसों
अन्कूट कोटिक भांतनसों भोजन करत गोपाल ।। आपही कहत तात अपनेसों गिरि मूरति देखो तत्काल ।।१।। सुरपति से सेवक इनहीके शिवविरं...
देखोरी हरि भोजन
देखोरी हरि भोजन खात ।। सहस्र भुजाधर उत जेंमत हैं इत गोपनसों करतहैं बात ।।१।। ललिता कहत देखहो राधा जो तेरे मन बात समात ।...
यह लीला सब
यह लीला सब करत कन्हाई ।। उत जेंमत गोवर्धनके संग इत राधासों प्रीति लगाई ।।१।। इत गोपिनसों कहत जिमावो उत आपुन जेंमत मन ला...
आरोगत आपुन पर्वत
आरोगत आपुन पर्वत रूप ।। वे देखो जु मागी लेत है चौद भुवनको भूप ।।१।। बडभागी हैं नंद जसोदा जिन पायो हरि सुत ।। लाल देखि आ...
भलीकरी पूजा तुम
भलीकरी पूजा तुम मेरी ।। बहुत भांत कर व्यंजन अरप्यो सो सब मान लई में तेरी ।।१।। सहस्र भुजा धर भोजन कीनों तुमदेखत विद्यमा...
आन ओर आन
आन ओर आन आन कहत बिझक रहत व्रजके नारीनर ॥ कटुतिक्त आम्ल खार सलोने लोने प्रकार खटरससों प्रीत बाढी रससों आरोगत सुंदर वर ॥१...
अब न छांडों
अब न छांडों चरण कमल महिमा में जानी ॥ सुरपति मेरो नाम धर्यो लोक अभिमानी ॥१॥ अबलों में नहीं जानत ठाकुरहे कोई ॥ गोपी ग्वाल...
धन्य वह कूँखि
धन्य वह कूँखि जन्म जहां लीनो गिरिधारी ॥ लरिका कहा बहुत सुत जाये जो न होय उपकारी ॥१ ॥ एक सो लाख बराबर गिनियें करे जो कुल...
हाहा हो हठीले
हाहा हो हठीले हरि जननीको कह्यो कर मेहतो बरष गयो अब गिरी धरनी धर ॥ देखोरे पिराई बांह सात घोस कीनी छांह अतिही कठिन कूट छत...